वनिता समाज की प्रेरक पहल : बुधेला विद्यालय में ‘सव्यसाची’ लेखन, बहुभाषीय शिक्षा एवं योग को प्रोत्साहन

सोनभद्र। मध्यप्रदेश के बुधेला ग्राम स्थित वीणा वाधिनी पब्लिक स्कूल ग्रामीण अंचल में नवाचारी, संस्कारयुक्त एवं समग्र शिक्षा का विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह विद्यालय विद्यार्थियों को दोनों हाथों से समान दक्षता के साथ लेखन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। दोनों हाथों से समान कुशलता रखने वाले व्यक्तियों के लिए हिंदी में ‘सव्यसाची’ शब्द प्रयुक्त होता है। विद्यालय की यह अभिनव पहल विद्यार्थियों में मस्तिष्कीय संतुलन, एकाग्रता तथा समन्वय क्षमता के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है। विद्यालय में ‘सव्यसाची लेखन’ के साथ-साथ बहुभाषीय शिक्षा पर भी विशेष बल दिया जा रहा है जिससे उनकी भाषाई दक्षता, अभिव्यक्ति क्षमता एवं आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया जा रहा है।

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इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित योगाभ्यास भी कराया जाता है। योग के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, आत्मनियंत्रण, मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्रकार विद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास को समान महत्व दे रहा है। इस अवसर पर क्लब की सड़श्याओं द्वारा विद्यार्थियों को स्टेशनरी किट एवं मिठाइयों का वितरण किया गया, जिससे विद्यार्थियों में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण परिलक्षित हुआ। कार्यक्रम में वनिता समाज की अध्यक्षा श्रीमती प्रज्ञा नायक के साथ श्रीमती सुधा किशोर, श्रीमती सस्मिता मोहंती, श्रीमती नीतू मिश्रा तथा वनिता समाज की अन्य वरिष्ठ सदस्याएँ भी उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर वनिता समाज की अध्यक्षा, श्रीमती प्रज्ञा नायक ने कहा, “वीणा वाधिनी पब्लिक स्कूल द्वारा ‘सव्यसाची’ लेखन, बहुभाषीय शिक्षा एवं योग जैसे समग्र विकासोन्मुख कार्यक्रमों को अपनाना अत्यंत प्रशंसनीय है। यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण बौद्धिक एवं शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रकार की रचनात्मक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वास्तव में प्रेरणास्रोत है। वनिता समाज भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को अपना सहयोग प्रदान करता रहेगा।”

विद्यालय प्रबंधन द्वारा वनिता समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु प्रेरक सहयोग बताया गया। ग्रामीण परिवेश में गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त एवं नवाचार-आधारित शिक्षा के प्रसार की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय कदम है।

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