Category: UTTARAKHAND

  • एन टी पी सी की तपोवन परियोजना का स्थापना दिवस बड़े हर्ष के साथ मनाया गया

    एन टी पी सी की तपोवन परियोजना का स्थापना दिवस बड़े हर्ष के साथ मनाया गया

    आग की घटना को साहसपूर्वक नियंत्रित करने वाले अग्निशमन कर्मियों को सम्मानित किया गया

    ज्योतिर्मठ, चमोली। 14 फरवरी 2026 को एनटीपीसी की तपोवन परियोजना का 22वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर परियोजना परिसर में एक गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं परियोजना प्रमुख (प्रभारी) नरसिंह पाल सिंह के स्वागत के साथ हुआ। उनके आगमन पर पूरे परिसर में उत्साह का वातावरण व्याप्त हो गया।

    इसके पश्चात ध्वजारोहण किया गया तथा NTPC गीत के सामूहिक गायन से वातावरण संगठनात्मक गौरव से ओत-प्रोत हो उठा। कार्यक्रम के दौरान केक कटिंग समारोह भी आयोजित किया गया, जिसने उत्सव में आत्मीयता का संचार किया।

    परियोजना प्रमुख नरसिंह पाल सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में टीम भावना, सुरक्षा और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर Indian Army के जोशीमठ क्षेत्र में आग की घटना को साहसपूर्वक नियंत्रित करने वाले अग्निशमन कर्मियों को सम्मानित किया गया। उनके साहस, तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई।

    कार्यक्रम के अंत में मानव संसाधन प्रमुख सुश्री सुगता दास गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

    उत्सव के समापन चरण में मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें Central Industrial Security Force (CISF) और NTPC के बीच रोमांचक मैच खेले गए। साथ ही NTPC Tapovan की टीमों के मध्य भी मैत्री मैच आयोजित हुआ। इन खेलों ने आपसी सहयोग, समन्वय और सौहार्द की भावना को और सुदृढ़ किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम उल्लास, सम्मान और संगठनात्मक एकता का प्रतीक बनकर सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना।

  • राष्ट्र का गणतन्त्र दिवस तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में बड़े उल्लास के साथ मनाया गया।

    राष्ट्र का गणतन्त्र दिवस तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में बड़े उल्लास के साथ मनाया गया।

    चमोली। राष्ट्र का गणतन्त्र दिवस तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में बड़े उल्लास के साथ मनाया गया। विभागाध्यक्ष मानव संसाधन सुश्री सुगाता दासगुप्ता जी ने बुके देकर कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख  अजय कुमार शुक्ला जी का स्वागत किया। इसके पश्चात  अजय कुमार शुक्ला ने ध्वज प्राचीर पर जाकर राष्ट्रीय ध्वज को फहराया और पूरा वातावरण राष्ट्र गान से गुंजायमान हो उठा। सीआईएसएफ़ की टुकड़ी द्वारा सलामी शस्त्र देकर राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किया गया।

    अपने उद्बोधन में परियोजना प्रमुख महोदय ने सभी कर्मचारियों का उत्साह वर्धन किया एवं सभी से टीम भावना के साथ एकजुट होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु अग्रसर होने का आवाहन किया।

    इसके पश्चात कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख,  अजय कुमार शुक्ल ने सभी विभागाध्यक्षों के साथ परियोजना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को परियोजना प्रमुख प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम में माह अक्टूबर 2025 में सूचना एवं प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा  साइबर सिक्योरिटी पर आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष मानव संसाधन सुश्री सुगाता दासगुप्ता जी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

  • विष्णुगाड़ – पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के क्रियान्वयन में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी

    विष्णुगाड़ – पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के क्रियान्वयन में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी

    पीपलकोटी |  जनसंपर्क अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि विष्णुगाड़–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (वीपीएचईपी) की टीबीएम साइट पर  30दिसम्बर.2025 की रात्रि को घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। उक्त घटना के संबंध में जिलाधिकारी, चमोली एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, चमोली द्वारा संयुक्त रूप से  31दिसम्बर.2025 को घटनास्थल का निरीक्षण किया गया तथा घटना के कारणों की जानकारी प्राप्त की गई। जिलाधिकारी, चमोली द्वारा प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

    टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा जांच प्रक्रिया में सभी आवश्यक जानकारियाँ, तकनीकी विवरण आदि हेतु पूर्ण सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि तथ्यों के आधार पर टीबीएम साइट पर संचालित मोनोरेल प्रणाली का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके। परियोजना प्रमुख अजय वर्मा द्वारा कार्यदायी संस्था को सुरक्षा मानकों, वैधानिक प्रावधानों एवं मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। घटना के उपरांत परियोजना की समस्त सुरक्षा व्यवस्थाओं की पुनः समीक्षा की जा रही है तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    घटना में प्रभावित 76  व्यक्तियों को प्राथमिक जांच एवं उपचार के पश्चात् डिस्चार्ज कर दिया गया है,  जबकि पाँच कार्मिकों को जिला अस्पताल में समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।  उनके उपचार एवं कल्याण हेतु टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा पूर्ण प्रबंधन किया जा रहा है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के लिए मानव जीवन एवं कार्यस्थल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संस्था सुरक्षित, जिम्मेदार एवं पारदर्शी कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है, तथा सभी सुरक्षा मानकों के अनुरूप परियोजना को समय से पूर्ण कर राष्ट्र को समर्पित करने के लिए कटिबद्ध है।

  • ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को एक और बड़ी सौगात:टिहरी पीएसपी से उत्तर प्रदेश को मिलेगा 25 प्रतिशत विद्युत लाभ

    ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को एक और बड़ी सौगात:टिहरी पीएसपी से उत्तर प्रदेश को मिलेगा 25 प्रतिशत विद्युत लाभ

    *देश की पहली वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज परियोजना के तृतीय इकाई का केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर एवं उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने किया वर्चुवली उदघाटन

    *ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने बढ़ाया ऐतिहासिक कदम*

    *पीकिंग पावर और ग्रिड प्रबंधन को मजबूत बनाएगी टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना*

    *प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत तेज गति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा : ए के शर्मा

    लखनऊ / देश की पहली वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज परियोजना—1000 मेगावाट टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की तृतीय यूनिट का वाणिज्यिक संचालन आज केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर एवं उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा की वर्चुअल उपस्थिति में विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्षमता प्राप्त हुई है, जो राज्य के विकास और उपभोक्ताओं को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने में सहायक होगी।

    टिहरी पीएसपी देश की प्रथम वेरिएबल स्पीड तकनीक वाली पंप स्टोरेज परियोजना है, जो ऑफ-पीक घंटों में अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके ग्रिड को 1000 मेगावाट तक की पीकिंग पावर उपलब्ध कराएगी। परियोजना की चार इकाइयों में से प्रथम दो पहले ही सफलतापूर्वक वाणिज्यिक उत्पादन कर रही हैं, जबकि तृतीय इकाई के संचालन से परियोजना की क्षमता और अधिक मजबूत हुई है। वेरिएबल स्पीड पीएसपी तकनीक की सहायता से बिजली की मांग के अनुरूप ऊर्जा का रियल टाइम स्टोरेज एवं रिलीज संभव सकेगा। इससे राष्ट्रीय ग्रिड पर लोड मैनेजमेंट और अधिक सुदृढ़ होगा और नवीकरणीय ऊर्जा को बिना किसी रूकावट के ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा।

    ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि यह अवसर पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत तेज गति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और टिहरी परियोजना इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। श्री शर्मा ने बताया कि तृतीय इकाई के उत्पादन से 25 प्रतिशत विद्युत उत्तर प्रदेश को प्राप्त होगी, जिससे राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि परियोजना की चौथी इकाई का उद्घाटन भी आगामी महीनों में संपन्न हो जाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि यदि इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार की किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हुई तो राज्य पूर्ण रूप से तत्पर रहेगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य ऊर्जा मंत्री श्रीपाद नाइक, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) नरेंद्र भूषण, सचिव विद्युत मंत्रालय भारत सरकार पंकज अग्रवाल सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

  • एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कई रणनीतिक एवं आपदा प्रबंधन हेतु मॉक ड्रिल 

    एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कई रणनीतिक एवं आपदा प्रबंधन हेतु मॉक ड्रिल 

    चमोली / एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कई रणनीतिक एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी के साथ एक व्यापक बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयारी के स्तर का आकलन करना, पारस्परिक समन्वय को सुदृढ़ करना तथा दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत बनाना था। इस मॉक ड्रिल में CISF, भारतीय सेना, ITBP, SDRF, राज्य अग्निशमन विभाग, उत्तराखंड पुलिस, IB तथा एनटीपीसी के अधिकारियों ने समन्वित रूप से भाग लिया। सभी एजेंसियों ने आपदा परिदृश्य-आधारित आपातकालीन अभियान के दौरान उत्कृष्ट  क्षमता, तत्परता और अनुशासन का परिचय दिया।

    अभ्यास के दौरान बादल फटने एवं भू धँसाव की एक काल्पनिक आपातकालीन स्थिति बैराज कॉम्प्लेक्स एवं सुरंग में तैयार की गई, जिसके माध्यम से रियल-टाइम संचार, त्वरित प्रतिक्रिया एवं संसाधन प्रबंधन, बचाव कार्य, अग्निशमन क्षमता, चिकित्सा सहायता तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल का परीक्षण किया गया। सभी प्रतिभागी एजेंसियों ने अपने-अपने दायित्वों का अत्यंत कुशलता से निर्वहन किया, जिससे सभी एजेंसियों के बीच समन्वय सुचारु बना रहा। इस अभ्यास ने एकीकृत कमान प्रणाली, संसाधन साझा करने की आवश्यकता और जमीनी स्तर पर प्रभावी संचार के महत्व को भी रेखांकित किया। इस सफल अभ्यास ने सुरक्षा, संरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति एनटीपीसी की प्रतिबद्धता को एक बार फिर सुदृढ़ किया है। इस मॉक ड्रिल से प्राप्त अनुभव भविष्य में आपातकालीन प्रतिक्रिया रणनीतियों को और बेहतर बनाने तथा एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करने में सहायक होंगे। परियोजना प्रबंधन ने सभी सहभागी एजेंसियों के सहयोग, समर्पण और सक्रिय सहभागिता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।

  • वीपीएचईपी में तैनात टीएचडीसीआईएल के कर्मचारियों ने सीएमडी आर.के. विश्‍नोई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की

    वीपीएचईपी में तैनात टीएचडीसीआईएल के कर्मचारियों ने सीएमडी आर.के. विश्‍नोई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की

    आर. के. विश्‍नोई जी का दूरदर्शी मार्गदर्शन और कार्य के प्रति समर्पण सदैव संगठन को प्रेरित करता रहेगा -अजय वर्मा, परियोजना प्रमुख

    पीपलकोटी । सोमवार को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDCIL) के विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (VPHEP) में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों ने आज टीएचडीसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD)  आर. के. विश्‍नोई के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। वीपीएचईपी परियोजना कार्यालय में दिनांक 17.11.2025 को प्रातः 11 बजे दो मिनट का मौन रखकर उन्हें स्मरण किया गया।

    इस अवसर पर अजय वर्मा, परियोजना प्रमुख (वीपीएचईपी) ने  विश्‍नोई के टीएचडीसीआईएल में अमूल्य योगदान और वीपीएचईपी की प्रगति में उनकी निर्णायक भूमिका को याद करते हुए कहा कि उनका दूरदर्शी मार्गदर्शन और कार्य के प्रति समर्पण सदैव संगठन को प्रेरित करता रहेगा। भारत के ऊर्जा क्षेत्र ने अपने एक अत्यंत प्रतिष्ठित और प्रखर नेता को खो दिया है। 15 नवम्बर 2025 (शनिवार) को 58 वर्ष की आयु में  आर.के. विश्‍नोई का स्वर्गवास हो गया। उनका अंतिम संस्कार 16 नवम्बर 2025 को ऋषिकेश में संपन्न हुआ।

    30 मार्च 1967 को जन्में  विश्‍नोई भारत के जलविद्युत क्षेत्र के एक ऐसे मार्गदर्शक व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने समृद्ध अनुभव, ज्ञान और नेतृत्व से ऊर्जा क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने 06 अगस्त 2021 को टीएचडीसीआईएल के सीएमडी का पदभार ग्रहण किया था। इससे पूर्व वे सितम्बर 2019 से निदेशक (तकनीकी) के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल में टीएचडीसीआईएल को एक सक्षम, अनुभवी और विविधीकृत ऊर्जा कंपनी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उन्होंने संचालनाधीन एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं में तकनीकी नवाचार और दक्षता बढ़ाने पर विशेष बल दिया।

    37 वर्षों से अधिक के अपने समृद्ध अनुभव में  विश्‍नोई ने देश की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे वर्ष 1989 में टीएचडीसीआईएल से इंजीनियर के रूप में जुड़े और अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली के बल पर 2013 में महाप्रबंधक, 2016 में कार्यकारी निदेशक बने। उन्होंने विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (444 मेगावाट) के कार्यकारी निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। टिहरी, कोटेश्वर एवं विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजनाओं में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है।

     विश्‍नोई BITS पिलानी से सिविल इंजीनियरिंग में ऑनर्स ग्रेजुएट थे। उन्होंने एमबीए की उपाधि प्राप्त की थी तथा मॉस्को (रूस) स्थित स्टेट यूनिवर्सिटी से ‘हाइड्रॉलिक स्ट्रक्चर्स एवं हाइड्रोपॉवर कंस्ट्रक्शन’ में प्रोफेशनल अपग्रेडेशन कार्यक्रम पूरा किया था। वे अंतर्राष्ट्रीय जलाशय आयोग (ICOLD) की ‘Technical Committee on Seismic Safety of Dams’ में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर रहे थे।

    उन्होंने स्पोकेन (यूएस), वाशिंगटन डीसी (यूएस), सेंट पीटर्सबर्ग (रूस), चेंगदू (चीन), बीजिंग (चीन), पोर्टो करास (ग्रीस), अन्ताल्या (तुर्की), ओटावा (कनाडा), सिंगापुर एवं नेपाल सहित कई देशों में महत्वपूर्ण कीनोट व्याख्यान दिए थे। श्री विश्‍नोई का निधन पूरे जलविद्युत समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व, तकनीकी उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और वीपीएचईपी परिवार दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है तथा शोक-संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।

  • एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया एनटीपीसी का 51वां स्थापना दिवस

    एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया एनटीपीसी का 51वां स्थापना दिवस

    चमोली । एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में एनटीपीसी का 51वां स्थापना दिवस बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महाप्रबंधक (परियोजना)  मनमीत बेदी ने परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक  अजय कुमार शुक्ला का बुके भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी निदेशक अजय कुमार शुक्ला द्वारा एनटीपीसी ध्वज फहराकर की गई। तत्पश्चात, एनटीपीसी के सम्मान में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने खड़े होकर एनटीपीसी गीत का सामूहिक गायन किया, जिससे पूरे परिसर में खुशी और गौरव का वातावरण बन गया।

    इस अवसर पर अपने संबोधन में  शुक्ला ने 1975 में एनटीपीसी की स्थापना से लेकर अब तक की उसकी गौरवशाली यात्रा का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी ने ऊर्जा क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और गुणवत्ता एवं दक्षता के साथ परियोजना निर्माण के लक्ष्यों को समय पर पूरा करें। कार्यक्रम के दौरान सभी कर्मचारियों ने एनटीपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह के प्रेरक संदेश का सीधा प्रसारण देखा और सुना। इसके उपरांत सुरक्षा जागरूकता सप्ताह एवं स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। समारोह में राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर्स को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से एनटीपीसी के विकास, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान के संकल्प को दोहराया।

  • टीएचडीसीआईएल में “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ पर सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन

    टीएचडीसीआईएल में “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ पर सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन

    पीपलकोटी । टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टीएचडीसीआईएल) की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (वीपीएचईपी) में भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन परियोजना परिसर में किया गया।

    इस अवसर पर परियोजना के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे परिसर में देशभक्ति की भावना गूंज उठी जब सभी कर्मचारियों ने एक स्वर में राष्ट्रीय गीत का गायन किया, जो एकता, समर्पण और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का प्रतीक था। कार्यक्रम में  अजय वर्मा, परियोजना प्रमुख (वीपीएचईपी) के साथ वरिष्ठ अधिकारी  के.पी. सिंह, महाप्रबंधक (टीबीएम);  पी.एस. रावत, महाप्रबंधक (पावर हाउस/टीबीएम);  आर.एस. राणा, महाप्रबंधक (ईएम);  संजय ममगाईं, अपर महाप्रबंधक (एचएम/मैकेनिकल);  एस.पी. डोभाल, अपर महाप्रबंधक (पावर हाउस);  ओ.पी. आर्य, अपर महाप्रबंधक (सीओ/टाउनशिप);  आर.एस. पंवार, उप महाप्रबंधक (सीओ);  बी.एस. चौधरी, उप महाप्रबंधक (क्यूसी); तथा  वी.डी. भट्ट, वरिष्ठ प्रबंधक (प्रभारी मानव संसाधन एवं प्रशासन) उपस्थित रहे। इस अवसर पर  अजय वर्मा, परियोजना प्रमुख ने “वंदे मातरम्” के ऐतिहासिक महत्व एवं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देशभक्ति की भावना को प्रबल करते हैं और राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रेरित करते हैं।

  • जीएसटी दर में कटौती: उत्तराखंड में कृषि, पर्यटन और उद्योग को मिली मजबूती

    जीएसटी दर में कटौती: उत्तराखंड में कृषि, पर्यटन और उद्योग को मिली मजबूती

    नई दिल्ली। पहाड़ी तूर दाल, लाल चावल और लखौरी मिर्च पर जीएसटी घटाकर 5% करने से पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा मिला है, जिससे 13 पहाड़ी जिलों के छोटे किसानों को मदद मिली है। 7,500 रुपए तक के होटल शुल्क पर जीएसटी घटाकर 5% करने से पर्यटन को राहत मिली है, जिससे प्रमुख स्थलों के 80,000 लोगों को लाभ हुआ है। ऐपण, रिंगाल और ऊनी उत्पादों पर जीएसटी घटाकर 5% करने से शिल्प क्षेत्र में बड़ा सुधार देखने को मिला है, जिससे महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों और पारंपरिक कारीगरों को लाभ मिला है। जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से ऑटो उद्योग को बढ़ावा मिला है, जिससे वाहन 8-10% सस्ते हो गए हैं और 50,000 नौकरियों को बढ़ावा मिला है।

    हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है, जहाँ सीढ़ीनुमा खेती का, आध्यात्मिक पर्यटन के साथ तालमेल देखने को मिलता है और प्राचीन शिल्प उभरते उद्योगों के साथ घुलमिल जाते हैं। पुरोला के लाल चावल के खेतों से लेकर नैनीताल और मसूरी के चहल-पहल भरे होमस्टे तक, राज्य की अर्थव्यवस्था प्रकृति, परंपरा और उद्यमशीलता के समृद्ध संतुलन को दर्शाती है। हाल ही में जीएसटी दरों में किए गए बदलाव से इस पहाड़ी अर्थव्यवस्था को समय रहते बढ़ावा मिला है, जिससे कृषि, पर्यटन, शिल्प और विनिर्माण क्षेत्र में करों में कमी आई है। पहाड़ी तूअर दाल, लाल चावल, हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र और आतिथ्य जैसी प्रमुख वस्तुओं और सेवाओं पर दरें कम करके, इन सुधारों का मकसद सामर्थ्य में सुधार लाना, छोटे उत्पादकों को सशक्त बनाना और राज्य के पर्यावरण-अनुकूल तथा उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना है।

    यह सुधार उत्तराखंड के सतत् विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो पहाड़ों में आजीविका को बढ़ावा देते हुए मैदानी इलाकों में उभरते औद्योगिक केंद्रों को मज़बूत करेगें।

    कृषि एवं अन्य उत्पाद पहाड़ी तूर दाल

    चमोली, अल्मोड़ा, टिहरी, नैनीताल और पिथौरागढ़ में उगाई जाने वाली पहाड़ी तूर दाल की खेती वर्षा-आधारित छोटे किसान पारंपरिक बारहनाजा मिश्रित फसल प्रणाली के तहत करते हैं। जैविक और स्थानीय रूप से प्रसिद्ध होने के कारण, यह उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों का एक अहम हिस्सा है और 13 पहाड़ी जिलों में इसकी व्यापक रूप से खेती की जाती है।

    जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से, इसकी कीमतें और अधिक किफायती होने की उम्मीद है, जिससे पहाड़ी तुअर दाल जैविक और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य बाज़ारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगी। इस बदलाव से टिकाऊ पहाड़ी खेती को प्रोत्साहन मिलने और छोटे व सीमांत किसानों की आय की संभावनाओं में सुधार होने की उम्मीद है।

    उत्तराखंड लाल चावल

    पुरोला और मोरी में उगाया जाने वाला उत्तराखंड का लाल चावल अपने पारंपरिक मूल्य और पहाड़ी कृषि-जैव विविधता में योगदान के लिए जाना जाता है। जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से, इसकी कीमतें और अधिक प्रतिस्पर्धी होने की उम्मीद है, खासकर पैकेज्ड और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य बाज़ारों में। इस बदलाव से लाल चावल की खेती से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 4,000 लोगों को मदद मिलेगी, स्थानीय रोज़गार पैदा होगा और सतत् पहाड़ी कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

    अल्मोड़ा लखोरी मिर्च

    अल्मोड़ा की जीआई-टैग वाली लखोरी मिर्च अपनी खास सुगंध और स्वाद के लिए जानी जाती है। जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से, इसकी कीमतें और अधिक प्रतिस्पर्धी होने की उम्मीद है, जिससे इसकी खेती से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 5,000 लोगों को लाभ होगा। यह कदम स्थानीय किसानों के लिए लाभकारी होगा और इस पारंपरिक पहाड़ी मसाले की बाजार में उपस्थिति को मजबूत करेगा।

    पर्यटन एवं कुटीर उद्योग, पर्यटन एवं होमस्टे

    होटल और रेस्टोरेंट सहित पर्यटन, उत्तराखंड के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 13.57% का योगदान देता है और करीब 80,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है। 7,500 रुपए तक के होटल शुल्क पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है। इस सुधार से यात्रा और अधिक किफायती होने और नैनीताल, मसूरी, औली, चोपता, मुनस्यारी, हरिद्वार और ऋषिकेश के छोटे होटलों, रेस्टोरेंट और होमस्टे को लाभ होने की उम्मीद है।

    ऐपण कला और सजावटी हस्तशिल्प

    अल्मोड़ा, बागेश्वर और नैनीताल सहित कुमाऊँ क्षेत्र में प्रचलित ऐपण एक पारंपरिक दीवार और फर्श कला है, जिसे अब बैग, दीवार पर लटकाने वाली वस्तुओं और उपहार वस्तुओं में रूपांतरित किया जा रहा है। जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से, इस सुधार से करीब 4,000 लोगों, खासकर महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को लाभ होने की उम्मीद है, साथ ही जीआई-टैग को बढ़ावा देने और स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों का विस्तार करने में भी मदद मिलेगी।

    हाथ से बुने हुए ऊनी वस्त्र

    उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में, स्थानीय रूप से हाथ से बुने हुए स्वेटर, टोपी और मोज़े पहाड़ी महिलाओं द्वारा संचालित एक अहम मौसमी कुटीर उद्योग हैं। जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से, कीमतों में 6-7% की गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे करीब 10,000 लोगों को आजीविका में सहारा मिलेगा और छोटे उत्पादकों को पर्यटन के लिहाज़ से सबसे अच्छे मौसम में बेहतर लाभ कमाने में मदद मिलेगी।

    रिंगाल (पहाड़ी बाँस) शिल्प

    रिंगाल मुख्य रूप से पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल में उत्पादित, एक स्थानीय छोटा बाँस है, जिसका इस्तेमाल टोकरियाँ, ट्रे और उपयोगी वस्तुएँ बनाने में किया जाता है। जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से, यह सुधार रिंगाल-आधारित हस्तशिल्प में लगे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों को मदद प्रदान करता है। गढ़वाल हिमालय में एक अध्ययन में पाया गया कि करीब 47.65% पहाड़ी परिवार रिंगाल या बाँस शिल्प कार्य से कुछ आय अर्जित करते हैं, जो ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।

    पारंपरिक ऊनी उत्पाद (पंखी, शॉल, स्टोल)

    चमोली, उत्तरकाशी और बागेश्वर में स्थानीय भेड़ के ऊन से हस्तनिर्मित, ये पारंपरिक ऊनी वस्तुएँ उत्तराखंड की शिल्प विरासत और ग्रामीण आजीविका का अभिन्न अंग हैं। जीएसटी में 12% से 5% की कटौती से स्थानीय मेलों और ऑनलाइन प्लेटफार्मों के ज़रिए बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने और इस कुटीर उद्योग पर निर्भर पहाड़ी महिला कारीगरों को समर्थन देने में मदद मिलेगी।

    उद्योग एवं विनिर्माण खाद्य प्रसंस्करण

    उत्तराखंड में 383 पंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं, जो मुख्य रूप से रुद्रपुर में स्थित हैं और लगभग 30,000 लोगों को रोजगार देती हैं। जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% करने से मार्जिन में सुधार, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन और फल प्रसंस्करण, हर्बल उत्पादों और जैविक खाद्य पदार्थों जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे राज्य का कृषि-औद्योगिक आधार मजबूत होगा।

    ऑटोमोबाइल क्षेत्र

    पंतनगर, रुद्रपुर, हरिद्वार और काशीपुर में फैले ऑटोमोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 लोग कार्यरत हैं। 1200 सीसी (पेट्रोल) और 1500 सीसी (डीज़ल) तक के वाहनों पर जीएसटी दर 28% से घटाकर 18% करने से कीमतों में लगभग 8-10% की गिरावट आने की उम्मीद है। इससे घरेलू मांग बढ़ेगी, निर्माताओं को मदद मिलेगी और ऑटोमोबाइल मूल्य श्रृंखला में अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

    मेडिकल डिवाइस पार्क

    उत्तराखंड राज्य अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (सिडकुल) औद्योगिक क्षेत्र में स्थित, इस मेडिकल डिवाइस पार्क में विनिर्माण गतिविधियों में करीब 4,000 लोग कार्यरत हैं। चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% करने से उत्पादन लागत कम होगी, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवा विनिर्माण व्यवस्था में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उत्तराखंड का चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र और मज़बूत होगा।

    निष्कर्ष

    जीएसटी सुधार उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में व्यापक लाभ प्रदान करते हैं, पारंपरिक फसलें उगाने वाले छोटे पहाड़ी किसानों से लेकर ऐपण और रिंगाल शिल्प को संरक्षित करने वाली महिला कारीगरों तक, और ऋषिकेश के होमस्टे मालिकों से लेकर रुद्रपुर के औद्योगिक श्रमिकों तक।

    कर के बोझ को कम करके और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करके, ये सुधार आजीविका सुरक्षा, पर्यटन, एमएसएमई विकास और हरित उद्यमिता को मज़बूत करेंगे। ये उपाय मिलकर पहाड़ और बाज़ार के बीच की खाई को पाटते हैं और उत्तराखंड के समावेशी, सतत् और आत्मनिर्भर विकास के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हैं।

  • टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत 

    टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत 

    ऋषिकेश, ।  सतत और समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, सार्वजनिक क्षेत्र की मिनी रत्न कंपनी टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने राष्ट्रव्यापी “स्वच्छता ही सेवा अभियान-2025” के तहत कई पहल शुरू की हैं।

     आर. के. विश्नोई, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, टीएचडीसीआईएल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वच्छता और सततता निगम के आदर्शों के अभिन्न स्तंभ हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि टीएचडीसीआईएल, एक एकीकृत विद्युत उत्पादन इकाई होने के अलावा, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इसका विकास समावेशी बना रहे और स्वच्छ भारत अभियान जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप हो। श्री विश्नोई ने आगे कहा कि स्वच्छता केवल एक गतिविधि नहीं है बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है जो स्वच्छ और हरित भारत के निगम के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देती है।

    निदेशक (वित्त),  सिपन कुमार गर्ग ने इससे पूर्व, 17 सितंबर 2025 को, कॉर्पोरेट कार्यालय, ऋषिकेश में स्वच्छता शपथ दिलाई थी और कर्मचारियों से ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत स्वच्छता के लिए एक घंटे की स्वैच्छिक सेवा समर्पित करने का आग्रह किया था। इसी के अंतर्गत, टीएचडीसीआईएल के सभी कर्मचारियों ने आज आयोजित श्रमदान में सक्रिय रूप से भाग लिया, साथ ही स्वच्छता ही सेवा अभियान-2025 के तहत कई अन्य पहलों में भी भाग लिया।

    राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान के एक भाग के रूप में, “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” पहल का आयोजन एनसीआर कार्यालय परिसर, कौशाम्बी में श्रीमती रश्मिता झा, मुख्य सतर्कता अधिकारी (आईआरएस), टीएचडीसीआईएल की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस पहल में एनसीआर कार्यालय के कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम ने एकता की भावना को बढ़ावा दिया और स्वच्छता को एक साझा ज़िम्मेदारी के रूप में स्थापित किया। इस अवसर पर  नीरज वर्मा, कार्यपालक निदेशक (प्रभारी, एनसीआर),  एस.के.आर्य, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी और टीएचडीसीआईएल के एनसीआर कार्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

    इसी अभियान के तह्त, ऋषिकेश में, टीएचडीसीआईएल ने 24 सितंबर 2025 को नए बस स्टैंड के आसपास स्वच्छता अभियान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान भी उपस्थित थे, जिन्होंने स्वच्छता को बढ़ावा देने और सतत विकास में योगदान देने के लिए टीएचडीसीआईएल के सक्रिय प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक(मानव संसाधन), डॉ. अमरनाथ त्रिपाठी, महाप्रबंधक (सामाजिक एवं पर्यावरण),  हर्ष कुमार जिंदल,  ए. के. कंसल, महाप्रबंधक (सर्विसेज),  आर. के. वर्मा, महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) तथा कॉर्पोरेट कार्यालय, ऋषिकेश के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। चिन्हित स्थान को टीएचडीसीआईएल द्वारा औपचारिक रूप से स्वच्छता लक्ष्य इकाई (सीटीयू) के रूप में अपनाया गया है, जिसका रखरखाव निगम द्वारा नियमित आधार पर किया जाएगा ताकि ऋषिकेश के नागरिकों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, टीएचडीसीआईएल ने स्वच्छता ही सेवा अभियान-2025 के तहत अपनी परियोजनाओं एवं कार्यालयों में कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की, जिसमें खुर्जा में स्कूली छात्रों द्वारा प्रभात फेरी, टिहरी में पोस्टर मेकिंग और बेस्ट फ्रॉम वेस्ट प्रदर्शनी, वीपीएचईपी कार्यालय में स्वच्छता अभियान और वीपीएचईपी डिस्पेंसरी द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर शामिल हैं। ये पहल सामुदायिक सहभागिता, छात्र जागरूकता एवं  सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रति टीएचडीसीआईएल की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।