दर्लिपाली: मंगलवार को, एनटीपीसी दर्लिपाली ने परियोजना के आस-पास के स्कूलों के कक्षा X और XII के मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित की। यह पहल एनटीपीसी के प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम, ‘उत्कर्ष मेरिट छात्रवृत्ति’ कार्यक्रम का हिस्सा है। कार्यक्रम के दौरान 19 स्कूलों के कुल 63 छात्रों ने छात्रवृत्ति प्राप्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी निदेशक (दर्लिपाली), राम भजन मलिक द्वारा दिए गए एक व्यापक संबोधन से हुई। उन्होंने मेधावी छात्रों को बधाई दी और उनकी सफलता की कामना की। उन्होने छात्रों को जुनून और जोश के साथ अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उनके साथ, पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में एडीईओ सुंदरगढ़ श्री सारंगधर बरिहा और बीईओ श्री अशोक लाकड़ा भी मौजूद थे।
‘एनटीपीसी उत्कर्ष’- मेरिट छात्रवृत्ति का उद्देश्य एनटीपीसी परियोजनाओं/स्टेशनों के लक्षित गांवों में समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिए पर पड़े वर्ग के योग्य प्रतिभाशाली छात्रों को आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और छात्रों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना पैदा करना है।
इस अवसर पर, जीएम (ओएंडएम) हरे राम सिंह, सभी विभागाध्यक्ष, मानव संसाधन प्रमुख, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, अभिलाषा लेडीज क्लब, डीईवीए, डीन, कार्यकारी क्लब के प्रतिनिधिगण, स्थानीय सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक उपस्थित थे। छात्रवृत्ति पुरस्कार विजेता छात्र-छात्राएँ और उनके परिवार इस कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहे और समाज में शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में निर्देशित इस नेक पहल के साक्षी बने। एनटीपीसी दर्लीपाली लंबे समय से अपने समावेशी और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों के साथ वंचितों की मदद कर रही है और आने वाले समय में भी इसके लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री और ओडिशा के उपमुख्यमंत्री ने भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से ट्रेन को दिखाई हरी झंडी
लखनऊ : ओडिशा सरकार ने वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को अयोध्या-काशी का तीर्थाटन कराया जाएगा। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा ट्रेन आज को भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से अयोध्या के लिए रवाना हुई। 24 मार्च को अयोध्या में पर्यटन विभाग द्वारा यात्रियों का स्वागत किया जाएगा। इस विशेष ट्रेन को उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उड़ीसा के उपमुख्यमंत्री प्रवाती परिदा, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वैन आदि ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर उप्र. के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि धार्मिक, आध्यात्मिक स्थलों सहित अन्य पर्यटन आकर्षणों के साथ उत्तर प्रदेश टूरिज्म के क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। उड़ीसा सरकार द्वारा शुरू की गई योजना की सराहना की जानी चाहिए। इससे उत्तर प्रदेश में धार्मिक-आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जयवीर सिंह ने आगे कहा कि नये भारत का नया उत्तर प्रदेश है और माननीय मुख्यमंत्री योगी जी के नेतृत्व में कानून व्यवस्था से लेकर कनेक्टिविटी पर व्यापक सुधार किया गया है। उत्तर प्रदेश में हर यात्री सुरक्षित है। इसके अलावा घरेलू पर्यटन में भी प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के 75 जनपदों में चिन्हित पर्यटन स्थलों का विकास कर रही है। उन्होंने उड़ीसा के निवासियों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में उत्तर प्रदेश का भ्रमण करें।
पर्यटन मंत्री ने अपेन संबोधन में यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण की जन्मस्थली होने के साथ ही भगवान बुद्ध की कर्मस्थली है। यहां पग-पग पर पौराणिक ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक विरासत के स्थल हैं। इसके साथ ही ताजमहल तथा यूनेस्कों की साइट भी है। पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए हर पवित्र स्थल पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ हैं। उन्होंने यात्रा पर रवाना होने वाले यात्रियों को शुभकामनाएं दी।
ओड़िसा के पर्यटन मंत्री ने बताया कि योजना के तहत बुधवार को भुवनेश्वर से रवाना हुई ट्रेन के अलावा तीन और ट्रेनें अयोध्या-वाराणसी के लिए आएंगी। प्रत्येक ट्रेन में 800 यात्री होंगे। 29 मार्च को संबलपुर, 08 अप्रैल को रायगढ़ और 23 अप्रैल को बालासोर से ट्रेन आएंगी। इस अवसर पर कई विधायकगण ओड़िसा सरकार के अधिकारी तथा भुवनेश्वर जिला प्रशासन लोग मौजूद थे।
राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र में आपातकालीन तैयारियों को बढ़ाने और गैस रिसाव से उत्पन्न होने वाली किसी भी घटना के लिए तत्परता सुनिश्चित करने के लिए 12 मार्च, 2025 को आरएसपी के एचपी बॉयलर-5, कैप्टिव पावर प्लांट-1 के यू-सील क्षेत्र में ब्लास्ट फर्नेस गैस रिसाव पर एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। एक वैधानिक आवश्यकता के तहत, आरएसपी की ऑनसाइट आपदा प्रबंधन प्रणाली की प्रभावकारिता और इसमें शामिल कार्मिकों की तैयारियों का आकलन करने के लिए अभ्यास किया गया था।
मॉक ड्रिल सुबह 11:11 बजे शुरू हुई और 11:30 बजे साइट इंसीडेंट कंट्रोलर, सीपीपी-1 के महाप्रबंधक (ओएंडएम), एन सी परिडा, द्वारा स्थिति को नियंत्रण में घोषित किया गया। पूरे समूह को तीन टीमों में विभाजित किया गया था: लड़ाकू दल, बचाव दल और सहायक दल। सभी टीमों ने कुशलतापूर्वक अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाईं और 19 मिनट के भीतर अभ्यास को सफलतापूर्वक पूरा किया।
महाप्रबंधक (अग्नि शमन सेवाएँ), जे बी पटनायक और उप महाप्रबंधक (अग्नि शमन सेवाएँ), सोनकुसरे के साथ-साथ सुरक्षा, अग्नि शमन सेवाएँ, ओएचएससी, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सीपीपी-1के प्रतिनिधियों ने इस ड्रिल का अवलोकन किया। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल टीम ने क्षेत्र को सुरक्षित करने, सुरक्षित निष्पादन सुनिश्चित करने और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभ्यास के बाद, महाप्रबंधक (ओएंडएम), सीपीपी-1 और महाप्रबंधक (अग्नि शमन सेवाएँ) द्वारा एक समीक्षा सत्र आयोजित किया गया, जहाँ वरिष्ठ अधिकारियों ने ड्रिल की प्रभावशीलता को सराहते हुए कुछ क्षेत्रों में सुधार की सिफारिश की।
एन.सी. परिडा के मार्गदर्शन में इस अभ्यास का समन्वयन वरिष्ठ प्रबंधक एवं विभागीय सुरक्षा अधिकारी (सीपीपी-1), रघुवीर सिंह, एएसओ (सुरक्षा इंजीनियरिंग), . टी एल पटेल और रितेश पटेल द्वारा किया गया।
राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) ने वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए सेल कॉर्पोरेट अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते । उल्लेखनीय है कि, सेल कॉर्पोरेट एक्सीलेंस अवार्ड्स विभिन्न श्रेणियों में नेतृत्व और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हुए दिए जाते हैं।।
वर्ष 2022-23 के लिए घोषित पुरस्कारों में, मुख्य महाप्रबंधक (गुणवत्ता), रामकृष्ण पात्र, को उत्पादकता विशेषज्ञ के लिए चुना गया है जो आरएसपी में दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देने में उनके प्रयासों को मान्यता देता है। पूर्व वरिष्ठ ऑपरेटिव (ब्लास्ट फर्नेस), एस के भंजदेव को परिचालन उत्कृष्टता सुनिश्चित करने में उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का सम्मान करते हुए सेल कर्मवीर पुरस्कार के लिए चुना गया है।
इसी तरह वर्ष 2023-24 के लिए, मुख्य महाप्रबंधक (पीपीसी), सुश्री सुनीता सिंह, संगठन में उनके असाधारण योगदान और इस्पात उद्योग में महिलाओं को सशक्त बनाने में उनकी भूमिका के लिए महिला ट्रेलब्लेज़र पुरस्कार के लिए चयनित कियागया है I महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा), श्री नेरेला कामेश्वर राव, को लागत चैंपियन एवं वित्तीय प्रवीणता पुरस्कार के लिए चुना गया है, जिसमें उनकी असाधारण वित्तीय सूझबूझ और लागत प्रबंधन रणनीतियों को मान्यता दी गई है I दिव्यांगजन (पीडब्ल्यूडी श्रेणी) के लिए रोल मॉडल पुरस्कार में, वरिष्ठ प्रबंधक (परियोजनाएँ और आधुनिकीकरण), प्रदीप कुमार महापात्र, को उनके प्रेरक योगदान और कार्यस्थल समावेशिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए चुना गया है । इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ प्रबंधक (टी एंड आरएम), धीरज कुमार को युवा अचीवर अवार्ड की लिए नामांकित किया गया है जिससे आरएसपी से उभरने वाली प्रतिभा और गतिशील नेतृत्व को बल मिला।
राउरकेला । सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के निदेशक प्रभारी, आलोक वर्मा ने 14 मार्च 2025 को गोपबंधु सभागार में आयोजित 54वें राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह पुरस्कार समारोह में अपने संबोधन में कहा “ “आइए हम शून्य हानि कार्यस्थल बनाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करें और यह सुनिश्चित करें कि संयंत्र में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित घर लौटे” । मंच पर आसन ग्रहण करने वालों में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), तरुण मिश्र, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा), ए के बेहुरिया, कार्यपालक निदेशक (वर्क्स), बी आर पलई और ओडिशा सरकार के उप निदेशक, कारखाने और बॉयलर, बिभु प्रसाद शामिल थे । कार्यपालक निदेशक (समग्रे प्रबंधन), अनिल कुमार, कार्यपालक निदेशक (खान), एम पी सिंह, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएँ), एस पाल चौधरी, ओडिशा सरकार के दोनों सहायक निदेशक, कारखाना और बॉयलर, विवेकानंद नायक और एस एस राउत, समारोह में भाग लिए I मुख्य महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष, विभागीय सुरक्षा अधिकारी, एएसओ और इस्पात संयंत्र के बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
इस अवसर पर बोलते हुए, निदेशक प्रभारी ने कहा, “हमें कार्यस्थल में सुरक्षा में सुधार के लिए लगातार नई प्रथाओं का आविष्कार करना चाहिए। खतरों की रिपोर्ट करना, दोषपूर्ण उपकरणों का पता लगाना, सुरक्षा प्रशिक्षण सुनिश्चित करना, खुले संचार को प्रोत्साहित करना और कार्यस्थलों में विकर्षणों को सीमित करना कुछ पुरानी प्रथाएँ हैं जिन्हें हमें सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने दैनंदिन जीवन में शामिल करने की आवश्यकता है”।
तरुण मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का सपना तभी संभव है जब हम सुरक्षा को एक अनुष्ठान और अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें। उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और आरएसपी को सभी के लिए सुरक्षित आश्रय बनाएं।”
ए के बेहुरिया ने कहा, “कार्यालय में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रोकथाम और सावधानी दो महत्वपूर्ण बातें हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यक्तिगत जिम्मेदारी है और सुरक्षा के लिए कोई निश्चित बजट नहीं है।
बी आर पलई ने सुरक्षा सप्ताह के दौरान आयोजित सुरक्षा अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रतिभागियों की सराहना की। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमें तकनीकी रूप से समर्थित प्रणाली की आवश्यकता है जो मानवीय त्रुटियों की पहचान करे और किसी भी खतरे को रोकने में सक्षम हो।”
अपने संबोधन में, बिभु प्रसाद ने कई उदाहरणों और घटनाओं का हवाला दिया जहाँ अति आत्मविश्वास के कारण दुर्घटनाएँ घटी । उन्होंने कहा, “खतरे किसी को नहीं छोड़ते – चाहे वह कारखाना मालिक हो या कर्मचारी, विकसित भारत के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सुरक्षा के प्रति हमारे व्यक्तिगत व्यवहार में सुधार करने की आवश्यकता है।”
पुरस्कार समारोह में गणमान्यों द्वारा इस अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के व्यक्तिगत एवं विभागीय तौर पर विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। सिंटरिंग प्लांट-1 ने वर्ष 2024-25 के लिए सर्वश्रेष्ठ हाउसकीपिंग और सुरक्षा के लिए चैंपियंस ट्रॉफी जीती।
इससे पहले, समारोह की शुरुआत एमओएमटी (ईएमडी), गुरु ज्योतिर्मय आचार्य द्वारा श्लोकों के उच्चारण के मध्य दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा और अग्निशमन सेवाएँ), श्रीमती आशा कार्था ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। सहायक महाप्रबंधक (सीआरएम), एन पाणिग्रही द्वारा एक सुरक्षा गीत प्रस्तुत किया गया। महाप्रबंधक (सुरक्षा), अबकासा बेहरा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया और पुरस्कार वितरण समारोह का समन्वय भी किया। सहायक प्रबंधक (सुरक्षा), सुश्री प्रज्ञा नाथ ने कार्यक्रम का मंच संचालन किया। इस अवसर पर ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग के लॉन में आयोजित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी निदेशक प्रभारी द्वारा किया गया।
राउरकेला।सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (नगर प्रशासन एवं सीएसआर) के कार्यालय में 4 मार्च, 2025 को एकल-उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने की रणनीतियों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (नगर प्रशासन एवं सीएसआर), श्री पी के स्वाईं ने की I इसमें महाप्रबंधक (समाज कल्याण, पीएचएस और विमानतल), जे पी मिश्रा, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (नगर इंजीनियरिंग – जन स्वस्थ), डॉ. दीपा लवंगारे, समाज कल्याण विभाग, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि और सभी सामुदायिक केंद्रों के पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मौजूदा पहलों को मजबूत करने और प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह पहल सेल आरएसपी के अपने सीएसआर और जन कल्याण पहलों के माध्यम से स्वच्छ और हरित समुदाय को बढ़ावा देने के चल रहे प्रयासों के अनुरूप है।
बैठक का समन्वयन सहायक प्रबंधक, (नगर इंजीनियरिंग – जन स्वस्थ), रसानंद प्रधान द्वारा किया गया। सेल, आरएसपी पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता के लिए समर्पित है, प्रभावशाली परिवर्तन लाने के लिए सामुदायिक हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र के सी.पी.टी.आई. केंद्र में 8 मार्च 2025 को सेवानिवृत्ति-पूर्व कर्मचारी सशक्तिकरण कार्यशाला ‘रोशनी’ आयोजित की गई। संयंत्र और ओडिशा खान समूह के अधिकारियों सहित 46 कर्मचारी, जो मार्च 2025 के महीने में सेवानिवृत्त होंगे, इस सत्र में शामिल हुए। महा प्रबंधक प्रभारी (एच.आर.-सी.एफ.), डॉ. पी.के.साहू उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि थे।
‘रोशनी’ कार्यशाला के सत्रों में सेवानिवृत्ति के बाद सहज रूप से परिवर्तन सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की व्यापक श्रृंखला शामिल की गई थी।
वरिष्ठ परामर्शदाता (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा) , डॉ. मोनालिसा ने अपने सत्र में स्वास्थ्य संबंधी चिंताजनक मुद्दों एवं सेवानिवृत्ति के बाद स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी युक्तियों को संबोधित किया।
साइबर सुरक्षा से संबंधित मामलों पर उप महा प्रबंधक (सी. एंड आई.टी.), वी.पी.आर्य द्वारा चर्चा की गई, जहाँ डिजिटल युग में इंटरनेट के लाभों को समझाया गया और प्रतिभागियों को अपनी डिजिटल उपस्थिति की सुरक्षा करने में मदद करने के लिए साइबर दुनिया में खतरों और सुरक्षा पर अंतर्दृष्टि प्रदान की गई।
वित्तीय सत्र में उप प्रबंधक (वित्त एवं लेखा), डी.के.दाश ने सुचारू अंतिम निपटान और बाद के चरण में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी वित्त प्रबंधन की प्रक्रियाओं पर चर्चा की। सहायक महा प्रबंधक (वित्त एवं लेखा), पप्पू कुमार ने वित्तीय सुरक्षा योजना के बारे में बात की।
महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी चरणों से भली भांति गुजरने और एक उद्देश्यपूर्ण और सक्रिय जीवन जीने के लिए सहायक महा प्रबंधक (सी.पी.-2), बाबूला नाहक ने सकारात्मक मानसिकता की तैयारी पर विचार-विमर्श किया।
संगठन के भीतर क्वार्टर खाली करने और प्रतिधारण नीतियों के विवरण पर उप प्रबंधक (नगर सेवाएँ), श्री एच.के.साहू, द्वारा चर्चा की गई।
सहायक महा प्रबंधक (एच.आर.-ई.आर. एवं सी.), सुश्री ज्योति ओड़या द्वारा सेल मेडिक्लेम योजना को संबोधित किया गया I
कार्यक्रम का संचालन सुश्री ज्योति ओड़या और एच.आर.-ई.आर. टीम द्वारा किया गया।
‘रोशनी’ कार्यशाला का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सकारात्मकता, उत्साह और तैयारी के साथ सेवानिवृत्ति को अपनाने के लिए व्यापक तरीके से तैयार करना है।
राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र के काल्टा लौह खदान में कर्मचारियों और हितधारकों को सुरक्षित पेयजल का सुविधा सुनिश्चित करने के लिए एक और कर्मचारी कल्याण पहल के तहत, 3 मार्च, 2025 को मुख्य महाप्रबंधक (बीआईएम-टीआईएम-केआईएम), हिमांशु मिश्रा द्वारा काल्टा लौह खदान में 2 पेय जल शोधक मशीनों का उद्घाटन किया गया। एक इकाई को खनन स्थल कार्यालय में स्थापित किया गया है, जबकि अन्य को कैंटीन में लगाया गया है।
महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं प्रशासन), बीआईएम-टीआईएम-केआईएम, श्री एन सी पंडा, महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा – बीआईएम-टीआईएम-केआईएम), परिमल बंसल, सहायक महाप्रबंधक (सिविल एवं सीएसआर-बीआईएम-टीआईएम-केआईएम), बी दत्ता, उप प्रबंधक (मानव संसाधन एवं प्रशासन), केआईएम, ए.के.साहू और केआईएम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
यूएफ और यूवी पेय जल शोधन मशीनें कुल 14.00 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई हैं। कार्यक्रम का समन्वयन सहायक महाप्रबंधक (सिविल–केआईएम), जगन्नाथ पात्र और कनिष्ठ प्रबंधक (सिविल-केआईएम), एस के बेहरा द्वारा किया गया।
राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) ने सतत औद्योगिक प्रथाओं और पर्यावरण के अनुकूल भविष्य के अपने दृष्टिकोण की तलाश में 12 मार्च 2025 को आरएसपी में प्रोजेक्ट्स सम्मलेन कक्ष में पाँच साल के लिए संचालन और रखरखाव के साथ शून्य तरल निर्वहन (“जीरो लिक्विड डिस्चार्ज)प्रणाली के तहत ट्रीटमेंट सिस्टम-2”, के कार्यान्वयन के लिए मेसर्स एफ़्वा इंफ़्रा एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, ठाणे और मेसर्स एसएमसी रिसोर्सेज एसडीएन, कुआलालंपुर के कंसोर्टियम के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
हस्ताक्षर समारोह कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएँ), सुदीप पाल चौधरी, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजनाएँ), पिनाकी चौधरी, मुख्य महाप्रबंधक (आंतरिक लेखा परीक्षा), डॉ. गिरिजा शंकर दास, मुख्य महाप्रबंधक (उपयोगिताएँ और पर्यावरण), हीरालाल महापात्र, मुख्य महाप्र्रबंधक (विद्युत् वितरण), डी के भंज और आरएसपी, मेकॉन और कंसोर्टियम के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित की गई I
ट्रीटमेंट सिस्टम-2 में प्रति घंटे 1920 सीयूएम अपशिष्ट जल को उपचारित करने की क्षमता होगी, जिसे पुन: उपयोग के लिए आरएसपी के मेकअप वाटर सिस्टम में रिसाइकिल किया जाएगा। यह पहल ब्राह्मणी नदी से ताजे कच्चे पानी के उपयोग को काफी कम करेगी, जिससे जल संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान मिलेगा।
इस परियोजना के साथ, आरएसपी उपयोग किए गए पानी को कुशलतापूर्वक पुनर्चक्रण करके शून्य तरल निर्वहन (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज-जेडएलडी) प्लांट बनने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। ट्रीटमेंट सिस्टम-2 की स्थापना इस उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायक होगी, जिससे आरएसपी की टिकाऊ पर्यावरण और हरित स्टील के उत्पादन के प्रति प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि, परियोजना के लिए परिसंविदा पत्र (लेटर ऑफ अवार्ड-एलओए) 28 फरवरी 2025 को जारी किया गया था, और कार्यान्वयन कार्यक्रम अनुबंध की प्रभावी तिथि से 188 महीने निर्धारित किया गया है। इस पहल के लिए परियोजना सलाहकार मेसर्स मेकॉन लिमिटेड, रांची है।
राउरकेला। भारतीय इस्पात अनुसंधान प्रौद्योगिकी मिशन (एसआरटीएमआई), जो इस्पात मंत्रालय द्वारा समर्थित भारतीय इस्पात उद्योग और शिक्षा जगत की एक संयुक्त पहल है, ने 12 मार्च, 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में “भारतीय इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास का उत्प्रेरण” कार्यक्रम के दौरान तीन नई अनुसंधान एवं विकास योजनाएं और एक वेब पोर्टल लॉन्च किया।
इस कार्यक्रम में प्रमुख इस्पात कंपनियों (सेल, जेएसडब्ल्यू, जेएसपीएल, टाटा स्टील, एनएमडीसी, जेएसएल, आरआईएनएल, मेकॉन आदि), प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों (आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईटी बीएचयू, एनआईटी त्रिची, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, आईएसएम धनबाद आदि), अनुसंधान संगठनों (सीएसआईआर-आईएमएमटी), स्टार्टअप्स और स्वीडिश ऊर्जा एजेंसी और एशियाई विकास बैंक जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भाग लिया।
इस्पात एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा ने अनुसंधान एवं विकास योजनाओं तथा एसआरटीएमआई वेब पोर्टल का शुभारंभ किया तथा इस्पात क्षेत्र में नवाचार एवं स्थिरता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर जोर दिया।
भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि नई आरएंडडी पहल और स्टीलकोलैब भारत के 2030 तक 300 MT स्टील उत्पादन क्षमता की ओर बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण में तेजी लाने और पूंजीगत वस्तुओं के विनिर्माण को स्वदेशी बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि एसआरटीएमआई वेब पोर्टल जुड़ाव, विचारों के आदान-प्रदान और उद्योग-व्यापी सहयोग को बढ़ावा देगा।
इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंड्रिक ने वैश्विक इस्पात मांग केंद्र के रूप में भारत के उभरने पर प्रकाश डाला, और अनुमान लगाया कि 2030 से पहले प्रति व्यक्ति खपत 100 किलोग्राम से बढ़कर 158 किलोग्राम हो जाएगी। उन्होंने संयंत्र दक्षता, एआई/एमएल अपनाने, डिजिटलीकरण और डीकार्बोनाइजेशन सहित प्रमुख चुनौतियों को भी रेखांकित किया, और भारत की अनूठी उद्योग संरचना के अनुरूप अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया, जहां 45% क्षमता द्वितीयक इस्पात क्षेत्र में निहित है।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के चेयरमैन और एसआरटीएमआई के अध्यक्ष अमरेंदु प्रकाश ने भारत की वैश्विक इस्पात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए उद्योग-अकादमिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारत की इस्पात मांग में 11% की वृद्धि का उल्लेख किया – जो वैश्विक औसत 0.5% से काफी अधिक है – और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने में अनुसंधान एवं विकास योजनाओं के महत्व को रेखांकित किया।
इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव अभिजीत नरेन्द्र ने उद्घाटन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा नई योजनाओं और वेब पोर्टल का अवलोकन प्रस्तुत किया।
इस्पात मंत्रालय और एसआरटीएमआई की निदेशक सुश्री नेहा वर्मा ने अनुसंधान एवं विकास योजनाओं, उनकी कार्यान्वयन रणनीतियों को प्रस्तुत किया और स्टीलकोलैब का परिचय दिया, जो उद्योग, शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप के लिए नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक सहयोगी मंच है।
एसआरटीएमआई द्वारा आज शुरू की गई तीन योजनाएं
चुनौती विधि – राष्ट्रीय हित की महत्वपूर्ण उद्योग-व्यापी चुनौतियों की पहचान करना और उनका समाधान करना
ओपन इनोवेशन विधि – उद्योग के सहयोग से शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के खुले शोध प्रस्तावों का समर्थन करना
स्टार्ट-अप एक्सेलेरेटर – अत्याधुनिक स्टील प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप का समर्थन करना
स्टीलकोलैब प्लेटफॉर्म एक मैचमेकिंग हब के रूप में कार्य करेगा, जो उद्योग के नेताओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों को डीकार्बोनाइजेशन, डिजिटलीकरण और उन्नत स्टील विकास को आगे बढ़ाने के लिए जोड़ेगा। समाधान चाहने वाले जैसे कि स्टील उद्योग अपनी समस्याएं बता सकते हैं जबकि शोधकर्ता और स्टार्टअप इस प्लेटफॉर्म पर अपने शोध / नवाचार विचारों को सामने रख सकते हैं।
“उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा” विषय पर एक पैनल चर्चा में पायलट परीक्षण सुविधाओं, उद्योग-संरेखित विश्वविद्यालय कार्यक्रमों और ग्रीन स्टील तथा डीकार्बोनाइजेशन पर केंद्रित अनुसंधान प्राथमिकताओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग, विशेष रूप से डिजिटल प्रौद्योगिकियों और लाभकारी प्रक्रियाओं के बीच की खाई को पाटने में स्टार्टअप की भूमिका पर भी जोर दिया गया।
“उद्योग और शिक्षा जगत के बीच की खाई को पाटना” विषय पर विचार-मंथन सत्र में उद्योग, शिक्षा जगत, इनक्यूबेशन केंद्रों और स्टार्टअप्स से 19 वक्ताओं ने भाग लिया, जिन्होंने इस्पात मूल्य श्रृंखला में सहयोग के अवसरों और अनुसंधान प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों द्वारा सहयोगात्मक अनुसंधान में गहरी रुचि व्यक्त करने के साथ हुआ, जिससे इस्पात क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास में भविष्य की साझेदारी की नींव रखी गई। इस्पात मंत्रालय के उप सचिव जी. सारथी राजा ने इस्पात मंत्रालय द्वारा समर्थित अनुसंधान एवं विकास पहलों पर प्रस्तुति दी।