मेडिकल संस्थानों में आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए – योगी आदित्यनाथ

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मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभागों के कार्यां की समीक्षा की

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लाभ सीधे आम आदमी को मिले तथा सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो : मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक, जवाबदेही और संवेदनशीलता तीनों एक साथ दिखाई देनी चाहिए, तभी आम लोगों का भरोसा और मजबूत होगा
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभागों के कार्यां की समीक्षा की। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लाभ सीधे आम आदमी को मिलना चाहिए। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होनी चाहिए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर मानव संसाधन और प्रभावी प्रबन्धन से सशक्त किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमन्द परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बन रही है। उन्होंने क्लेम दावों का तय समय-सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों को समय पर भुगतान होता रहेगा, तो मरीजों को बेहतर सुविधा मिलती रहेगी। उन्हें अवगत कराया गया कि प्रदेश में 6,480 अस्पताल योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक निःशुल्क उपचार किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने पं0 दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष पद्धतियों को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों की आई0पी0डी0 सेवाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि नेशनल हेल्थ मिशन के अन्तर्गत कोविड कालखण्ड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर यथोचित समायोजन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी परियोजनाएं तय समय-सीमा में पूर्ण हों, ताकि आमजन को शीघ्र बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकें। बैठक में आगामी महीनों में प्रस्तावित महत्वपूर्ण लोकार्पण एवं शिलान्यास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज का 110 बेडेड ट्रॉमा सेन्टर, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का बी0एस0सी0 नर्सिंग कॉलेज तथा कानपुर मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभाग विस्तार एवं डी-एडिक्शन वॉर्ड ब्लॉक शामिल हैं। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। जनपद महराजगंज, शामली और सम्भल में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जबकि कई अन्य जनपदों में प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि ‘108’ एम्बुलेन्स सेवा और एडवान्स्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेन्स की प्रतिक्रिया अवधि में लगातार सुधार हुआ है। वर्तमान में 375 ए0एल0एस0 एम्बुलेन्स संचालित हैं और अब तक 9.38 लाख मरीजों को रेफर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेन्स रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने के निर्देश देते हुए कहा कि आपात स्थिति में प्रत्येक मिनट अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने एम्बुलेंस संचालकों का भुगतान समय से सुनिश्चित करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि तीन माह से कम एक्सपायरी अवधि वाली दवाएं अस्पतालों में नहीं होनी चाहिए और उनकी जगह नई दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य कैंसर मिशन, यू0पी0 ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (UPTEN), प्रोजेक्ट सुश्रुत तथा CARE-UP मिशन की कार्ययोजनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। मुख्यमंत्री को अगवत कराया गया कि UPTEN के तहत प्रदेश में आपातकालीन ट्रॉमा नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जबकि CARE-UP मिशन के अंतर्गत मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में आई0सी0यू0 एवं एच0डी0यू0 सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

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