लखनऊ, | हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित “हेल्प यू ब्लड डोनर अभियान” को एक नई ऊंचाई मिली जब सुप्रसिद्ध भजन, ग़ज़ल एवं बॉलीवुड गायिका श्रीमती प्रतिभा सिंह बघेल ने इस अभियान की ब्रांड एंबेसडर बनने की सहमति प्रदान की। उनके इस सहयोग से रक्तदान की आवश्यकता और महत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुण्य कार्य में भागीदार बनकर जीवन बचाने में योगदान देंगे।
हेल्प यू ट्रस्ट के संकल्प को नई दिशा
इस ऐतिहासिक अवसर पर, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी डॉ. हर्ष वर्धन अग्रवाल ने कहा, “ट्रस्ट विगत 13 वर्षों से रक्तदान जागरूकता एवं शिविरों के माध्यम से सेवा कार्य कर रहा है। यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि आज श्रीमती प्रतिभा सिंह बघेल ने ‘हेल्प यू ब्लड डोनर अभियान’ का ब्रांड एंबेसडर बनना स्वीकार किया है। उनके इस जुड़ाव से समाज के हर वर्ग में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे रक्त की कमी से जूझ रहे अस्पतालों और मरीजों को सहायता मिलेगी। हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके साथ से यह अभियान और अधिक प्रभावी होगा और लाखों जीवन बचाने में सहायक सिद्ध होगा।”
प्रतिभा सिंह बघेल की प्रतिबद्धता
श्रीमती प्रतिभा सिंह बघेल ने इस अवसर पर कहा, “‘हेल्प यू ब्लड डोनर अभियान’ का हिस्सा बनकर मुझे अत्यंत गर्व महसूस हो रहा है। रक्तदान एक ऐसा पुण्य कार्य है जिससे किसी जरूरतमंद को नया जीवन मिल सकता है। मैं इस अभियान के माध्यम से समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए संकल्पबद्ध हूं और आशा करती हूं कि हम सभी मिलकर अधिक से अधिक लोगों को इस नेक कार्य के लिए प्रेरित कर सकेंगे। मैं स्वयं मुंबई पहुंचकर सबसे पहले रक्तदान करूंगी और ‘हेल्प यू ब्लड डोनर अभियान’ को राष्ट्रीय अभियान बनाने में अपना पूरा योगदान दूंगी। रक्तदान—महादान है, आइए, एकजुट होकर जीवन बचाएं।”
वाराणसी। काशी तमिल संगमम 3.0 का आज वाराणसी के नमो घाट पर समापन हुआ। यह आयोजन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया। जिसमें भारत सरकार के कई मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार की भी अहम भूमिका रही। जिसने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को चरितार्थ किया। यह कार्यक्रम दो राज्यों के संस्कृति एकता को जोड़ने के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। 10 दिनों में 1200 की संख्या में आए डेलिगेट्स ने काशी के नमो घाट हनुमान घाट बाबा विश्वनाथ सहित अन्य मंदिरों में दर्शन पूजन किया और बीएचयू का भ्रमण करते हुए एकेडमिक कार्यक्रम का हिस्सा बने।
कार्यक्रम के अंतर्गत सभी डेलीगेट महाकुंभ में स्नान करने पहुंचे और वहां से फिर 500 साल बाद बन रहे अयोध्या में प्रभु राम लाल के मंदिर और उनके दर्शन करके अद्भुत नजर आए। अयोध्या में दर्शन के दौरान कुछ डेलिगेट्स के आंखों में आंसू भी दिखाई दिया और उन्होंने मंदिर में दान भी किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक मंच पर दिखे सभी कलाकार बजाया मंगल ध्वनि
सांस्कृतिक कार्यक्रम के आरम्भ में बनारस की छात्राओं के समूह द्वारा स्वागत वंदन गीत का गायन किया गया तत्पश्चात तमिलनाडु की पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें थप्पत्तम, कुम्मी, कोलाट्टम, अम्मानट्टम एवं ग्रामिया कलाई अट्टम प्रमुख रहे। थप्पत्तम नृत्य में कलाकार विशेष प्रकार के ड्रम (थप्पू) का प्रयोग करते हैं, जिसे मुख्य रूप से तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सवों और सामाजिक आयोजनों के दौरान प्रस्तुत किया जाता है। कुम्मी नृत्य में महिलाएँ एक सर्कल में ताल मिलाकर ताली बजाते हुए गीत गाती हैं, जिससे यह नृत्य सामूहिकता और हर्षोल्लास का प्रतीक बनता है।
कोलाट्टम, जिसे ‘लाठी नृत्य’ भी कहा जाता है, में नर्तक अपने हाथों में छोटी-छोटी लकड़ियाँ लेकर उन्हें एक-दूसरे से टकराते हुए नृत्य करते हैं, जिससे यह नृत्य टीम भावना और समन्वय का प्रतीक बन जाता है। अम्मानट्टम नृत्य देवी शक्ति की आराधना में किया जाता है, जिसमें नृत्यांगनाएँ भक्ति भाव से देवी की स्तुति करती हैं, वहीं ग्रामिया कलाई अट्टम तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाने वाला लोक नृत्य है, जो वहाँ की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को प्रदर्शित करता है। इन रंगारंग प्रस्तुतियों ने वाराणसी और तमिल संस्कृति के अद्वितीय मेल का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। काशी तमिल संगमम 3 के तहत आयोजित इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दोनों राज्यों की सांस्कृतिक समृद्धि को देखा इस 10 दिनों में दिखने को मिला। जिससे यह आयोजन भारत की विविधता में एकता का अद्भुत प्रतीक बन गया है।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री, ओडिशा के मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य अतिथि हुए शामिल
वाराणसी,: काशी तमिल संगमम का भव्य समापन समारोह वाराणसी के प्रतिष्ठित नमो घाट पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार ने कहा कि काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए हम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। सरकार के प्रयासों से युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास, उद्यमिता और सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह महाकुंभ ऐसे समय में हो रहा है जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया गया है, और यह संगमम केवल अतीत को संजोने का नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय संस्कृति को आकार देने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने काशी तमिल संगमम 3.0 को संस्कृति के एकीकरण और प्रेम व सम्मान के एक सूत्र में पिरोने का महोत्सव बताया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह आयोजन भारत की एकात्मता और “विविधता में एकता” का प्रतीक बन रहा है।
इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि काशी और तमिलनाडु की गहरी जड़ें सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव मनाने के लिए एक साथ आई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्रालय के प्रयासों से भारत की शिक्षा और सांस्कृतिक नीतियां अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 जैसी पहल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं और अनुसंधान, नवाचार, एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दे रही हैं।
काशी तमिल संगमम 3.0 के इस सफल आयोजन ने भारत की गंगा-जमनी तहज़ीब और सांस्कृतिक एकता को और अधिक सशक्त किया है। यह आयोजन न केवल भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक माध्यम बना, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी बल दिया। समापन समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों ने भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें और एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत का निर्माण हो सके।
*महाशिवरात्रि को श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ के दृष्टिगत जिला प्रशासन एडवाइजरी जारी किया*
*अथवा घर पर रहकर श्री काशी विश्वनाथ जी का ऑनलाइन दर्शन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सोशल मीडिया हैंडल्स, यूट्यूब, टाटा स्काई आदि पर प्राप्त कर सकते हैं*
*द्वार सं0-4 (गोदौलिया द्वार) से सामान्य जन का प्रवेश बाधित रहेगा*
*महाशिवरात्रि पर्व 25 से 27 फरवरी तक किसी भी प्रकार की विशिष्ट अनुरोध अथवा दर्शन व्यवस्था पूरी तरह से बन्द रहेगी*
*दर्शन में अत्यधिक समय लगने की सम्भावना है ऐसे में खाली पेट रहने से स्वास्थ्य के लिए समस्या उत्पन्न हो सकती है*
*श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मोबाइल लॉकर इत्यादि की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी*
*एकल दिशा मूवमेंट प्लान के कारण किसी दुकान इत्यादि में रखे सामान को लेने के लिए अतिरिक्त असुविधा कारित होगी*
*जन सामान्य मंदिर में प्रतिबंधित सामान यथा मोबाइल, पर्स, स्मार्ट वॉच, चाभी, इयरफोन, इलेक्ट्रानिक्स व धातु आदि का सामान इत्यादि अपने घर या होटल में ही छोड़कर आएं*
*समूह में आने वाले दर्शनार्थी अपने वापस पहुंचने का स्थल घर या होटल ही तय करके आएं तथा कतार या मंदिर में अलग हो जाने पर एक-दूसरे की प्रतीक्षा में अनावश्यक न रूकें*
वाराणसी। महाकुम्भ-2025 पर श्रद्धालुओं के पलट प्रवाह के कारण वाराणसी में पहले से ही देश के विभिन्न प्रांतों से आए दर्शनार्थियों की अत्यधिक संख्या है। महाशिवरात्रि पर्व भी महत्वपूर्ण स्नान तिथि होने के कारण महाशिवरात्रि पर्व 26 दिसंबर दिन-बुधवार को महाकुम्भ से श्रद्धालुओं की अधिक संख्या में काशी आगमन होगा। विभिन्न आखाड़ों से साधु-संतो एवं नागा साधुओं द्वारा शोभायात्रा निकालते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया जायेगा। इस कारण प्रातः 06 बजे से लेकर दोपहर बाद तक गेट नं0-4 (गोदौलिया गेट) की तरफ से सामान्य जन का प्रवेश सम्भव नहीं हो सकेगा।
उक्त जानकारी देते हुए अपर जिलाधिकारी (नगर) आलोक कुमार वर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर दर्शनार्थियों की अत्यधिक भीड़ होने की सम्भावना है, जिससे दर्शन के लिए कम समय एवं सामान्य दर्शनार्थियों के लिए गेट नं0-4 पूरी तरह से अवरूद्ध होने के कारण लाईन में लगे दर्शनार्थियों की प्रतीक्षा का समय बढ़ने की सम्भावना है। इसलिए गेट नं0-4 से मन्दिर दर्शन जाने वाले श्रद्धालु ललिता घाट या सरस्वती फाटक के मार्ग से दर्शन करें। ऐसी दशा में निःशक्त जन, वृद्धजन दिव्यांग जन व छोटे बच्चों को विशेष समस्या हो सकती है। उन्होंने उक्त के दृष्टिगत आमजन से अपील की है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से वाराणसी की तरफ आने वाले लोग महाशिवरात्रि के दिन अन्य शिव मंदिरों में दर्शन प्राप्त करें अथवा घर पर रहकर श्री काशी विश्वनाथ जी का ऑनलाइन दर्शन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सोशल मीडिया हैंडल्स, यूट्यूब, टाटा स्काई आदि पर प्राप्त कर सकते हैं। सामान्य जन से यह भी अपील है कि महाशिवरात्रि के दिन नागा साधुओं की शोभा यात्रा एवं उनके दर्शन-पूजन का कार्यक्रम होने के कारण गोदौलिया अथवा मैदागिन से होते हुए गेट नं0-4 की तरफ आने वाले रूट का डायवर्जन पुलिस द्वारा किया जाना है। इसलिए दोपहर 1.00 बजे तक सामान्य जनों का श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में गोदौलिया व मैदागिन के रास्ते से प्रवेश सम्भव नहीं हो पायेगा। विभिन्न अखाड़ों से साधु-संतो एवं नागा साधुओं द्वारा अत्यधिक संख्या में शोभायात्रा निकाल कर दर्शन किया जायेगा, जिस कारण द्वार सं0-4 (गोदौलिया द्वार) से सामान्य जन का प्रवेश बाधित रहेगा। गर्मी एवं उमस के वर्तमान वातावरण में अत्यधिक प्रतीक्षा अवधि होने के कारण बच्चों, महिलाओं, वृद्धों आदि के लिए गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं/दर्शनार्थियों के अधिक संख्या का दबाव होने के कारण महाशिवरात्रि पर्व 25 से 27 फरवरी तक किसी भी प्रकार की विशिष्ट अनुरोध अथवा दर्शन व्यवस्था पूरी तरह से बन्द रहेगी। उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले समस्त दर्शनार्थियों/श्रद्धालुओं से अपील की है कि खाली पेट दर्शन हेतु लाइन में न लगे, क्योंकि महाशिवरात्रि पर्व पर दर्शनार्थियों की अधिक भीड़ होने के दृष्टिगत दर्शन में अत्यधिक समय लगने की सम्भावना है ऐसे में खाली पेट रहने से स्वास्थ्य के लिए समस्या उत्पन्न हो सकती है। महाशिवरात्रि पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मोबाइल लॉकर इत्यादि की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी तथा एकल दिशा मूवमेंट प्लान के कारण किसी दुकान इत्यादि में रखे सामान को लेने के लिए अतिरिक्त असुविधा कारित होगी। इसलिए जन सामान्य मंदिर में प्रतिबंधित सामान यथा मोबाइल, पर्स, स्मार्ट वॉच, चाभी, इयरफोन, इलेक्ट्रानिक्स व धातु आदि का सामान इत्यादि अपने घर या होटल में ही छोड़कर आएं। समूह में आने वाले दर्शनार्थी अपने वापस पहुंचने का स्थल घर या होटल ही तय करके आएं तथा कतार या मंदिर में अलग हो जाने पर एक-दूसरे की प्रतीक्षा में अनावश्यक न रूकें। किसी प्रकार की स्थिति में भागने या दौड़ने का प्रयास न करें तथा सामान्य प्रवाह के अनुसार ही आगे बढ़े। कोई स्वास्थ्य समस्या होने पर निकटतम पुलिस कर्मी, मंदिर कार्मिक या स्वयंसेवी को तत्काल सूचित करें।
*आईटी आर्किटेक्चर, प्रभावी संचार, सोशल मीडिया आउटरीच बढ़ाने और आधुनिक चुनाव प्रबंधन सहित कई विषयों पर होगी चर्चा, बनेगी कार्ययोजना*
रायपुर./ भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी 4 मार्च और 5 मार्च को देश के सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (CEOs) का सम्मेलन आयोजित किया गया है। नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन में देशभर के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आईटी आर्किटेक्चर, प्रभावी संचार, सोशल मीडिया आउटरीच को बढ़ाने, चुनावी प्रक्रियाओं में विभिन्न पदाधिकारियों की वैधानिक भूमिका और आधुनिक चुनाव प्रबंधन के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।
भारत निर्वाचन आयोग के नवनियुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यभार संभालने के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों का यह पहला सम्मेलन है। आयोग ने इसके लिए सभी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को अपने-अपने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एक-एक डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) और ईआरओ (निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) को नामित करने के निर्देश दिए हैं। वैधानिक प्राधिकारियों के रूप में सीईओ, डीईओ और ईआरओ राज्य, जिला और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर महत्वपूर्ण पदाधिकारी हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों का दो दिनों का यह सम्मेलन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों को विचार-मंथन और आपस में एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन के पहले दिन आईटी आर्किटेक्चर, प्रभावी संचार, सोशल मीडिया आउटरीच को बढ़ाने और चुनावी प्रक्रियाओं में विभिन्न पदाधिकारियों की वैधानिक भूमिका सहित आधुनिक चुनाव प्रबंधन के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होगी। वहीं दूसरे दिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सीईओ पहले दिन विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा पर अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे।
सरकार के पहल पर जताई खुशी , सुब्रमण्यम भारती,और मंदिरों के इतिहास को जाना
वाराणसी। काशी तमिल संगमम-3 में स्टार्ट-अप, इनोवेशन,रिसर्च ग्रुप हनुमान घाट पहुंचा। जहां सभी ने गंगा में स्नान कर मां की पूजा करते हुए सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। वहीं, मौजूद आचार्यों ने विस्तार से गंगा के विभिन्न घाटों के इतिहास के बारे में बताया।
गंगा स्नान के बाद सभी मेहमानों ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। सभी मेहमानों को मंदिरों के इतिहास, दिव्यता और भव्यता के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद तमिल मेहमान हनुमान घाट स्थित सुब्रमण्यम भारती के घर गए। वहां उनके परिवार के सदस्यों से उन्होंने मुलाकात की। डेलिगेट्स के अंदर काफी कुछ जानने की जिज्ञासा दिखी। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के घर के समीप पुस्तकालय का भी भ्रमण किया और उसके बारे में जानकारी प्राप्त की।
सुब्रमण्यम भारतीय के घर भ्रमण करने के बाद दल कांची मठ पहुंचा और वहां के इतिहास के बारे में जानकारी ली। काशी में दक्षिण भारतीय मंदिर को देखकर दल के सदस्य उत्साहित दिखे। पं. वेंकट रमण घनपाठी का कहना है कि काशी और तमिलनाडु का गहरा रिश्ता है। ये समागम महज एक पखवाड़े का नहीं सदियों पुराना है। पं. वेंकट रमण घनपाठी ने बताया कि काशी के हनुमान घाट, केदारघाट, हरिश्चंद्र घाट पर मिनी तमिलनाडु बसता है। जहां एक दो नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों के हजारों परिवार बसते हैं, जो इन दोनों राज्यों के मधुर रिश्ते को दर्शाते हैं। केवल हनुमान घाट पर 150 से अधिक घर तमिल परिवारों के हैं, जिनकी गलियों में हर दिन काशी तमिल संगमम होता है।
रमन स्वामी ने बताया काशी विश्वनाथ मंदिर काफी बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल काफी अच्छा है जो हम लोग काशी प्रयागराज और अयोध्या का भ्रमण कर रहे हैं। हमारे वाराणसी की यात्रा काफी अच्छी रही है। उन्होंने कहा कि हम 2012 में काशी आये थे लेकिन अब की काशी स्वच्छ और साफ है काशी विश्वनाथ मंदिर जाने का रास्ता भी काफी आसान हो गया है।
वाराणसी, / काशी तमिल संगमम काशी और कांची के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के विभिन्न पहलुओं पर संवाद और चर्चा को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। सोमवार को बीएचयू के पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में आयोजित एक विशेष अकादमिक कार्यक्रम में स्टार्टअप, नवाचार, एडुटेक और अनुसंधान से संबंधित विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
डॉ. गोवरी बालाचंदर (आईआईटी बीएचयू) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के बढ़ते अनुसंधान तंत्र, नवाचार-आधारित पहलों और शिक्षा पर सरकारी नीतियों के परिवर्तनकारी प्रभावों पर चर्चा की गई।
डॉ. दीपिका कौर, प्रबंध संस्थान, बीएचयू ने भारत सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भारत में 1.5 मिलियन से अधिक स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों के विशाल नेटवर्क के साथ दुनिया की सबसे बड़ी और विविध शैक्षिक प्रणालियों में से एक है। हालांकि, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता में असमानता एक चुनौती बनी हुई है, जिसे डिजिटल परिवर्तन द्वारा दूर किया जा सकता है। उन्होंने इस अंतर को कम करने और सीखने के अवसरों को बढ़ाने के लिए विभिन्न सरकारी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही, SPARC, IMPRINT, FIST, NIRF और PMRF जैसी प्रमुख अनुसंधान और नवाचार योजनाओं पर प्रकाश डाला, जो अकादमिक और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा दे रही हैं। डॉ. कौर ने केंद्रीय बजट 2025 की प्रमुख घोषणाओं का भी उल्लेख किया, जिसमें अगले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों में 50,000 अटल लैब्स की स्थापना, आईआईटी की क्षमता का विस्तार, और उभरती प्रौद्योगिकियों को समर्थन देने के लिए डीपटेक फंड के सृजन की बात कही गई है।
प्रो. राजकिरण, प्रबंध संस्थान, बीएचयू ने अटल इनक्यूबेशन सेंटर (AIC) और महामना फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप की यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने स्टार्टअप्स और अनुसंधान-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने में इन केंद्रों की भूमिका को रेखांकित किया।
इसके बाद, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गईं:
डॉ. पन्नीर सेल्वम पेरुमैयन, अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान – उन्होंने ICARC में विकसित अत्याधुनिक सुविधाओं और कृषि अनुसंधान में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी।
डॉ. धनंजय सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान – उन्होंने भारत को विश्व में सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बताया और कहा कि सब्जी क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आजीविका प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शोधार्थी कैलाश वर्मा, भौतिकी विभाग, बीएचयू – उन्होंने अंतरिक्ष अभियानों में इलेक्ट्रॉन प्रभाव के तहत अंतरिक्ष यान की सतह सामग्री पर किए गए अपने प्रायोगिक अनुसंधान को प्रस्तुत किया।
डॉ. प्रीतम सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, सेरामिक इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी बीएचयू – उन्होंने जल-आधारित बैटरियों, हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और वैकल्पिक ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की। कार्यक्रम में एक सजीव संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS), इंजीनियरों के लिए रोजगार के अवसर और नई सब्जी किस्मों के विकास से संबंधित चर्चाएँ हुईं। कार्यक्रम का समापन प्रो. शनमुगा सुंदरम द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों का उनकी सहभागिता और मूल्यवान योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम ने भारत की शिक्षा और अनुसंधान तंत्र को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि देश वैश्विक नवाचार और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में अग्रणी बना रहे।
स्पीड पोस्ट, पार्सल जैसी आवश्यक सेवाओं को वाराणसी में रखा गया है डम्प
वाराणसी/ प्रयागराज।( जी.जी.व्यूरो ) केन्द्रीय संचार मंत्रालय की साइट पर लिखा है ” अर्जेंट है स्पीड पोस्ट करो “ जब प्रयागराज और प्रयागराज होकर जाने वाली डाक सेवा अवरुद्ध थी तब डाक, पार्सल बुक क्यों किया गया? अर्जेंट सेवा का यह हाल है कि एक माह से वाराणसी से डाक निकाली ही नहीं जा रही है। हर दिन करेक्ट स्टेटस वाराणसी में दिखा रहा है। 30 जनवरी 2025 को वाराणसी से बुक किया गया पैकेट 23 फरवरी 2025 तक वाराणसी में ही पड़ा है। इस सन्दर्भ में साइट पर दिये गये कम्प्लेन ईमेल आइडी nsh.delhi@indiapost.gov.in और cpmg_up@indiapost.gov.in पर कंसाइनमेंट नम्बर देने के बाद अब नम्बर सर्च करने पर नो रिजल्ट आ रहा है। इन मेलों पर कोई उत्तर देने, देखने और प्रभावी कार्रवाई करने वाला व्यक्ति है भी या नहीं कहा नहीं जा सकता क्योंकि सप्ताह भर में कोई उत्तर नहीं दिया गया।
डाक विभाग की लापरवाही और डाक विभाग के उच्चाधिकारियों की मनमानी से यह सेवा प्रभावित हुई है और कंज्यूमर के लिए सिरदर्द बन गई है।डाक विभाग को अपनी आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम करके रखना चाहिए था। ग्राहकों को इस तरह परेशान करने वाली नाकाम व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। उच्चाधिकारियों और केन्द्रीय संचार मंत्रालय को तत्काल संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है। उपभोक्ता डाकघरों का चक्कर काट रहे हैं।
काशी तमिल संगमम 3.0 के तहत बीएचयू में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा 45 देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल, तमिल डेलिगेट्स के साथ संवाद कार्यक्रम में लिया हिस्सा
• राजदूतों ने कहा, विश्व को भारत से मिल रही समरसता तथा सह-अस्तित्व की सीख
• विरासत का उत्सव मनाने से ही जीवंत रहती है संस्कृति, काशी तमिल संगमम इस बात को कर रहा साकारः विदेश मंत्री
वाराणसी,/ भारत दुनिया को सह-अस्तित्व और समरसता का मार्ग दिखाया है, खासतौर से ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर क्षेत्रीय हितों के टकराव के कारण संघर्ष हो रहे हैं। काशी-तमिल संगमम 3.0 के अंतर्गत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में आयोजित एक विशेष बौद्धिक सत्र के दौरान यह विचार उभरकर सामने आया। इस सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विभिन्न देशों के 45 राजदूतों ने तमिल प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। इस सत्र ने वैश्विक प्रतिनिधियों को न केवल काशी और कांची की महान संस्कृतियों के संगम को नजदीक से देखने का अवसर मिला बल्कि उन्हें नई दिल्ली से परे भारत को समझने का अनूठा मौका भी प्रदान किया।
मुख्य अतिथि के रूप में सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. एस. जयशंकर ने काशी को पूरे भारत के लिए एक सांस्कृतिक केंद्र बताया, जिससे देश के हर कोने का व्यक्ति गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करता है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोगों का काशी के प्रति विशेष लगाव है और काशी-तमिल संगमम इस अनूठे संबंध का उत्सव है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं की भूमि है, और यह अक्सर लोगों को आश्चर्यचकित करता है कि इतनी विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और विश्वासों के बावजूद यह देश एक सूत्र में कैसे बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विविधता में निहित एकता ही भारत को एक राष्ट्र के रूप में जोड़ती है। उन्होंने राजदूतों को बताया कि काशी-तमिल संगमम विविधता में एकता के उत्सव का एक आदर्श उदाहरण है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने परिकल्पित किया है।
डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इसका उत्सव मनाना जरूरी है। साथ ही दुनिया को भारत के स्वर्णिम इतिहास और इसकी जड़ों के बारे में इससे पता चलता है। उन्होंने कहा कि विरासत के उत्सव के माध्यम से ही संस्कृति जीवंत रहती हैं। भारत सरकार इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। यह विचार उन्होंने तमिल प्रतिनिधि राजगोपालन के एक प्रश्न के उत्तर में साझा किए, जिन्होंने पूछा कि इस विशेष उत्सव के दौरान मंत्री किन प्रमुख पहलुओं को उजागर करना चाहेंगे।
एरट्रिया के राजनयिक ने काशी की यात्रा और दो महान संस्कृतियों के समागम को देखने के विशेष अवसर की सराहना की। उन्होंने अपने भारतीय शिक्षकों को याद करते हुए कहा कि वे भारत के लोगों, संस्कृति और विरासत के बारे में बताया करते थे। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि भारत के विभिन्न हिस्सों के लोगों के बीच जो संबंध हैं, वही इस देश को एक सूत्र में बांधते हैं।
रवांडा के उप उच्चायुक्त ने भी इस चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारतीयों के बीच जो एकजुटता और समरसता है, वह पूरी दुनिया के लिए एक सीख है। उन्होंने दुनिया भर में जारी संघर्षों और युद्धों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीयों द्वारा अपनाई गई सद्भावना और समरसता अनुकरणीय है।
इसी क्रम में आइसलैंड के राजदूत ने कहा कि भारत की विविधता इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जो इसके साझा मूल्यों और संस्कृति में परिलक्षित होती है। जमैका के उच्चायुक्त ने इस बात का उल्लेख किया कि इस वर्ष जमैका में भारतीयों के आगमन के 108 वर्ष पूरे होने पर उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और जमैका के लोगों के संघर्ष और सफलता की कई अनकही कहानियाँ हैं जिन्हें सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने भारत में कैरेबियन अध्ययन केंद्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया।
तमिल प्रतिनिधि, सुश्री मीनाक्षी ने सुझाव दिया कि तमिलनाडु में और अधिक प्रयास किए जाएँ ताकि लोगों को खास तौर पर ग्रामीण महिलाओं को भारत सरकार की नवाचार और स्टार्टअप को समर्थन देने वाली पहलों के बारे में जागरूक किया जा सके।
अतिथियों का स्वागत करते हुए, प्रो. संजय कुमार, कार्यवाहक कुलपति, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने कहा कि विभिन्न देशों के मिशन प्रमुखों की उपस्थिति भारत की वैश्विक पहुंच और ज्ञान तथा संस्कृति के माध्यम से सभ्यताओं के बीच स्थापित होने वाले ऐतिहासिक संबंधों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 1916 में महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बीएचयू ज्ञान, राष्ट्रीय एकता और शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की वैश्विक उपस्थिति और विदेशी विशेषज्ञों की भागीदारी का उल्लेख किया। प्रो. कुमार ने बताया कि बीएचयू एक वैश्विक संस्थान के रूप में स्थापित हो रहा है, जहां दुनिया भर से विद्वान, शोधार्थी और छात्र आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो संभवतः भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों में सबसे अधिक है।
सत्र का संचालन आईआईटी-बीएचयू के प्रोफेसर वी. रामनाथन ने किया, जिसमें भारत की साझा विरासत के उत्सव और इसके वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श हुआ। वह विरासत जिसने भारत को न केवल एक वैश्विक शक्ति के रूप में बल्कि एक मजबूत लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो दुनिया के लिए एक मिसाल है।
महाकुंभ-2025 में दिव्यांगजन सशक्तीकरण पर मंथन, वेब पोर्टल हुआ लॉन्च
दिव्यांगजन के अधिकार और शिक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला, महाकुंभ में आए देशभर के आयुक्त
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा से लेकर दिव्यांगता के आकलन तक, राष्ट्रीय कार्यशाला में गहन चर्चा
महाकुंभ नगर। महाकुंभ-2025 के अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा आयोजित ‘दिव्य कुम्भ प्रदर्शनी’ के अंतर्गत राज्य आयुक्तों के राष्ट्रीय सम्मेलन में दिव्यांग पोर्टल का उद्घाटन किया गया। इस कार्यशाला में देशभर के राज्य आयुक्तों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहां दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण, उनके अधिकारों और शिक्षा पर व्यापक चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल, मुख्य आयुक्त, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य आयुक्त दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के जरिए दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं और सेवाओं की जानकारी सुगमता से उपलब्ध होगी।
महाकुंभ पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन
कार्यशाला के दौरान महाकुंभ-2025 पर आधारित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया, जिसमें दिव्यांगजनों की भागीदारी और उनके लिए की गई विशेष व्यवस्थाओं को दिखाया गया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, श्री सुभाष चंद शर्मा ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की।
संयुक्त सचिव, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, श्री राजीव शर्मा ने दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके सशक्तीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों का संबोधन और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण पर चर्चा
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में दिव्यांगजनों की सामाजिक भागीदारी, शिक्षा और रोजगार को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. संजय सिंह और जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला में ALIMCO, कानपुर और क्षेत्रीय पुनर्वास केंद्र, लखनऊ के विशेषज्ञों ने दिव्यांगजनों के लिए तकनीकी सहायता और पुनर्वास कार्यक्रमों की जानकारी दी। दिव्यांगता के आकलन और UDID कार्ड जारी करने से संबंधित भारत सरकार की 12 मार्च 2024 और 16 अक्टूबर 2024 की अधिसूचनाओं को लागू करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर विशेष मंथन
कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक ड्रॉपआउट रोकने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। इसके तहत सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को प्रभावी बनाने और दिव्यांग छात्रों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने के विषय पर चर्चा हुई।
देशभर के वरिष्ठ अधिकारी और आयुक्त रहे मौजूद
कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य आयुक्तों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से श्री प्रवीण पुरी (आईएएस, महाराष्ट्र), विजय राजपूत (आईएएस, गुजरात), सी. उदय कुमार (आईएएस, अंडमान-निकोबार), श्रीमती अदिति चौधरी (आईएएस, पश्चिम बंगाल), श्रीमती सोनाली पी. वायंगकर (प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश), श्रीमती बृतती हरिचंदन (ओडिशा), गुरुप्रसाद पवस्कर (गोवा), एस.डी. सुंदरेशन (पुडुचेरी), श्रीमती शैलजा (तेलंगाना), दास सूर्यवंशी (कर्नाटक), प्रो. पी.टी. बाबूराज (केरल) और अचिंतन किलिकदर (त्रिपुरा) शामिल थे।
इसके अतिरिक्त, एस. गोविंदराज (आयुक्त, दिव्यांगजन, भारत सरकार), प्रवीण प्रकाश अंबष्ठ (उप मुख्य आयुक्त, दिव्यांगजन, भारत सरकार), अमित कुमार सिंह (संयुक्त निदेशक, निदेशालय दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ), रणजीत सिंह (संयुक्त निदेशक, निदेशालय दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ), मधुरेंद्र पर्वत (रजिस्ट्रार, जगदगुरु रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट), अभय कुमार श्रीवास्तव (उपनिदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, प्रयागराज मंडल, प्रयागराज), सतेंद्र त्रिपाठी (उपनिदेशक, वाराणसी मंडल, वाराणसी), राजेश मिश्रा (उपनिदेशक, विन्ध्याचल मंडल, विन्ध्याचल) और विभिन्न जिलों के दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी भी इस कार्यशाला में उपस्थित रहे।
दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा, उनके सशक्तीकरण और शिक्षा की पहुंच को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।