बीसीसीएल के कल्याण भवन में गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रतिमा का अनावरण

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धनबाद। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जन्म-जयंती के अवसर पर कल्याण भवन (एचआरडी) में आज बीसीसीएल एवं झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति के संयुक्त तत्वावधान में उनकी आदमकद प्रतिमा के अनावरण का गरिमामय समारोह आयोजित किया गया।मुख्य अतिथि, सीएमडी बीसीसीएल,  मनोज कुमार अग्रवाल ने परिसर में स्थापित गुरुदेव की नवनिर्मित प्रतिमा का अनावरण किया तथा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन)  मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी) श्री संजय कुमार सिंह, दीक्षा महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना अग्रवाल, उपाध्यक्ष श्रीमती पूर्बिता रमैया एवं श्रीमती रंजना सिंह सहित कोयला भवन मुख्यालय के सभी महाप्रबंधक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, अधिकारी एवं कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समारोह में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष  भवानी बंदोपाध्याय,  सुजीत रंजन मुखर्जी,  पार्थसारथी दत्ता सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त बीसीसीएल सीसीसी, वेलफेयर एवं सेफ्टी बोर्ड के सदस्य-श्री संजीत सिंह, श्री एस.एस. डे,  मुरारी तांती,  उमेश सिंह तथा विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिमा अनावरण एवं अतिथियों के औपचारिक स्वागत से हुई। विभागाध्यक्ष (सीएसआर)  सुरेन्द्र भूषण ने गुरुदेव के जीवन, व्यक्तित्व एवं साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने प्रेरणादायी संबोधन में सीएमडी  मनोज कुमार अग्रवाल ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारतीय मेधा एवं प्रतिभा के अद्वितीय प्रतीक हैं, और उनकी रचनाएँ आज भी भारतीय समाज को सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों से समृद्ध करती हैं। उन्होंने गुरुदेव की प्रसिद्ध रचना ‘जहाँ मन भय से मुक्त हो’ का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है कि उसके नागरिक एक भयमुक्त वातावरण में स्वतंत्र और सकारात्मक विचारों के साथ अपना योगदान दें। उन्होंने बीसीसीएल परिवार से आह्वान किया कि वे गुरुदेव के आदर्शों को आत्मसात करते हुए संगठन और समाज के समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

सांस्कृतिक सत्र में जेबीबीयूएस के सदस्यों द्वारा रवीन्द्र संगीत, कविता पाठ एवं अन्य प्रस्तुतियाँ दी गईं। समापन सत्र में समिति के पदाधिकारियों द्वारा सीएमडी, निदेशक (मानव संसाधन), निदेशक (तकनीकी/संचालन) तथा दीक्षा महिला मंडल की पदाधिकारियों – श्रीमती अर्चना अग्रवाल, श्रीमती पूर्बिता रमैया एवं श्रीमती रंजना सिंह को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का समापन विभागाध्यक्ष (एचआरडी) राधेश्याम दुबे द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। मंच संचालन वरीय प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री सफुरा रुबाब ने किया। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति एवं राष्ट्रीय विरासत के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।

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