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  • महतारी गौरव वर्ष’ में मातृशक्ति को समर्पित ऐतिहासिक बजट – श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े

    महतारी गौरव वर्ष’ में मातृशक्ति को समर्पित ऐतिहासिक बजट – श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े

    *महिलाओं की सुरक्षा, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को मिला सशक्त आधार*

    *रानी दुर्गावती योजना से बेटियों को 1.50 लाख रुपए की सहायता*

     *मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना से महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन*

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत होने के बाद महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे ‘महतारी गौरव वर्ष’ के संकल्पों को साकार करने वाला ऐतिहासिक और दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत यह बजट मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को समर्पित है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों के आत्मविश्वास को सशक्त करने का ठोस खाका है। सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को नीति के केंद्र में रखकर समावेशी विकास का स्पष्ट संदेश दिया है।

    *महिला उद्यमिता को नया आयाम*

    मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को राज्य एवं देश के सफल आजीविका मॉडलों का अध्ययन, प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और महिला उद्यमिता को नई दिशा प्राप्त होगी।

    *सुरक्षित और सशक्त सामाजिक ढांचा*

    महिलाओं के लिए सुरक्षित, सहयोगात्मक और प्रेरक वातावरण तैयार करने हेतु 250 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये सदन महिला संवाद, प्रशिक्षण, परामर्श और सामाजिक सहयोग के केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त मंच मिलेगा।

    *पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूती*

    प्रदेश में 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण हेतु 42 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे बच्चों, किशोरियों एवं गर्भवती माताओं को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और प्रारंभिक शिक्षा सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का लक्ष्य कुपोषण के विरुद्ध अभियान को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    *बेटियों के भविष्य को आर्थिक संबल*

    मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विशेष रूप से रानी दुर्गावती योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि 18 वर्ष पूर्ण करने पर पात्र बालिकाओं को 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता उच्च शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल बेटियों के सम्मान और सुरक्षित भविष्य का मजबूत आधार बनेगी।

    *सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में ठोस कदम*

    मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा, “महतारी गौरव वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि माताओं और बेटियों के स्वाभिमान, अधिकार और सशक्तिकरण का संकल्प है। यह बजट सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवेदनशील शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट छत्तीसगढ़ को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा तथा आने वाले वर्षों में लाखों महिलाओं और बालिकाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • भारत निर्वाचन आयोग एवं राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन संपन्न

    भारत निर्वाचन आयोग एवं राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन संपन्न

    रायपुर, / भारत निर्वाचन आयोग एवं राज्य निर्वाचन आयुक्तों का एक दिवसीय राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन “भारत मंडपम” नई दिल्ली में मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को आयोजित हुआ । उक्त सम्मेलन भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुआ। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह सहित देश के सभी राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त ,  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एवं राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी उपस्थित रहे।सम्मेलन मुख्य रूप से राज्यों में स्थानीय निकाय के निर्वाचन कराये जाने हेतु भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के मध्य समन्वय बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया। सम्मेलन में अजय सिंह राज्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने सम्बोधन में कहा कि स्थानीय चुनाव हेतु निर्वाचक नामावली तैयार करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग क़ी विधान सभा क़ी निर्वाचक नामावली का डाटा शीघ्रातिशीघ्र एवं यथासंभव 7 दिवस के भीतर प्राप्त होना चाहिए ताकि राज्य निर्वाचन आयोग  नगरीय एवं पंचायत चुनाव के लिए निर्वाचक नामावली निर्धारित समय में तैयार कराकर चुनाव संपन्न करा सके . उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संसाधनों के सदुपयोग की दृष्टि से राज्यों की आवश्यकता अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ई वी एम ) उपलब्ध कराया जाना चाहिए । अजय सिंह ने यह भी बताया कि जनवरी -फरवरी 2025 में छत्तीसगढ़ के नागरीय एवं पंचायतों के लिए चुनाव एक साथ 36 दिनों में सफलतापूर्वक संपन्न कराये गए।भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि राज्यों के निर्वाचन आयोगों द्वारा उठाये गए सभी बिंदुओं पर विचार उपरांत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा शीघ्र निर्णय लिए जाने हेतु भी आश्वस्त किया गया. सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवन्त कुमार राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव आलोक कुमार श्रीवास्तव एवं आई टी विशेषज्ञ डॉ सत्यकाम बेहार उपस्थित रहे।

  • 700 भवन विहीन स्कूलों के लिए 123 करोड़ रुपये का प्रावधान, 150 मॉडल स्कूल बनाये जाएंगे

    700 भवन विहीन स्कूलों के लिए 123 करोड़ रुपये का प्रावधान, 150 मॉडल स्कूल बनाये जाएंगे

    रायपुर में यूनिटी मॉल के निर्माण के लिए बजट में 93 करोड़ रुपये का प्रावधान

    “नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से नॉलेज हब तक- बदलते प्रदेश की नई तस्वीर”

    “शिक्षा, कौशल और स्वावलंबन का संकल्प- बजट 2026-27 से सशक्त होगा प्रदेश का भविष्य”

    रायपुर, / राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में शिक्षा और ग्रामोद्योग को विकास की मुख्यधारा में रखते हुए दूरदर्शी एवं जनकल्याणकारी प्रावधान किए हैं। विभागीय मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह बजट प्रदेश की मानव पूंजी को सशक्त बनाने, युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अवसर प्रदान करने और पारंपरिक कारीगरों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है, समग्र विकास, सशक्त नागरिक और आत्मनिर्भर प्रदेश।

    मॉडल स्कूलों से उत्कृष्ट शिक्षा की ओर बढ़ता प्रदेश

    शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और अधोसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु पीएम-श्री योजना के अंतर्गत लगभग 350 विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में “स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना” प्रारंभ की जा रही है, जिसके प्रथम चरण में 150 विद्यालयों का चयन किया गया है तथा इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जिन विद्यालयों में प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक तक एकीकृत परिसर हैं, वहां आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण का विकास सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को समग्र और प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा मिल सके।

    हर बच्चे को सुरक्षित भवन, सुदृढ़ आधारभूत संरचना

    राज्य सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रदेश में कोई भी विद्यालय भवन-विहीन न रहे। बजट में 500 प्राथमिक, 100 मिडिल, 50 हाई स्कूल और 50 हायर सेकेंडरी स्कूल भवनों के निर्माण हेतु कुल 123 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल न केवल छात्रों को सुरक्षित और अनुकूल शिक्षण वातावरण प्रदान करेगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को भी सुदृढ़ बनाएगी। साथ ही, एनसीसी विद्यार्थियों के स्वल्पाहार की राशि को दोगुना करने के निर्णय युवाओं के मनोबल और अनुशासन को प्रोत्साहित करेगा।

     बस्तर में शिक्षा का नया अध्याय: स्थापित होंगी दो एजुकेशन सिटी

    दंतेवाड़ा के सफल अनुभव के आधार पर अब अबूझमाड़ और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएगी, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन एजुकेशन सिटी में स्कूल, आईटीआई, प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास, शिक्षक आवास सहित संपूर्ण शैक्षणिक इको-सिस्टम विकसित किया जाएगा। यह पहल बस्तर क्षेत्र के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगी तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को शिक्षा और अवसर के केंद्र में परिवर्तित करेगी।

    हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान, कारीगरों को नया बाजार

    ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत राज्य सरकार हस्तशिल्प को आजीविका सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम मानते हुए ठोस कदम उठा रही है। ढोकरा आर्ट, बांस कला और माटी कला से जुड़े हजारों परिवारों की आय में वृद्धि के लिए देश के पांच प्रमुख शहरों के एयरपोर्ट पर शो-रूम स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर का मंच मिलेगा। साथ ही, हस्तशिल्पियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मेलों में भागीदारी हेतु वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि उनके उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।

    यूनिटी मॉल और ग्लेजिंग यूनिट से मिलेगा आधुनिक विपणन मंच

    रायपुर में यूनिटी मॉल के निर्माण के लिए बजट में 93 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो राज्य के हस्तशिल्प उत्पादों को आधुनिक और स्थायी विपणन मंच प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, कुनकुरी के ग्राम गोरिया में 2 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से ग्लेजिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जिससे माटी शिल्पकला को आधुनिक डिजाइन और बाजार उन्मुख स्वरूप मिलेगा। शासन के इस पहल से पारंपरिक कारीगरों के कौशल को नई पहचान मिलेगी और उनके जीवन स्तर में ठोस सुधार सुनिश्चित होगा। मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह बजट 2026-27 शिक्षा, कौशल विकास और पारंपरिक उद्योगों को सशक्त बनाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। राज्य सरकार का संकल्प है कि हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर कारीगर को सम्मानजनक आजीविका का अवसर मिले, यही विकसित और समावेशी प्रदेश की आधारशिला है।

  • चौदहवीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया शुभारंभ

    चौदहवीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया शुभारंभ

    खेल से सुदृढ़ होता है राष्ट्र निर्माण – उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

    रायपुर, /* प्रथम वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, भिलाई में चौदहवीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता 2025-26 का सोमवार को विधिवत शुभारंभ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खेल और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता 24 से 27 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में देशभर की पुलिस एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कुल 30 टीमें भाग ले रही हैं, जिनमें लगभग 450 खिलाड़ी शामिल हैं। विशेष बात यह है कि 10 राज्यों के 30 से अधिक ओलंपिक, वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स और साउथ एशियन गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं। जिसमें अर्जुन पुरस्कार विजेता असम के डीएसपी श्री जनता तालुकार एवं राजस्थान के डीएसपी रजत चौहान भी प्रतियोगी के रूप में शामिल हुए।

    अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस बल केवल कानून – व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल और अनुशासन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय स्तर की इस प्रतियोगिता से पुलिस बलों के बीच समन्वय, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना को मजबूती मिलेगी। छत्तीसगढ़ को इसकी मेजबानी मिलना राज्य के लिए गर्व का विषय है।

    पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कहा कि खेल गतिविधियां पुलिस बलों में शारीरिक दक्षता, मानसिक संतुलन और अनुशासन को मजबूत करती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को निष्पक्षता एवं खेल भावना के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दीं और आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। इस कार्यक्रम में दुर्ग नगर की महापौर श्रीमती अलका बाघमार, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, एडीजी एस.आर.पी. कल्लूरी, एडीजी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल विवेकानंद सिन्हा, आईजी ओ.पी. पाल, आईजी अजय यादव, आईजी अभिषेक शांडिल्य, आईजी श्री बी.एस. ध्रुव, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, डीआईजी एम.आर. आहिरे, डीआईजी मध्य रेंज एवं आयोजन सचिव सदानंद कुमार, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल, कलेक्टर अभिजीत सिंह, नगर निगम आयुक्त राठौर तथा प्रथम वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के डीआईजी कमांडेंट एवं पुलिस खेल अधिकारी राजेश कुकरेजा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पद्मश्री सम्मानित समसाद बेगम, भारती बंधू, आलोक निरंजन एवं पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सबा अंजुम भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

  • सुशासन से समृद्धि की ओर: विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला का बजट

    सुशासन से समृद्धि की ओर: विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला का बजट

    *प्रदेश के विकास को नई गति देगा बजट : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत किए जा रहे राज्य के बजट को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नवीन विधानसभा भवन में प्रस्तुत होने जा रहा हमारी सरकार का यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार के विज़न को नई मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का यह बजट समावेशी विकास, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाने वाला होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आमजन के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। किसानों, गरीबों, युवाओं, मातृशक्ति और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वित्त वर्ष 2026-27 का यह बजट प्रदेश के “सुशासन से समृद्धि” मॉडल को मजबूत आधार प्रदान करेगा और विकास की गति को और तेज करेगा। यह बजट राज्य के बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन, कृषि उन्नयन, सामाजिक सुरक्षा तथा मानव संसाधन विकास को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के अपने संकल्प पर दृढ़ है और यह बजट उस दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बजट से प्रदेश आत्मनिर्भरता, आर्थिक प्रगति और समृद्धि के नए दौर में प्रवेश करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को आगामी बजट के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह बजट छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला साबित होगा।

  • जनकल्याणकारी नीतियों से मजबूत हो रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    जनकल्याणकारी नीतियों से मजबूत हो रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    *समृद्ध किसान, मजबूत उद्योग और बढ़ता सेवा क्षेत्र: विकसित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम*

    रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रदेश की मजबूत, संतुलित और विकासोन्मुख अर्थव्यवस्था का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, किसानों के हित में लिए गए निर्णयों, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने तथा सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित भावों पर बढ़कर लगभग 6 लाख 31 हजार 291 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसकी वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ में विकास के सभी प्रमुख क्षेत्र समान रूप से प्रगति कर रहे हैं।

    *कृषि क्षेत्र में मजबूत वृद्धि:किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का परिणाम*

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में 12.53 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है, जो किसानों की मेहनत, तकनीकी नवाचार, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और समृद्ध किसान ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हैं। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    *औद्योगिक क्षेत्र में तेजी: निवेश और रोजगार के नए अवसर*

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश की औद्योगिक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार उद्योग क्षेत्र में 10.26 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है और राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग का योगदान लगभग 49 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश, अधोसंरचना विकास और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे प्रदेश की आर्थिक संरचना और अधिक मजबूत हो रही है।

    *सेवा क्षेत्र बना नई अर्थव्यवस्था का आधार*

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा क्षेत्र में 13.15 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आईटी एवं डिजिटल सेवाओं में विस्तार के कारण युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

    *प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि — प्रदेशवासियों की समृद्धि का संकेत*

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर लगभग 1.79 लाख रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.07 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों की बढ़ती आय, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और सरकार की विकासोन्मुख नीतियों का सकारात्मक परिणाम है।

    *हर परिवार की समृद्धि हमारा लक्ष्य*

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक परिवार की आय बढ़े, जीवन स्तर बेहतर हो और समृद्धि हर घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त एवं खुशहाल बने। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान और मजबूत करेगा तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

  • संत गाडगे बाबा ने दिया स्वच्छता ही सच्ची पूजा का संदेश – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    संत गाडगे बाबा ने दिया स्वच्छता ही सच्ची पूजा का संदेश – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    *मुख्यमंत्री राष्ट्र संत शिरोमणि गाडगे बाबा 150वीं जयंती पर आयोजित निर्मल दिवस कार्यक्रम में हुए शामिल*

    रायपुर/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्र संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती पर आयोजित निर्मल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम सभी ऐसे महान संत का स्मरण कर रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन और कर्मों से समाज को स्वच्छता, सेवा और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे बाबा ने “स्वच्छता ही सच्ची पूजा” का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संत गाडगे बाबा की स्वच्छता की प्रेरणा से उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान का स्मरण हो गया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की और आज स्वच्छता जनआंदोलन बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह संत गाडगे बाबा के विचारों का ही प्रभाव है कि देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हमारी माताओं-बहनों को सम्मान दिलाने का कार्य किया है। देशभर में शौचालयों के निर्माण से उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के उत्थान के लिए अनेक ऐतिहासिक योजनाएँ शुरू की गईं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जनधन योजना जैसी पहलें शामिल हैं। आज सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त कर नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सफल और संस्कारित जीवन जीने की आधारशिला है। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में नशामुक्त वातावरण बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने संत गाडगे बाबा के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उनकी आरती एवं स्मारिका का विमोचन किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान बच्चों और समाज के उत्कृष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।कार्यक्रम को विधायक सुनील सोनी, विधायक मोतीलाल साहू तथा पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संत गाडगे बाबा के वंशज भी मंच पर उपस्थित थे।कार्यक्रम में तुलसी कौशिक, घनश्याम चौधरी, श्रीमती रजनी रजक, विनय निर्मलकर सहित छत्तीसगढ़ रजक समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • लाल आतंक का अंधेरा छंटा, नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने ‘गोगुंडा’ में पहली बार जला बल्ब

    लाल आतंक का अंधेरा छंटा, नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने ‘गोगुंडा’ में पहली बार जला बल्ब

    *गोगुंडा की पहाड़ियों पर आजादी के 78 वर्ष बाद पहुँची बिजली, ग्रामीणों में हर्ष का माहौल*

    रायपुर/ सुकमा की दुर्गम वादियों में करीब 650 मीटर की ऊंचाई पर बसा गोगुंडा गांव आज सिर्फ रोशनी से नहीं, बल्कि उम्मीदों से जगमगा उठा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में आजादी के 78 साल बाद, इस पहाड़ी गांव ने पहली बार बिजली के बल्ब की रोशनी देखी है। यह केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि उन चार दशकों के काले साये की हार है, जिसने इस गांव को विकास की मुख्यधारा से काट रखा था। कल तक जो गांव सूरज ढलते ही घने जंगलों और नक्सलियों के खौफ के सन्नाटे में डूब जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई और खुशियों की गूंज सुनाई दे रही है। ढिबरी (मिट्टी के तेल का दीया) और टॉर्च के सहारे जीवन काटने वाले ग्रामीणों के चेहरे अब अंधेरा ढलने के बाद भी बल्ब की दूधिया रौशनी में चमक रहे है। बिजली ने ग्रामीणों में जीवन के प्रति उत्साह की ऊर्जा भर दी है।गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का ने कांपती आवाज में कहा कि हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अपने जीते जी गांव में बिजली देख पाएंगे। आज पहली बार महसूस हो रहा है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर मौजूद है।

    यह ऐतिहासिक बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का वह अटूट संकल्प है, जिसने मौत के साये को मात दी। सीआरपीएफ और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से कैंप स्थापित हुआ, जिससे नक्सलियों का ‘सुरक्षित किला’ ढह गया। जहां पहले 5 घंटे पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता था, वहां अब विकास की गाड़ियां पहुंच रही हैं। कैंप बनते ही कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी बुनियादी सुविधाएं युद्ध स्तर पर शुरू की गईं।कलेक्टरने बताया कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना सामाजिक और आर्थिक बदलाव की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य जिले के अंतिम छोर तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाना है। सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। गोगुंडा अब सुरक्षित है और यहाँ जल्द ही पुल-पुलियों का जाल बिछेगा। कमांडेंट 74वीं बटालियन श्री हिमांशु पांडे ने बताया कि नक्सली दंश के कारण यह गांव दशकों पीछे था। कैंप की स्थापना के बाद मिली यह बिजली क्षेत्र में शांति और प्रगति का नया अध्याय लिखेगी। गोगुंडा की यह रोशनी बस्तर के बदलते स्वरूप की कहानी कह रही है। यह कहानी है उस अदम्य साहस की, जिसने पहाड़ों का सीना चीरकर बिजली के खंभे गाड़े और उन ग्रामीणों की, जिन्होंने दशकों बाद लोकतंत्र पर अपना अटूट विश्वास जताया। अब गोगुंडा का अंधेरा स्थायी रूप से छंट चुका है और अब वहां सिर्फ भविष्य की चमक है।

  • छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन की अध्यक्षता में फिल्म पॉलिसी पर बैठक

    छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन की अध्यक्षता में फिल्म पॉलिसी पर बैठक

     सब्सिडी व फिल्म सिटी पर फोकस

    रायपुर। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन की अध्यक्षता में आज फिल्म पॉलिसी को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य राज्य की फिल्म नीति के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देना तथा फिल्म उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था। बैठक में हिंदी फिल्मों, क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों एवं ओटीटी फिल्मों सहित सभी श्रेणियों के लिए उपलब्ध सब्सिडी योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही सिनेमा घरों के निर्माण पर मिलने वाली सब्सिडी, फिल्म शूटिंग उपकरणों की खरीदी पर अनुदान तथा सिनेमा घरों के मरम्मत कार्यों पर उपलब्ध वित्तीय सहायता के विषय में भी विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।

    संस्कृति विभाग के निदेशक एवं टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, आवेदन की समय-सीमा तथा आवश्यक औपचारिकताओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार लाभ प्रदान किया जाएगा।

    बैठक के दौरान उपस्थित निर्माताओं एवं फिल्मकारों ने जमीनी स्तर पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया। इन मुद्दों पर सार्थक और सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि पहली बार फिल्म पॉलिसी पर इस प्रकार विस्तृत और पारदर्शी संवाद आयोजित किया गया है, जिससे फिल्म उद्योग जगत में विश्वास और उत्साह का वातावरण बना है। विवेक आचार्य ने राज्य में विकसित की जा रही फिल्म सिटी की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में फिल्म टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में राज्य फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। बैठक में प्रेमचंद्राकर, भूपेंद्र साहू, मोहित साहू, अनुज शर्मा, मोहन सुंदरानी, लखी सुंदरानी, मनोज वर्मा, राज वर्मा, सतीश जैन, श्री रॉकी दसवानी, अनुपम वर्मा, श्रीमती गायत्री केशरवानी, संतोष जैन, अनुमोद राजवैद्य, प्रकाश अवस्थी, अरिहंत फिल्म्स, श्री गजेंद्र श्रीवास्तव, चकोर फिल्म्स, राजन दादा, अलख राय, मनीष मानिकपुरी एवं अशोक तिवारी सहित अनेक फिल्म निर्माता एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक का समापन सकारात्मक वातावरण में हुआ। सभी हितधारकों ने राज्य में फिल्म उद्योग के समग्र विकास के लिए निरंतर सहयोग और समन्वय के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

  • बारनवापारा अभयारण्य: जहां हर कदम पर है प्रकृति का रोमांच…..

    बारनवापारा अभयारण्य: जहां हर कदम पर है प्रकृति का रोमांच…..

    रायपुर,/ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभ्यारण्य साल और सागौन के घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराती है।

    बारनवापारा में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंगा, भालू तथा कभी-कभी तेंदुए की झलक भी देखने को मिल जाती है। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां के वातावरण को और जीवंत बनाते हैं। वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी पर्यटकों को जंगल के भीतर सुरक्षित भ्रमण का अवसर देती है। सुबह और शाम का समय वन्यजीवों को देखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह अभयारण्य सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है। रेल यात्रियों के लिए रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक स्टेशन है। रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। निजी वाहन से पहुंचना अधिक सुविधाजनक रहता है।

    अभयारण्य में प्रवेश शुल्क और सफारी शुल्क निर्धारित हैं। यहां पार्किंग, गाइड, वॉच टॉवर, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग कराएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। बारनवापारा की यात्रा को और अधिक सुखद बनाने के लिए पर्यटन मंडल द्वारा संचालित मोहदा रिसोर्ट विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह रिसोर्ट प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है और यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे, रेस्टोरेंट, बच्चों के खेलने की जगह तथा हरियाली से घिरा शांत परिसर उपलब्ध है। परिवार और समूह में आने वाले पर्यटकों के लिए यह ठहरने का एक उत्कृष्ट विकल्प है। यहां स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है। जंगल सफारी और मोहदा रिसोर्ट की बुकिंग वनविभाग और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की साइट से की जा सकती है। 

    बारनवापारा के समीप स्थित तुरतुरिया भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां प्राचीन अवशेष, शांत वन क्षेत्र और जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। तुरतुरिया को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ी मान्यता के कारण धार्मिक और पौराणिक महत्व भी प्राप्त है। यहां पिकनिक और प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है। लोक मान्यता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान यहीं आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ। इस कारण यह स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है। यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहां बहने वाली छोटी जलधाराएं और प्राकृतिक झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए यह आकर्षक स्थान है। तुरतुरिया में प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्राकृतिक गरम जल कुंड भी पाए जाते हैं, जिनके बारे में स्थानीय मान्यता है कि इनका जल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यही “तुर-तुर” ध्वनि से निकले नाम की एक मान्यता भी बताई जाती है।

    अभयारण्य से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार और पुरातात्विक अवशेष यहां के प्रमुख आकर्षण हैं, जो इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। बारनवापारा घूमने का सर्वाेत्तम समय अक्टूबर से जून तक माना जाता है। वर्षा ऋतु में हरियाली अपने चरम पर होती है, हालांकि कभी-कभी सफारी सेवाएं सीमित हो सकती हैं। यात्रा के दौरान हल्के रंग के वस्त्र पहनना, दूरबीन और कैमरा साथ रखना तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। बारनवापारा अभयारण्य, सिरपुर और तुरतुरिया मिलकर एक ऐसा पर्यटन परिपथ तैयार करते हैं, जहां प्रकृति, रोमांच, इतिहास और आरामदायक आवास की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। यदि आप सप्ताहांत में सुकून भरी और यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए एक आदर्श गंतव्य सिद्ध हो सकता है।