Category: RAIPUR

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा को सेवानिवृत्ति पर दी शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा को सेवानिवृत्ति पर दी शुभकामनाएं

    रायपुर/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय में छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सेवानिवृत्ति के अवसर पर जुनेजा को शुभकामनाएं दीं और उनकी दीर्घकालिक सेवा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि अशोक जुनेजा ने अपनी दीर्घ सेवाअवधि के दौरान पुलिस बल को अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित गुप्ता और मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत उपस्थित थे।

  • सुषमा के स्नेहिल सृजन : माँ शारदे………

    सुषमा के स्नेहिल सृजन : माँ शारदे………

    माँ शारदे

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    शुभ-शुभ दिन आए, हृदय उमंग छाए,
    शारदे माँ शारदे माँ,  
    ज्ञान का भंडार दे।

    शब्द सार उर बसे, वाणी मधु मिश्री झरे,
    दिव्यता से परिपूर्ण,
    कृति में निखार दे।

    सुंदर सुभाव जगे, छंद लय ताल सजे,
    वीणापाणि सरस्वती,
    रचना सँवार दे।

    ‘सुषमा’ आशीष मिले, सृजन समृद्ध बने,
    कवित्त झंकार भरे,
    लेखनी में धार दे।
    ————————————————
    *…

    ✍️

     कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल रायगढ़/रायपुर छ ग

  • राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेस पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

    राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेस पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

    *शासकीय कार्य में एआई के उपयोग और संभावित लाभों के प्रति  किया गया जागरूक*

    *प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया कार्यशाला में भाग*

    रायपुर / इलैक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) के  द्वारा राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक दिवसीय कार्यशाला का आज आयोजन किया गया।  कार्यशाला में  मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, बसवा राजु, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव कमल प्रीत सिंह, तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव एस.भारतीदासन, उर्जा विभाग के विशेष सचिव अंकित आनंद, एन.आर. डी.ए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सौरभ कुमार, आई. जी.  राम गोपाल गर्ग सहित 100 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया । कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका सिंह बारिक ने कहा कि तीव्र गति से परिवर्तित टेक्नालॉजी के इस दौर में राज्य के अंतिम व्यक्ति तक सुशासन की पहुँच बनाने के लिए इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की जानकारी इस कार्यशाला में दी जायेगी । 

    श्रीमती निहारिका सिंह बारिक ने कहा कि ए.आई. तकनीक हमारी सोच से अधिक गति से परिवर्तन ला रहा है । ए.आई. से हमारी अनेक समस्याओं का त्वरित समाधान प्राप्त किया जा सकता है और शासकीय सेवा वितरण एवं नीति निर्माण में भी इसका प्रभावी उपयोग किया जा सकता है । इन्हीं कारणों से आज की इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है ।

    कार्यशाला के प्रथम सत्र के समापन पर उपस्थित समस्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को धन्यवाद प्रेषित करते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मालिक ने कहा कि एआई तकनीक का उपयोग शासन और प्रशासन में दक्षता बढाने एवं त्वरित निर्णय लेने में किया जा सकता है । इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य शासकीय कार्यों में प्रौद्योगिकी के समुचित उपयोग को प्रोत्साहित करना है । 

    नई दिल्ली से आये एआई के विशेषज्ञ डॉ. शिवा कक्कर ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि विश्व में सर्वप्रथम टेक्नॉलाजी का उपयोग टेक्सटाईल उद्योग में किया गया। वर्ष 2022 के पश्चात सम्पूर्ण विश्व में एआई तकनीक का तीव्र गति से विस्तार हुआ । डॉ. शिवा ने बताया कि पहले यह माना जाता रहा है कि तकनीक के प्रयोग से रोजगार के अवसर कम होते हैं , परंतु वास्तविकता यह है कि नवीन तकनीक के माध्यम से नवीन कौशल को ज्यादा रोजगार प्राप्त होता है । कार्यशाला में एआई तकनीक के श्रेष्ठ उपयोग की जानकारी देते हुए डॉ. शिवा कक्कर ने चैट जीपीटी, मैटा, गूगल नोट बुक एल.एम्. जैसे अन्य प्रासंगिक एवं उपयोगी टूल्स की विस्तृत जानकारी प्रदान की । 

    कार्यशाला के समापन पर धन्यवाद प्रस्तावित करते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मलिक ने बताया कि चिप्स द्वारा इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के विभिन्न विषयों पर प्रतिमाह कार्यशालाओं का आयोजन किया जायेगा । राज्य के विभाग अपने कार्यक्षेत्र से सम्बंधित विशेष विषयों का चयन कर चिप्स को सूचित करें तो उस विषय पर भी चिप्स द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा । इस अवसर पर चिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी शशांक पाण्डेय और संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो भी विशेष रूप से उपस्थित रहे ।

  • छत्तीसगढ़ में 41 हजार करोड़ रूपए से हो रहा रेल सुविधाओं का विकास

    छत्तीसगढ़ में 41 हजार करोड़ रूपए से हो रहा रेल सुविधाओं का विकास

    केन्द्रीय बजट में छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए 6925 करोड़ रूपए की सौगात

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय रेलमंत्री का आभार जताया

    रायपुर /छत्तीसगढ़ में 41 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेलवे सुविधाओं के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है, जिसमें रेल्वे ट्रैक का विस्तार, रेलवे लाईन का दोहरीकरण, रेलवे फ्लाई ओवर एवं ब्रिज आदि का निर्माण शामिल है। केंद्र सरकार ने इस साल के बजट में छत्तीसगढ़ राज्य में रेल्वे सुविधा के विकास के लिए  6925 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इससे राज्य में रेल परियोजनाओं के कामों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में रेलवे के उन्नयन और विकास के लिए 41,000 करोड़ रुपए के निवेश से नई रेल लाइनों, रेलवे फ्लाईओवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में रेलवे का शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो गया है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव को छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व रेल परियोजनाओं की सौगात मिली है। ये परियोजनाएं राज्य के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी और जनता को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क विस्तार की ऐतिहासिक पहल हो रही है। इससे यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ औद्योगिक, खनिज और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क विस्तार से न केवल यात्री परिवहन बल्कि खनिज संपदा और औद्योगिक उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी। इससे राज्य में व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

    छत्तीसगढ़ में रेलवे के दीर्घकालिक विकास के लिए रावघाट-जगदलपुर, धरमजयगढ़-लोहरदगा और खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा जैसी कई नई रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को ऐतिहासिक रेलवे बजट प्राप्त हुआ है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और यात्री सुविधाओं को नया आयाम मिलेगा। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस विकास यात्रा को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    गौरतलब है कि रावघाट रेलवे लाइन के अन्तर्गत दल्लीराजहरा-अंतागढ़ (77 किमी) सेक्शन चालू, यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है। रावघाट तक विस्तार कार्य प्रगति पर, जिससे भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति होगी और ग्रामीणों को किफायती यातायात सुविधा मिलेगी। इसी तरह के.के. रेल लाइन दोहरीकरण के अन्तर्गत 170 किमी में से 148 किमी का कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे बस्तर और दंतेवाड़ा जिले की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। आवागमन आसान और माल परिवहन सुविधाजनक हो सकेगा। 4021 करोड़ रूपए की लागत वाली डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल लाइन परियोजना की लंबाई 295 किमी है। इसके निर्माण से खनिज परिवहन, यात्री सुविधाएं और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कोरबा-अंबिकापुर नई रेल लाइन से सरगुजा क्षेत्र को नए विकास की दिशा मिलेगी। गढ़चिरौली-बीजापुर-बचेली 490 किमी लंबी परियोजना के सर्वेक्षण के लिए 12.25 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। सरडेगा-भालुमुडा डबल लाइन से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

  • गहिरा गुरु महाराज के उपदेशों से आदिवासी समाज को मिला सत्य सनातन धर्म का बोध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    गहिरा गुरु महाराज के उपदेशों से आदिवासी समाज को मिला सत्य सनातन धर्म का बोध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    *श्रीकोट आश्रम में गुरुमाता पूर्णिमा जी के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री*

    रायपुर/ यह हम सभी के लिए अत्यधिक गौरव का विषय है कि हम इस पवित्र स्थल पर एकत्रित होकर परम पूज्य संत गहिरा गुरु जी और माता पूर्णिमा जी के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता पूर्णिमा जी का जीवन पूरी तरह से त्याग, तपस्या और समाज सेवा की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत करता है। उनका विग्रह समाज के कल्याण के प्रति उनके अडिग समर्पण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज श्रीकोट आश्रम बलरामपुर में परम पूज्य संत गहिरा गुरु  की धर्मपत्नी  पूर्णिमा जी के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के विशेष अवसर पर यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संत गहिरा गुरु जी ने गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी समाज की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने दीन-हीन और असहायों की सेवा को अपना परम धर्म माना और सत्य, शांति, दया और क्षमा के सिद्धांतों को धर्म के अमूल्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने  संत गहिरा गुरु जी द्वारा आदिवासी समुदायों के उत्थान में दिए गए अतुलनीय योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएं दी और उन्हें आह्वान किया कि वे माता पूर्णिमा जी और संत गहिरा गुरु जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारते हुए समाज को एक नई दिशा देने हेतु मनोयोग से जुट जाएं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यहां आने पर मुझे माता के विग्रह के दर्शन सौभाग्य मिला, उनका सजीव और मनोरम विग्रह देखकर ऐसा लगा मानो किस क्षण वह बोल उठे।  श्री साय ने गहिरा गुरु जी का स्मरण करते हुए कहा कि गहिरा गुरु जी आदिवासी समाज के बड़े संत हुए, जिनके उपदेशों और कथनों के जरिए पूरे समाज ने सत्य सनातन धर्म का महत्त्व जाना। उन्होंने कहा कि विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास से पिछड़े हुए आदिवासी समुदाय के जीवन में गहिरा गुरु महाराज के उपदेशों से आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सुधार आया। श्री साय ने कहा कि मेरा सौभाग्य रहा कि गहिरा गुरु समाज का आशीर्वाद मुझे मिलता रहा। रायगढ़ के सांसद रहते गहिरा गुरु महाराज के जन्म ग्राम को गोद लेकर उसका विकास करने का सौभाग्य मिला। आज उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज आगे बढ़ रहा है। जगह-जगह संस्कृत महाविद्यालय खुल रहे हैं और आदिवासी समाज लगातार आगे बढ़ रहा है। समारोह में  बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती में देर रात बहती रही कविता की सुर सरिता

    राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती में देर रात बहती रही कविता की सुर सरिता

    रायपुर/ बसंत पंचमी के अवसर पर राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती में आयोजित 65वें सरस्वती जयंती में  देर रात तक कविता की सुर सरिता बहती रही। इस आयोजन में ओज, वीर, श्रृंगार सहित अन्य रसों के कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    कवि सम्मेलन में प्रदेश के ख्याति प्राप्त कवियों ने मां वाग्देवी की आराधना करते हुए बसंत का स्वागत किया। कार्यक्रम में हर पंक्ति पर वाहवाही गूंजती रही, जिससे आयोजन यादगार बन गया। बसंत की महक के साथ अब पूरे शहर में बसंत पंचमी के आयोजनों का सिलसिला शुरू हो चुका है। यह कवि सम्मेलन भी उसी श्रृंखला की एक कड़ी थी, जिसमें काव्य प्रेमियों ने हृदय खोलकर कविता की इस सुरसरिता का आनंद लिया।

    कवि सम्मेलन में कवि रामेश्वर शर्मा, कवि मन्नू लाल यदु, कवि यशवंत यश, कवयित्री श्रीमती सुषमा प्रेम पटेल, कवि मिनेश साहू, कवि रिक्की बिंदास, कवि राजू छत्तीसगढ़िया ने काव्य पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा तथा इंद्रदेव यदु, ऋषि पटवारी, उत्तम देवहरे और बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थेl

  • बसंत पंचमी पर्व पर मुख्यमंत्री मां शारदा धाम पहुंचे

    बसंत पंचमी पर्व पर मुख्यमंत्री मां शारदा धाम पहुंचे

    *सरस्वती मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की*

    रायपुर / विद्यादायनी माता सरस्वती की उपासना के पावन पर्व बसंत पंचमी पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर जिले के दुलदुला तहसील के ग्राम पंचायत जामटोली अंतर्गत ग्राम डेवाडेलंगी में मां शारदा धाम पहुंचे। उन्होंने इस धाम परिसर में स्थित मां सरस्वती मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर शारदा धाम में आए समस्त श्रद्धालुगण को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां सरस्वती की कृपा हमेशा हम सब पर बनी रहे। आपके कंठ में सदा मां सरस्वती विराजमान रहें। उन्होंने कहा कि वेदों में कहा गया है कि मानव योनि में जन्म लेना सौभाग्य की बात है। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद हमें मानव जीवन मिलता है। हमारे कर्म ऐसे रहने चाहिए कि जब हम इस दुनिया से जाएं तो लोग हमें याद रखें। इस धाम में शिक्षा के लिए अलख जगाने के साथ ही खेलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय मां शारदा के पावन धाम में आयोजित अखण्ड श्रीहरि कीर्तन राम नाम जाप के आयोजन में भी शामिल हुए, जिसमें आसपास के 48 गांवों के श्रद्धालु और 12 कीर्तन मंडलियां शामिल हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रसिद्व धार्मिक पर्यटन स्थल के निकट गिरमा नदी बहती है, जिसके एक ओर छत्तीसगढ़ है तो दूसरी ओर झारखंड है। इस धाम के बगल में बह रही पावन गिरमा नदी दो प्रदेशों की संस्कृति को समाहित कर अविरल धारा के साथ बह रही है।

  • “सोशल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: हूज़ आई पी इज़ इट एनीवे?” पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित

    “सोशल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: हूज़ आई पी इज़ इट एनीवे?” पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित

    डीपीआईआईटी -आई पी आर चेयर, एचएनएलयू के सहयोग से किया गया संगोष्ठी का आयोजन
    रायपुर/ हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू ), रायपुर में डीपीआईआईटी -आई पी आर चेयर ने सेंटर फॉर इनोवेशन एंड आई पी लॉज़ (स्कूल ऑफ लॉ एंड टेक्नोलॉजी) के सहयोग से “सोशल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: हूज़ आई पी इज़ इट एनीवे?” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम सोशल मीडिया, डिजिटल एंटरटेनमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) के क्षेत्र में बौद्धिक संपदा (आई पी) स्वामित्व, प्रवर्तन, अधिकारों और उत्तरदायित्वों की जटिलताओं पर केंद्रित था।

    संगोष्ठी की शुरुआत एचएनएलयू के कुलपति प्रो. वी.सी. विवेकानंदन के उद्घाटन भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने पिछली शताब्दी में तकनीकी विकास द्वारा संगीत और सिनेमा के परिदृश्य को बदलने की चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे सोशल मीडिया ने इस परंपरागत व्यवस्था को बदलकर व्यक्तियों को रचनात्मकता का अवसर प्रदान किया है, जिससे आई पी कानून की पारंपरिक व्याख्या को नए दृष्टिकोण की आवश्यकता हो गई है।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जी.आर. रघवेन्दर ने सोशल मीडिया पर रचनात्मकता और उसके त्वरित प्रसार की चर्चा करते हुए आई पी कानूनों की जटिल चुनौतियों पर प्रकाश डाला। सुश्री अर्पिता भट्ट, लीगल काउंसल, ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा साझा करने और गोपनीयता से जुड़े मुद्दों को विस्तार से समझाया।

    डॉ. दीपक श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार (प्र.) द्वारा स्वागत भाषण दिया गया, और डॉ. देबमिता मोंडल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
    उद्घाटन सत्र के बाद “डेटरमिनिंग आई पी ओनरशिप ऑफ सोशल मीडिया क्रिएटिव कंटेंट एंड एआई-जनरेटेड कंटेंट: लीगल, एथिकल, एंड पॉलिसी डिसीज़न्स” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में यूजर-जनरेटेड कंटेंट (यू जी सी ) और एआई द्वारा निर्मित रचनाओं से जुड़े विधिक ढांचे पर चर्चा की गई।

    जी.आर. रघवेन्दर, वरिष्ठ सलाहकार, भारत सरकारडॉ. एम. शक्तिवेल, विधि प्रोफेसर, टीएनएलयू डॉ. निधि हृदय बुच, एसोसिएट प्रोफेसर, जी एनएलयू सुश्री स्वप्ना सुंदर, एडवोकेट एवं वरिष्ठ भागीदार, पी वी एस गिरिधर एसोसिएट्स डॉ. दयानंद मूर्ति सी.पी., डीपीआईआईटी -आई पी आर चेयर, प्रोफेसर, डी एस एनएलयू पैनल में शामिल थे।

    इस सत्र का संचालन सुश्री उर्वी श्रीवास्तव और अपूर्व शर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने डिजिटल युग में आई पी प्रबंधन के कानूनी, नैतिक और नीतिगत प्रभावों पर गहन चर्चा को प्रोत्साहित किया।
    दोपहर के बाद के सत्र में फैकल्टी सदस्यों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें बौद्धिक संपदा और डिजिटल सामग्री निर्माण के समकालीन मुद्दों पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किए गए। सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुति पुरस्कार सार्थक खंडेलवाल और सुश्री अर्शिया चौहान, एनएलयू, दिल्ली के एलएल.एम. शोधार्थियों को प्रदान किया गया।
    इस पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकित सिंह, आई पी चेयर इंचार्ज द्वारा किया गया।
    यह संगोष्ठी बौद्धिक संपदा, डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और नई तकनीकों के अंतःसंबंध पर महत्वपूर्ण चर्चा को प्रोत्साहित करने में सफल रही। इसने डिजिटल युग में उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक कानूनी ढांचे की आवश्यकता को उजागर किया।

  • बीजापुर में सुरक्षाबलों ने 08 नक्सलियों को किया ढेर

    बीजापुर में सुरक्षाबलों ने 08 नक्सलियों को किया ढेर

    *मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों के साहस को सराहा*

    रायपुर / छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता मिली है। थाना गंगालूर क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में अब तक 08 नक्सलियों के शव सहित इंसास राइफल, वीएलजी लॉन्चर सहित कई हथियार बरामद किए गए हैं। सुरक्षाबलों को आशंका है कि इस मुठभेड़ में कई और नक्सली मारे गए या घायल हुए होंगे। फिलहाल, क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान जारी है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता पर सुरक्षाबलों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह सुरक्षाबल के जवानों की बड़ी सफलता है, उनके साहस को सलाम करता हूं। जवान मजबूती के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादियों से हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने और सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2025 को डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा 202 एवं केरिपु 222 वाहिनी की संयुक्त टीम को पश्चिम बस्तर डिवीजन में माओवादियों की उपस्थिति की जानकारी मिली थी। इसी आधार पर सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान के लिए निकली। इस दौरान 01 फरवरी की सुबह साढ़े आठ बजे से रुक-रुक कर कई बार मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने 08 नक्सलियों को मार गिराया और उनके ठिकानों से विस्फोटक सामग्री एवं आधुनिक हथियार बरामद किए।

    गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर अंचल के नक्सल प्रभावित ईलाकों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना कर वहां के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही नियद नेल्ला नार योजना के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास और लोगों को शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ पहुंचा रही है। नियद नेल्ला नार योजना में शामिल गांवों में सड़कों का निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत जैसी सुविधाओं का विकास और  रोजगार को बढ़ावा दे रही है, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिल रही है।

  • धरमजयगढ़ वनमंडल में वृद्ध और बीमार नर हाथी की मृत्यु

    धरमजयगढ़ वनमंडल में वृद्ध और बीमार नर हाथी की मृत्यु

    रायपुर,/ धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र स्थित बेहरामार परिसर में एक वृद्ध नर हाथी (मखना) की मृत्यु हो गई। यह हाथी लगभग 60 वर्ष का था और पिछले दो माह से गंभीर रूप से बीमार था। वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी और उपचार के बावजूद, 31 जनवरी की शाम चार बजे उसने दम तोड़ दिया।

    वन विभाग के अनुसार, हाथी के चारों पैरों, ऊपरी उदर और पुष्ट भाग में गहरे घाव थे, जिनमें संक्रमण हो गया था। इसे पहले करतला वन परिक्षेत्र (कोरबा वनमंडल) में उपचार मिला था, लेकिन 2 जनवरी को यह धरमजयगढ़ क्षेत्र में आ गया, जहां इसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी गई। स्थिति बिगड़ने पर 30 जनवरी को रमकोला हाथी राहत एवं पुनर्वास केंद्र (सूरजपुर) से दो कुमकी हाथी मंगवाए गए, लेकिन उपचार के दौरान ही हाथी की मृत्यु हो गई।

    एक फरवरी की सुबह वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा शव विच्छेदन किया गया, जिसमें गंभीर संक्रमण को मृत्यु का कारण बताया गया। नियमानुसार, 10×10 फीट के गड्ढे में हाथी को दफनाया गया। धरमजयगढ़ वनमंडल हाथी प्रभावित क्षेत्र है, जहां वन विभाग सतत ट्रैकिंग और निगरानी कर रहा है।