रायपुर,/ छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुंचे केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में शांति, सुशासन और सतत विकास को लेकर चल रही पहल पर केंद्रीय मंत्री से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को बस्तर की समृद्ध कला-संस्कृति का प्रतीक ‘बस्तर आर्ट’ स्मृति चिह्न भेंट किया।
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गिरौदपुरी धाम में 4 से 6 मार्च तक होगा गुरूदर्शन मेला
*श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार, सुरक्षा के कड़े इंतजाम*
रायपुर, / गिरौदपुरी धाम में इस वर्ष तीन दिवसीय गुरूदर्शन मेला का आयोजन 4 से 6 मार्च 2025 तक होगा। मेला आयोजन समिति की बैठक धर्मगुरु गुरुबालदास साहेब की अध्यक्षता में जिला पंचायत बलौदाबाजार के सभागार में संपन्न हुई, जिसमें मेले की तैयारियों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं व सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राजमाता गुरु प्रवीण माता जी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब, राजमहंतगण, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, कलेक्टर दीपक सोनी, एसएसपी विजय अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
धर्मगुरु गुरुबालदास साहेब ने बैठक में कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी के सम्मान में आयोजित गिरौदपुरी मेला सबकी भागीदारी से शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि किसी भी प्रकार की अप्रिय गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि गिरौदपुरी मेला श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां लाखों लोग आते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विशाल जैतखाम के निर्माण के साथ अन्य सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। वहीं, आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मेला समिति के सदस्य मेले की अवधि में व्यवस्थाओं की निगरानी करें और मेले के बाद सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराएं।
बैठक का संचालन कर रहे कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि इस वर्ष मेले के लिए कसडोल एसडीएम आर.आर. दुबे को मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है। राज्य स्तर से 23 प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। श्रद्धालुओं के पेयजल की व्यवस्था के लिए मेला परिसर में स्थित टंकियों की साफ-सफाई कराकर उसमें जलापूर्ति की जा रही है। कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग पुलिस कंट्रोल रूम से होगी। सात जगहों पर दमकल वाहन तैनात किए जाएंगे। अलग-अलग स्थानों पर पुलिस पेट्रोलिंग टीमें गश्त करेंगी। छाता पहाड़ क्षेत्र में वायरलेस सेट भी स्थापित किया गया है। मेला परिसर और आसपास मांस-मदिरा की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
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छत्तीसगढ़ में निवेश को बढ़ावा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का उद्योगपतियों को आमंत्रण
*नई औद्योगिक नीति से 1 . 23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त*
*निवेशकों को आकर्षित करने नई उद्योग नीति का दिख रहा असर*
*छत्तीसगढ़ विजन 2047 के तहत राज्य को औद्योगिक हब बनाने की पहल*
रायपुर / आप छत्तीसगढ़ आइए, निवेश करिए और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहभागी बनें। विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ को समर्पित हमारी नई उद्योग नीति लागू होने से अब तक राज्य सरकार को 1 लाख 23 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। राज्य सरकार न्यूनतम प्रशासन-अधिकतम प्रोत्साहन, उद्यमियों को निवेश अनुकूल माहौल और हर संभव सहयोग दिए जाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में आयोजित इंडस्ट्री डायलॉग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को बढ़ावा देने वाली भारत सरकार की महती योजना रैंप का प्रदेश में शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 09 लाभार्थियों को 2 करोड़ 21 लाख से अधिक, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य संस्करण योजना के तहत 3 लाभार्थियों को 55 लाख से अधिक तथा राज्य में निवेश करने वाले 16 निवेशकों को इनविटेशन टू इन्वेस्ट पत्र वितरित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प रखा है। उनके संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित करने छत्तीसगढ़ विजन 2047 तैयार कर इस दिशा में लगातार काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि ईज आफ डूइंग बिजनेस के तहत अनुमति, अनुमोदन और नवीनीकरण की प्रक्रिया हमने काफी आसान कर दी है, जिससे प्रदेश में निवेश आकर्षित हो रहे हैं। श्री साय ने बताया कि हमारी सरकार उद्योग जगत की सुविधा के लिए नये औद्योगिक पार्क स्थापित कर रही है। इनके तैयार होने के बाद यहां तेजी से निवेशक अपने उद्योग लगा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने 7 नये लघु औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की है तथा 4 बड़े औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना प्रक्रियाधीन है। बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट की स्थापना के चलते सहायक ईकाइयों के लिए बड़ी संभावनाएं बनती हैं। इन्हें स्थान देने के लिए नगरनार के पास नियानार में 118 एकड़ भूमि में नये औद्योगिक पार्क की स्थापना की उन्होंने जानकारी भी दी।
इन्वेस्टर्स डायलॉग को मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला, संचालक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सुश्री अंकिता पाण्डेय ने भी संबोधित किया। उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने स्वागत उद्बोधन दिया और विभागीय योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित उद्योग विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में उद्यमीगण उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ी गुरतुर भाषा: अंतस को सींचती है, आत्मा को एक दूसरे से जोड़ती है – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
*मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के दो दिवसीय आठवें प्रांतीय सम्मेलन का किया शुभारंभ*
रायपुर, / छत्तीसगढ़ी गुरतुर भाषा है। छत्तीसगढ़ी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, यह हमारे अंतस को सींचने और हमारी आत्मा को एक दूसरे से जोड़ने वाली भाषा है। हमें अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा पर गर्व है। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के दो दिवसीय आठवें प्रान्तीय सम्मेलन 2025 के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने सन 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर हमारे पुरखों के सपनों को साकार किया। अलग राज्य बनने के बाद अपनी महतारी की भाषा छत्तीसगढ़ी को सम्मान दिलाने की जिम्मेदारी हम सब की है। यह खुशी की बात है कि छत्तीसगढ़ी में बढ़िया किताबें लिखी जा रही है। इनमें से आज भागमानी, छत्तीसगढ़ के छत्तीस भाजी, छतनार, चल उड़ रे पुचुक चिरई, एक कहानी हाना के, गंगा बारू अउ माटी के दीया सहित छत्तीसगढ़ी भाषा की 11 पुस्तकों का विमोचन किया गया। आयोग के आठवें प्रांतीय सम्मेलन के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर वैष्णव, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र, डॉ. विनय कुमार पाठक, संचालक संस्कृति एवं राजभाषा विवेक आचार्य, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित अनेक गणमान्य साहित्यकार उपस्थित थे।

*छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा अब तक डेढ़ हजार पुस्तकों का प्रकाशन*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा यह प्रयास है कि हमारी भाषा, बोली का मान बढ़े, लोगों का अपनी भाषा से जुड़ाव रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा का समृद्ध इतिहास है, हमारी यह भाषा शिलालेख में भी दर्ज है। अनेक कवि और लेखक अपनी लेखनी से छत्तीसगढ़ी को समृद्ध कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा अपने गठन के बाद अब तक डेढ़ हजार पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। उन्होंने कहा प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है, इस नीति में बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा दी जाती है। छत्तीसगढ़ में भी बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा दी जा रही है। बच्चे अपनी मातृभाषा में कठिन से कठिन विषय भी आसानी से समझ लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ी भाषा को लोकप्रिय बनाने में सफल होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने साहित्यकारों के आग्रह पर छत्तीसगढ़ी रचनाकारों की किताबें स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजने की घोषणा की, ताकि स्कूली बच्चे इनका अध्ययन कर सकें।
*वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान*
मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवधर दास महंत, जिला जांजगीर, काशीपुरी कुन्दन, जिला गरियाबंद, सीताराम साहू ’’श्याम’’, जिला बालोद, राघवेन्द्र दुबे, जिला बिलासपुर, कुबेर सिंह साहू, जिला राजनांदगांव और डॉ. दादूलाल जोशी, जिला राजनांदगांव को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
*11 किताबों का विमोचन -*
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में 11 साहित्यकारों की पुस्तक का विमोचन किया। इनमें देवचरन धुरी की पुस्तक ‘‘देवचरन के कहमुकरी’’, डॉ. दीनदयाल साहू की पुस्तक ‘‘भागमानी’’ ( छत्तीसगढ़ी उपन्यास), मुकेश कुमार के उपन्यास ‘‘मंजरी पाती’’ (छत्तीसगढ़ी उपन्यास), कन्हैया साहू ’ अमित की पुस्तक ‘‘छत्तीसगढ़ के छत्तीस भाजी’’, राजकुमार चौधरी के काव्य संग्रह ‘‘छतनार (काव्य संग्रह)’’, टीकेश्वर सिन्हा की ’गब्दीवाला’ की पुस्तक ‘‘चल उड़ रे पुचुक चिरई’’, हरिशंकर प्रसाद देवांगन की पुस्तक ‘‘एक कहानी हाना के’’, मिनेश कुमार साहू की पुस्तक ‘‘गंगा बारू’’ डॉ. लूनेश कुमार वर्मा के काव्य संग्रह ‘‘माटी के दिया’’, रामनाथ साहू – गीतांजली (गुरूदेव रविन्द्रनाथ टेगोर के गीताजंली काव्य के छत्तीसगढ़ी अनुवाद) और दुर्गा प्रसाद पारकर की पुस्तक प्रतिज्ञा (मुंशी प्रेमचंद कृत प्रतिज्ञा के छत्तीसगढ़ी अनुवाद) शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के आठवें प्रांतीय सम्मेलन के अध्यक्ष रामेश्वर वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ी समृद्ध भाषा है। अलग-अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली छत्तीसगढ़ी का मानकीकरण करने और एकरूपता लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। संचालक संस्कृति एवं राजभाषा विवेक आचार्य ने राजभाषा आयोग के कार्यों पर प्रकाश डाला। आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर प्रदेश भर से आए गणमान्य साहित्यकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगरीय निकायों के कार्यों की समीक्षा की
*स्वच्छ सर्वेक्षण में अच्छी रैंकिंग के लिए पुख्ता तैयारी के दिए निर्देश, लंबित विद्युत देयकों का भुगतान प्राथमिकता से करने कहा*
*सभी नगरीय निकायों को 15 दिनों में सिटी डेव्हलपमेंट प्लान तैयार कर संचालनालय भेजने के निर्देश*
रायपुर./ उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ सभी नगरीय निकायों की बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की। छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित समिति कक्ष में आयोजित बैठक में सभी नगर निगमों के आयुक्त तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी वर्चुअली शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री श्री साव के साथ नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक आर. एक्का भी बैठक में मौजूद थे।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बैठक में सभी नगरीय निकायों को केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में अच्छी रैंकिंग हासिल करने के लिए पुख्ता तैयारी के निर्देश दिए।
आगामी मार्च महीने के प्रथम सप्ताह में सर्वेक्षण दलों द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण-2024, ओडीएफ एवं जीएफसी प्रमाणीकरण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। श्री साव ने बैठक में सर्वेक्षण के दौरान मूल्यांकन के लिए प्रमुख दस मापदण्डों, 54 प्रमुख संकेतको एवं 166 सह-संकेतकों की जानकारी देते हुए सभी बिन्दुओं पर निकायों को वांछित तैयारियां रखने को कहा। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस संबंध में निकायों द्वारा अब तक की गई तैयारियों और व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली।
श्री साव ने नगरीय क्षेत्रों में दर्शनीय स्वच्छता के लिए सार्वजनिक व व्यावसायिक क्षेत्रों में नियमित सफाई, ट्विन-बिन्स की उपलब्धता, शत-प्रतिशत ठोस अपशिष्ट संग्रहण एवं परिवहन, सीटीयू/ब्लैक स्पॉट/जीवीपी से मुक्त शहर, बैक-लेन/नालियों एवं जल-स्त्रोतों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आगामी समीक्षा बैठकों में सभी नगरीय निकायों के स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के परिणामों की निकायवार समीक्षा करने की बात कही। निकायों के प्रदर्शन एवं रैंकिंग के विश्लेषण के बाद इसमें गिरावट पाए जाने पर राज्य शासन स्तर द्वारा कार्यवाही की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में निकायों में लंबित विद्युत देयकों के निपटान एवं 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यवाहियां समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।गए। उन्होंने सभी नगरीय निकायों को 15 दिनों में विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप सिटी डेव्हलपमेंट प्लान तैयार कर संचालनालय भेजने को कहा। सुडा (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
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गरियाबंद के प्रगतिशील कृषक अवनीश पात्र राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
रायपुर, / गरियाबंद जिले के ग्राम चिचिंया, ब्लॉक देवभोग के प्रगतिशील कृषक अवनीश पात्र को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली द्वारा आयोजित कृषि विज्ञान मेले में नवोन्मेषी किसान के रूप में सम्मानित किया गया है। वे छत्तीसगढ़ के एकमात्र किसान हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया। श्री पात्र को यह सम्मान आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने प्रदान किया।
श्री अवनीश पात्र ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर एवं कृषि विज्ञान केंद्र, गरियाबंद के मार्गदर्शन में तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर पान की खेती शुरू की। उन्होंने शुरुआत में शेड नेट में पान उत्पादन किया, लेकिन बाद में कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से नमी और तापमान का विश्लेषण कर आम के बगीचे में पान की खेती प्रारंभ की। इस तकनीक से वे पिछले दो वर्षों से सफलतापूर्वक व्यावसायिक पान उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में वे बिलौरी, बंगला, मीठा और कपूरी किस्मों की पान खेती कर रहे हैं।

श्री पात्र ने समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाकर कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदला है। वे 3 एकड़ में अनाज वाली फसलें, 5 एकड़ में फलों की खेती, एक एकड़ में वानिकी एवं औषधीय फसलें का उत्पादन कर रहे हैं। इसके साथ ही वे 22 गायों का डेयरी फार्म और 200 मुर्गियों की क्षमता वाला पोल्ट्री फार्म भी संचालित कर रहे हैं। उनकी वार्षिक आय लगभग 15 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे उन्होंने कृषि को एक सफल और लाभदायक उद्यम बना दिया है। श्री अवनीश पात्र की मेहनत और नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता से प्रदेश के अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलेगी।
श्री पात्र को वर्ष 2023 में मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया और 2019 में कृषि रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी इस उपलब्धि पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस.एस. टुटेजा ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
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मुख्य सचिव ने सार्वजनिक यातायात को बाधित करने वालों पर कड़ी कार्यवाही करने के दिए निर्देश
*सड़क मार्गों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के साथ ही लोगों को जागरुक करने अभियान चलाने किया निर्देशित*
रायपुर, /मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में आज आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में सड़कों पर जन्मदिन मनाने, पंडाल लगाने, भंडारा आयोजित करने की प्रवृतियों को हतोत्साहित करने एवं सार्वजनिक यातायात को बाधित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
*सार्वजनिक मार्गों पर अवरोध पर कठोर कार्रवाई*
मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी व्यक्ति यदि सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करने वालों पर एंटी-एन्क्रोचमेंट एक्ट, मोटर व्हीकल एक्ट, नगर पालिका अधिनियम एवं अन्य सुसंगत अधिनियमों तथा भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत दंडात्मक कार्यवाही करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

मुख्य सचिव श्री जैन ने बैठक में कहा कि सड़कें केवल आवागमन के लिए हैं, निजी आयोजनों के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि जन्मदिन, पार्टियां तथा अन्य कोई भी निजी कार्यक्रम सार्वजनिक सड़कों पर आयोजित करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी। उन्होंने ऐसे आयोजनों में शामिल वाहनों को जब्त करने और आयोजकों पर जुर्माना लगाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जिम्मेदार व्यक्तियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
मुख्य सचिव श्री जैन ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे किसी भी अवैध आयोजन को तुरंत रोकें और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने इस तरह की अवांछित गतिविधियों को रोकने और संबंधितों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने एसओपी तैयार करने के निर्देश पुलिस विभाग के अधिकारियों को दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे नागरिकों को स्पष्ट संदेश मिले कि सार्वजनिक मार्गों पर अवैध आयोजन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग को विभिन्न प्रचार माध्यमों का उपयोग करते हुए आमजन को इस सम्बन्ध में जागरूक करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएँ दोबारा होती हैं, तो संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस सम्बन्ध में सख्त निगरानी रखें। मुख्य सचिव ने कहा कि वे विशेष सतर्कता दल (विजिलेंस टीम) गठित करें, जो ऐसी घटनाओं पर नजर रखेंगे और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, रायपुर एवं बिलासपुर के पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर एवं बिलासपुर के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, परिवहन, नगरीय प्रशासन, विधि विभाग और जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
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सौर सुजला योजना बनी किसानों के लिए वरदान : वनक्षेत्र बारनवापारा के 1222 किसानों को सोलर पम्प से मिली सिंचाई सुविधा
रायपुर / आजादी के दशकों बाद भी परंपरागत बिजली से वंचित रहे बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा क्षेत्र के किसानों के लिए छत्तीसगढ़ शासन की सौर सुजला योजना वरदान साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साथ के नेतृत्व में क्रेडा विभाग द्वारा अब तक बारनवापारा क्षेत्र में 1222 किसानों के खेतों में सौर सिंचाई पम्प स्थापित किए गए हैं, जिससे अब किसान बिना किसी चिंता के सिंचाई सुविधा का लाभ उठाकर लाभकारी खेती कर रहे हैं।
सौर सुजला योजना के तहत बारनवापारा क्षेत्र में 2 हार्स पावर के 03, तीन हार्स पावर के 615 और 5 हार्स पावर के 604 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। यह योजना उन किसानों के लिए वरदान साबित हुई है, जिनके खेतों तक बिजली नहीं पहुंची थी या जिनके पास सिंचाई के अन्य संसाधन नहीं थे।
ग्राम डेबी के किसान नित्यानंद बताते हैं कि पहले सिंचाई की सुविधा न होने के कारण उनकी सालाना आमदनी मात्र 25 से 30 हजार रुपये थी। लेकिन सोलर पम्प लगने के बाद अब वे धान के साथ सब्जियां जैसे आलू, टमाटर और बरबटी उगाकर तीन से चार गुना अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह, बंशराम चौहान, बसंत कुमार कैवर्त्य, अमरू राम, धनीराम बिंझवार और गौरी बाई दीवान सहित कई अन्य किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पहले किसान नदी-नालों से डीजल पम्प के जरिए सिंचाई करते थे, जिससे उनकी आय का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च हो जाता था। लेकिन सौर सुजला योजना के तहत मात्र 24,800 रुपये में सोलर पम्प मिलने से अब उनकी यह समस्या समाप्त हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन किसानों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर सौर पम्प उपलब्ध करा रही है। तीन हार्स पावर के पम्प के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के किसानों को मात्र 10,000 रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों को 15,000 रुपये, सामान्य वर्ग के किसानों को 21,000 रुपये का अंशदान देना होता है, जबकि 5 हार्स पावर के पम्प के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के किसानों को 15,000 रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग को 20,000 रुपये तथा सामान्य वर्ग के कृषक को 25,000 रुपये का अंशदान देना होता है।बलौदाबाजार जिले में अब तक 5198 सौर पम्प लगाए जा चुके हैं। सौर सुजला योजना का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और क्रेडा विभाग के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। सिंचाई के लिए नदी, नाले, कुएं और नलकूप प्राथमिकता से चिन्हांकित किए जाते हैं।छत्तीसगढ़ शासन की यह योजना किसानों के लिए कम लागत में सिंचाई की बेहतर और स्थायी व्यवस्था है।
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मनेंद्रगढ़ को मिली वनमण्डल की सौगात : नवीन वनमण्डल में होंगे तीन उप वनमंडल
*कोरिया वनमण्डल का हुआ पुनर्गठन, राजपत्र में प्रकाशन*
रायपुर, / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से सरगुजा संभाग के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर को एक और बड़ी सौगात मिली है। अब मनेंद्रगढ़ का अपना खुद का वनमण्डल होगा और इस संबंध में राजपत्र में प्रकाशन भी कर दिया गया है। जिला बनने के बाद लंबे समय से मनेंद्रगढ़ को वनमण्डल बनाने की मांग उठ रही थी। क्षेत्र के स्थानीय विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने लोगों की इस मांग को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने रखा था। इस प्रस्ताव पर आखिरकार मुहर लगी है और कोरिया वन मंडल का पुनर्गठन करते हुए मनेंद्रगढ़ वनमण्डल का गठन किया गया है। राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार नवीन वनमण्डल मनेंद्रगढ़ में तीन उप वनमण्डल होंगे। इसका कुल क्षेत्रफल 2361.35 वर्ग किमी होगा। उप वनमण्डल में मनेंद्रगढ़ उप वनमण्डल 878.89 वर्ग किमी, केल्हारी उप वनमण्डल 664.12 वर्ग किमी तथा जनकपुर उप वनमंडल 818.33 वर्ग किमी का होगा।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ऐतिहासिक पहल: छत्तीसगढ़ की जनता बनी महाकुंभ 2025 की साक्षी
*मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयास को 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने महाकुम्भ नगरी में स्थित छत्तीसगढ़ पैवेलियन में रूककर बनाया सार्थक*
*मनोज कुमार सिंह, सहायक संचालक ( महाकुम्भ से लौटकर)*
रायपुर, /“आप सभी को एक बात कहना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुम्भ 2025 का आयोजन हो रहा है। मैं चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु वहां जाएं। आप को वहां जाकर रूकने और खाने की चिंता नहीं करनी है। आपके लिए हमारी सरकार ने प्रयागराज के सेक्टर 6 में साढ़े चार एकड़ में छत्तीसगढ़ पैवेलियन बनाया है। वहां पर आपके रूकने और खाने की निःशुल्क व्यवस्था की है।“
यह कथन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महाकुम्भ 2025 शुरू होने के पहले अपने सार्वजनिक संबोधनों में कई जगह कही थी। मुख्यमंत्री श्री साय राज्य की जनता की आवश्यकताओं और इच्छाओं को समझते हैं, इसीलिए मुख्यमंत्री श्री साय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की और प्रयागराज स्थित कुंभ मेला क्षेत्र में साढ़े चार एकड़ में छत्तीसगढ़ पैवेलियन का निर्माण कराया और छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने खर्च पर 45 दिनों तक राज्य के श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की।
इन 45 दिनों में छत्तीसगढ़ के लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने चिंतामुक्त होकर महाकुम्भ 2025 के संगम में आस्था की डुबकी लगाई। 45 दिनों तक चलने वाला आस्था और परंपरा का विश्व का सबसे बड़ा त्यौहार अब समाप्त हो चुका है, लेकिन जाते हुए भी ये छत्तीसगढ़ की जनता को अविस्मरणीय यादें दे गया है जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ पैवेलियन का प्रवेश द्वार बस्तर की पहचान गौर मुकुट से सुशोभित था। ये दूर से ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेता था। भीतर प्रवेश करते ही छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा छत्तीसगढ़ की ममतामयी पहचान को परिलक्षित करती थी। इसके साथ ही राज्य की चार ईष्ट देवियों ( मां महामाया, मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी और मां चंद्रहासिनी) की तस्वीरों के आगे लोगों के सिर श्रद्धा से झुक जाते थे। प्रदर्शनी में राज्य सरकार की योजनाओं को जानने के लिए लोग आतुर दिखते थे। प्रदर्शनी में सिरपुर, कुतुबमीनार से ऊंचे जैतखाम, भारत का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट वाटरफाल, आधुनिक शहर नया रायपुर के बारे मे जानकर लोग स्तब्ध रह जाते थे।
*मुख्यमंत्री श्री साय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी महाकुंभ के सफल आयोजन की बधाई*
महाकुम्भ के समापन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को महाकुम्भ के सफल आयोजन और छत्तीसगढ़ को साढ़े चार एकड़ जगह उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल और समर्पित प्रयासों के चलते छत्तीसगढ़ के लगभग 50 हजार श्रद्धालु प्रयागराज महाकुंभ 2025 का हिस्सा बने। इन श्रद्धालुओं की भागीदारी ने राज्य की तीन करोड़ जनता को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इस महान आध्यात्मिक आयोजन से जोड़ा।
