श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और बेहतर इंतेजाम के लिए अधिकारियों द्वारा लगातार किया जा रहा निरीक्षण
वाराणसी।महाकुंभ गंगा स्नान कर बाबा काशी विश्वनाथ धाम मंदिर में दर्शन करने पहुँचे और दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं/दर्शनार्थियों के सुगम दर्शन,सुचारू आवागमन व भीड़ नियंत्रण को लेकर जिलाधिकारी एस. राजलिंगम और अपर पुलिस कमिश्नर डॉ एस चिनप्पा ने गिरजाघर और गोदौलिया चौराहे का निरीक्षण किया और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
जिलाधिकारी और अपर पुलिस कमिश्नर गिरजाघर गोदौलिया चौराहे से पैदल चलते हुए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को निर्देश देते रहे और लोगों से भी आवश्यक सहयोग करने व कतारबद्ध होकर चलने की अपील करते रहे। मौके पर पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
*सीडीओ ने टीबी मुक्त ग्राम पंचायत हेतु कार्य योजना बनाकर कार्य करने को किया निर्देशित*
वाराणसी। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीइपी) के अन्तर्गत कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल की अध्यक्षता में जनपद के समस्त ग्राम प्रधानों की एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया| कार्यशाला में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।
उक्त कार्यशाला में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मुख्य विकास अधिकारी ने ग्राम प्रधानों से निक्षय मित्र बनने एवं अपने ग्राम पंचायत के ट्यूबरक्लोसिस के मरीजों को मानसिक संबल प्रदान करने हेतु अनुरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वस्थ ग्राम परिकल्पना हेतु यह आवश्यक है तथा यदि ग्राम प्रधान अपने ग्राम पंचायत के टीबी के मरीजों के जांच उपचार में रुचि लेंगे तो हम टीबी मुक्त पंचायत का लक्ष्य जल्दी ही पूरा कर पाएंगे। मुख्य विकास अधिकारी ने इस वर्ष के लिए टीबी मुक्त ग्राम पंचायत हेतु अभी से कार्य योजना बनाकर कार्य करने के लिए निर्देशित भी किया।
कार्यशाला में *जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय* ने पीपीटी के माध्यम से ट्यूबरक्लोसिस के कारण, उपचार तथा बचाव पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला एवं ग्राम प्रधानों से आह्वान किया कि वह अपने क्षेत्र की आशा एवं एएनएम से ट्यूबरक्लोसिस के बारे में ग्राम पंचायत से संबंधित प्रगति का विवरण लेते रहें तथा ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाली मीटिंग में टीबी से संबंधित चर्चा अवश्य करें। जिससे समुदाय के लोंगो को जागरूक किया जा सके|
उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को टीबी के लक्षण प्रतीत होते हैं तो उन्हें मात्र अपने निकटतम आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जाकर अपना सेंपल देना है इसके बाद यदि उनमें टीबी की बीमारी पाई जाती है तो अग्रिम कार्यवाही जनपद के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से की जाती है मरीज को कहीं भी इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता है।
वाराणसी ।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्लीपुर, वाराणसी द्वारा काशी दर्शन डी.यू. महाविद्यालय, मेहदीगंज, वाराणसी पर इन – सीटू फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत विद्यालय स्तरीय जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, ड़ॉ. नवीन कुमार सिंह के दिशा निर्देश में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ड़ॉ. नवीन कुमार सिंह ने विद्यालय के छात्र एवं छात्राओं को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुक़सान जैसे कि मृदा, पानी तथा हवा द्वारा प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी । कार्यक्रम में केन्द्र के सस्य वैज्ञानिक ड़ॉ अमितेश कुमार सिंह ने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने कि घटना हमारे देश में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश में होता है।
वैज्ञानिक बीज तकनीकी डॉ. श्रीप्रकाश सिंह ने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक टन धान का पुवाल जलाने से 5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 3 किलोग्राम फोस्फोरस, 25 किलोग्राम पोटेशियम तथा 2 किलोग्राम सलफर जल कर राख हो जाता है। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मनीष पाण्डेय ने बताया कि खेत में पराली के ऊपर पूसा वेस्ट डीकमपोज़र का प्रयोग करके 30 से 35 दिन में सडाकर गलाया जा सकता है जिससे मिट्टी कि उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है। केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन में क़ृषि में मशीनों जैसे कि मल्चर, रोटावेटर, सुपर सीडर तथा हैप्पी सीडर का प्रयोग करके पराली का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है। गृह वैज्ञानिक डॉ. प्रतीक्षा सिंह ने बताया की लाभदायक सूक्ष्मजीवों का प्रयोग करके भी फसल अवशेषों को सडा गला कर गुणवत्ता युक्त जैविक खाद तैयार की जा सकती है | कार्यक्रम में उपस्थित पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. पूजा सिंह सिंह फसल अवशेषों का आच्छादन के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी| फसल अवशेष का मिट्टी पर होने वाले लाभ तथा हानियों पर और प्राकृतिक खेती पर विस्तार से चर्चा किया। इस कार्यक्रम में निबंध, प्रश्नोत्तरी एवं डिबेट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया और पुरस्कार वितरण किया गया। व्याख्यान प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार कौशिक विश्वकर्मा द्वितीय पुरस्कार निधि शर्मा तथा तृतीय पुरस्कार आंशिक मौर्या को मिला। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता सही जवाब देने पर अमीषा पटेल, वंदना, रीता यादव, कौशिक विश्वकर्मा, दीक्षा सिंह, आंचल वर्मा, सरिता पटेल एवं संजना पटेल को पुरस्कृत किया गया। धन्यवाद ज्ञापन काशी दर्शन डीयू महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. रीता पटेल ने किया । इस अवसर पर मिथुन विश्वकर्मा, नागेंद्र सहित लगभग 250 छात्र एवं छात्राओं ने प्रतिभाग किया |
वाराणसी ।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्लीपुर, वाराणसी द्वारा शिवचरण स्मारक इंटर्मिडिएट कॉलेज, मेहदीगंज, आराजी लाइन, वाराणसी पर इन – सीटू फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत विद्यालय स्तरीय जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, ड़ॉ. नवीन कुमार सिंह के दिशा निर्देश में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजय सिंह, प्रबंधक एवं प्राचार्या श्रीमती सोनी पटेल विद्यालय के छात्र एवं छात्राओं को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुक़सान जैसे कि मृदा, पानी तथा हवा द्वारा प्रदूषण से होने वाले दुसप्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में केन्द्र सस्य वैज्ञानिक ड़ॉ अमितेश कुमार सिंह ने फसल अवशेषों को जलाने कि घटना हमारे देश में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश में होता है। वाराणसी जिले में किसानों द्वारा पराली जलाने कि समस्या न के बराबर है। एक टन धान का पुवाल जलाने से 5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 3 किलोग्राम फोस्फोरस, 25 किलोग्राम पोटेशियम तथा 2 किलोग्राम सलफर जल कर राख हो जाता है। इसी प्रकार खेत में पराली के ऊपर पूसा वेस्ट डीकमपोज़र का प्रयोग करके 30 से 35 दिन में सड़कर गल जाता है और इसको मिट्टी में मिलाकर मिट्टी कि उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मनीष पाण्डेय ने फसल अवशेष प्रबंधन में क़ृषि में मशीनों जैसे कि मल्चर, रोटावेटर, सुपर सीडर तथा हैप्पी सीडर का प्रयोग करके पराली का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने बताया की लाभदायक सूक्ष्मजीवों का प्रयोग करके भी फसल अवशेषों को सडा गला कर गुणवत्ता युक्त जैविक खाद तैयार की जा सकती है | कार्यक्रम में उपस्थित पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. पूजा सिंह सिंह फसल अवशेषों का आच्छादन के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी| फसल अवशेष का मिट्टी पर होने वाले लाभ तथा हानियों पर और प्राकृतिक खेती पर विस्तार से चर्चा किया। इस कार्यक्रम में निबंध, प्रश्नोत्तरी एवं डिबेट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया और पुरस्कार वितरण किया गया। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार शिवानी विश्वकर्मा द्वितीय पुरस्कार लक्ष्मी गुप्ता तथा तृतीय पुरस्कार प्रियंका प्रजापति, प्रश्नोत्तर्री प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार चांदनी मौर्या सिंह द्वितीय पुरस्कार आयुष सेठ तथा तृतीय पुरस्कार कल्पना पाल और डिबेट प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ख़ुशी पटेल द्वितीय पुरस्कार सुप्रिया सिंह तथा तृतीय पुरस्कार आकाश पटेल ने प्राप्त किया। जिसमे लगभग 160 से अधिक छात्र एवं छात्राओं ने प्रतिभाग किया|
*रविदास जयंती पर आने वाले श्रद्धालुओं को समुचित सुविधाएं सुनिश्चित हो-एस.राजलिंगम*
वाराणसी। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम और अपर पुलिस आयुक्त एस. चिनप्पा ने बुधवार को संत रविदास जयंती की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत सीर गोवर्धन क्षेत्र का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने भारी भीड़ आने को देखते हुए यातायात सहित कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने का निर्देश देते हुए वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था समुचित तरीके से सुनिश्चित कराए जाने पर विशेष जोर दिया।
जिलाधिकारी ने नगर निगम के अधिकारियों को पूरे परिसर एवं मंदिर के आसपास के चारों तरफ विशेष अभियान चलाकर साफ सफाई, प्रकाश, मोबाइल शौचालय, पेयजल आदि की उचित व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मंदिर प्रशासन से भी साफ सफाई के लिए मंदिर की तरफ से भी वालंटियर नियुक्त किए जाने को कहा। जिससे व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रहे। भीड़ को नियंत्रित एवं व्यवस्थित करने के संबंध में उन्हें स्पष्ट रणनीति बनाकर उसे अमल में लाने के निर्देश दिए।
आदि शंकराचार्य से जुडी बनारस की स्मृतियों को किया साझा
वाराणसी। वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्रीविधुशेखर भारती स्वामी जी का काशीखण्ड के सुप्रसिद्ध केदारखण्ड में स्थित गौरीकेदारेश्वर मन्दिर के समीप में स्थित श्रृंगेरी मठ पर क्षेमेश्वर घाट की ओर से दोपहर 12.30 बजे आगमन हुआ। मठ में कुम्भाभिषेक आदि पूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इसके बाद सायंकाल 6 बजे काशी के नारद घाट में स्थित श्रीराजराजेश्वरी चैरिटेबल ट्रस्ट में उनका आगमन हुआ। वहां पर क्षेमेश्वर घाट से देवनाथ पुरा में स्थित भवन में उनका स्वागत समाज के सभी लोगों ने पुष्प समर्पण द्वारा किया। वेद मंत्रों के सस्वर पाठ से क्षेत्र गुंजायमान रहा। शास्त्रों के अध्येता और आम आस्तिक काशीवासी सहित महाकुंभ के सुअवसर पर काशी आए लोगों ने उक्त पुण्यकार्य में सहभागिता की। वहां पर स्वामी जी ने अपने शुभाशीर्वचनों से सभी पर अनुग्रह किया।
स्वामी जी ने अपने भाषण में सभी को धर्म के पालन का उपदेश दिया। धर्म के महत्व को समझाया। स्वामी जी ने कहा कि धर्म ही मनुष्यों का एक विशेष कर्तव्य है जो उन्हें पशुओं से अलग करता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी मनुष्य के साथ यदि कुछ जाता है तो वह उसका धर्म ही जाता है। धर्म के अलावा बाकी सब कुछ चाहे धन हो या वैभव यहीं पर रह जाता है। इसलिए मनुष्यों को अपने धर्म का पालन करना चाहिए। धर्म से ही सबका कल्याण होता है। सभी लोगों को कल्याण के मार्ग पर ही अग्रसर होना चाहिए। स्वामी श्री ने आदि शंकराचार्य जी की बनारस जुडी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा की आपलोग भाग्यशाली हैं की जिस काशी में प्रवास करने के लिए लोग कई जन्मो तक पुण्य जुटाते हैं तब आ पाते हैं वंहा आप सपरिवार जीवन बिता रहे हैं। इस सौभाग्य का सदुपयोग परमार्थ हित में और धर्म कार्य में लगकर करें. ।
अद्वैत वेदांत के प्रणोता आद्य शंकराचार्य ने दुनिया को ज्ञान दिया, इसकी अजस्त्र धारा उनमें देवाधिदेव की नगरी काशी में ही फूटी। काशी विश्वनाथ के दरस परस के निमित्त महादेव की नगरी में आगमन की राह से इसकी शुरुआत हुई।
वास्तव में अद्वैत ब्रह्मवादी आचार्य शंकर केवल निर्विशेष ब्रह्म को सत्य मानते थे। ब्रह्म मुहूर्त में शिष्यों संग स्नान के लिए मणिकर्णिका घाट जाते आचार्य का राह में बैठी विलाप करती युवती से सामना हुआ। युवती मृत पति का सिर गोद में लिए बैठी करुण क्रंदन कर रही थी। शिष्यों ने उससे शव हटाकर आचार्य शंकर को रास्ता देने का आग्रह किया। दुखित युवती के अनसुना करने पर आचार्य ने खुद विनम्र अनुरोध किया। इस पर युवती के शब्द थे कि हे संन्यासी, आप मुझसे बार-बार शव हटाने को कह रहे हैं। इसकी बजाय आप इस शव को ही हट जाने के लिए क्यों नहीं कहते। आचार्य ने दुखी युवती की पीड़ा को महसूस करते हुए कहा कि देवी! आप शोक में शायद यह भी भूल गई हैं कि शव में स्वयं हटने की शक्ति नहीं होती। स्त्री ने तुरंत उत्तर दिया- महात्मन् आपकी दृष्टि में तो शक्ति निरपेक्ष ब्रह्म ही जगत का कर्ता है फिर शक्ति के बिना यह शव क्यों नहीं हट सकता। एक सामान्य महिला के ऐसे गंभीर, ज्ञानमय व रहस्यपूर्ण शब्द सुनकर आचार्य वहीं बैठ गए। समाधि लग गई और अंत:चक्षु में उन्होंने देखा कि सर्वत्र आद्याशक्ति महामाया लीला विलाप कर रही हैं। उनका हृदय अविवर्चनीय आनंद से भर गया। मुख से मातृ वंदना की शब्द धारा फूट चली। इसके साथ आचार्य शंकर ऐसे महासागर बन गए जिसमें अद्वैतवाद, शुद्धाद्वैतवाद, विशिष्टा द्वैतवाद, निगरुण ब्रह्म ज्ञान के साथ सगुण साकार भक्ति धाराएं एक साथ हिलोरें लेने लगीं। उन्होंने यह भी अनुभव किया कि ज्ञान की अद्वैत भूमि पर जो परमात्मा निर्गुण निराकार ब्रह्म है वही द्वैत भूमि पर सगुण साकार रूप हैं। उन्होंने निर्गुण और सगुण दोनों का समर्थन करके निर्गुण तक पहुंचने के लिए सगुण की उपासना को अपरिहार्य सीढ़ी माना। ज्ञान और भक्ति की मिलन धरती पर उन्होंने यह भी अनुभव किया कि अद्वैत ज्ञान ही सभी साधनाओं की परम उपलब्धि है। उन्होंने ‘ब्रह्मं सत्यं जगत् मिथ्या का उद्घोष भी किया। ‘सौन्दर्य लहरी, ‘विवेक चूड़ामणि प्रस्थान त्रयी भाष्य समेत भक्ति रसपूर्ण स्त्रोतों की रचना की। अपने अकाट्य तर्को से उन्होंने शैव -शाक्त-वैष्णवों का द्वंद्व समाप्त किया और पंचदेवोपासना की राह प्रशस्त की। हिमालय समेत संपूर्ण भारत की यात्र की और धर्म रक्षार्थ चार शंकराचार्य पीठ स्थापित किए। इस कार्यक्रम में उस क्षेत्र के समाज के सभी लोगों की भागीदारी रही। कार्यक्रम सभा का संचालन डॉ तुलसी कुमार जोशी ने किया। महत्वपूर्ण उपस्थितियों में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान के संकाय प्रमुख प्रोफेसर राजाराम शुक्ल, श्रृंगेरी मठ के चल्ला अन्नपूर्णा, नीरज पारिख, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डॉ गणेश्वर नाथ झा, श्री राज राजेश्वरी चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य तुलसी गजानन जोशी, काशी क्षेत्र तीर्थ पुरोहित तुलसी मनोज कुमार जोशी एवं अन्य समाज के लोगों की उपस्थिति रही।
वाराणसी । समाजवादी पार्टी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल ने कहा कि सत्र 2025-26 का वार्षिक बजट आम जनता एवं माध्यम वर्गीय के साथ छलावा भरा निराशाजनक बजट है। सरकार ने आंकड़ों से जनता की भावनाओं के साथ खेल कर छलावा किया है। क्योंकि इनकम टैक्स के न्यू रेजीम स्लैब में बड़ी राहत देने ढिंढोरा पीटने के नाम पर 12 लाख की सीमा पार करते ही 4 लाख के ऊपर से टैक्स की गणना होगी अर्थात किसी की वार्षिक इनकम 12 लाख 100 रुपए है तो वह टैक्स के दायरे में आ जाएगा, उसे अब 4 से 8 लाख के आय पर 5% और 8 से 12 लाख के आय पर 10% प्रतिशत के साथ 60 हजार आय कर और 12 लाख के ऊपर 100 रुपए पर 15% ब्याज यानि कुल 60,015 रूपये सरकार को आयकर देना पड़ेगा।
बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला और युवाओं पर ध्यान नही रखा गया है l आधारभूत ढांचा एवं परिवहन को अनदेखा किया गया है l पेट्रोल-डीज़ल को पूर्व की भांति टैक्स में छूट के दायरे से बाहर रखा गया है। किसानों की मांग के अनुरूप कुछ भी नहीं किया गया है। जीएसटी की तत्कालीन परिस्थितियों से परेशान व्यापारियों को कोई राहत नहीं दी गई है।
श्री जायसवाल ने कहा कि कुल मिला जुलाकर जुमलेबाजी वाला और निराशाजनक बजट है l इससे किसी का भला होने वाला नहीं है। महंगी पढ़ाई , महंगी दवाई, महंगी थाली से मध्यम वर्ग को कोई राहत होने वाली नहीं है।
*केंद्रीय बजट को सामान्य नागरिक, व्यापारियों, उद्यमियों, श्रमिकों, सरकारी कर्मचारी के साथ ही विकसित भारत के मिशन को पूरा करने वाला है-मंत्री रविंद्र जायसवाल*
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने शनिवार को लोकसभा में प्रस्तुत देश मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पूर्ण प्रस्तुत बजट को देश के लिए बहुआयामी बताते हुए कहा कि इसे सामान्य नागरिक, व्यापारियों, उद्यमियों, श्रमिकों, सरकारी कर्मचारी के साथ ही विकसित भारत के मिशन को पूरा करने वाला है। ये बजट इन्वेस्टमेंट, कन्जंप्शन को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि टोटल बजट ₹50.65 लाख करोड़ का है। बजट में नौकरीपेशा के लिए 12.75 लाख तक की आय टैक्स फ्री कर सरकार ने मध्यम वर्ग को लाभांवित किया हैं।
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि बजट में प्रत्येक क्षेत्र पर ध्यान दिया गया है जो आम नागरिक से जुड़ा है। नए बजट से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज आसान होगा, देश के 200 जिला अस्पतालों में कैंसर के केयर सेंटर खोले जाएंगे, कैंसर की 36 दवाएं भी अब सस्ती हो जाएगी।
*पर्यटन सूचना केन्द्र/सहायता केन्द्र पर पर्यटको को दी जा रही समुचित सूचनाएं*
*पर्यटन सूचना केन्द्र/सहायता केन्द्र पर पर्यटक पुलिस की ड्यूटी लगायी गयी*
वाराणसी। महाकुम्भ के दृष्टिगत काशी आने वाले श्रद्धालुओं एवं स्नानार्थियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु जिला प्रशासन के निर्देशानुसार पर्यटन विभाग द्वारा भी समुचित व्यवस्थाये सुनिश्चित कराई गई है। महाकुम्भ के दृष्टिगत पर्यटन विभाग द्वारा कैण्ट रेलवे स्टेशन, लालबहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर, सारनाथ, राजघाट पर्यटन सूचना केन्द्र, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट के अतिरिक्त दो नये स्थान बनारस रेलवे स्टेशन तथा रोडवेज बस स्टैण्ड पर श्रद्धालुओं को सूचनाएं उपलब्ध कराने हेतु पर्यटन सूचना केन्द्र/सहायता केन्द्र पर पर्यटक पुलिस की ड्यूटी लगायी गयी।
महाकुम्भ के दृष्टिगत पर्यटन विभाग द्वारा महाकुम्भ के ब्रोसर्स, सिटी मैप एवं जनपद वाराणसी के विभिन्न पर्यटन स्थलों की जानकारी उपलब्ध करायी जाती है। महाकुम्भ के दृष्टिगत पर्यटन विभाग द्वारा माह जनवरी में 212 नये पेईंग गेस्ट हाउस संचालकों का पंजीकरण कर लाईसेन्स दिया गया, जिससे कि आने वाले श्रद्धालुओं की अवस्थापना में सुविधा हो सके। अब तक लगभग 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं/पर्यटकों को वाराणसी के पर्यटक स्थलों तथा महाकुम्भ से सम्बन्धित जानकारी दी जा चुकी है। जिसमे कैण्ट रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन एवं दशाश्वमेध घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक है। जनपद वाराणसी के आस-पास के पर्यटन स्थल विशेषकर मीरजापुर के विन्ध्यवासिनी धाम, चन्दौली एवं सोनभद्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ इको-टूरिज्म से सम्बन्धित जानकारी भी दी जा रही है एवं उन स्थलों को देखने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।
वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान – दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क), वाराणसी में 27 से 31 जनवरी 2025 तक चावल और बाजरा कुकीज उत्पादन एवं सूक्ष्म उद्यमिता विकास पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘चावल मूल्य संवर्धन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह (SHG) आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने’ परियोजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ओडिशा के विभिन्न जिलों से 10 महिला स्वयं सहायता समूह (WSHG) सदस्यों के साथ-साथ ओडिशा सरकार के मिशन शक्ति विभाग द्वारा नामित दो राज्य अधिकारियों ने भाग लिया। यह पांच दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण, उद्यमिता विकास और बाजार तक पहुंचने की क्षमता से सशक्त बनाने पर केंद्रित था। इस दौरान व्याख्यान, व्यवहारिक प्रशिक्षण, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को धान प्रसंस्करण, कुकी उत्पादन, पैकेजिंग, भंडारण तकनीकों और व्यावसायिक रणनीतियों की बारीकियों से अवगत कराया गया। इस प्रशिक्षण की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों ने कला जीरा चावल से संपूर्ण अनाज कुकीज़ और कला जीरा चावल व बाजरा मिश्रित कुकीज़ बनाने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। साथ ही, उन्हें उन्नत कुकी ड्रॉपिंग और वायर-कट मशीनों के संचालन में भी प्रशिक्षित किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में इरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राबे याहया ने प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। समापन सत्र में इरी इंडिया के कॉरपोरेट सपोर्ट सर्विसेज के प्रमुख, श्री टी. सी. धौंडियाल ने प्रतिभागियों की सीखने की प्रतिबद्धता की सराहना की और इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। इस प्रशिक्षण के दौरान आइसार्क के वैज्ञानिकों और मिशन शक्ति विभाग के अधिकारियों ने ओडिशा में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को रेखांकित किया और बताया कि कैसे ये समूह राज्य की आर्थिक समावेशिता और सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान दे सकते हैं। डॉ. हमीदा इतागी, डॉ. विक्रम, श्री आलोकनाथ, और चावल मूल्य संवर्धन उत्कृष्टता केंद्र (सर्वा) की उत्पाद विकास टीम ने उत्पाद नवाचार, बाजार में जुड़ाव, ब्रांडिंग रणनीतियों और उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
प्रतिभागियों ने अपने नए कौशलों को अपने उद्यम शुरू करने और स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों, जैसे काला जीरा चावल और बाजरा, के मूल्य को बढ़ाने में उपयोग करने को लेकर उत्साह व्यक्त किया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें व्यवसाय के अवसरों, ब्रांडिंग रणनीतियों और लागत-लाभ विश्लेषण की समझ भी दी, जिससे वे बाजार की प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम हो सकें।
समापन सत्र में डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने इस कार्यक्रम की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने समुदायों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरक नेतृत्व निभाने की सलाह दी। सर्वा के प्रमुख और परियोजना अन्वेषक, डॉ. नेसे ने अपने समापन संबोधन में कहा, “सशक्त महिलाएं पूरे समुदाय को सशक्त बनाती हैं। आइसार्क में सीखे गए कौशल न केवल आपके जीवन को बदलेंगे बल्कि ओडिशा के कृषि क्षेत्र के व्यापक विकास में भी योगदान देंगे।”
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आइसार्क, मिशन शक्ति विभाग और अन्य सहयोगी संस्थानों के सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, समावेशी विकास को सशक्त करने और ओडिशा की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। केंद्र आगे भी तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिला उद्यमियों का समर्थन करेगा, जिससे भारत में चावल मूल्य श्रृंखला का संपूर्ण विकास हो सके।