दिल्ली। भारत सरकार के नागरिक सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश के तहत, 7 मई 2025 को एनजीईएल भाड़ला-1 सौर ऊर्जा संयंत्र (जैसलमेर क्लस्टर) में एक पूर्ण ब्लैकआउट ड्रिल सफलतापूर्वक आयोजित की गई। यह अभ्यास रात 10:00 से 10:15 बजे तक किया गया।
इस अभ्यास के अंतर्गत, ब्लैकआउट की स्थिति को दर्शाने हेतु साइट पर समस्त प्रकाश व्यवस्था को बंद कर दिया गया। संयंत्र पर तैनात कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए सभी निर्धारित ब्लैकआउट प्रक्रियाओं का पालन किया।
इस ड्रिल से पहले 7 मई की सुबह साइट सेफ्टी इंचार्ज श्री अशोक कुमार ने प्रारंभिक रूप से कर्मचारियों को संबोधित किया। इस ब्रीफिंग में उन्होंने एयर रेड चेतावनियों से निपटने, क्रैश ब्लैकआउट लागू करने, अग्निशमन प्रोटोकॉल, बचाव अभियानों, और आपातकालीन स्थितियों में आवश्यक आपूर्ति को संरक्षित रखने के महत्व पर विस्तृत निर्देश प्रदान किए। यह ब्लैकआउट ड्रिल ओमैर अज़मी (आरई-इंजीनियर, एनजीईएल) के पर्यवेक्षण में आयोजित की गई। यह सक्रिय पहल राष्ट्रीय सुरक्षा पहलों के प्रति एनजीईएल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह सुनिश्चित करती है कि उसके कर्मचारी आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
फरीदाबाद। एनटीपीसी फरीदाबाद ने अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर अपने संविदा श्रमिकों के सशक्तिकरण और कल्याण को समर्पित एक सारगर्भित एवं जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन एनटीपीसी की समावेशी और सम्मानजनक कार्य संस्कृति की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम की शुरुआत परियोजना प्रमुख अतुल कमलाकर देसाई के स्वागत संबोधन से हुई, जिन्होंने श्रमिकों के अमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर के मुख्य अतिथि रहे भुवनेश वर्श्नेय, सहायक भविष्य निधि आयुक्त, फरीदाबाद, जिन्होंने भविष्य निधि अधिनियम (PF Act) की विस्तृत जानकारी दी और श्रमिकों द्वारा उठाए गए PF से जुड़े विभिन्न प्रश्नों का समाधान किया। वरिष्ठ प्रबंधक (अन्वेषण) द्वारा अद्यतन श्रम कानूनों और श्रमिकों के अधिकारों पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई, जिससे उपस्थित श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। इस अवसर पर श्री निशांत गर्ग, उप महाप्रबंधक (O&M) भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर एक विशेष “सुझाव मेला” का आयोजन भी किया गया, जिसमें संविदा श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उपयोगी सुझाव व फीडबैक साझा किए। कार्यक्रम का समापन सभी संविदा श्रमिकों के लिए आयोजित भोज के साथ हुआ, जो उनके प्रति सम्मान और सराहना का प्रतीक रहा। एनटीपीसी फरीदाबाद अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के साथ गरिमा, संवाद और विकास की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
फरीदाबाद। एनएचपीसी निगम मुख्यालय में उपस्थित कमल बहादुर शाह, मुख्यमंत्री, सुदूरपश्चिम प्रांत, नेपाल सरकार और आर.के. चौधरी, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी के साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारीगण
नवीकरणीय ऊर्जा विकास के क्षेत्र में भारत-नेपाल सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख पहल करते हुए, कमल बहादुर शाह, मुख्यमंत्री, सुदूरपश्चिम प्रांत के नेतृत्व में नेपाल के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिनांक 1 मई 2025 को भारत सरकार के नवरत्न उद्यम एनएचपीसी के निगम मुख्यालय का दौरा किया।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए, कमल बहादुर शाह, मुख्यमंत्री, सुदूरपश्चिम प्रांत ने भारत और नेपाल के बीच नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के महत्व का उल्लेख किया, जो सतत विकास और क्षेत्रीय प्रगति के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऐसी साझेदारियां आपसी विकास, ऊर्जा सुरक्षा और हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अपने संबोधन में आर.के. चौधरी, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी लिमिटेड ने कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं नेपाल को, न केवल पड़ोसी के रूप में देखती हैं, बल्कि स्वच्छ और सतत विकास की दिशा में एक कार्यनीतिक साझेदार के रूप में भी देखती हैं। उन्होंने नेपाल सरकार द्वारा 800 मेगावाट पश्चिम सेती और 460 मेगावाट एसआर6 जलविद्युत परियोजनाओं का कार्यान्वयन शीघ्र शुरू करने के लिए रियायतों को शीघ्रता से अंतिम रूप दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने दौरे के दौरान नेपाली प्रतिनिधि मंडल को नवीकरणीय ऊर्जा विकास के क्षेत्र में एनएचपीसी के विजन, क्षमताओं और योग्यताओं पर प्रस्तुति दी गई। दोनों देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के भावी विकास के लिए भारत और नेपाल के बीच सहयोग पर भी चर्चा हुई।
माननीय मुख्यमंत्री के साथ बीर बहादुर थापा, मंत्री, भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारिता, घनश्याम चौधरी, प्रांतीय विधानसभा के सदस्य एवं संसदीय दल के नेता, नरेश शाही, प्रांतीय विधानसभा के माननीय सदस्य, झपट सऊद, प्रांतीय विधानसभा के सदस्य, डॉ. कमल प्रसाद पोखरेल शर्मा, मुख्य सचिव, सुदूरपश्चिम प्रांत सरकार, शेर बहादुर भंडारी, सदस्य, नीति एवं योजना आयोग, सुदूरपश्चिम, सूरत कुमार बाम, सचिव, भौतिक अवसंरचना मंत्रालय, डॉ. जीतू उपाध्याय, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार, राम बहादुर बिस्सा, मुख्यमंत्री के निजी सचिव, मनोज कुमार सिंह, थर्ड सेक्रेटरी, नेपाल दूतावास, नई दिल्ली और विकास कुमार मीना, अवर सचिव, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार भी उपस्थित थे। इस अवसर पर आर.पी. गोयल, निदेशक (वित्त), उत्तम लाल, निदेशक (कार्मिक) और सुप्रकाश अधिकारी, निदेशक (तकनीकी) के साथ एनएचपीसी के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने एनएचपीसी निगम मुख्यालय में स्थापित अत्याधुनिक “अर्ली वार्निंग मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम”, ‘रियल टाइम जेनरेशन मॉनिटरिंग सेंटर’ और ‘हाइड्रो एक्सपीरियंस सेंटर’ का भी दौरा किया।
कोयला गैसीकरण को एक विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, इसे 2030 तक 100 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है
मंत्री ने उद्योग भागीदारों से कोकिंग कोयला ब्लॉकों की नीलामी में शामिल होने का आग्रह किया
नई दिल्ली / मुंबई। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज मुंबई में इस्पात क्षेत्र पर आयोजित एक प्रमुख द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन, इंडिया स्टील के छठे संस्करण को संबोधित किया। इस्पात पर अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के बीच इस्पात क्षेत्र की उभरती गतिशीलता और कोयला उद्योग के साथ इसके सहजीवी संबंधों पर संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया।
अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, श्री जी. किशन रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्पात भारत की आर्थिक प्रगति का आधार है और विकसित भारत 2047 के लिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक है। उन्होंने बताया कि कैसे भारत बुनियादी ढांचे के विकास में नए वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। जम्मू और कश्मीर में विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब ब्रिज से लेकर तमिलनाडु में ऐतिहासिक पम्बन ब्रिज तक – यह सब इस्पात क्षेत्र की बढ़ती ताकत के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी ढांचे की यात्रा में हर मील का पत्थर इस्पात से बना है। यह एक गतिशील राष्ट्र की प्रगति और आकांक्षाओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत के इस्पात क्षेत्र में हाल ही के वर्षों में प्रभावशाली वृद्धि हुई है जिससे देश विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक राष्ट्र बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इस्पात को भारत का “उदयमान क्षेत्र” बताया, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के माध्यम से घरेलू खपत, औद्योगिक विस्तार और आत्मनिर्भरता का प्रमुख कारक है।
श्री रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि यदि इस्पात भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है तो कोयला और खनन क्षेत्र इसकी मजबूत नींव है। उन्होंने कच्चे माल की सुरक्षा विशेषकर कच्चे माल की रणनीति और कच्चे माल के मिश्रण में बदलाव के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर और मैंगनीज, निकल और क्रोमियम जैसे आवश्यक मिश्र धातु तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक आर्थिक आवश्यकता और रणनीतिक अनिवार्यता दोनों है।
भारत ने हाल ही में पिछले वित्तीय वर्ष में एक बिलियन टन कोयला उत्पादन और प्रेषण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है – जो राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। ऊर्जा सांख्यिकी 2025 से पता चलता है कि कोयला भारत की कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 60% और इसके विद्युत उत्पादन का 70% हिस्सा बना हुआ है। जबकि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं, मंत्री ने पुन: पुष्टि की कि निकट भविष्य में कोयला भारत के ऊर्जा और औद्योगिक परिदृश्य का केंद्र बना रहेगा।
इस समस्या के समाधान के लिए खान मंत्रालय ने निम्न-श्रेणी के अयस्क के बेनिफिशिएशन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति का प्रस्ताव किया है जिस पर वर्तमान में सार्वजनिक परामर्श चल रहा है। चूना पत्थर और निम्न-श्रेणी के अयस्क के लिए संशोधित रॉयल्टी दरों सहित नीतिगत सुधारों को निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।
मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा दोहराए गए ग्रीनफील्ड खदानों के समय पर उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया। ऐसी परिसंपत्तियों के संचालन में देरी राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी है। मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर काम कर रहा है और खदान विकास में तेजी लाने के लिए बोलीदाताओं के साथ प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहा है। मंजूरी को सुव्यवस्थित करने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के साथ भी समन्वय बढ़ाया गया है। पिछले छह महीनों में कई प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और आगे भी सुधार जारी हैं।
इस दिशा में एक प्रमुख पहल राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन है जिसका लक्ष्य 2030 तक 8,500 करोड़ रुपये के निवेश से 100 मीट्रिक टन गैसीकरण का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह पहल संश्लेषण गैस (सिनगैस) उत्पन्न करने के लिए उच्च-राख, गैर-कोकिंग घरेलू कोयले के उपयोग को बढ़ावा देती है, जो डीआरआई (डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन) इस्पात निर्माण का एक स्वच्छ विकल्प है। उन्होंने उद्योग से इस परिवर्तनकारी तकनीक में निवेश करने का आग्रह किया। यह न केवल उत्सर्जन को कम करती है बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मूल्य श्रृंखलाओं को भी बढ़ाती है।इसके अलावा, मंत्री ने खनिक समुदाय से उन्नत मिश्र धातुओं और हरित प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने के लिए डंप और टेलिंग से महत्वपूर्ण खनिजों की प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। मौजूदा डंप से परीक्षण और प्राप्ति को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में लिया जाना चाहिए।
सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ कच्चे माल की रणनीति की यह यात्रा सामूहिक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत इस्पात क्षेत्र के लिए एक साहसिक और महत्वाकांक्षी मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय इस्पात नीति में 2030-31 तक 300 मीट्रिक टन और 2047 तक 500 मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कोयला मंत्रालय और खान मंत्रालय इस दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से जुड़े हुए हैं और इसे साकार करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं।
श्री रेड्डी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र, राज्य सरकारों और उद्योग हितधारकों के बीच घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से भारत न केवल घरेलू स्तर पर अपनी कच्चे माल की आवश्यकताओं को पूरा करेगा बल्कि टिकाऊ आत्मनिर्भर इस्पात उत्पादन में अग्रणी राष्ट्र के रूप में भी उभरेगा। उन्होंने सम्मेलन में सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे ऐसी नीतियों को आकार देने में सक्रिय रूप से योगदान दें जो देश के इस्पात पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक हरित और अधिक लचीला भविष्य सुनिश्चित करें।इससे पहले उद्घाटन दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई केन्द्रीय मंत्रियों और तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया और इस क्षेत्र में सहयोगात्मक विकास के महत्व पर जोर दिया। स्टील एक्सपो के दूसरे दिन कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने इस्पात क्षेत्र में कच्चे माल की उपलब्धता पर गोलमेज वार्ता में भाग लिया और कोयला उत्पादन क्षेत्र में आए उल्लेखनीय बदलाव के बारे में बताया।
विनिर्माण मिशन से देश भर में न केवल लाखों एमएसएमई और छोटे उद्यमियों को मदद मिलेगी, बल्कि देश भर में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगा: पीएम
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रोजगार मेले को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों एवं संगठनों में नवनियुक्त 51,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत सरकार के विभिन्न विभागों में इन युवाओं के लिए आज नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि उनके कर्तव्यों में देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करना, आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना, आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में योगदान देना और श्रमिकों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाना शामिल है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जिस ईमानदारी के साथ वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करते हैं, उसका भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ये युवा अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे।
श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “किसी भी राष्ट्र की प्रगति और सफलता की नींव उसके युवाओं में निहित है। युवा राष्ट्र निर्माण में भागीदार होते हैं, तो देश तेजी से विकास करता है और विश्व भर में अपनी पहचान भी बनाता है।” उन्होंने यह भी कहा, “भारत के युवा अपनी कड़ी मेहनत और नवाचार के जरिए दुनिया को अपनी अपार क्षमता दिखा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार हर कदम पर यह सुनिश्चित कर रही है कि देश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ते रहें। उन्होंने बताया कि स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। इन अभियानों के माध्यम से सरकार भारत के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक खुला मंच प्रदान कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “इस बजट में घोषित विनिर्माण मिशन का उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना और भारत के युवाओं को वैश्विक स्तर पर मानकीकृत उत्पाद बनाने के अवसर प्रदान करना है। इस पहल से न केवल देश भर में लाखों एमएसएमई और छोटे उद्यमियों को मदद मिलेगी, बल्कि देश भर में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।” उन्होंने कहा कि यह भारत के युवाओं के लिए अवसरों का एक अभूतपूर्व समय है। उन्होंने बताया कि आईएमएफ ने हाल ही में कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस वृद्धि के कई पहलू हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण आने वाले दिनों में सभी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि है। प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल के दिनों में ऑटोमोबाइल और फुटवियर उद्योगों ने उत्पादन और निर्यात में नए रिकॉर्ड हासिल किए हैं, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पहली बार खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के कारोबार को पार कर लिया है, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार पैदा हुए हैं।
श्री मोदी ने कहा, “मुंबई जल्द ही विश्व ऑडियो विजुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) 2025 की मेजबानी करेगा। युवाओं पर केंद्रित इसका आयोजन युवा रचनाकारों को पहली बार ऐसा मंच प्रदान करेगा। यह शिखर सम्मेलन मीडिया, गेमिंग और मनोरंजन के क्षेत्र में नवाचार करने वालों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करेगा।” उन्होंने कहा कि मनोरंजन स्टार्टअप को निवेशकों और उद्योग के दिग्गजों से जुड़ने का मौका मिलेगा, जिससे यह दुनिया के सामने अपने विचारों को पेश करने का सबसे बड़ा मंच बन जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से एआई, एक्सआर और इमर्सिव मीडिया के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा, “वेव्स भारत के डिजिटल कंटेंट के भविष्य को ऊर्जा प्रदान करेगा।” उन्होंने भारत के युवाओं की समावेशिता की सराहना की और इस बात पर प्रकाश डाला कि समाज का हर वर्ग देश की उपलब्धियों में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की बेटियां आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने हाल ही में यूपीएससी के नतीजों का हवाला दिया, जहां शीर्ष दो स्थान महिलाओं ने हासिल किए और शीर्ष पांच में से तीन टॉपर महिलाएं हैं। श्री मोदी ने कहा, “नौकरशाही से लेकर अंतरिक्ष और विज्ञान तक के क्षेत्रों में महिलाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। हमारी सरकार स्वयं सहायता समूहों, बीमा सखियों, बैंक सखियों और कृषि सखियों जैसी पहलों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे नए अवसर पैदा हुए हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि हजारों महिलाएं अब ड्रोन दीदी के रूप में काम कर रही हैं, जो अपने परिवारों और गांवों के लिए समृद्धि सुनिश्चित कर रही हैं।
आज रोजगार पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आपको मिला यह पद आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अपने जीवन के अगले चरणों को न केवल खुद के लिए बल्कि राष्ट्र के लिए भी समर्पित करें। उन्होंने यह भी कहा कि जन सेवा की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी सेवा के प्रति सर्वोच्च सम्मान के साथ काम करता है, तो उसके प्रयासों को राष्ट्र को एक नई दिशा में ले जाने की ताकत मिलती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों के कर्तव्यों का पालन, नवाचार और प्रतिबद्धता भारत के प्रत्येक नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने में सीधे योगदान देगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति जिम्मेदारी के पदों पर पहुंचता है, तो नागरिक के रूप में उसके कर्तव्य और भूमिकाएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। उन्होंन इस दिशा में जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर प्रकाश डाला और सभी को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सेवा के भाव के रूप में अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ईमानदारी और समर्पण के साथ, भारत एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनेगा। उन्होंने युवाओं से 140 करोड़ भारतीयों के सपनों और आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए काम करने का आग्रह किया।
रायपुर, / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर श्री तिवारी का पारंपरिक शाल ओढ़ाकर तथा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट बेलमेटल कला से निर्मित नंदी की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय और सांसद मनोज तिवारी के बीच छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक संस्कृति और राज्य में उभरते फिल्म उद्योग सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री तिवारी को राज्य सरकार द्वारा लोककला के संरक्षण, संवर्धन तथा फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना की दिशा में उठाए जा रहे कदमों से भी अवगत कराया।
सांसद श्री तिवारी ने मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक धरोहरों को राष्ट्रीय पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की।
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह आश्वासन दिया है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को जल्द ही भारतीय धरती पर उनके नापाक कृत्यों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्री भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के मार्शल अर्जन सिंह पर एक स्मारक व्याख्यान देते हुए यह बात कही। उन्होंने आतंकवाद कतई बर्दाश्त न करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दोहराया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर आवश्यक तथा उचित कदम उठाएगी।
श्री सिंह ने कहा कि भारत एक पुरानी सभ्यता है और इतना बड़ा देश कभी भी किसी भी आतंकी गतिविधि से घबरा नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि इस कायराना हरकत के खिलाफ हर भारतीय एकजुट है। श्री सिंह ने कहा कि न केवल हमला करने वालों को, बल्कि भारतीय धरती पर ऐसे नापाक कृत्य करने के लिए पर्दे के पीछे से साजिश रचने वालों को भी जल्द ही उचित जवाब दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने सीमा पार से सहायता प्राप्त आतंकवादी घटनाओं के संदर्भ में कहा, “इतिहास साक्षी रहा है कि देशों का पतन दुश्मन की हरकतों के कारण नहीं, बल्कि उनके अपने कुकर्मों के कारण हुआ है। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि सीमा पार के लोग इतिहास के सबक को और करीब से देखेंगे।”
राजनाथ सिंह ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों द्वारा धर्म को निशाना बनाकर किए गए कायराना हमले में हमारे देश ने कई निर्दोष नागरिकों को खो दिया है। इस अत्यंत अमानवीय कृत्य ने हमें बहुत पीड़ा पहुंचाई है। रक्षा मंत्री ने दुःख की इस घड़ी में दिवंगत जनों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
श्री सिंह ने भारतीय वायुसेना की शुरू से अब तक की यात्रा को एक महत्वाकांक्षी, प्रेरणादायक और परिवर्तनकारी बताया, जो न केवल आसमान छूने के बारे में है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने के बारे में भी है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद, भारतीय वायुसेना स्वतंत्रता के बाद और अधिक मजबूत हुई है। श्री सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना आज एक सशक्त स्तंभ के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का ध्यान सशस्त्र बलों को आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर रूपान्तरित करने में है। उन्होंने भारतीय वायुसेना को क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। श्री सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता की ओर यात्रा एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रतिबद्धता, सहयोग और एकीकृत दृष्टिकोण समय की मांग है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि वर्तमान में भारतीय वायुसेना अच्छी तरह से सुसज्जित व अत्यधिक प्रौद्योगिकी-उन्मुख है, तो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भी मजबूत होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज रक्षा निर्माण में न केवल सार्वजनिक क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, बल्कि निजी उद्योग जगत भी इसमें बड़े उत्साह के साथ भाग ले रहा है। रक्षा उत्पादन का क्षेत्र जैसे-जैसे तकनीक-उन्मुख होता जा रहा है, स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। ये रक्षा नवाचार की रीढ़ साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हाई-टेक युद्ध में निजी क्षेत्र, स्टार्ट-अप्स व एमएसएमई की भूमिका और भी अधिक बढ़ने वाली है।
श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एयरो-इंजन विकास को सरकार की प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि इंजन को भारत में ही सह-विकास और सह-उत्पादन के मॉडल पर बनाया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 21वीं सदी में शक्ति का झुकाव एशिया की ओर होने के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार अस्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और तकनीकी क्रांति से उत्पन्न जटिल चुनौतियों से निपटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, वरिष्ठ असैन्य एवं सैन्य अधिकारी तथा भारतीय वायुसेना के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मी भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के कार्यक्रम में भाग लेंगे प्रधानमंत्री बिहार में 13,480 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे प्रधानमंत्री बिहार में अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो भारत रैपिड रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 24 अप्रैल को बिहार का दौरा करेंगे। वे मधुबनी जाएंगे और सुबह करीब 11:45 बजे राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। वे 13,480 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे और इस मौके पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस अवसर पर वे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को मान्यता देने और प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार भी प्रदान करेंगे।
प्रधानमंत्री बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ में लगभग 340 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र और रेल अनलोडिंग सुविधा की आधारशिला रखेंगे। इससे आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने और थोक एलपीजी परिवहन की दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी।
क्षेत्र में बिजली के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए, प्रधानमंत्री बिहार में 1,170 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत 5,030 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे।
देश भर में रेल संपर्क को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री सहरसा और मुंबई के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस, जयनगर और पटना के बीच नमो भारत रैपिड रेल और पिपरा और सहरसा तथा सहरसा और समस्तीपुर के बीच ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। वे सुपौल पिपरा रेल लाइन, हसनपुर बिथान रेल लाइन और छपरा और बगहा में दो 2-लेन रेल ओवर ब्रिज का भी उद्घाटन करेंगे। वे खगड़िया-अलौली रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी में सुधार होगा और क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास होगा।
प्रधानमंत्री दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत बिहार के 2 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को लगभग 930 करोड़ रुपये के सामुदायिक निवेश कोष के लाभ वितरित करेंगे।
प्रधानमंत्री पीएमएवाई-ग्रामीण के 15 लाख नए लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र सौंपेंगे और देश भर के 10 लाख पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को किस्तें जारी करेंगे। वे बिहार में 1 लाख पीएमएवाई-जी और 54,000 पीएमएवाई-यू घरों के गृह प्रवेश को चिन्हित करते हुए कुछ लाभार्थियों को चाबियां सौंपेंगे।
राष्ट्रीय राजधानी में आईआईआईडीईएम में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 229 बीएलओ, 12 ईआरओ और 2 डीईओ भाग ले रहे हैं
बिहार के राज्य पुलिस नोडल अधिकारी (एसपीएनओ) और पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष एक-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रारंभ
नई दिल्ली । भारत निर्वाचन आयोग भारत अंतराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM), नई दिल्ली में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए एक 2-दिवसीय प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। यह चुनाव होने वाले राज्य बिहार से प्रशिक्षित होने वाला बीएलओ का तीसरा बैच है। इस 2-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य से 229 बीएलओ, 12 ईआरओ और 2 डीईओ भाग ले रहे हैं। बिहार के राज्य पुलिस नोडल अधिकारी (एसपीएनओ) और पुलिस अधिकारियों के लिए एक विशेष एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आज शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में किया जिसके उपरांत उन्होंने प्रतिभागियों के साथ बातचीत भी की।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बीएलओ को सांविधिक ढांचे के अनुसार उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों से परिचित कराना और उन्हें त्रुटि-मुक्त निर्वाचक नामावली सुनिश्चित करने के लिए तैयार करना है। उन्हें उनकी जिम्मेदारियों में सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए आईटी अनुप्रयोगों में भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
आईआईआईडीईएम में चल रहे प्रत्यक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के पहले चरण में यह नवीनतम प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें चुनाव होने वाले राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के 555 बीएलओ और बिहार के 10 मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीतिक दलों के 279 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-1) को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। ये सुप्रशिक्षित बीएलओ विधान सभा स्तर के मास्टर ट्रेनर्स (एएलएमटी) के एक ऐसे दल का निर्माण करेंगे, जिनसे देश भर में बीएलओ के पूरे नेटवर्क को मजबूती मिलेगी।
बिहार के एसपीएनओ और पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण का उद्देश्य चुनाव अधिकारियों और पुलिस के बीच विशेषकर कानून और व्यवस्था, अतिसंवेदनशीलता आकलन (vulnerability assessment), अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) की तैनाती और आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू कराने के क्षेत्रों में समन्वय को बेहतर बनाना है, ताकि चुनाव प्रबंधन को और बेहतर बनाया जा सके।
अब तक ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, ब्राजील, मिस्र, फ्रांस, इंडोनेशिया, इजरायल, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े लोकतंत्रिक देशों सहित 141 देशों के 3000 से अधिक प्रतिभागियों ने आईआईआईडीईएम में भारत की विश्व स्तर पर मान्यताप्राप्त चुनावी प्रबंधन पद्धतियों वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाया है।
खेल अधोसंरचनाओं के निर्माण के प्रस्ताव पर केन्द्रीय मंत्री ने दी सहमति
रामानुजगंज विघानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बनेंगे इंडोर स्टेडियम, क्रीडा परिसर, क्रिकेट स्टेडियम का भी होगा निर्माण रायपुर,/छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने दिल्ली प्रवास के दौरान आज केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से उनके निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। मंत्री श्री नेताम और केन्द्रीय मंत्री डॉ. मांडविया के मध्य छत्तीसगढ़ के विकास हेतु योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री नेताम द्वारा इस दौरान रामानुजगंज-बलरामपुर जिले के विभिन्न स्थानों में खेलो इंडिया मद से खेल अधोसंरचना निर्माण के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया ने सैंद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए जल्द स्वीकृति देने का आश्वासन दिया। मंत्री श्री रामविचार नेताम ने बताया कि उनके इस प्रस्ताव की स्वीकृति मिल जाने से छत्तीसगढ़ के दुरूस्थ जिले रामानुजगंज-बलरामपुर में भी खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया के तर्ज पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी खेलो छत्तीसगढ़ के माध्यम से राज्य के युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने का काम कर रही है।
मंत्री श्री नेताम ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया को विधानसभा क्षेत्र रामानुजगंज जिला बलरामपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत गांजर में स्टेडियम निर्माण एवं समतलीकरण कार्य लागत 1 करोड़ 50 लाख रूपए के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसी प्रकार ग्राम त्रिशुली हल्दीमोड के पास क्रिकेट मैदान स्टेडियम निर्माण लागत 1 करोड़ 50 लाख रूपए डिण्डो में मिनी स्टेडियम निर्माण लागत 1 करोड़ रूपए, रामानुजगंज, बलरामपुर और रामचंद्रपुर में मल्टीपर्पस इंडोर स्टेडियम का निर्माण हेतु लागत राशि प्रति कार्य 15-15 करोड़ रूपए का प्रस्ताव दिया है। इसी तरह रामानुजगंज में बॉलीवाल तथा बैडमिंटन के लिए पक्के मैदान एवं सीटिंग बैच के निर्माण के लिए 5 करोड़ तथा रामानुजगंज में ही सर्वसुविधा युक्त क्रीडा परिसर का निर्माण जिसकी लागत 10 करोड़ रूपए अनुमानित है का प्रस्ताव केन्द्रीय खेल एवं युवा मंत्री डॉ. मंडाविया के समक्ष् रखा गया है। केन्द्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया ने इन प्रस्तावों पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए जल्द स्वीकृति का आश्वासन दिया है। इन कार्यों की स्वीकृति हो जाने पर रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र में भी खेल गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा।