Category: NEW DELHI

  • IRCTC ने भारत के पूर्वी क्षेत्र के लिए नया रेल-आधारित पर्यटन सर्किट “डिवाइन ईस्ट टेम्पल टूर” लॉन्च किया

    IRCTC ने भारत के पूर्वी क्षेत्र के लिए नया रेल-आधारित पर्यटन सर्किट “डिवाइन ईस्ट टेम्पल टूर” लॉन्च किया

    · वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम (ज्योतिर्लिंग) को शामिल करते हुए 10 दिनों की यात्रा योजना।

    · भारत गौरव डीलक्स पर्यटक रेलगाड़ी 09 मार्च, 2026 को दिल्ली सफदरजंग रेलवे स्टेशन से प्रस्थान करेगी।

    · प्रमुख विरासत स्थलों, मंदिरों और समुद्र तटों के साथ गंगासागर में पवित्र स्नान इस यात्रा के विशेष आकर्षण हैं।

    · यह रेलगाड़ी वातानुकूलित प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी की तीन श्रेणियों में 150 पर्यटकों को समायोजित कर सकती है तथा इसमें 02 रेस्टोरेंट कार भी हैं, जो इस ट्रेन की एक विशेष सुविधा है।

    नई दिल्ली। भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी), जो भारत सरकार के रेल मंत्रालय के तहत एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, ने भारत गौरव डीलक्स पर्यटक रेलगाड़ी के माध्यम से “दिव्य पूर्व मंदिर यात्रा” नामक एक नया पर्यटन परिपथ शुरू किया है। यह 10 दिनों की रेल आधारित यात्रा श्रद्धालुओं और यात्रियों को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के कई प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के साथ-साथ सांस्कृतिक रूप से समृद्ध विरासत स्थलों के दर्शन का एक अनोखा अवसर देती है।

    यात्रा की शुरुआत दिल्ली सफदरजंग से होगी और इसमें वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम की यात्रा कराई जाएगी, जिसके बाद रेलगाड़ी दिल्ली वापस लौटेगी। इस यात्रा के दौरान वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर (ज्योतिर्लिंग) के दर्शन और गंगा आरती कराई जाएगी। इसके बाद भारत की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता का भ्रमण होगा, जिसमें विक्टोरिया मेमोरियल, शहर के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल तथा कालीघाट (शक्ति पीठ) और दक्षिणेश्वर काली मंदिर जैसे प्रसिद्ध मंदिर शामिल हैं। गंगासागर के पवित्र तटों की एक दिवसीय यात्रा, जिसमें सागर संगम में पवित्र स्नान और कपिल मुनि मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे, इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है। इसके बाद यात्रा पुरी जाएगी, जहाँ भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। साथ ही ओडिशा परिपथ के अंतर्गत भुवनेश्वर, धौली शांति स्तूप, उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएँ, कोणार्क सूर्य मंदिर और अन्य प्रमुख स्थल दिखाए जाएंगे। यात्रा का अंतिम आध्यात्मिक पड़ाव बैद्यनाथ धाम (देवघर) होगा, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसके पश्चात 18 मार्च 2026 को रेलगाड़ी दिल्ली सफदरजंग वापस पहुँचेगी और इस यादगार तथा आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा का समापन होगा।

    आईआरसीटीसी द्वारा प्रस्तुत यह सर्वसमावेशी यात्रा धार्मिक और अवकाश पर्यटन का एक बेहतरीन मेल है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को सहज, सुरक्षित और समृद्ध यात्रा अनुभव प्रदान करना है।

    भारत गौरव डीलक्स पर्यटक रेलगाड़ी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें वातानुकूलित तृतीय, द्वितीय एवं प्रथम श्रेणी के सुव्यवस्थित केबिन, रेलगाड़ी के भीतर स्वच्छ शाकाहारी भोजन परोसने वाले भोजनयान, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था तथा यात्रियों की सुविधा के लिए समर्पित टूर प्रबंधक उपलब्ध हैं।

    आईआरसीटीसी ने इस विशेष रेल यात्रा की शुरुआत 1 एसी श्रेणी के लिए ₹1,06,940/- प्रति व्यक्ति, 2 एसी के लिए ₹98,925/- तथा 3 एसी श्रेणी के लिए ₹79,285/- की कीमत पर की है। इस पैकेज मूल्य में वातानुकूलित श्रेणियों में रेल यात्रा, वातानुकूलित होटलों में ठहरने की व्यवस्था, सभी भोजन (केवल शाकाहारी), वातानुकूलित वाहनों द्वारा सभी स्थानांतरण एवं दर्शनीय स्थल भ्रमण, यात्रा बीमा तथा आईआरसीटीसी टूर प्रबंधकों की सेवाएँ आदि शामिल हैं। दिव्य पूर्व मंदिर यात्रा के लिए बुकिंग आईआरसीटीसी के पर्यटन पोर्टल तथा देशभर में स्थित अधिकृत आईआरसीटीसी पर्यटन कार्यालयों के माध्यम से की जा सकती है। अधिक जानकारी, यात्रा कार्यक्रम और बुकिंग से संबंधित विवरण के लिए यात्री www.irctctourism.com/bharatgaurav पर जा सकते हैं या मोबाइल नंबर 8287930299 (प्रफुल्ला), 8287930484 (सुभाश्री), 8287930032 (अभिषेक), 8595931047 (मोनिका) तथा 8882826357 (प्रणीत) पर संपर्क कर सकते हैं।

  • परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के द्वितीय चरण का सफल आयोजन

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के द्वितीय चरण का सफल आयोजन

    छत्तीसगढ़ से लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं पालकों की उत्साहजनक सहभागिता

    रायपुर,/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के प्रथम चरण का सीधा प्रसारण दिनांक 6 फरवरी 2026 को देशभर के विद्यालयों में किया गया। इस चरण में छत्तीसगढ़ राज्य से अत्यंत उत्साहजनक सहभागिता देखने को मिली। राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 36,903 विद्यालयों में इस कार्यक्रम का प्रसारण हुआ, जिसे 26.65 लाख विद्यार्थियों, 1.54 लाख शिक्षकों एवं 1.68 लाख पालकों सहित कुल 29.87 लाख दर्शकों ने देखा।

    इसके अतिरिक्त, समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु 478 सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम देखने की व्यवस्था की गई, जहाँ लगभग 42 हजार नागरिकों ने कार्यक्रम का लाभ उठाया। प्रथम चरण में महासमुंद जिले की कक्षा 12वीं की छात्रा कु. सृष्टि साहू को  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सीधे प्रश्न पूछने का अवसर प्राप्त हुआ, जो राज्य के लिए गर्व का विषय रहा।

     *द्वितीय चरण में भी छत्तीसगढ़ की प्रभावशाली भागीदारी* 

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का द्वितीय चरण दिनांक 9 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें भी छत्तीसगढ़ राज्य की व्यापक एवं सक्रिय सहभागिता रही। इस चरण में राज्य के 36,905 विद्यालयों से कार्यक्रम प्रसारित किया गया, जिसे 26.65 लाख विद्यार्थी, 1.54 लाख शिक्षक एवं 1.68 लाख पालकों सहित कुल 29.89 लाख दर्शकों ने देखा। साथ ही, पूर्ववत 478 सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक रूप से कार्यक्रम देखने की व्यवस्था की गई, जिससे 42 हजार लोगों ने लाभ प्राप्त किया।

     *प्रधानमंत्री से प्रश्न पूछने का अवसर* 

    द्वितीय चरण में रायपुर जिले के माना कैम्प स्थित पीएम श्री नवोदय विद्यालय के कक्षा 11वीं के विद्यार्थी श्री तेजस चन्द्राकर को माननीय प्रधानमंत्री जी से प्रश्न पूछने का अवसर प्राप्त हुआ। श्री तेजस ने परीक्षा के बाद भ्रमण योग्य स्थलों के संबंध में जानकारी चाही। प्रधानमंत्री जी ने श्री तेजस को उसके निवास तहसील से प्रारंभ करते हुए, तहसील, जिला एवं राज्य स्तर पर देखने योग्य स्थलों की सूची तैयार करने, उनके भ्रमण की योजना बनाने तथा इन यात्राओं को सीखने के अवसर के रूप में अपनाने का प्रेरणादायक सुझाव दिया।

  • मेरठ रेलवे स्टेशन पर दिखेगी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की झलक – अश्विनी वैष्णव

    मेरठ रेलवे स्टेशन पर दिखेगी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की झलक – अश्विनी वैष्णव

    *केंद्रीय रेल मंत्री ने राज्यसभा में मेरठ के ऐतिहासिक महत्व और स्टेशन पुनर्विकास पर दी जानकारी*

    *सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी के सुझावों और नए डिजाइन के आधार पर चल रहा है कार्य*

    नई दिल्ली : केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में मेरठ की ऐतिहासिक विरासत और वहां के रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मेरठ का इतिहास हमारे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) से गहराई से जुड़ा हुआ है और सरकार की यह प्राथमिकता है कि रेलवे स्टेशन का स्वरूप इस गौरवशाली इतिहास को प्रतिबिंबित करे। इतिहास और आधुनिकता का संगम सदन को संबोधित करते हुए रेल मंत्री ने बताया कि मेरठ का इतिहास जितना भव्य है, उसी के अनुरूप स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मेरठ इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। जिस तरह का मेरठ का गौरवशाली इतिहास है, उसके हिसाब से ही वहां के स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है।”

    सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी की पहल की सराहना

    अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी के प्रयासों की विशेष प्रशंसा की। रेल मंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं सांसद महोदय से व्यक्तिगत अनुरोध किया था कि वे मेरठ के वरिष्ठ नागरिकों और प्रबुद्ध जनों के साथ चर्चा करें, ताकि स्टेशन के डिजाइन में स्वतंत्रता आंदोलन की वास्तविक झलक को समाहित किया जा सके।

    मंत्री जी ने कहा, “मैं सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने इस दिशा में बहुत ही सकारात्मक पहल की। उन्होंने स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों के साथ बैठकर मंथन किया और एक नया डिजाइन प्रस्तुत किया है। वर्तमान में स्टेशन पर काम उसी नए डिजाइन के आधार पर तेजी से चल रहा है।”

    *सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण*

     इस नई पहल के तहत मेरठ रेलवे स्टेशन न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, बल्कि यह आने वाले यात्रियों और युवा पीढ़ी के लिए 1857 की क्रांति और मेरठ के स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों को जीवंत करने वाला एक माध्यम भी बनेगा।

  • रेलवे बोर्ड के सदस्य हरि शंकर वर्मा ने उत्तर रेलवे के प्रदर्शन की समीक्षा की

    रेलवे बोर्ड के सदस्य हरि शंकर वर्मा ने उत्तर रेलवे के प्रदर्शन की समीक्षा की

    ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया

    नई दिल्ली। रेलवे बोर्ड के सदस्य (परिचालन एवं व्यवसाय विकास) हरि शंकर वर्मा ने आज बड़ौदा हाउस स्थित उत्तर रेलवे मुख्यालय का दौरा किया और जोन के परिचालन प्रदर्शन और रणनीतिक दिशा की समीक्षा की।

    उनके आगमन पर, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा, प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक (PCOM) डॉ. मोनिका अग्निहोत्री और प्रमुख मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक (PCCM) प्रवीण पांडे ने उनका औपचारिक स्वागत किया।

    विभागाध्यक्षों (PHODs) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान हरि शंकर वर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि रेल संचालन के दौरान संरक्षा (Safety) और सुरक्षा (Security) सर्वोपरि होनी चाहिए। कार्य संस्कृति के संबंध में कड़े निर्देश देते हुए, उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को “औपनिवेशिक मानसिकता” (Colonial Mindset) त्यागने और सेवा वितरण में पूर्णतः ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कार्यशैली में नवीन एवं अभिनव दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया।

    श्री वर्मा ने कहा, “भारतीय रेलवे 2047 तक प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के लिए विकास का इंजन बनेगी।” उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक रेलवे अधिकारी का प्रदर्शन इसी व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य से प्रेरित होना चाहिए।

    क्षेत्रीय परिचालन (Field Operations) पर विशेष ध्यान

    श्री वर्मा ने परिचालन और वाणिज्यिक विभाग के अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की, जिसमें मंडल स्तर के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

    सत्र के दौरान, उन्होंने युवा अधिकारियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रयास करने हेतु प्रेरित किया। व्यावहारिक नेतृत्व शैली का परिचय देते हुए, उन्होंने फील्ड में अधिकारियों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों को धैर्यपूर्वक सुना और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

  • सेल  ने दर्ज किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ जनवरी प्रदर्शन और वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि का उच्चतम रिकॉर्ड

    सेल  ने दर्ज किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ जनवरी प्रदर्शन और वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि का उच्चतम रिकॉर्ड

    नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026: भारत की अग्रणी स्टील उत्पादक और ‘महारत्न’ सार्वजनिक उपक्रम, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से जनवरी की अवधि के दौरान कुल बिक्री में 16% की वृद्धि दर्ज की है। इस अवधि में 16.6 मिलियन टन की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि (CPLY) में यह आंकड़ा 14.3 मिलियन टन था। यह कंपनी द्वारा दर्ज की गई अब तक की सबसे अधिक संचयी (cumulative) बिक्री है।

    सेल ने जनवरी 2026 में भी अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ जनवरी बिक्री दर्ज की, जो 1.84 मिलियन टन रही। यह पिछले वर्ष के इसी महीने के 1.68 मिलियन टन के मुकाबले 10% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। इस दौरान इन्वेंट्री में 0.25 मिलियन टन की कमी और उधार (borrowings) में पर्याप्त कटौती देखने को मिली।

    इस अवधियों के दौरान, कई मानकों रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन देखा गया, जिनमें बिक्री, डिस्पैच, कैश कलेक्शन और ग्राहकों तक सीधी डिलीवरी (door-to-door delivery) शामिल है। इस दौरान कंपनी ने निम्नलिखित उपलब्धियां हासिल कीं:संयंत्रों (plants) से रिकॉर्ड प्रेषण (dispatches)।डोर-डिलीवरी वॉल्यूम में विस्तार और वेयरहाउस बिक्री में वृद्धि।लॉजिस्टिक्स दक्षता और ग्राहकों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए बाजार में पैठ मजबूत करना।

    मार्केटिंग वर्टिकल की पहलों से प्रेरित, ये उपलब्धियां, ऑपरेशन्स उत्कृष्टता के साथ ग्राहक-केंद्रित रणनीतियों को जोड़ने की सेल की क्षमता को उजागर करती हैं। सेल पिछले रिकॉर्ड्स को लगातार पीछे छोड़ते हुए और व्यावसायिक लक्ष्यों को हासिल  करते हुए, भारत की विकास गाथा में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।

  • एक मज़बूत निर्यात-सक्षम,उद्योग-अनुकूल और एमएसएमई -केंद्रित बजट के लिए सरकार को धन्यवाद: फियो अध्यक्ष

    एक मज़बूत निर्यात-सक्षम,उद्योग-अनुकूल और एमएसएमई -केंद्रित बजट के लिए सरकार को धन्यवाद: फियो अध्यक्ष

    नई दिल्ली,: फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) केंद्रीय बजट 2026–27 का गर्मजोशी से स्वागत करता है और सरकार को एक साहसिक, दूरदर्शी और सुधार-उन्मुख बजट पेश करने के लिए बधाई देता है जो भारत की विकास यात्रा को महत्वपूर्ण रूप से मज़बूत करता है, साथ ही भारतीय निर्यात, विनिर्माण और एमएसएमई की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को निर्णायक रूप से बढ़ाता है।

    बजट पर टिप्पणी करते हुए, फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने माननीय वित्त मंत्री और सरकार के प्रति निरंतर आर्थिक विकास, राजकोषीय विवेक, बुनियादी ढांचे के विस्तार और विश्वास-आधारित शासन के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता के लिए अपनी सराहना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये उपाय व्यापार और निवेश इकोसिस्टम को और अधिक ऊर्जा देंगे और निर्यातकों को एक स्थिर और अनुमानित नीतिगत माहौल प्रदान करेंगे।

    श्री रल्हन ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026–27 स्पष्ट रूप से भारत की आर्थिक क्षमता को ठोस प्रदर्शन में बदलने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। विनिर्माण, एमएसएमई, बुनियादी ढांचे और सेवाओं पर मज़बूत ज़ोर—सार्थक कर और सीमा शुल्क सुधारों द्वारा समर्थित—भारतीय निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ अधिक गहराई से और प्रतिस्पर्धी रूप से एकीकृत करने में सक्षम बनाएगा।”

    फियो विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, कपड़ा, रसायन, विमान घटक, निर्माण उपकरण और दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट जैसे उच्च-मूल्य और रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को मज़बूत करने के लिए सरकार के केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना करता है। 200 पुराने औद्योगिक समूहों के प्रस्तावित पुनरुद्धार, कई क्षेत्र-विशिष्ट पहलों के साथ, पैमाने, उत्पादकता, प्रौद्योगिकी अपनाने और निर्यात की तैयारी में सुधार की उम्मीद है। श्री रल्हन ने कहा कि उद्योग भारत के निर्यात पदचिह्न का विस्तार करने के लिए इन पहलों का सक्रिय रूप से लाभ उठाने के लिए तैयार है।

    व्यापार सुविधा उपायों का स्वागत करते हुए, श्री रल्हन ने कहा कि प्रमुख इनपुट पर शुल्क छूट, निर्यात समय-सीमा का विस्तार, विश्वसनीय निर्यातकों की पहचान और कारखाने परिसर से निर्यात कार्गो की निकासी से लेनदेन लागत में काफी कमी आएगी, व्यापार करने में आसानी में सुधार होगा और आपूर्ति-श्रृंखला दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “ये सुधार सीधे तौर पर निर्यातक के आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करेंगे।”

    फियो अध्यक्ष ने एमएसएमई  के लिए सरकार के मज़बूत और सोचे-समझे सपोर्ट की भी तारीफ़ की, जिसमें तीन तरह के तरीके अपनाए गए हैं: 10,000 करोड़  रुपये का एसएमई  ग्रोथ फंड, आत्मनिर्भर भारत फंड को बढ़ाना,  टीआरईडी पर सीपीसीई  की अनिवार्य ऑनबोर्डिंग, और इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी सपोर्ट। श्री रल्हन ने कहा, “एमएसएमई भारत के निर्यात इकोसिस्टम की रीढ़ हैं। बजट में तरलता सहायता, इक्विटी समावेश और प्रोफेशनल कैपेसिटी-बिल्डिंग पर फोकस एमएसएमई को आगे बढ़ने, इनोवेशन करने और ग्लोबल चैंपियन बनने के लिए सशक्त करेगा।”

    फियो ने सर्विस सेक्टर पर नए सिरे से ज़ोर देने का भी स्वागत किया—जिसमें आईटी, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म, शिक्षा, डिज़ाइन, खेल और केयर इकोनॉमी शामिल हैं—जिसे सेफ हार्बर प्रावधानों और ज़्यादा टैक्स निश्चितता से सपोर्ट मिला है। ये उपाय, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, जलमार्गों और ऊर्जा सुरक्षा पर लगातार सार्वजनिक पूंजीगत खर्च के साथ मिलकर, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेंगे और एक वैश्विक सेवाओं और विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और मज़बूत करेंगे।

    बजट की दिशा में विश्वास व्यक्त करते हुए, श्री रल्हन ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत के विज़न को प्राप्त करने के लिए एक मज़बूत नींव रखता है, जो विकास, समावेशन और राजकोषीय अनुशासन को संतुलित करता है। उन्होंने कहा “बजट वैश्विक बाजारों को एक मज़बूत और सकारात्मक संकेत भेजता है और एक विश्वसनीय, लचीले और आकर्षक व्यापार और निवेश गंतव्य के रूप में भारत की विश्वसनीयता को मज़बूत करता है। भारतीय उद्योग और निर्यातक इन पहलों के लाभों को अधिकतम करने और निर्यात-आधारित विकास में तेज़ी लाने के लिए सरकार के साथ साझेदारी करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

  • फियो ने केंद्रीय बजट 2026–27 की सराहना की

    फियो ने केंद्रीय बजट 2026–27 की सराहना की

    एक मज़बूत निर्यात-सक्षम, उद्योग-अनुकूल और एमएसएमई -केंद्रित बजट के लिए सरकार को धन्यवाद – फियो अध्यक्ष, एस सी रल्हन

    नई दिल्ली : फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) केंद्रीय बजट 2026–27 का गर्मजोशी से स्वागत करता है और सरकार को एक साहसिक, दूरदर्शी और सुधार-उन्मुख बजट पेश करने के लिए बधाई देता है जो भारत की विकास यात्रा को महत्वपूर्ण रूप से मज़बूत करता है, साथ ही भारतीय निर्यात, विनिर्माण और एमएसएमई की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को निर्णायक रूप से बढ़ाता है। बजट पर टिप्पणी करते हुए, फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने माननीय वित्त मंत्री और सरकार के प्रति निरंतर आर्थिक विकास, राजकोषीय विवेक, बुनियादी ढांचे के विस्तार और विश्वास-आधारित शासन के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता के लिए अपनी सराहना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये उपाय व्यापार और निवेश इकोसिस्टम को और अधिक ऊर्जा देंगे और निर्यातकों को एक स्थिर और अनुमानित नीतिगत माहौल प्रदान करेंगे।

    श्री रल्हन ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026–27 स्पष्ट रूप से भारत की आर्थिक क्षमता को ठोस प्रदर्शन में बदलने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। विनिर्माण, एमएसएमई, बुनियादी ढांचे और सेवाओं पर मज़बूत ज़ोर—सार्थक कर और सीमा शुल्क सुधारों द्वारा समर्थित—भारतीय निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ अधिक गहराई से और प्रतिस्पर्धी रूप से एकीकृत करने में सक्षम बनाएगा।”

    फियो विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, कपड़ा, रसायन, विमान घटक, निर्माण उपकरण और दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट जैसे उच्च-मूल्य और रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को मज़बूत करने के लिए सरकार के केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना करता है। 200 पुराने औद्योगिक समूहों के प्रस्तावित पुनरुद्धार, कई क्षेत्र-विशिष्ट पहलों के साथ, पैमाने, उत्पादकता, प्रौद्योगिकी अपनाने और निर्यात की तैयारी में सुधार की उम्मीद है। श्री रल्हन ने कहा कि उद्योग भारत के निर्यात पदचिह्न का विस्तार करने के लिए इन पहलों का सक्रिय रूप से लाभ उठाने के लिए तैयार है।

    व्यापार सुविधा उपायों का स्वागत करते हुए, श्री रल्हन ने कहा कि प्रमुख इनपुट पर शुल्क छूट, निर्यात समय-सीमा का विस्तार, विश्वसनीय निर्यातकों की पहचान और कारखाने परिसर से निर्यात कार्गो की निकासी से लेनदेन लागत में काफी कमी आएगी, व्यापार करने में आसानी में सुधार होगा और आपूर्ति-श्रृंखला दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “ये सुधार सीधे तौर पर निर्यातक के आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करेंगे।”

    फियो अध्यक्ष ने एमएसएमई  के लिए सरकार के मज़बूत और सोचे-समझे सपोर्ट की भी तारीफ़ की, जिसमें तीन तरह के तरीके अपनाए गए हैं: 10,000 करोड़  रुपये का एसएमई  ग्रोथ फंड, आत्मनिर्भर भारत फंड को बढ़ाना, टीआरईडी पर सीपीसीई  की अनिवार्य ऑनबोर्डिंग, और इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी सपोर्ट। श्री रल्हन ने कहा, “एमएसएमई भारत के निर्यात इकोसिस्टम की रीढ़ हैं। बजट में तरलता सहायता, इक्विटी समावेश और प्रोफेशनल कैपेसिटी-बिल्डिंग पर फोकस एमएसएमई को आगे बढ़ने, इनोवेशन करने और ग्लोबल चैंपियन बनने के लिए सशक्त करेगा।”

    फियो ने सर्विस सेक्टर पर नए सिरे से ज़ोर देने का भी स्वागत किया—जिसमें आईटी, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म, शिक्षा, डिज़ाइन, खेल और केयर इकोनॉमी शामिल हैं—जिसे सेफ हार्बर प्रावधानों और ज़्यादा टैक्स निश्चितता से सपोर्ट मिला है। ये उपाय, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, जलमार्गों और ऊर्जा सुरक्षा पर लगातार सार्वजनिक पूंजीगत खर्च के साथ मिलकर, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेंगे और एक वैश्विक सेवाओं और विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और मज़बूत करेंगे।

    बजट की दिशा में विश्वास व्यक्त करते हुए, श्री रल्हन ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत के विज़न को प्राप्त करने के लिए एक मज़बूत नींव रखता है, जो विकास, समावेशन और राजकोषीय अनुशासन को संतुलित करता है। उन्होंने कहा “बजट वैश्विक बाजारों को एक मज़बूत और सकारात्मक संकेत भेजता है और एक विश्वसनीय, लचीले और आकर्षक व्यापार और निवेश गंतव्य के रूप में भारत की विश्वसनीयता को मज़बूत करता है। भारतीय उद्योग और निर्यातक इन पहलों के लाभों को अधिकतम करने और निर्यात-आधारित विकास में तेज़ी लाने के लिए सरकार के साथ साझेदारी करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

  • कोल इंडिया के सीएसआर सहयोग से आईआईटी बॉम्बे की पायलट परियोजना ‘जीवोदया’ को रेशम उत्पादन में बड़ी सफलता

    कोल इंडिया के सीएसआर सहयोग से आईआईटी बॉम्बे की पायलट परियोजना ‘जीवोदया’ को रेशम उत्पादन में बड़ी सफलता

    तीन वर्षों के सतत अनुसंधान एवं विकास के बाद विकसित हुई अभिनव, अहिंसक रेशम निर्माण तकनीक

    दिल्ली। कोल इंडिया के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड के सहयोग से संचालित आईआईटी बॉम्बे की अनूठी पायलट परियोजना ‘जीवोदया’ ने तीन वर्षों के निरंतर अनुसंधान एवं विकास के पश्चात नैतिक रेशम उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

    इस परियोजना के अंतर्गत आईआईटी बॉम्बे के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प केंद्र (सी-तारा) ने रेशम उत्पादन की एक ऐसी नवीन तकनीक सफलतापूर्वक विकसित की है, जिसमें रेशम के कीड़ों की हत्या की आवश्यकता नहीं होती। पारंपरिक विधियों से अलग, इस तकनीक में रेशम के कीड़े रेशमी धागा उत्पन्न करने के बाद पतंगे (moth) में परिवर्तित होकर अपना प्राकृतिक जीवन चक्र पूर्ण कर पाते हैं। इसीलिए, मानवीय और नैतिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते इस रेशम को ‘जीवोदया सिल्क’ नाम दिया गया है।

    परंपरागत रूप से, शहतूत की पत्तियों पर पलने वाले रेशम के कीड़े अपने चारों ओर कोकून (cocoon) बनाते हैं। रेशम निकालने के लिए इन कोकूनों को उबाल दिया जाता है, जिससे लाखों रेशम कीड़ों की मृत्यु हो जाती है। ‘जीवोदया’ परियोजना ने इस लंबे समय से चली आ रही प्रथा को चुनौती देते हुए करुणा आधारित वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को पुनर्परिभाषित किया है।

    अथक प्रयोगों के बाद, ‘सी-तारा’ ने एक दुर्लभ वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत रेशम के कीड़ों को कोकून बनाए बिना समतल सतह पर रेशमी धागा बुनने के लिए प्रशिक्षित किया गया। इसके परिणामस्वरूप, अब रेशम के कीड़ों को कोकून बनाने की आवश्यकता नहीं रहती और वे अंततः पतंगे के रूप में मुक्त होकर उड़ान भर पाते हैं। यह उपलब्धि प्राचीन भारतीय दर्शन की उस भावना को साकार करती है –

    मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्” — कोई भी दुःखी न हो।

    कोल इंडिया ने इस असाधारण प्रयोग को अवधारणा से सफलता तक पहुँचाने में निरंतर सीएसआर सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नैतिक और पर्यावरणीय महत्व के साथ-साथ, यह तकनीक रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए आय का एक नया और सतत स्रोत भी प्रदान करती है, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।

    ‘जीवोदया’ पायलट परियोजना की सफलता के साथ, यह पहल व्यापक स्तर पर अपनाए जाने तथा सतत और नैतिक रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएँ रखती है।

  • उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक ने तुगलकाबाद जंक्शन केबिन पलवल सेक्शन पर कवच प्रणाली के इंस्टॉलेशन का निरीक्षण किया

    उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक ने तुगलकाबाद जंक्शन केबिन पलवल सेक्शन पर कवच प्रणाली के इंस्टॉलेशन का निरीक्षण किया

    तुगलकाबाद जंक्शन केबिन (दिल्ली क्षेत्र) – पलवल सेक्शन में कवच सिस्टम को सफलतापूर्वक चालू किया गया 

    निरीक्षण के दौरान कवच सिस्टम की जांच के लिए पाँच टेस्ट किए गए

     नई दिल्ली । उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक  अशोक कुमार वर्मा ने आज तुगलकाबाद जंक्शन केबिन (दिल्ली क्षेत्र) और पलवल सेक्शन पर स्वदेशी कवच प्रणाली (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के इंस्टॉलेशन का निरीक्षण किया। चार लाइन वाले इस (35 किमी) सेक्शन में 152 मेन लाइन ट्रैक किलोमीटर हैं। उत्तर रेलवे ने इस कॉरिडोर के पूरे हिस्से में कवच प्रणाली लगाई है, जिसके अंतर्गत प्रमुख स्टेशन यार्ड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम वाली दो मेन लाइनें और एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग वाली दो लाइनें शामिल हैं ।

    निरीक्षण के दौरान कवच प्रणाली से जुड़े पांच टेस्ट किए गए:

    सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) टेस्ट: लोको पायलट ने कवच को टेस्ट करने के लिए रेड सिग्नल पार करने की कोशिश की, कवच सिस्टम ने सिग्नल से पहले ही लोको को रोक दिया।

    *हेड ऑन कोलिजन टेस्ट: दो लोको को एक ही लाइन पर रखा गया, कवच प्रणाली ने तय दूरी की लिमिट से काफी पहले ही लोको को रोक दिया।

    *रियर एंड कोलिजन टेस्ट: इस टेस्ट में लोको के पीछे की ओर फिसलने की परस्थिति उत्पन्न की गई, कवच प्रणाली ने पीछे से टक्कर से बचने के लिए लोको को पीछे जाने से रोक दिया।

    *लूप लाइन ओवरस्पीड टेस्ट: ट्रायल के दौरान, लोको 120 kmph की स्पीड से लूप लाइन में गया, कवच प्रणाली ने स्पीड को 20 kmph तक सीमित कर दिया।

    *लेवल क्रॉसिंग प्रोटेक्शन टेस्ट: इसमें फाटक खुला होने की परस्थिति उत्पन्न की गई जिसमें कवच प्रणाली ने लोको को फाटक से पहले ही रोक दिया।

    श्री वर्मा ने कहा,“यह कमीशनिंग भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में से एक पर बड़ा सेफ्टी अपग्रेड है, जो दिल्ली उपनगरीय और लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को कवर करता है। यह सेक्शन पैसेंजर, उपनगरीय और मालगाड़ियों के लिए एक हाई-ट्रैफिक वाला हिस्सा है। इस सेक्शन पर कवच प्रणाली की कमीशनिंग से ऑपरेशनल सेफ्टी, विश्वसनीयता और पैसेंजर का भरोसा काफी बढ़ गया है।”

    कवच एक एडवांस्ड ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत देश में ही बनाया गया है। कवच आपात स्थितियों में रेलगाड़ियों में ब्रेक लगाकर रेल परिचालन को और अधिक सुरक्षित बनाता है। यह सिस्टम ऑटोमैटिकली सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD), आमने-सामने और पीछे से टक्कर होने के खतरों से बचाता है। इसके अलावा, ओवरस्पीडिंग पर लगातार नज़र रखकर उसे कंट्रोल किया जाता है और कम दृश्यता और खराब मौसम में भी संरक्षा सुनिश्चित की जाती है।  KAVACH, SIL-4 संरक्षा मानकों के अनुकूल कार्य करने वाला दुनिया में संरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर है। देश में डिज़ाइन किया गया और किफायती सिस्टम होने के कारण, यह आयातित तकनीक पर निर्भरता कम करता है और भारतीय सिग्नलिंग इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देता है।  भारतीय रेलवे धीरे-धीरे KAVACH प्रणाली का विस्तार कर रही है, जिससे लाखों यात्रियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद रेल परिचालन और सुरक्षित रेल यात्रा के लिए उसकी प्रतिबद्धता और दृढ़ हो रही है। यह कमीशनिंग सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

  • एनटीपीसी फ़रीदाबाद ने एनएसआईसी टेक्निकल सर्विसेज़ सेंटर के सहयोग से व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया

    एनटीपीसी फ़रीदाबाद ने एनएसआईसी टेक्निकल सर्विसेज़ सेंटर के सहयोग से व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया

    फरीदाबाद। एनटीपीसी फ़रीदाबाद ने आज अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के अंतर्गत एनएसआईसी टेक्निकल सर्विसेज़ सेंटर, नीमका के सहयोग से दो अल्पकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल मार्केटिंग तथा बेकरी एवं सोया मिल्क उत्पाद पर केंद्रित हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय युवाओं की रोजगारयोग्यता क्षमता को बढ़ाना है। उद्घाटन समारोह में  अशुतोष सत्पथी, बिज़नेस यूनिट हेड (BUH), एनटीपीसी फ़रीदाबाद एवं बदरपुर तथा सुश्री के. श्रीलता, अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अशुतोष सत्पथी ने आज के प्रतिस्पर्धी परिवेश में कौशल विकास की अहम भूमिका पर बल दिया तथा प्रशिक्षुओं को उपलब्ध सीखने के अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समुदाय के विकास तथा युवाओं को आवश्यकता-आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाने के प्रति एनटीपीसी की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

    सुश्री के. श्रीलता, अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) ने प्रशिक्षुओं को आत्मनिर्भरता, अनुशासन और सतत् सीखने के महत्व पर जोर देते हुए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिभागियों से अर्जित कौशल का उपयोग कर सतत् आजीविका के अवसर सृजित करने का आह्वान किया तथा सीएसआर पहलों के माध्यम से समावेशी विकास हेतु एनटीपीसी के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं, जिससे प्रतिभागी स्वरोज़गार एवं आय-सृजन के अवसरों का अन्वेषण कर सकें। यह पहल एनटीपीसी फ़रीदाबाद के सामाजिक विकास में सार्थक योगदान देने, कौशल सुदृढ़ीकरण, उद्यमिता को प्रोत्साहन तथा आसपास के समुदायों में आजीविका के अवसरों में सुधार के सतत् प्रयासों को दर्शाती है।