हजारीबाग। एनएमएल चट्टी बरियातु कोयला खनन परियोजना द्वारा संचालित सामुदायिक विकास एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियाँ स्थानीय समुदायों के समग्र विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। परियोजना यह मानती है कि सतत विकास तभी संभव है जब प्रगति के साथ-साथ समाज और प्रकृति के हितों का संतुलन भी सुनिश्चित किया जाए। इसी दिशा में, परियोजना प्रत्येक वर्ष सामुदायिक विकास एवं सीएसआर के माध्यम से विभिन्न ठोस कदम उठाती है। इसी क्रम में, फरवरी 2026 में चट्टी बरियातु कोयला खनन परियोजना ने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। परियोजना-प्रभावित गाँव तथा नव विकसित पुनर्वास क्षेत्रों के अंतर्गत नवाडीह, चट्टी बरियातु और पगार क्षेत्र में एक-एक सौर ऊर्जा संचालित गहरे बोरवेल (ओवरहेड टैंकों सहित) स्थापित किये गए। यह पहल न केवल सुरक्षित और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करती है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करते हुए सतत विकास को भी बढ़ावा देती है। इस पहल से 500 से अधिक परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति में सुधार आया है।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 में परियोजना द्वारा बिरहोर टोला, जो खनन क्षेत्र की परिधि पर स्थित एक विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह का निवास क्षेत्र है, उसके आसपास एक व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया था। इस अभियान के अंतर्गत अशोक, नीम और महुआ जैसे 200 पौधे लगाए गए थे। ये प्रजातियाँ न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन से भी जुड़ी हुई हैं। इस पहल से हरित आवरण बढ़ाने, वायु गुणवत्ता में सुधार करने और पारिस्थितिक संतुलन को सुदृढ़ करने में सहायता मिली है। इन पहलों के माध्यम से परियोजना यह दर्शाती है कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल संसाधनों का उपयोग नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी है। परियोजना की ये पहलें एक संतुलित, समावेशी और सतत भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, और भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को और सुदृढ़ करने के लिए परियोजना प्रतिबद्ध है।
