रायपुर / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 24 मार्च को छत्तीसगढ़ के एकदिवसीय दौरे में राजधानी रायपुर पहुंचेंगी और छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती समारोह में शामिल होंगी।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 24 मार्च को प्रातः 10.35 बजे स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर पहुंचेंगी और सीधे छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए रवाना होंगी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु प्रातः 11.15 बजे से छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती समारोह में शामिल होंगी। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सहित विधानसभा के सदस्यगण उपस्थित रहेंगे।
सांसद निधि के अन्तर्गत 5 करोड़ की लागत की 135 विकास परियोजनाओं का बटन दबाकर किया शिलान्यास सोनभद्र / सोनभद्र में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री भारत सरकार हरदीप सिंह पुरी का जनपद भ्रमण के दौरान कलेक्ट्रेट पहुंचने पर मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार अवनीश अवस्थी, जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इस दौरान मंत्री जी ने जिला स्तरीय अधिकारियों से परिचय प्राप्त करते हुए केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के सम्बन्ध में संक्षिप्त विवरण की गहनता पूर्वक समीक्षा करते हुए जानकारी प्राप्त किये।
इस दौरान मंत्री जी ने कहा कि जनपद सोनभद्र मे कैबिनेट मंत्री के रूप में नहीं आता, इस जनपद से मेरा एक अलग ही लगाव है, जनपद सोनभद्र देश के अति पिछड़े 112 जनपदों में आज विकास के मामले में तीसरे स्थान पर है, जनपद सोनभद्र में जनकल्याणकारी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है, जनपद में कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अस्पताल में आवश्यक मूलभूत सुविधा, एम्बुलेंस सुविधा, आक्सीजन प्लांट आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराने का काय किया गया है, सोनभद्र को रेलवे कनेक्टीविटी और एयर कनेक्टीविटी से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किया जायेगा । रांची राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव जनपद में प्रारंभ हो गया है, इसी प्रकार से जनपद में अन्य ट्रेनों के ठहराव का कार्य किया जायेगा ।
आज जनपद के अति पिछड़े क्षेत्र की महिलाओं को सोलर कूकर की सुविधा भी उपलब्ध करायी जा रही है, जनपद में ईलाज की सुविधा बेहतर उपलब्ध कराने हेतु मेडिकल कालेज की भी स्थापना हुईं है । प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जब प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली तब उसके पूर्व 17 हजार प्रधानमंत्री आवास की मांग केन्द्र सरकार को मिलती थी, उसके बाद मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के गरीब पात्रों के लिए लाखों की संख्या में आवास की मांग की जा रही है और प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है । सोनभद्र जनपद को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता है और यहां पर्यटन की असीम संभवनाओं को देखते हुए मीनी स्वीटजरलैण्ड के रूप में यह जनपद विख्यात है।
इस दौरान राज्य मंत्री समाज कल्याण विभाग संजीव कुमार गौंड़ ने कहा कि जनजाति बाहुल्य जनपद को गोद लेने का कार्य मुख्यमंत्री जी द्वारा किया गया है और जनजाति क्षेत्र का चहुंमुखी विकास मंत्री जी के कुशल निर्देशन में हो रहा है और जनपद का विकास निरन्तर हो रहा है। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी जी ने कहा कि देश के पेट्रोलियम मंत्री जी द्वारा जनपद सोनभद्र जैसे विकास में पिछड़े जनपद को गोद लेकर विकास की रफ्तार को बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया गया है। मंत्री ने सांसद निधि के अन्तर्गत आज 135 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास बटन दबाकर किये और विकास खण्ड चोपन के ग्राम जुगैल के 300 ग्रामीणों को फ्री सौर उर्जा चूल्हा, मेडिकल कालेज को अत्याधुनिक मेडिकल वैन को दियें, जो यहां के विकास के लिए एक और बड़ा योगदान होगा। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी,अनुसूचित जनजाति के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, भाजपा जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुप्ता सहित सम्मानित जनप्रतिनिधिगण व अधिकारीगण उपस्थित रहें।
सोनभद्र / जनपद सोनभद्र में केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री भारत सरकार हरदीप सिंह पुरी ने आज विशिश्ट स्टेडियम तियरा में पहुंचकर भगवान बिरसा मुण्डा व स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर माल्यार्पण कर तीसरी तीरंदाजी प्रतियोगिता का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया । इस दौरान मंत्री ने संसद सदस्य स्थायी निधि से 12 एल0ई0डी0 सहित दो हाईमास्ट का शिलान्यास भी किया । इस दौरान मंत्री ने कहा कि जनपद सोनभद्र में तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयेजन हो रहा है, जिसमें जनपद के ही नहीं देश व प्रदेश के प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं और अपने प्रतिभा को दिखा रहे हैं, इस प्रतियोगिता के माध्यम से अच्छे खिलाड़ी स्टेट स्तर के साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर देश व प्रदेश का नाम रौशन करेंगंे, इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले 10 महिला प्रतिभाग एवं 10 पुरूष वर्ग को विशेष प्रकार का किट उपलब्ध कराया जायेगा, जिससे वह आगे की प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ सकेंगें।
, इस दौरान तीरंदाजी एसोसिशन के अध्यक्ष अवनीश अवस्थी ने कहा कि प्रदेश सरकार तीरंदाजी के क्षेत्र में लोगों को आगे लाने हेतु विशेष ध्यान दे रही है और उत्तर प्रदेश के तीरंदाजी के छात्र अब नेशनल लेबल की प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग कर रहे हैं, इस दौरान तीरंदाजी के क्षेत्र में इण्टरनेशनल स्तर पर खेलने वाले अतुल वर्मा, जीना तारा, निष्ठा गुप्ता को किट देकर मंत्री जी द्वारा सम्मान किया गया। इस दौरान तीरंदाजी एसोसएशन जनपद सोनभद्र के अध्यक्ष रामसकल, तीरंदाजी एसोसिएशन के सचिव बलिराम ने तीरंदाजी प्रतियोगिता के सम्बन्ध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी और मंत्री जी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। इस मौके पर प्रदेश सरकार के मंत्री संजीव कुमार गोंड़, जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, भाजपा जिलाध्यक्ष नन्दला गुप्ता सहित अन्य सम्बन्धित पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। इस दौरान मंत्री जी ने धनुष व तीर से निशाना भी साधा।
फरीदाबाद । आर.के. चौधरी, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी को जल संसाधन, विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए प्रतिष्ठित ‘सीबीआईपी इंडीविजुअल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, सीबीआईपी व अध्यक्ष, सीईए द्वारा आर. के. चौधरी को 21 मार्च 2025 को नई दिल्ली में सीबीआईपी (केंद्रीय सिंचाई एवं विद्युत बोर्ड) स्थापना दिवस समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान प्रदान किया गया। इस अवसर पर संजय कुमार सिंह, निदेशक (परियोजनाएं व तकनीकी), एनएचपीसी , सुप्रकाश अधिकारी, कार्यपालक निदेशक (ओएंडएम), एनएचपीसी तथा एनएचपीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
चौधरी ने बीआईटी सिंदरी से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री प्राप्त की है और उन्होंने एडवांस डिप्लोमा इन मैनेजमेंट भी किया है। चौधरी के पास जलविद्युत परियोजनाओं की संकल्पना से लेकर कमीशनिंग तक और परियोजनाओं के विकास के सभी पहलुओं में 36 वर्षों से अधिक का समृद्ध और व्यापक अनुभव है। उन्होंने भारत और भूटान में जलविद्युत के विकास में उल्लेखनीय कार्य करते हुए विशेष रूप से कलपोंग जलविद्युत परियोजना में योगदान दिया है। इस परियोजना को दूरस्थ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में निर्धारित समय से 16 माह पहले चालू किया गया था। उन्होंने तीस्ता-V (510 मेगावाट) और मांगदेछू (720 मेगावाट) जलविद्युत परियोजनाओं के चालू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेषज्ञ सदस्य के रूप में भूटान में 1020 मेगावाट ताला जलविद्युत परियोजना की हेड रेस टनल की मरम्मत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के दौरान एनएचपीसी के 94.2 मेगावाट टनकपुर पावर स्टेशन (उत्तराखंड) को “सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली जलविद्युत परियोजना” के लिए सीबीआईपी अवॉर्ड 2024 से भी सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार टनकपुर पावर स्टेशन में एनएचपीसी टीम के अथक प्रयासों, प्रचालन उत्कृष्टता और प्रतिबद्धता को मान्यता देता है। यह पुरस्कार परियोजना द्वारा लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और देश के विद्युत उत्पादन में योगदान देने तथा जलविद्युत क्षेत्र में प्रचालन दक्षता के लिए एक मानक स्थापित करने की प्रशंसा करता है। आर.के. चौधरी, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी के साथ श्री संजय कुमार सिंह, निदेशक (परियोजनाएं व तकनीकी) एनएचपीसी , सुप्रकाश अधिकारी, कार्यकारी निदेशक (ओएंडएम), एनएचपीसी , ऋषि रंजन आर्य, एचओपी, एनएचपीसी टनकपुर पावर स्टेशन और एनएचपीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, सीबीआईपी व अध्यक्ष, सीईए से यह पुरस्कार प्राप्त किया।
राष्ट्रपति ने एम्स, नई दिल्ली के दीक्षांत समारोह को सुशोभित किया
नई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के दीक्षांत समारोह को सुशोभित किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स, नई दिल्ली एक ऐसा संस्थान है, जिसने स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और आयुर्विज्ञान अनुसंधान में उत्कृष्टता हासिल करके दुनिया भर में प्रतिष्ठा अर्जित की है। यह उन लाखों रोगियों के लिए आशा का प्रतीक है, जो अक्सर दूर-दूर से इलाज के लिए आते हैं। इसके संकाय, पैरामेडिक्स और गैर-चिकित्सा कर्मचारियों की मदद से वंचितों और विशेषाधिकार प्राप्त लोगों का समान समर्पण और सहानुभूति के साथ इलाज करते हैं। यह कहा जा सकता है कि एम्स गीता के कर्म योग की जीवंत प्रयोगशाला है।
राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह मेड-इन-इंडिया की सफलता की एक गौरवपूर्ण गाथा है और यह पूरे देश में अनुकरणीय मॉडल है। अपने अस्तित्व के 69 वर्षों में, ब्रांड एम्स मूल्यों के प्रति अपने संकल्प के कारण समय की कसौटी पर खरा उतरा है। अभिनव अनुसंधान और मरीजों की देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता वास्तव में सराहनीय है।
राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एम्स ने अपने सभी प्रयासों में सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के स्वस्थ विकास के लिए सुशासन आवश्यक है और एम्स इसका अपवाद नहीं है। इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अनुसंधान से परे है। यह एक ऐसा माहौल बनाने तक फैला हुआ है, जहां हर हितधारक की आवाज सुनी जाती है, जहां संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाता है और जहां उत्कृष्टता ही आदर्श है।
भावनात्मक स्वास्थ्य के मुद्दे के बारे में राष्ट्रपति ने कहा कि यह आज की दुनिया में एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि किसी के लिए भी, खासकर युवा पीढ़ी के लिए निराशा की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि जीवन में हर नुकसान की भरपाई की जा सकती है, सिवाय एक अनमोल जीवन के नुकसान के। उन्होंने एम्स के संकाय से मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर जागरूकता अभियान शुरू करने का आग्रह किया, ताकि लोगों को इस छिपी हुई बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके।
उत्तीर्ण छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अब उन्हें अपनी शिक्षा का लाभ उठाने के लिए एक उज्ज्वल कैरियर बनाना होगा। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे वंचितों की मदद करने के किसी भी अवसर को कभी नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि देश के कई क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सा पेशेवर नहीं हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे उन क्षेत्रों में लोगों की सेवा करने पर विचार करेंगे, भले ही साल के कुछ समय के लिए ही क्यों न हो। उन्होंने छात्रों को अपने आस-पास के लोगों का ख्याल रखने और अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने की सलाह दी।
भारत और मलेशिया वर्ष 2024-2027 के लिए सह-अध्यक्ष बने; 2026 में मलेशिया में टेबल-टॉप अभ्यास और 2027 में भारत में फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास की घोषणा की
नई दिल्ली। आतंकवाद से मुकाबले(सीटी) पर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) विशेषज्ञ कार्य समूह (सीटी पर ईडब्ल्यूजी) की 14वीं बैठक 19 से 20 मार्च, 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में आसियान सचिवालय, आसियान देशों (लाओ पीडीआर, मलेशिया, इंडोनेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम), एडीएमएम-प्लस सदस्य राज्यों (चीन, अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और कोरिया गणराज्य) के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।
आतंकवाद से मुकाबले (सीटी) पर 14 वें एडीएमएम-प्लस ईडब्ल्यूजी के दौरान , सह-अध्यक्षों, भारत और मलेशिया ने वर्ष 2024-2027 के लिए नियोजित गतिविधियों के लिए कार्य योजना प्रस्तुत की। इसने 2026 में मलेशिया में सीटी पर ईडब्ल्यूजी के लिए टेबल-टॉप अभ्यास और 2027 में भारत में फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित करने की घोषणा की।
दो दिवसीय बैठक के दौरान आतंकवाद और उग्रवाद के उभरते खतरे से निपटने के लिए एक मजबूत और व्यापक रणनीति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य आसियान देशों के रक्षा बलों और उसके संवाद भागीदारों के जमीनी अनुभव को साझा करना था। बैठक ने वर्तमान चक्र के लिए नियोजित गतिविधियों/अभ्यासों/बैठकों/कार्यशालाओं की नींव रखी।
इससे पहले, 2021-2024 के पिछले चक्र के दौरान सीटी पर ईडब्ल्यूजी के सह-अध्यक्ष रहे म्यांमार और रूस ने वर्तमान चक्र (2024-2027) के लिए सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया को सौंप दी थी। भारत वर्तमान चक्र के लिए पहली ईडब्ल्यूजी बैठक की मेजबानी कर रहा है।
उद्घाटन सत्र में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने मुख्य भाषण दिया और उद्घाटन समारोह के दौरान भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक गतिशील और उभरती चुनौती बनी हुई है, जिसके खतरे लगातार सीमाओं को पार कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में आतंकवाद का मुकाबला करने की दिशा में भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला, जिसमें 2022 में यूएनएससी की आतंकवाद-रोधी समिति की भारत की अध्यक्षता के दौरान दिल्ली घोषणा को अपनाना भी शामिल है।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अमिताभ प्रसाद, भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक , विदेश मंत्रालय और भारतीय सेना के आतंकवाद-रोधी प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। भाग लेने वाले देशों और आसियान सचिवालय के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने क्षेत्र में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक दौरे के हिस्से के रूप में प्रतिनिधियों ने आगरा का भी दौरा किया।
देश में कोयला उत्पादन 1 बीटी के आंकड़े को पार कर गया
नई दिल्ली। भारत ने कोयला उत्पादन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 20 मार्च, 2025 को एक बिलियन टन (बीटी) को पार कर गया। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष के 997.83 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन से 11 दिन पहले प्राप्त की गई है, जो भारत की अपनी ऊर्जा मांगों को सुनिश्चित करने और औद्योगिक, कृषि और समग्र आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति को चिन्हित करती है।
कोयला क्षेत्र की सफलता का श्रेय कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू), निजी क्षेत्र के दिग्गजों और 350 से अधिक कोयला खदानों में कार्यरत लगभग 5 लाख खदान श्रमिकों के अथक प्रयासों को जाता है। इन कोयला खनिकों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिन्होंने बेजोड़ समर्पण के साथ अनेक चुनौतियों का सामना किया है।
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकता के लगभग 55 प्रतिशत के लिए कोयले पर निर्भर है, और देश की लगभग 74 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पन्न की जाती है। यह भारत की अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करने और ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने में कोयले के अभूतपूर्व महत्व को चिन्हित करता है।
रिकॉर्ड तोड़ कोयला उत्पादन सरकार के रणनीतिक सुधारों और नीतियों को दर्शाता है, जैसे कि खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन और कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी के माध्यम से कोयला क्षेत्र को निजी खिलाड़ियों के लिए खोलना। इन पहलों से घरेलू कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आयात में उत्तरोत्तर कमी आई है और विदेशी मुद्रा बचत में महत्वपूर्ण योगदान मिला है। अप्रैल से दिसंबर 2024 तक, भारत के कोयला आयात में 8.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 5.43 बिलियन डॉलर (42,315.7 करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है और सतत विकास सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कोयला मंत्रालय के चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डालती है।
यह उपलब्धि सिर्फ़ कोयला उत्पादन के बारे में नहीं है; यह दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारत के समग्र विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्नत खनन तकनीकों को अपनाकर, रसद को अनुकूलित करके और टिकाऊ प्रणालियों को बढ़ावा देकर, कोयला क्षेत्र भारत के ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त करने और आर्थिक मजबूती बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप, यह मील का पत्थर भारत को ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में ले जाता है। निरंतर रणनीतिक सुधारों, तकनीकी प्रगति और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के माध्यम से, आत्मनिर्भर भारत की ओर भारत की यात्रा पटरी पर बनी हुई है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए आत्मनिर्भर, ऊर्जा-सुरक्षित भविष्य को सुरक्षित करने के लिए देश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की एक अरब टन कोयला उत्पादन की ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता के प्रति देश की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
श्री मोदी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे “देश के लिए गौरव का क्षण” बताया तथा इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के पूर्ण समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक्स पोस्ट में बताया कि देश ने एक बिलियन टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। केंद्रीय मंत्री के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मोदी ने एक्स पर लिखा; “भारत के लिए गर्व का क्षण!
एक बिलियन टन कोयला उत्पादन को पार करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को उजागर करती है। यह उपलब्धि इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के समर्पण और कड़ी मेहनत को भी दर्शाती है।”
भारतीय रेलवे, भारत की विकास कहानी का क्राउचिंग टाइगर, दुनिया की सबसे उल्लेखनीय और कम चर्चित कहानियों में से एक है कि कैसे बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के प्रति जागरूक सार्वजनिक नीति में रणनीतिक निवेश राष्ट्रीय विकास के लिए प्रभावशाली लाभांश हो सकता है। पिछले दशक (2014-2024) के दौरान भारतीय रेलवे ने जो प्रगति की है, वह विकास और प्रगति का स्वर्णिम काल हो सकता है, और यह प्रणाली आज विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते रेलवे नेटवर्क में से एक है।
इसके संदर्भ में, भारत की कहानी को क्या अलग बनाता है और इसे विकास के लिए समान महत्वाकांक्षा वाले देशों और क्षेत्रों के लिए एक सबक बनाता है? मुख्य बात एक सार्वजनिक नीति दृष्टिकोण था जिसे सबसे अच्छे ढंग से यह कहकर संक्षेप में प्रस्तुत किया जा सकता है कि रेलवे के लिए योजना भारत के साथ और भारत के लिए बनाई गई है।
इसका मतलब यह चिन्हित करना था कि यह प्रणाली आम आदमी के लिए रेलवे के रूप में अपनी आवश्यक भूमिका में विश्व स्तरीय और किफायती बनी रहनी चाहिए, साथ ही भारत के 22.4 मिलियन लोगों के दैनिक प्रयासों के साथ-साथ, जो अपने आर्थिक जीवन के एक हिस्से के रूप में इस सेवा का उपयोग करते हैं – और यह कि इसे एक ऐसी प्रणाली के रूप में समानांतर रूप से विकसित होना चाहिए जो भारत के उद्योग, वाणिज्य और 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा का समर्थन करती है।
इसके लिए व्यापार करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता थी। अतीत में रेलवे अपनी धीमी विकास दर, आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे की क्षमता संतृप्ति आदि के लिए आलोचना के घेरे में आया था। यह अभी भी उन लोगों से आता है जो पर्याप्त ज्ञान के बिना जानकारी प्राप्त किए पुरानी मानसिकता से चिपके हुए हैं जैसे कि नेटवर्क विकास की अक्सर 1950 के बाद से केवल 68000 किमी तक क्रमिक वृद्धि के लिए आलोचना की जाती है, बिना यह जाने कि लाइन क्षमता वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बढोतरी ट्रैक किलोमीटर की है जो आज 132000 किमी से अधिक हो गई है।
पिछले दशक के साथ इसके प्रदर्शन की दस साल की व्यापक तुलना इस बात को साबित करती है। 2014-2024 के दौरान, 2004-2014 के 14900 की तुलना में कुल 31000 किलोमीटर नये ट्रैक की स्थापना की गई है। इसी तरह कुल संचयी माल लदान 8473 मिलियन टन यानी 12660 मिलियन टन तक बढ़ गया तथा भारतीय रेल ने 8.64 लाख करोड़ के मुकाबले 18.56 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। इसके साथ ही विद्युतीकरण के फलस्वरूप कार्बन फुटप्रिंट पर बचत 5188 किलोमीटर की तुलना में 44000 किलामीटर से अधिक हो गई है। पिछले दशक में शून्य के मुकाबले 2741 किमी लंबे विश्व स्तरीय डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण, लोको का उत्पादन 4695 से बढ़कर 9168 हो गया है और कोचों का निर्माण 32000 से बढ़कर 54000 हो गया। भारतीय रेल ने उत्पादकता और प्रदर्शन के सभी मापदंडों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था में प्रमुख सुधार मुख्य बजट के साथ रेलवे बजट के विलय के साथ आया, जिसे स्टीम एज माइंड सेट वाले कई बूमर्स अभी भी बिना किसी स्पष्ट कारण के याद करते हैं।
रेलवे को वित्तीय कमी के कारण संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण स्वीकृत परियोजनाओं की बड़ी संख्या में लंबित थी, लेकिन पिछले दशक में जीबीएस में 8.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि पिछले दस वर्षों में यह केवल 1.56 लाख करोड़ रुपये था।
रेलवे जल्द ही श्रीनगर के लिए अपनी पहली ट्रेन चलाएगा, घाटी में सफर के लिए ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है, इस रेल मार्ग में सबसे ऊंचे पुलों और विशाल पहाड़ों पर नेटवर्क को जोड़ने वाली सबसे लंबी रेल सुरंगों का निर्माण हो चुका है। भारतीय रेलवे अपनी निर्बाध कनेक्टिविटी के लिए 100% विद्युतीकरण को प्राप्त करने वाला पहला प्रमुख रेलवे बनने वाला है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट में भारी कमी आएगी।
रेलवे नेटवर्क में टक्कर रोधी कवच का उपयोग भी यातायात रेलवे प्रणाली में सबसे बड़ा है। भारत मे संचालित रेलगाड़ियां भी ‘विश्व स्तरीय’ से आगे निकल रही हैं। भारतीय रेलवे ने घरेलू आवश्यकताओं के साथ उन्नत वैश्विक तकनीकों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया है, जिसका लक्ष्य संरक्षित, तेज, स्वच्छ और अधिक आरामदायक रेलगाड़ियां बनाना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय रेल सभी के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके।
भारतीय रेलवे अपने अनूठे बिजनेस मॉडल के साथ अपने माल ढुलाई राजस्व से यात्री परिहवन के मद के घाटे को वहन करती है और फिर भी लाभदायक बनी रहती है। प्रमुख विकसित रेलवे प्रणालियाँ या तो निजीकरण कर दी गई हैं और उच्च टैरिफ तय करने के लिए स्वतंत्र हैं या अपने घाटे के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं, इसके विपरीत भारतीय रेलवे अपने सभी परिचालन और कार्य व्यय का ध्यान रखती है और अपने कैपेक्स के लिए सकल बजटीय सहायता प्राप्त करती है। अन्य साधनों से कड़ी प्रतिस्पर्धा और उत्पन मांग पर निर्भर होने के बावजूद, इसके राजस्व सृजन लक्ष्य साल दर साल रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज करते हुए सफलतापूर्वक हासिल किए जा रहे हैं।
यह बात उन बुमर्स और 90 के दशक के बच्चों के लिए आश्चर्य की बात हो सकती है जो भारत में एक साधारण युग को याद करते हैं। “निर्यात गुणवत्ता“ का लेबल लगाने वाली किसी भी चीज़ की कीमत प्रीमियम हुआ करती थी, जबकि सबसे अच्छे उत्पाद – जिन्हें विश्व स्तरीय कहा जाता था – वे यूरोप और अमेरिका के समृद्ध देशों के लिए आरक्षित थे। भारतीयों को अक्सर कुछ गलत सामाजिक-आर्थिक सोच की आड़ में घटिया सामान या सेवाएँ प्रदान की जाती थीं। पीढ़ियों को भारतीय रेलवे जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए भी अपनी अपेक्षाएँ कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालाँकि, 2014 के बाद सरकार के फोकस ने विकास और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के प्रति एक दृढ़ प्रगतिशील और प्रेरक दृष्टिकोण अपनाया है। आधुनिक भारत एक ऐसे राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर का हकदार है जो नवाचार की कमी और रूढ़िवादी अंतर्मुखी एजेंडे से मुक्त हो।
यह प्रगति आवश्यक रेलवे घटकों के लिए उच्च स्तर के स्थानीयकरण को बनाए रखते हुए और विनिर्माण सुविधाओं को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाते हुए हासिल की गई है। हालांकि वंदे भारत ट्रेनें और उनके वेरिएंट काफी ध्यान आकर्षित करते हैं, लेकिन भारतीय रेलवे की प्राथमिकताओं में गहराई से जाने पर कई अन्य क्षेत्रों में पर्याप्त प्रयास सामने नजर आते हैं।
भारत अब आने वाले महीनों में दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने के लिए तैयार है। इन 1,200-हॉर्सपावर (एचपी) इंजनों के विकास की तुलना ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा से की जा सकती है, जिसने भारत को परमाणु महाशक्ति के रूप में वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया। उल्लेखनीय रूप से, भारत अब इस मामले में अग्रणी है, और “विकसित” देशों से कहीं आगे निकल गया है, जो अभी भी शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनें बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जर्मनी की TUV-SUD ने भारत की हाइड्रोजन ट्रेनों का तीसरे पक्ष से ऑडिट कराया है।
दुनिया की सबसे लंबी हाइपरलूप परीक्षण सुविधा की स्थापना के साथ, भारत भविष्य के परिवहन में वैष्विक नेतृत्व के रूप में उभर रहा है। दिसंबर 2024 में 422 मीटर का परीक्षण ट्रैक सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, देश अब हाइपरलूप यात्रा की व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए लगभग 50 किलोमीटर का परीक्षण ट्रैक बनाने की तैयारी कर रहा है। एलन मस्क समर्थित स्विसपॉड और फ्रांस की SYSTRA के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बढ़ती वैश्विक मान्यता के माध्यम से, भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जो व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हाइपरलूप प्रणाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जिससे एक तकनीकी महाशक्ति के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हुई है।
यहां तक कि चीन ने भी ‘मेक इन इंडिया’ पहल को अपनाया है, जिसमें सीआरआरसी इंडिया बैंगलोर मेट्रो के लिए स्थानीयकरण प्रयासों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। चीनी फर्म मेट्रो कोचों के 75% से अधिक स्थानीय निर्माण को प्राप्त कर रही है, जिसमें 50% सामग्री भारत से प्राप्त की जाती है। सीआरआरसी का लक्ष्य भविष्य की परियोजनाओं में स्थानीयकरण को 90% तक बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त, सीआरआरसी के लिए खुद को वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करके, यह सुविधा पश्चिम एशिया और अफ्रीका को निर्यात ऑर्डर संभालने के लिए तैयार है।
जापान के साथ बुलेट ट्रेन रोलिंग स्टॉक आपूर्ति सौदों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं भारत ने पहले ही हाई-स्पीड ट्रेनों के घरेलू विनिर्माण की शुरुआत कर दी है। रोलिंग स्टॉक से परे, ऑस्ट्रियाई कंपनी प्लासर एंड थ्योरर की सहायक कंपनी प्लासर इंडिया अपनी ट्रैक मशीनों के साथ रेलवे रखरखाव और निर्माण को बदल रही है। उनके स्थानीय विनिर्माण प्रयास वैश्विक निर्यात का समर्थन करते हुए आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं।
भारतीय रेलवे ने अपनी ‘बीबीआईएन पहल’ के तहत न केवल दक्षिण एशिया को रेल से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू किया है, बल्कि पूर्व में अपनी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत भारत को आसियान से जोड़ने की भी योजना बनाई है और ‘आईएमईसी पहल’ के तहत यह भारत को रेल-समुद्र-रेल कॉरिडोर के जरिए यूरोप से जोड़ने की योजना बना रही है। इसके सार्वजनिक उपक्रम रोलिंग स्टॉक, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों का निर्यात कर रहे हैं और कई एशियाई और अफ्रीकी देशों में परामर्श प्रदान कर रहे हैं।
अपनी नई रेलगाड़ियों, आधुनिक स्टेशनों, तेज गति, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और हाई स्पीड नेटवर्क के साथ, भारतीय रेलवे अब एक प्रमुख विश्व स्तरीय रेलवे प्रणाली है और इसकी कहानी ऐसी है जिसे भारत अन्य देशों तक ले जा सकता है, जिन्होंने अभी तक राष्ट्रीय विकास को बढावा देने में रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका का पूरी तरह से लाभ नहीं प्राप्त किया है। विकसित रेल-विकसित भारत का आदर्श वाक्य भारतीय रेलवे के लिए 2047 तक बिना किसी इंतजार के और परिवर्तन का गवाह बनना है – यह भारत के लिए और भारत के साथ एक सतत यात्रा है, जिसमें प्रतिदिन रिकॉर्ड, प्रगति और विकास के मील के पत्थर स्थापित किए जा रहे हैं।
(लेखक सीआरएफ में प्रतिष्ठित फेलो और रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य ट्रैफिक हैं)
नई दिल्ली,वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका), वाराणसी ने राजभाषा हिंदी के उत्कृष्ट प्रयोग और प्रचार-प्रसार में अपनी प्रतिबद्धता को साबित करते हुए एक और गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। रेल मंत्रालय द्वारा बरेका को राजभाषा हिंदी के सर्वाधिक एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए “रेल मंत्री राजभाषा शील्ड” से सम्मानित किया गया।
आज 20 मार्च 2025 को नई दिल्ली स्थित रेल भवन के सम्मेलन कक्ष में रेलवे बोर्ड की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक के दौरान रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार बरेका के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी डॉ. संजय कुमार सिंह को प्रदान किया।
इस उपलब्धि पर बरेका महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देते हुए राजभाषा हिंदी के अधिकतम प्रयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार बरेका की हिंदी में कार्य करने की उत्कृष्ट परंपरा और समर्पण का प्रतीक है। बरेका निरंतर हिंदी के प्रोत्साहन के लिए कार्य करता रहेगा और भविष्य में भी राजभाषा हिंदी को सशक्त बनाने की दिशा में अग्रसर रहेगा।