नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 18 जून 2020 को शुरू की गई पहली वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के क्रम को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय 27 मार्च 2025 को वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 12वें चरण की शुरुआत करने जा रहा है। यह पहल देश में घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला और खान मंत्री, जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय राज्य मंत्री, सतीश चंद्र दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इस नीलामी के तहत कुल 25 कोयला खदानों की पेशकश की जाएगी, जिनमें से 7 खदानें कोयला सीएमएसपी [कोयला खान (विशेष प्रावधान)अधिनियम, 2015 के अंतर्गत और 18 खदानें खनिज और खदान (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर) के अंतर्गत आती हैं। इनमें से 2 लिग्नाइट खदानें भी शामिल हैं, जो विभिन्न ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होंगी। इसके अलावा, 13 कोयला खदानें पूरी तरह से खोजी जा चुकी हैं, जबकि 12 आंशिक रूप से खोजी गई हैं, जिससे तत्काल और भविष्य के विकास दोनों के लिए अवसर मिलेंगे।
इसके अतिरिक्त, नीलामी के 11वें दौर के दूसरे प्रयास के तहत, कोयला मंत्रालय एमएमडीआर अधिनियम के अंतर्गत तीन आंशिक रूप से खोजी गई कोयला खदानों की पेशकश कर रहा है, जिससे निवेशकों को महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे और घरेलू कोयला उत्पादन एवं ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का उद्देश्य पारदर्शी और बाजार-आधारित कोयला अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी ने कोयले के विशाल भंडार को अनलॉक (खोलने) करना एक गेम-चेंजर रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा, दक्षता और सतत खनन प्रथाओं को बढ़ावा मिला है।
वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 12वें चरण से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बड़ी भागीदारी की उम्मीद है। यह पहल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी। इसके साथ ही, यह देश में एक मजबूत और लचीला कोयला क्षेत्र विकसित करने में योगदान देगा, जिससे उद्योगों, विद्युत संयंत्रों और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को सहायता मिलेगी।
कोयला मंत्रालय लगातार सुधारों को लागू करने, व्यापार करने की सुगमता बढ़ाने और कोयला खनन के लिए एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाने में ये पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और देश की आर्थिक नींव को और मजबूत करेंगी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सेपक टकरा विश्व कप 2025 में भारतीय सेपक टकरा दल को उनके अभूतपूर्व प्रदर्शन के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक लाने पर भी टीम की सराहना की। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा:
“सेपक टकरा विश्व कप 2025 में शानदार खेल के प्रदर्शन के लिए हमारे दल को बधाई! यह दल 7 पदक लेकर आया है। पुरुषों की रेगु टीम ने भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह शानदार प्रदर्शन वैश्विक सेपक टकरा के खेल में भारत के लिए आशाजनक भविष्य का संकेत देता है।”
नई दिल्ली/ फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन ( फियो ) द्वारा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित सोर्सेक्स इंडिया 2025 के तीसरे संस्करण का उद्घाटन 26 मार्च, 2025 को यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी ) संतोष कुमार सारंगी ने किया, जिसमें फियो के कार्यवाहक अध्यक्ष अश्विनी कुमार, फियो के महानिदेशक एवं सीईओ डॉ. अजय सहाय, फियो की एमसी सदस्य सुश्री इंदु महाजन और फियो के डीडीजी आशीष जैन सहित कई प्रमुख लोग शामिल हुए।
अपने मुख्य भाषण में, श्री सारंगी ने इस बात पर जोर दिया कि सोर्सएक्स इंडिया भारत के विदेशी व्यापार, विशेष रूप से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक इको सिस्टम को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और पीएलआई योजना जैसी विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं और पहलों के माध्यम से भारत से सोर्सिंग का समर्थन करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये प्रयास विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, नवीनतम तकनीकों को अपनाने को प्रोत्साहित करने और वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। उन्होंने उत्पाद की गुणवत्ता और मानकीकरण को बढ़ाने में डिजिटलीकरण और व्यापार करने में सुगमता की बढ़ती भूमिका की ओर भी इशारा किया, जो भारतीय वस्तुओं की वैश्विक स्वीकृति बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, श्री सारंगी ने उल्लेख किया कि सरकार निर्यात को और बढ़ावा देने के लिए पूरक अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से नए बाजार पहुंच के अवसरों की खोज कर रही है।
फियो के कार्यवाहक अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने सोर्सेक्स इंडिया 2025 को एक मील का पत्थर बताया जो उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करता है। उन्होंने भारतीय निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच सीधे जुड़ाव के महत्व पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में भारत के व्यापार पदचिह्न का विस्तार करना है।
फियो के महानिदेशक और सीईओ डॉ. अजय सहाय ने भारत के निर्यात विकास पथ में सोर्सेक्स इंडिया इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया, खासकर तब जब देश ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोर्सेक्स इंडिया भारतीय ब्रांडों के निर्यात, व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने और वैश्विक बाजारों में भारतीय व्यवसायों के लिए नए अवसरों को खोलने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा।
अफ्रीका, सीआईएस, ईयू, एलएसी, नाफ्टा, एनईए, ओशिनिया, एसए, एसईए और डब्ल्यूएएनए जैसे क्षेत्रों सहित 45 से अधिक देशों के 150 से अधिक वैश्विक खरीदारों की भागीदारी के साथ, सोर्सेक्स इंडिया 2025 भारतीय निर्यातकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने का एक आवश्यक मंच है। इस वर्ष, इस आयोजन में खाद्य और पेय पदार्थ, स्वास्थ्य और सौंदर्य, एफएमसीजी और एफएमसीडी, परिधान और परिधान, कपड़ा और गृह सज्जा, ई-कॉमर्स सेवाएं और लॉजिस्टिक्स सहित विविध क्षेत्रों की भारतीय कंपनियां शामिल हैं। इस कार्यक्रम में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा समर्थित भारत भर से 10 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कारीगरों की भागीदारी भी प्रदर्शित की गई।
समापन में, फियो एमसी सदस्य सुश्री इंदु महाजन ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सोर्सेक्स इंडिया न केवल खरीदारों और विक्रेताओं के बीच व्यावसायिक साझेदारी की सुविधा प्रदान करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर ब्रांड इंडिया के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रदर्शित करने का एक अमूल्य अवसर भी प्रदान करता है।
नई दिल्ली,/ बेंगलुरू में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंडक सहित अन्य प्रतिनिधियों ने राउंड टेबल बैठक में हिस्सा लिया। जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उद्योग नीति, निवेश अनुकूल वातावरण और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है, जिससे इस क्षेत्र में बड़े निवेश के अवसर खुल रहे हैं।आईईएसए अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर रुचि जताई और इस क्षेत्र में संभावित निवेश को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया।
बैठक में इंडस्ट्रियल क्लस्टर, स्किल डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह बैठक छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने नैसकॉम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा
नई दिल्ली, / छत्तीसगढ़ जल्द ही आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार और नैसकॉम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ है, जिससे छत्तीसगढ़ में कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में नैसकॉम के उपाध्यक्ष श्रीकांत श्रीनिवासन व अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की और राज्य की कौशल विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि रायपुर देश का ऐसा प्रमुख शहर है, जहां आईआईटी, एनआईटी, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, जो उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल युवा तैयार कर रहे हैं।
नया रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां कई आईटी कंपनियों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। सरकार बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर नया रायपुर को एक प्रमुख टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत आईटी और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्किलिंग प्रोग्राम के माध्यम से कॉलेज के विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि अभी तक 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की औद्योगिक नीति की सफलता को दर्शाता है। इस बैठक के दौरान दिल्ली, मुंबई और रायपुर में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में मिले सकारात्मक प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई।
*स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दी बधाई*
नई दिल्ली/ विश्व क्षय दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन , नई दिल्ली में स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें भारत के सभी राज्यों से स्वास्थ्य सचिव , राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक , राज्य क्षय अधिकारी , विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी , राज्य सलाहकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार सम्मिलित हुए । कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री व रसायन और उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने की ।
उक्त पुरस्कार श्री नड्डा के कर कमलों से छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक विजय दयाराम के ने प्राप्त किया ।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री नड्डा जी ने टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में किये जा रहे कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य टीबी मुक्त ग्राम पंचायत की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है ।
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने छत्तीसगढ़ राज्य को भारत शासन द्वारा उत्कृष्ठ कार्य हेतु सम्मानित किए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए सभी कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने 100 दिवसीय अभियान अंतर्गत खोजे गए सभी शंकाप्रद मरीजों को सूचीबद्ध करते हुए उपलब्ध संसाधनों के आधार पर एक्स-रे व नाट जांच शीघ्र पूर्ण करने हेतु कहा है । जांच में पाए गए टीबी मरीजों का पंजीयन कर उनका उपचार प्रारम्भ कर उन्हें निक्षय पोषण योजना का लाभ दिलाये जाने के साथ उन्हें निक्षय मित्र द्वारा अतिरिक्त सहायता प्रदाय किये जाने हेतु भी कहा है ।
सोर्सेक्स इंडिया 2025 का तीसरा संस्करण 26-28 मार्च, 2025 को यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, द्वारका, नई दिल्ली में
नई दिल्ली / फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो ) द्वारा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित सोर्सेक्स इंडिया 2025 का तीसरा संस्करण 26-28 मार्च, 2025 को यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, द्वारका, नई दिल्ली में शुरू होने वाला है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के डीजीएफटी संतोष कुमार सारंगी द्वारा फियो के अध्यक्ष (कार्यकारी) अश्विनी कुमार, फियो के उपाध्यक्ष (कार्यकारी) इसरार अहमद और फियो के महानिदेशक एवं सीईओ डॉ. अजय सहाय की उपस्थिति में किया जाएगा।
इस भव्य आयोजन में अफ्रीका, सीआईएस, ईयू, एलएसी, नाफ्टा, एनईए, ओशिनिया, एसए, एसईए और वाना जैसे प्रमुख क्षेत्रों सहित 45 से अधिक देशों के 150 से अधिक विदेशी खरीदार भाग लेंगे। इस तरह के विविध और व्यापक खरीदार प्रतिनिधित्व के साथ, इस आयोजन से महत्वपूर्ण व्यावसायिक सहयोग और भारत के निर्यात विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
दुनिया भर से 150 से अधिक विदेशी खरीदारों के साथ, इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को उत्पादक बी2बी बैठकों में शामिल होने, व्यापार संबंध स्थापित करने और सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करना है।
इस आयोजन में दो ज्ञानवर्धक संवादमूलक सत्र होंगे: “वैश्विक व्यापार का भविष्य: चुनौतियों और अवसरों की खोज करना” और “वैश्विक व्यापार वित्तपोषण और निवेश: एक जटिल दुनिया में विकास अवसरों का सृजन करना ” जहाँ उद्योग विशेषज्ञ भाषण देंगे और प्रतिभागियों के साथ परस्पर बातचीत करेंगे। विभिन्न श्रेणियों के प्रदर्शक भाग लेंगे, जो खाद्य एवं पेय पदार्थ, स्वास्थ्य एवं सौंदर्य, एफएमसीजी एवं एफएमसीडी, परिधान एवं वस्त्र, वस्त्र एवं गृह सज्जा, खिलौने एवं बच्चों के उत्पाद, खेल एवं फिटनेस, स्टेशनरी एवं कार्यालय आपूर्ति, ई-कॉमर्स सेवाएं, शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण, मनोरंजन, खाद्य सेवाएं एवं क्यूएसआर, अवकाश एवं यात्रा, व्यावसायिक सेवाएं, विशेष रेस्तरां तथा लॉजिस्टिक्स सहित विविध क्षेत्रों में अपने उत्पादों एवं सेवाओं का प्रदर्शन करेंगे।
फियो के अध्यक्ष (कार्यकारी) अश्विनी कुमार ने कहा, “सोर्सेक्स इंडिया का तीसरा संस्करण भारतीय निर्यातकों के लिए एक निर्णायक आयोजन बनने जा रहा है, जो उन्हें वैश्विक बाजार में अपनी ताकत एवं क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक प्रीमियम मंच प्रदान करेगा।”
फियो के महानिदेशक एवं सीईओ डॉ. अजय सहाय ने कहा, “सोर्सेक्स इंडिया ने नए व्यापार अवसर सृजित करने तथा भारतीय निर्यातकों एवं अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के बीच पुल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शीर्ष ब्रांडों एवं संस्थागत भागीदारों की निरंतर भागीदारी, विश्वभर में भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
फियो निर्यातकों, एमएसएमई और उद्योग जगत के नेताओं सहित सभी हितधारकों को इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता है। पंजीकरण और अधिक जानकारी के लिए www.sourcex-india.com पर जाएं।
“हिन्दी के विशाल मंदिर की वीणापाणी,स्फूर्ति-घेतना रचना की प्रतिभा कल्याणी”कवि शिरोमणि निराला ने कभी महादेवी वर्मा कवयित्री के व्यक्तित्व को उक्त पंक्तियों से समझने की कोशिश की थी। एक जापानी कवि नागूची ने कहा था कि- “महादेवी प्रयाग की गंगा है।” आधुनिक हिन्दी साहित्य की जिन छह महान विभूतियों ने निर्विवाद रूप में अमरता प्राप्त कर ली है, उनमें महादेवी का स्थान विशिष्ट है। अन्य पांच विभूतियां हैं- भारतेंदू, मैथिलीशरण, जयशंकर प्रसाद, निराला और सुमित्रा नंदन पंत। महादेवी में छायावादी कविता को एक गति वेग दिया, उसकी श्रृंगार-भावना को सौम्य और सौदर्य चेतना को सूक्ष्म बनाया, कविता को अपनी सहसानुभुति संपन्न चित्रकला से एक अपूर्व रंजकता प्रदान की और हमें संस्कृत की समृ संस्कृति से अनुप्राणित कर एक समर्थ गद्य शैली दी।
एक छावावादी कवयित्री के रूप में भी महादेवी वर्मा की अपनी मौलिकता है। उन्होंने दीपक, बादल, वीणा
“अवनि अंबर की रुपहली सीप में तरल मोती सा जलधि जब कांपता तैरते घन मृदुल हिम के पुंज से ज्योत्सना के रजत पारावार में” कवयित्री और चित्रकर्ती के दुर्लभ संयोग ने महादेवी वर्मा को आधुनिक हिन्दी साहित्य, भारतीय साहित्य तथा विश्व साहित्य के इतिहास में बहुत ऊंचे स्थान का अधिकारी बना दिया है। महादेवी ने चित्रकला की कोई विधिवत् शिक्षा प्राप्त नहीं की थी। बचपन में एक मराठी सज्जन ने उन्हें चित्रकला की प्रारंभिक बातें सीखी दी।
इत्यादि के बिंबों में सुनिश्चित अर्थ बता भरकर छायावादी कविता को एक प्रतीक पद्धति दी। तथा छायावादी वेदना-संसार को रहस्यवादी संकेतों से उदात्त बनाया। लेखनी के साथ तूलिका पर भी अधिकार रखने के कारण उन्होंने चित्रोपन बिंबों की एक अभिनव योजना से छायावादी काव्य संसार को रंगरूप मय बना दिया। कितना विशाल, कितना मूर्त, कितना क्रियाशील और कितना रंग-बोधमय है यह बिंब।
महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में 24 मार्च को होली के दिन फरुखाबाद में हुआ था। शायद होली का ही असर था कि उनकी तूलिका हमेशा रंग बिरंगी रही। उनकी कविताओं में विषाद और आंसू की जैसी भी घनघटा है,। बातचीत के दौरान स्वजनों के साथ बहुत खुलकर हंसा करती थीं। और कभी-कभी अपने विनोदी स्वभाव का परिचय देने से न हीं चूकती थीं। महादेवी वर्मा के पिताश्री गोविंद प्रसाद वर्मा कालिजियेट स्कूल, भागलपुर में कई वर्षों तक हेडमास्टर रहे। महादेवी इसीलिये अक्सर भागलपुर आती रहती थी। लगातार कई दिनों तक रुका करती थीं, और कभी कभार उस स्कूल के छात्रों को पढ़ा भी दिया करती थीं। इसलिये कवयित्री के मन में और उनके भाव-जगत में बिहार प्रवास का संस्कार रचा-बसा हुआ था। उनके लिये बिहार घर-नैहर जैसा था।
महादेवी केवल कवयित्री, चित्रकर्त्री और उत्कृष्ट गद्यलेखिका ही नहीं थीं। वे एक दार्शनिक भी थीं, संस्कृत भाषा-साहित्य की परम विदुषी थी। वक्तृत्व कला में निपुण थी, श्रंखला की कड़ियों को तोड़ने वाली एक विद्रोहिणी नारी थीं। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाली अग्रणी महिला थी, शिक्षा शास्त्री थीं।. उन में संगठन करने का अद्भुत कौशल था। और एक छायावादी कवयित्री होकर भी वे अपने समय समाज, राष्ट्र और संपूर्ण मानवीय दायित्वों के प्रति अत्यधिक सजग थी।
“चांदनी के देश जाने का, अभी ता मन नहीं है अश्रु- यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है।।”
किन्तु काल को कौन रोक सकता है कवयित्री की जिजीविषा भी काल को नहीं रोक सकी और बलशाली काल 11 सितंबर 1987 की काली रात में लगभग साढ़े नौ बजे अपना कवल निर्मम ग्रास से भर गया। महादेवी के निधन से हिन्दी साहित्य की अपूरणीय क्षति हो गई। मृत्यु जीवन की गति है और दुःख जीवन का सर्वाधिक व्यापक संगीत है। इसलिये मोह महादेवी वर्मा को कभी आच्छन्न नहीं कर सका। तभी तो तरुणाई के दिनों में हीं उन्होंने अनासक्त भाव से लिखा था।
“विस्तृत नभ का कोई कोना, मेरा न कभी अपना होगा, परिचय इतना, इतिहास यही, उमड़ी कल थी, मिट आज चली…. ।। ” मौलिकता और विशिष्टता की उस प्रतिभूति को कोटि-कोटि नमन….!
“मोदी की विदेश नीति” पुस्तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 से 2024 तक की विदेश नीति पर केंद्रित है। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक¸ मोदी की विदेश नीति जिसका लेखक कुमार राजीव रंजन सिंह और संपादन संजय सिंह ने किया है। कुमार राजीव रंजन सिंह छात्र जीवन से ही राजनीतिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों में गहरी रुचि रखने लगे जिस वजह से देश के सामने तमाम चुनौतियों और समस्याओं से उद्वेलित राजीव रंजन छात्र नेता रहने के दौरान ही राष्ट्रीय राजनीति में गहराई तक जुड़ गए और समसामयिक मुद्दों को उठाते रहे। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा उनकी राजनीति मुख्य रूप से युवाओं के साथ जुड़कर उनके मुद्दों के प्रति आम लोगों में जागरूकता फ़ैलाने का रहा है। श्री मोदी के नेतृत्व में युवाओं से जुड़े मुद्दों के केंद्र में आने से प्रभावित होकर वे ‘यंग इंडिया’ से जुड़ गए। श्री राजीव रंजन ने बदलते भारत के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में बौद्धिक प्रतिभाओं की जरूरत को देखते हुए एक ऐसी संस्था की कल्पना की जो सामाजिक, आर्थिक विकास के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती में भी सहायक हो। इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 2022 में एक थिंक टैंक ‘इंडिया सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ (ICPRD) की स्थापना की। युवा सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्ध कुमार राजीव रंजन सिंह देश की प्रगति एवं उन्नति के लिए सामूहिकता में विश्वास करते हैं।
मोदी की विदेश नीति पुस्तक में मोदी सरकार की विदेश नीति को विस्तार से समझाया गया है और इसे उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों की नीतियों से अलग और प्रभावशाली बताया गया है। यह पुस्तक दो खंडों में विभाजित है। पहले खंड में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय मंचों में भारत की भूमिका का विश्लेषण किया गया है, जबकि दूसरे खंड में भारत के विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों की चर्चा की गई है। पुस्तक में कुल सात अध्याय हैं, जो निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित हैं:
भारत की विदेश नीति और उसका प्रबुद्ध उदय, नरेंद्र मोदी का भारत, लुक ईस्ट पॉलिसी से एक्ट ईस्ट पॉलिसी तक, मोदी की पड़ोसी प्रथम नीति, दुनिया के 74 देशों की रिकॉर्ड यात्राएं, अंतर-सरकारी संगठनों में भारत की भूमिका, जी-20, बिम्सटेक और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत, विदेश नीति की विशेषताएँ। मोदी सरकार की विदेश नीति को इस पुस्तक में “वैश्विक नेता” दृष्टिकोण से देखा गया है। पुस्तक में बताया गया है कि मोदी की विदेश नीति सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत को एक शक्तिशाली वैश्विक शक्ति बनाने की दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
पड़ोसी देशों के साथ संबंध
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे पहले पड़ोसी देशों से मजबूत संबंध स्थापित करने पर ध्यान दिया। उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा भूटान से शुरू की और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने के लिए बिना किसी पूर्व निर्धारित योजना के लाहौर पहुंच गए। यह उनकी अनौपचारिक कूटनीति का एक उदाहरण था, जो पारंपरिक तरीकों से अलग था।
चीन के साथ संबंध
पुस्तक में यह बताया गया है कि मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महाबलीपुरम आमंत्रित करके एक ऐतिहासिक संदेश दिया। हालांकि, गलवान संघर्ष के बाद भारत ने चीन के प्रति एक कठोर नीति अपनाई और स्पष्ट कर दिया कि जब तक सीमा पर हालात सामान्य नहीं होंगे, तब तक द्विपक्षीय संबंध भी सामान्य नहीं होंगे।
अमेरिका और रूस के साथ संबंध
मोदी सरकार के दौरान भारत ने अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलन बनाए रखा। पुस्तक में उल्लेख है कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक मजबूत व्यक्तिगत रिश्ता बनाया, वहीं रूस के साथ भारत की ऐतिहासिक मित्रता को और मजबूत किया।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका
पुस्तक में इस बात पर जोर दिया गया है कि मोदी सरकार ने भारत को वैश्विक कूटनीति में एक मजबूत स्थान दिलाया। जी-20, बिम्सटेक, क्वाड और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक सक्रिय रही। भारत की वैश्विक कूटनीति का एक उदाहरण कोरोना महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल रही, जिसमें भारत ने विभिन्न देशों को मुफ्त में वैक्सीन प्रदान की।
पाकिस्तान और रक्षा नीति
मोदी सरकार ने पाकिस्तान को लेकर अपनी नीति में कोई ढील नहीं दी। सीमा पार आतंकवाद और उरी तथा पुलवामा हमलों के बाद भारत ने सर्जिकल और एयर स्ट्राइक करके स्पष्ट संदेश दिया कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई भी कदम उठा सकता है।
पुस्तक का लेखन विश्लेषणात्मक और शोधपरक है। लेखक ने विभिन्न घटनाओं का संदर्भ देते हुए यह स्पष्ट किया है कि मोदी सरकार की विदेश नीति में किस प्रकार बदलाव आया है और यह भारत के वैश्विक स्थान को कैसे मजबूत कर रही है। लेखक ने मोदी सरकार की विदेश नीति की उपलब्धियों को तो प्रमुखता से दर्शाया है, लेकिन कुछ विवादास्पद मामलों जैसे कि चीन के साथ तनाव और पड़ोसी देशों के साथ कुछ असफल प्रयासों का विश्लेषण कम किया गया है।
“मोदी की विदेश नीति” एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो भारत की कूटनीति और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका को समझने के लिए उपयोगी है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों, भारतीय विदेश नीति और मोदी सरकार की कूटनीतिक रणनीतियों को गहराई से समझना चाहते हैं।
पुस्तक के प्रमुख सकारात्मक बिंदु: मोदी सरकार की विदेश नीति का गहराई से विश्लेषण, भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की विस्तृत व्याख्या, शोधपरक दृष्टिकोण और घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन कुल मिलाकर, यह पुस्तक नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को समझने के लिए एक अच्छा स्रोत है, लेकिन इसे पढ़ते समय एक संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना जरूरी है।
साइबर अपराध एक आपराधिक गतिविधि है जो कंप्यूटर, कंप्यूटर नेटवर्क या नेटवर्क डिवाइस को लक्ष्य करके किया जाता है, साइबर अपराध साइबर अपराधियों या हैकर्स द्वारा किया जाता है। साइबर अपराध व्यक्ति या संगठन द्वारा किया जाता है। कुछ साइबर अपराधी उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हैं और तकनीकी रूप से कुशल होते हैं। साइबर अपराधी सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम और नेटवर्क में सेंध नहीं लगाते हैं कभी कभी वे मानव मस्तिष्क को भी हैक कर लेते हैं ।
वैश्विक स्तर पर साइबर हमले तीव्र दर से बढ़ रहा है लगभग हर दिन 2,200 से ज़्यादा हमले हो रहे हैं यानि 39 सेकंड में एक हमला। रिस्कबेस्ड सिक्योरिटी की एक रिपोर्ट से सन् 2019 के पहले नौ महीनों में डेटा उल्लंघनों के कारण लगभग 7.9 बिलियन रिकॉर्ड उजागर हुए थे। साइबर खतरे के बढ़ने के साथ, साइबर सुरक्षा समाधानों पर वैश्विक खर्च बढ़ रहा है जो 2026 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 260 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
साइबरसिक्यूरिटी वेंचर्स की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक साइबर अपराध से दुनिया को सालाना लगभग 10.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। यह साइबर अपराधियों के लिए संभावित इनाम है जो उन्हें अवैध गतिविधियों में संलग्न होने के लिए आकर्षित करता है। नेटवर्क का उपयोग करने वाले सभी व्यवसाय कॉर्पोरेट जासूसी या ग्राहक हमलों के लिए लक्ष्य होते हैं।
साइबर अपराध के प्रकार :-
ईमेल धोखाधड़ी.
पहचान धोखाधड़ी ( व्यक्तिगत जानकारी चुराकर उसका दुरुपयोग करना)।
वित्तीय या कार्ड भुगतान डेटा की चोरी।
कॉर्पोरेट डेटा की चोरी और बिक्री।
साइबरएक्सटॉर्शन
रैनसमवेयर हमले
क्रिप्टोजैकिंग
साइबर जासूसी (जिसमें हैकर्स सरकारी/कंपनी के डेटा तक पहुंच बनाते हैं)।
सिस्टम में इस तरह हस्तक्षेप करना जिससे नेटवर्क को खतरा हो।
कॉपीराइट का उल्लंघन करना.
अवैध जुआ
अवैध वस्तुओं को ऑनलाइन बेचना।
बाल पोर्नोग्राफी का अनुरोध करना, निर्माण करना या पास रखना।
साइबर अपराध के कारण :-
वित्तीय लाभ
शक्ति और नियंत्रण
विचारधारा या विश्वास में बदलाव
बदला
साइबर सुरक्षा युक्तियाँ :-
अपने सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखें।
एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें ।
मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें जिसका आसानी से अनुमान न लगाया जा सके
अज्ञात प्रेषकों से प्राप्त ईमेल अनुलग्नक न खोलें
अज्ञात प्रेषकों या अपरिचित वेबसाइटों से प्राप्त ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें।
सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करने से बचें।
बातचीत करते या वीडियो कॉल के समय सावधानी रखें।
अपनी व्यक्तिगत, गोपनीय एवं वित्तीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
किसी भी आपदा जैसी स्थिति की जानकारी पर अपना धैर्य बनाए रखें।
साइबर अपराध व सुरक्षा में मनोविज्ञान की उपयोगिता:-
मनोविज्ञान के नियम एवं सिद्धांतों का उपयोग साइबर अपराधियों के व्यवहार व कारणों को समझने, साइबर सुरक्षा में संलग्न पेशेवरों को ट्रेनिंग एवं प्रोत्साहन, साइबर सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता लाने तथा साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों में होने वाले मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रबंधन तथा भविष्य के लिए सतर्क बनाने हेतु किया जाता है।
सबसे पहले मनोविज्ञान के माध्यम से साइबर अपराधियों के व्यक्तित्व गुणों, व्यवहार पैटर्न्स की जानकारी प्राप्त किया जा सकता है तथा साइबर अपराध को प्रोत्साहित करने वाले कारकों की पहचान कर उन्हें अवरोधित किया जा सकता है। ऐसे कड़े प्रावधान की जाने की आवश्यकता है जिसमें साइबर अपराध से अर्जित संपत्ति का न केवल रिकवरी किया जाए बल्कि उससे कई गुना ज्यादा हर्जाना वसूल करने के साथ- साथ जेल की सजा एवं अन्य सजा के उपायों पर विचार किया जाए।
मनोवैज्ञानिक साइबर सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे व्यक्तियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहायता देने के साथ-साथ उन्हें सतत रूप से सतर्क व अभिप्रेरित रहकर कार्य करने के लिए प्रेरित करने में सहायता दे सकते हैं। साइबर सुरक्षा में उन व्यक्तियों की ही सेवा ली जानी चाहिए जिनकी इस क्षेत्र में कार्य करने की रुचि हो। मनोवैज्ञानिक साइबर सुरक्षा पेशेवर को ऐसे हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय बनाने में सहयोग कर सकते हैं ।
मनोवैज्ञानिकों की भूमिका जो लोग साइबर क्राइम के लिए जोखिम में हैं उनके बचाव के लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार करने में सहायता प्रदान करना है क्योंकि साइबर अपराधी व्यक्ति के संवेग का उपयोग करता है जब व्यक्ति उच्च संवेग की स्थिति में होता है तो संज्ञानात्मक क्षमताओं जैसे निर्णय लेने की क्षमता, प्रत्यक्षीकरण, चिंतन व अन्य का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है। इसीलिए साइबर अपराधी किसी व्यक्ति को शिकार बनाने के लिए उसमें भय, असमंजस, लालच जैसे नकारात्मक संवेगों के उच्च स्तर का उपयोग करते हैं मनोवैज्ञानिक लोगों को मानसिक व सांवेगिक रूप से मजबूत करके उन्हें साइबर ठगी से बचाने में सहयोग दे सकते हैं।
साइबर क्राइम से पीडित लोगों को परामर्श व मनोचिकित्सा सेवाओं के द्वारा मनौवैज्ञानिक/मानसिक समस्याओं ( संवेगिक प्रक्रियाएं, हेल्पलेसनेस की भावना, अपने बारे में नकारात्मक विचार, अंतरवैयक्तिक समस्याएं, नशा, लत की समस्या, तनाव, दुश्चिंता, कम आत्मविश्वास, काम में अरूचि, स्वयं को दोष देना, नींद की समस्या, ध्यान की समस्या, भूख की समस्या व अन्य) से बाहर निकलने में मनोवैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, समय रहते यदि पीडित के तनाव का प्रबंध नहीं किया जाता है तो इससे उन्हें शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है या वह आत्महत्या जैसे स्वघाती व्यवहार भी कर सकता है।