राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु एनटीपीसी विंध्याचल में 15 दिवसीय थिएटर वर्कशॉप का भव्य समापन

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सोनभद्र, सिंगरौली।  एनटीपीसी विंध्याचल परियोजना के उमंग भवन में 15 दिवसीय थिएटर वर्कशॉप का भव्य समापन किया गया। राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक अभिरुचि जागृत करने एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश का रचनात्मक सदुपयोग करने के उद्देश्य से यह कार्यशाला विंध्य क्लब में 08.05.2026 से 22.05.2026 तक संचालित की गई। प्रशिक्षण का संचालन शैडो ग्रुप, भोपाल की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया।इस वर्कशॉप में परियोजना के कर्मचारियों, महिला गृहणियों एवं बच्चों को अभिनय, वाद-संवाद, नृत्य तथा हिंदी साहित्य की गहन समझ विकसित करने हेतु प्रशिक्षित किया गया। मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने राजभाषा हिंदी की सहजता, अभिव्यक्ति क्षमता एवं सांस्कृतिक समृद्धि को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि परियोजना प्रमुख(विंध्याचल)  संजीव कुमार साहा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण)  ए जे राजकुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, यूनियन एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधिगण, सुहासिनी संघ की पदाधिकारीगण, मानव संसाधन विभाग के अधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में कर्मचारी सहभागी जन सपरिवार उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा पंचतंत्र की लोकप्रिय कहानी ‘मगरमच्छ एवं बंदर’ का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया। स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता हेतु ‘गणपति बप्पा मोरिया’ विषय पर भी प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी गई। महिला प्रतिभागियों द्वारा संस्कृत नाटक ‘कर्णभारम्’ का हिंदी में भावपूर्ण मंचन किया गया तथा प्रख्यात कवि अरुण कमल द्वारा रचित कविता ‘ग्रहण’ पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने राजभाषा की संवेदनशीलता को उजागर किया। कर्मचारियों की ओर से ‘राजा और राज्य’ विषय पर विशेष नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया, जिसने शासन, कर्तव्य एवं नैतिकता का संदेश राजभाषा हिंदी के माध्यम से दिया। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों द्वारा कई मनमोहक समूह नृत्य भी प्रस्तुत किए गए।

मुख्य अतिथि संजीव कुमार साहा ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों में रचनात्मकता के साथ-साथ राजभाषा हिंदी के प्रयोग को भी बढ़ावा देती हैं। उन्होंने प्रशिक्षण टीम एवं प्रतिभागियों को बधाई दी। यह कार्यशाला राजभाषा हिंदी को दैनिक जीवन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई। कार्यशाला ने प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, सृजनात्मकता एवं राजभाषा के प्रति अनुराग को नई दिशा दी।

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