वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों से युक्त दंडक्रम पारायण को बिना किसी रुकावट के 50 दिनों में पूरा किया
वाराणसी/ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को नमो घाट पर आयोजित काशी तमिल संगमम कार्यक्रम के शुभारंभ के मौके पर 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को स्मृति चिन्ह देकर उनका सम्मान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे की इस उपलब्धि पर अपने एक्स पर लिखा है कि काशी के सांसद होने के नाते, मुझे इस बात की खुशी है कि यह असाधारण उपलब्धि इस पवित्र नगरी में संभव हुई। उनके परिवार, विभिन्न संतों, ऋषियों, विद्वानों और पूरे भारत के उन संगठनों को मेरा प्रणाम जिन्होंने उनका समर्थन किया।
बताते चलें कि वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों से युक्त दंडक्रम पारायण को बिना किसी रुकावट के 50 दिनों में पूरा किया हैं। इसमें कई वैदिक श्लोक और पवित्र शब्दों का त्रुटिहीन उच्चारण शामिल है। उल्लेखनीय हैं कि दुनिया में केवल दो दंडक्रम का पारायण हुआ। एक तो नासिक में वेदमूर्ति नारायण शास्त्री देव ने 200 साल पहले दंडक्रम पारायण किया था और आज के समय में काशी में दंडक्रम पारायण वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे द्वारा किया गया। उन्होंने 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक काशी में दंडक्रम पारायण किया। यह दंडक्रम पारायण वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय, रामघाट, काशी में हुआ और पूर्णाहुति गत शनिवार को हुई। एक सोने का कंगन और 101116 रुपये की धन राशि सम्मान स्वरूप वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को दिया गया। यह सम्मान शृंगेरी शंकराचार्य के आशीर्वाद स्वरूप रेखे को दिया गया है।
शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनि शाखा के करीब 2000 मंत्रों को दंडक्रम पारायण कहते है जो एक परीक्षा है। वेद पाठ करने के 8 प्रकार मे से एक है दंडक्रम पारायण है जो सबसे कठिन माना गया है। इन मंत्रों को कंठस्थ किया जाता है और फिर इसे सुनाया जाता है। दंडक्रम को उसके जटिल स्वर-स्वरूप और कठिन ध्वन्यात्मक क्रमपरिवर्तन के कारण उसे वैदिक पाठ का मुकुट माना गया है। इसमें पदों को पाठ विशिष्ट शैली में एक साथ उल्टा और सीधा करने का विधान है किया जाता है।
विचार, परम्परा, अध्यात्म और एकता के संगम का पर्याय बन चुके काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण का हुआ भव्य आगाज
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से कलाकारों ने शमा बाधा
काशी तमिल संगमम् का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करने वाला है-योगी आदित्यनाथ
*विगत 04 वर्षों में 26 लाख श्रद्धालु काशी आए- सीएम योगी”
*काशी तमिल संगमम् के आयोजन का उद्देश्य दो संस्कृतियों को जोड़ना है-धर्मेन्द्र प्रधान*
*भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने वीडियो संदेश में इस आयोजन की सराहना की*
*1,400 से अधिक तमिल प्रतिनिधियों को सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों से जुड़ने का मिलेगा अवसर*
*मुख्यमंत्री व केंदीय शिक्षा मंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं बाबा कालभैरव मंदिर में भगवान् का विधिवत् दर्शन पूजन किया*
वाराणसी। विचार, परम्परा, अध्यात्म और एकता के संगम का पर्याय बन चुके “काशी तमिल संगमम” के चौथे संस्करण का मंगलवार को दुनिया के सबसे बड़े घाट नमो घाट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी तमिल संगमम 4.0 का बटन दबाकर भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, राज्यपाल तमिलनाडु आर.एन.रवि, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ एल मुरुगन, उप राज्यपाल पुडुचेरी के.कैलाशनाथन के साथ ही उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, श्रम एवं सेवायोजन समन्वय मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रविन्द्र जायसवाल, आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, महापौर अशोक कुमार तिवारी, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, एमएलसी धर्मेन्द्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्तिक मास में आयोजित हो रहे काशी तमिल संगमम के अवसर पर तीनों लोकों से न्यारी, मोक्ष दायिनी काशी मे लोगो का स्वागत करते हुए कहा कि इस पूरे कार्यक्रम के केंद्र में देवाधिदेव महादेव हैं। यह आयोजन उत्तर-दक्षिण के शैक्षिक, सांस्कृतिक, आर्थिक संबंधों को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम् का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करने वाला है। यह आयोजन उत्तर भारत की सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक भागीदारी के नए द्वार खोल रहा है। उन्होंने तमिलनाडु से आए प्रतिनिधियों से कहा कि तमिलनाडु से चलकर काशी, प्रयागराज और अयोध्या की यह यात्रा सुखद अनुभूति कराने वाला है। उन्होंने कहा कि इस बार की थीम “आओ तमिल सीखे” यानी तमिल करकलाम है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को और सुदृण करेगी। इस आयोजन का महत्व तेनकाशी से प्रारंभ होकर आने वाले कार रैली के कारण और बढ़ जाता है जो सड़क मार्ग से चलकर दो हजार किलोमीटर की यात्रा करके काशी की धरती पर पहुंचने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में चल रहा यह अभियान ज्ञान, साधना, कला, सभ्यता आदि को एक नई ऊंचाईयों पर स्थापित करेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन की शुरुआत वणक्कम काशी, वणक्कम तमिलनाडु, वणक्कम काशी तमिल संगमम् से की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम् के आयोजन का उद्देश्य दो संस्कृतियों को जोड़ना है। पहले चरण के आयोजन से लेकर चौथे चरण के आयोजन को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि काशी तमिल संगमम् के पहले संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम् एक जनांदोलन बन चुका है। आज काशी तमिल के बीच ऐसा संबंध बन चुका है जिसकी गूंज सदियों तक रहेगी। धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा इस बार का थीम तमिल सीखिए यानि तमिल करकलाम है। जो कि इस आयोजन को और अनूठा बनाती है। इस बात तमिलनाडु के शिक्षक काशी क्षेत्र में आकर छात्रों को तमिल सीखाएंगे, वहीं काशी क्षेत्र के छात्र तमिलनाडु जाकर तमिल सीखेंगे जो कि एक नई शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि भाषा कोई समस्या नहीं है। सदियों से तमिलनाडु के लोग काशी आते हैं और काशी से बड़ी संख्या में लोग तमिलनाडु जाते हैं। इस बार का आयोजन इस मामले में और भी अनूठा है कि आज तेनकाशी से कार रैली का शुभारंभ हुआ है जो दो हजार किलोमीटर की यात्रा करके 10 दिसंबर को कार रैली काशी पहुंचेगी। इस रैली का काशीवासी भव्य रुप से स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम् एक अद्वितीय कार्यक्रम है और इस बार का आयोजन और भी भव्य होगा।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने काशी तमिल संगमम् 4.0 के शुभारंभ अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरु किए गए इस अभियान की सराहना की।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में तमिलनाडु बसता है। यही कारण है कि उन्होंने तमिल भाषा को विश्व पटल पर लाने के लिए कई प्रयास किए। इसी क्रम में काशी तमिल संगमम् यात्रा की शुरुआत हुई। यह हमारी संस्कृति के पुर्नजागरण का सिंहनाद है। हर वर्ष इसके आयोजन का एक उद्देश्य होता है। इसलिए इस बार का थीम है चलो तमिल सीखे। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि तमिल भाषा भारत का गौरव है और इस भाषा को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होने बीएचयू और गुवाहाटी विश्वविद्यालय का जिक्र किया जहां तमिल भाषा में पढ़ाई होती है।
इससे पूर्व भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। जिसमें उन्होंने काशी तमिल संगमम कार्यक्रम की सराहना की। एक महीने तक चलने वाले इस सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक संगम में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि अलग-अलग जत्थों में काशी पहुँचेंगे। उद्घाटन समारोह के लिए पहुंचे पहले जत्थे का वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में अनुभवात्मक दौरा शुरू हो गया है। यह उन्हें इस क्षेत्र की विरासत और ज्ञान परंपराओं के साथ एक गहन और समृद्ध जुड़ाव प्रदान करेगा। तमिलनाडु से आने वाले प्रतिनिधियों के यात्रा कार्यक्रम में वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या के विश्वविद्यालयों, विरासत स्थलों, मंदिरों, शिल्प समूहों और ज्ञान संस्थानों के दौरे के साथ-साथ विद्वानों, छात्रों, कारीगरों और स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत शामिल है। प्रत्येक पड़ाव को एक स्तरीय अनुभव प्रदान करने के लिए आंशिक रूप से सीखने का अभियान, आंशिक रूप से सांस्कृतिक घर वापसी आदि के लिए डिज़ाइन किया गया है-काशी तमिल संगमम 4.0 का आयोजन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से रेलवे, संस्कृति, पर्यटन, कपड़ा और युवा मामले एवं खेल सहित दस केंद्रीय मंत्रालयों की भागीदारी से किया जा रहा है। आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय संगमम के नॉलेज पार्टनर हैं, जो इस पहल को शैक्षणिक मजबूती दे रहे हैं।
इस वर्ष का विषय, “तमिल सीखें-तमिल करकलम”, तमिल सीखने को बढ़ावा देने और भारत की शास्त्रीय भाषाई विरासत के प्रति व्यापक समझ विकसित करने पर नए सिरे से ज़ोर देता है। इस संस्करण में हिस्सा लेने वाले विविध समूहों में छात्र, शिक्षक, लेखक, मीडिया पेशेवर, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के व्यवसायी, महिला नेता, पेशेवर, कारीगर और आध्यात्मिक विद्वान शामिल हैं। संवाद, परंपरा और अन्वेषण के अपने मिश्रण के साथ काशी तमिल संगमम 4.0 की शुरुआत प्रतिभागियों को एक जीवंत मंच उपलब्ध कराता है, जो भारत की साझा विरासत का जश्न मना रहा है। इस अवसर पर काशी एवं तमिलनाडु के कलाकारों ने भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। तत्पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंदीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं बाबा कालभैरव मंदिर में भगवान् का विधिवत् दर्शन पूजन किया।
*उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाश नाथन समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा आयोजित प्रदर्शनी को सराहा कहा इससे आम लोग काशी एवं तमिल की संस्कृतियों के साथ-साथ सरकार द्वारा जन कल्याण हेतु किये जा रहे प्रयासों से होंगे अवगत*
वाराणसी। वाराणसी के नमो घाट पर मंगलवार से शुरू हुए ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई केंद्रीय संचार ब्यूरो, लखनऊ द्वारा काशी एवं तमिलनाडु की महान विभूतियों के जीवन दर्शन तथा केंद्र सरकार द्वारा जन कल्याण के लिए किये जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके उपरांत प्रदर्शनी को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। यह प्रदर्शनी 15 दिसंबर तक निरंतर रहेगी।
प्रदर्शनी के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक समेत अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा आयोजित प्रदर्शनी को सराहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा इससे आम लोग काशी एवं तमिल की संस्कृतियों के साथ-साथ सरकार द्वारा जन कल्याण हेतु किये जा रहे प्रयासों से अवगत होंगे।
तमिलनाडु से आये हुए पत्रकार दल तथा काशी तमिल संगमम् की कवरेज कर रहे पत्रकारों तथा बड़ी संख्या में आम लोगों द्वारा भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने वाले ‘काशी तमिल संगमम्’ के इस चतुर्थ संस्करण में केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगायी गयी चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु एवं काशी की महान विभूतियों के राष्ट्र निर्माण में योगदान एवं उनकी उपलब्धियां को दर्शाया गया है। चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु की महान विभूतियों जैसे ऋषि अगस्त्य, तमिल महिला कवि संत अव्वैयार, तमिल कवि संत तिरुवल्लुवर, कवयित्री और संत कारैकल अम्माइयार, भक्ति आंदोलन की कवि एवं संत अंडाल (कोधाई), थिरूनावुक्कारसर, तमिल कवि और समाज सुधारक रामलिंग स्वामी (वल्लालर), तमिल विद्वान यू. वी. स्वामीनाथ अय्यर, अग्रणी समाज सुधारक, चिकित्सक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश भारत में पहली महिला विधायक डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी, गणितज्ञ निवास रामानुजन, अविष्कारक और उद्योगपति जी.डी. नायडू, खगोलशास्त्री सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, नोबेल पुरस्कार विजेता वेंकटरामन रामकृष्णन, स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, नोबेल पुरस्कार विजेता एवं महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सुप्रसिद्ध राजनेता एवं भारत रत्न के. कामराज, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सुप्रसिद्ध राजनेता चिदंबरम सुब्रमण्यम, महान अभिनेता एवं राजनेता एम. जी. रामचंद्रन इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों एवं शब्दों में दर्शाया गया है।
इसी प्रकार काशी की महान विभूतियां जैसे संत कबीरदास, संत रविदास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं शिक्षाविद पंडित मदन मोहन मालवीय, सुप्रसिद्ध शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान, विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार पंडित रविशंकर, महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों शब्दों के माध्यम से दर्शाया गया है। चित्र प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किये जा रहे सरकार के जन कल्याणकारी नीतियों, प्रयासों एवं योजनाओं को भी दर्शाया गया है। जिसमें केंद्र सरकार द्वारा हाल में श्रम सुधार के लिए बनाये गये कानूनों, विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी के दरों को कम करने के लिये किए गये प्रयासों की जानकारी दर्शकों और जनसामान्य के लिए प्रदर्शित की गई है।
*प्रधानमंत्री ने पुलिस के बारे में जनता की धारणा बदलने, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने, शहरी और पर्यटन पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने और नए आपराधिक कानूनों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया*
*प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी, एआई और राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड एकीकरण के विस्तारित उपयोग का आह्वान किया; द्वीप सुरक्षा, तटीय पुलिस व्यवस्था और फोरेंसिक आधारित जांच में नवाचार पर जोर दिया*
*सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ, जिसमें विजन 2047 पुलिस व्यवस्था रोडमैप, आतंकवाद निरोधक रुझान, महिला सुरक्षा, भगोड़ों का पता लगाना और फोरेंसिक सुधार शामिल रहे*
*प्रधानमंत्री ने आपदा से निपटने की बेहतर तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया; चक्रवात, बाढ़ और प्राकृतिक आपात स्थितियों से निपटने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया*
*प्रधानमंत्री ने पुलिस नेतृत्व से विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने और इसमें सुधार करने का आग्रह किया*
*प्रधानमंत्री ने विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किए; शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों को नव स्थापित शहरी पुलिस व्यवस्था पुरस्कारों से सम्मानित किया*
रायपुर /प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लिया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का विषय ‘विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’ है।
प्रधानमंत्री ने खासकर युवाओं के बीच पुलिस के प्रति जनता की धारणा बदलने की तत्काल जरूरत पर बल दिया, जिसके लिए दक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने शहरी पुलिस व्यवस्था को मज़बूत करने, पर्यटक पुलिस को फिर से सक्रिय करने और औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों के स्थान पर लागू किए गए नए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस और व्यापक प्रशासन को निर्जन द्वीपों को एकीकृत करने के लिए नवीन रणनीतियां अपनाने, राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (नेटग्रिड) के अंतर्गत एकीकृत डेटाबेस का प्रभावी उपयोग करने और कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्राप्त करने के लिए इन प्रणालियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को पुलिस जांच में फोरेंसिक के उपयोग पर केस स्टडी करने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया, और कहा कि फोरेंसिक के बेहतर अनुप्रयोग से आपराधिक न्याय प्रणाली और मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री ने प्रतिबंधित संगठनों की नियमित निगरानी के लिए तंत्र स्थापित करने, वामपंथी उग्रवाद से मुक्त क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करने और तटीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए नवोन्मेषी मॉडल अपनाने के महत्व पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक समग्र सरकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें प्रवर्तन, पुनर्वास और सामुदायिक स्तर पर हस्तक्षेप एक साथ किया जाए।
सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विज़न 2047 की दिशा में पुलिस व्यवस्था के दीर्घकालिक रोडमैप, आतंकवाद-निरोध और कट्टरपंथ-निरोध में उभरते रुझान, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने में तकनीक का लाभ उठाने, विदेशों में रह रहे भारतीय भगोड़ों को वापस लाने की रणनीतियों और प्रभावी जांच एवं अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक क्षमताओं को मज़बूत करने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने मज़बूत तैयारियों और समन्वय की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और पुलिस प्रमुखों से चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपात स्थितियों, जिनमें चक्रवात दित्वा की मौजूदा स्थिति भी शामिल है, के लिए प्रभावी आपदा प्रबंधन तंत्र को मज़बूत करने का आग्रह किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं के दौरान जीवन की रक्षा और न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय योजना, तत्क्षण समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और समग्र सरकारी दृष्टिकोण आवश्यक हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पुलिस नेतृत्व से आह्वान किया कि वे विकासशील राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पुलिस व्यवस्था को फिर से व्यवस्थित करें, ताकि विकसित भारत बनने की राह पर साफ हो सके।
प्रधानमंत्री ने खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किए। उन्होंने शहरी पुलिस व्यवस्था में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों को भी पुरस्कार प्रदान किए। यह सम्मान शहरी पुलिस व्यवस्था में नवाचार और सुधार को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार स्थापित किया गया है।
इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव ने भाग लिया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक, साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि देश भर से विभिन्न रैंकों के 700 से अधिक अधिकारी वर्चुअल माध्यम से इस सम्मेलन में शामिल हुए।
फियो ने राष्ट्रपति पुतिन के दौरे के दौरान इंडिया-रूस बिज़नेस फ़ोरम से पहले विकास और अवसर पर बल दिया
नई दिल्ली : फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइज़ेशन्स (फियो) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4-5 दिसंबर 2025 को होने वाले भारत के सरकारी दौरे और साथ में होने वाले इंडिया-रूस बिज़नेस फ़ोरम का स्वागत करता है, जो भारत और रूस के बीच आर्थिक और व्यापार सहयोग को बढ़ाने और गहरा करने के लिए सही समय पर प्लेटफ़ॉर्म है।
हाल के ट्रेड डेटा से पता चलता है कि अप्रैल-अगस्त 2025-26 के समय में रूस को भारत का निर्यात 1.84 बिलियन डॉलर था, जबकि इम्पोर्ट 26.45 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। इससे पहले रूस के साथ वस्तु व्यापार 2024-25 में रिकॉर्ड 68.7 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया था, जिसमें लगभग 4.88 बिलियन डॉलर का निर्यात और 63.84 बिलियन डॉलर का आयात शामिल था। पिछले चार सालों में, 2021 से शुरू होकर, दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार पाँच गुना से ज़्यादा बढ़ा है। यह लगभग 13 बिलियन डॉलर था और 2024-25 में यह 68 बिलियन डॉलर हो जाएगा।
यह ज़बरदस्त बढ़ोतरी मज़बूत ऊर्जा और वस्तु आधारित रिश्तों को दिखाती है, लेकिन रूस के पक्ष में व्यापार असंतुलन काफ़ी बढ़ गया है। फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन का मानना है कि फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स, एग्रो-प्रोडक्ट्स, ऑटो और ऑटो-कंपोनेंट्स और आईटी सर्विसेज़ जैसे सेक्टर में रूस को निर्यात की बहुत संभावना है, जिनकी बदलते मार्केट डायनामिक्स के कारण बहुत ज़्यादा मांग है। श्री रल्हन ने आगे कहा कि इसके अलावा, रूस से कई पश्चिमी कंपनियों के निकलने से भारतीय निर्यातकों के लिए अलग-अलग सेक्टर में खाली जगह भरने का एक बड़ा मौका बना है। साथ ही, दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का एक बड़ा दीर्घकालिक लक्ष्य भी बताया है।
फियो अध्यक्ष ने यह भी कहा कि द्विपक्षीय निवेश अभी भी काफी हैं और पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं, 2025 तक 50 बिलियन डॉलर का लक्ष्य है। भारत में रूस का निवेश ऑयल और गैस, पेट्रोकेमिकल्स, बैंकिंग, रेलवे और स्टील जैसे सेक्टर में है, जबकि रूस में भारत का निवेश मुख्य रूप से ऑयल और गैस और फार्मास्यूटिकल्स में है।
श्री रल्हन ने कहा कि इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) जैसे लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के फिर से शुरू होने और बढ़ने से भी देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार ज़्यादा किफायती हुआ है। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रपति श्री पुतिन के दौरे के दौरान होने वाला इंडिया-रूस बिज़नेस फोरम, भारतीय निर्यातकों, निवेशकों और रूसी निवेशकों के लिए ऊर्जा पर आधारित व्यापार से ज़्यादा डायवर्सिफाइड, स्थायी व्यापार और इन्वेस्टमेंट रिलेशनशिप की ओर बढ़ने का एक अहम मौका है।
फियो अध्यक्ष श्री एस सी रल्हन ने कहा “यह बिज़नेस फ़ोरम भारत-रूस व्यापार के लिए एक अहम समय पर हो रहा है। जहाँ व्यापार की मात्रा में बढ़ोतरी हमारे आर्थिक संबंधों की मज़बूती दिखाती है, वहीं अब हमें इस रफ़्तार का फ़ायदा उठाकर नॉन-ऑयल सेक्टर — इंजीनियरिंग सामान, केमिकल, फ़ार्मास्यूटिकल्स, खेती, कपड़ा, चमड़ा, जेम्स और ज्वेलरी और वैल्यू-एडेड मैन्युफ़ैक्चर्ड सामान में डायवर्सिफ़ाई करना चाहिए। फ़ोरम को बैलेंस्ड, लंबे समय के व्यापार और आपसी निवेश का रास्ता बनाना चाहिए।”
फियो को उच्च मूल्य वाली वस्तुओं फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, इंजीनियरिंग सामान, साथ ही सेवाओं (आईटी/आईटीईएस, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा) के भारतीय निर्यात के विस्तार में विशेष रूप से मजबूत संभावनाएं दिखती हैं, साथ ही भारत के बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, हरित ऊर्जा, रेलवे, खनन और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में रूसी निवेश को प्रोत्साहित करता है। इसके अलावा, संस्थागत सुविधा और द्विपक्षीय व्यापार मिशनों के साथ रूस को एक बाजार के रूप में तलाशने के लिए एमएसएमई , निर्यातकों और एसएमई का समर्थन करने से भारत के निर्यात सेक्टर को और बढ़ावा मिलेगा।
फियो ने मरीन प्रोडक्ट्स, डेयरी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे खास सेक्टर में भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली बाजार पहुंच की चुनौतियों को दूर करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है। फेडरेशन इस बात पर ज़ोर देता है कि इन श्रेणियों की रूसी बाजार में मज़बूत और लगातार मांग बनी हुई है, और रूस की तरफ से रेगुलेटरी और प्रक्रियागत रुकावटों को दूर करने को प्राथमिकता देने का आग्रह करता है जो अभी उनके प्रवेश को सीमित करती हैं। इन उच्च संभावना वाली उत्पाद श्रेणियों के लिए आसान एक्सेस को सुगम बनाते हुए, फियो अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि इससे न सिर्फ़ द्विपक्षीय व्यापार को विविधीकृत और पुनर्संतुलित करने में मदद मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मज़बूत करने में भी मदद मिलेगी।
*सम्मेलन में अब तक की प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और ‘सुरक्षित भारत’ के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार की जाएगी*
*वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद का मुकाबला, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिसिंग में फोरेंसिक विज्ञान तथा एआई के उपयोग जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी*
*प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे*
रायपुर / प्रधानमंत्री 29-30 नवंबर, 2025 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के अखिल भारतीय सम्मेलन के 60वें संस्करण में भाग लेंगे। यह सम्मेलन 28 से 30 नवंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य अब तक प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा करना और ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ‘सुरक्षित भारत’ के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा तैयार करना है।
‘विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद निरोध, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान एवं एआई के उपयोग जैसे प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे।
यह सम्मेलन देश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध मुद्दों पर खुले और सार्थक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण संवादात्मक मंच प्रदान करता है। यह पुलिस बलों के सामने आने वाली परिचालन, अवसंरचनात्मक और कल्याण संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के साथ-साथ अपराध से निपटने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आंतरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पेशेवर प्रथाओं के निर्माण और साझाकरण को भी सुगम बनाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस वार्षिक सम्मेलन में निरंतर गहरी रुचि दिखाई है, और स्पष्ट चर्चाओं को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने एक ऐसा माहौल तैयार किया है जहां पुलिस व्यवस्था पर नए विचार उभर सकें। व्यावसायिक सत्र, विस्तृत बातचीत और विषयगत चर्चाएं प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा और नीतिगत मामलों पर सीधे प्रधानमंत्री के साथ अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान करती हैं।
वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इस सम्मेलन के स्वरूप में निरंतर सुधार हुआ है, जिसमें देश भर के विभिन्न स्थानों पर इसका आयोजन भी शामिल है। यह सम्मेलन गुवाहाटी (असम), कच्छ के रण (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), टेकनपुर (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, गुजरात), पुणे (महाराष्ट्र), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), नई दिल्ली, जयपुर (राजस्थान) और भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित किया जा चुका है। इसी परंपरा को जारी रखते हुए, इस वर्ष 60वां पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक सम्मेलन रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्री, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे। नए और अभिनव विचारों को सामने लाने के लिए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग के प्रमुख और डीआईजी तथा एसपी स्तर के कुछ चुनिंदा पुलिस अधिकारी भी इस वर्ष सम्मेलन में भाग लेंगे।
नई दिल्ली । संविधान दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली स्थित उत्तर रेलवे मुख्यालय में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आज संविधान दिवस के उपलक्ष्य में उत्तर रेलवे प्रधान कार्यालय में एक शपथ समारोह में भाग लिया।
समारोह में भारत के संविधान की प्रस्तावना को पढ़ना शामिल था, जो संविधान में निहित मूल्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। अधिकारियों ने संविधान के मूल्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने की शपथ ली, जो राष्ट्र के संस्थापक दस्तावेज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस वर्ष का समारोह विशेष महत्व रखता है क्योंकि उत्तर रेलवे न्याय, समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के प्रति अपने समर्पण की पुष्टि करता है।
बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए सम्मिलित हुए मंत्री नन्दी
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा हाल ही में मंजूर हुए 25,060 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन में टारगेटेड स्कीमें शामिल की जाएंगी
दिल्ली/ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय वणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता एवं राज्यमंत्री जितिन प्रसाद की उपस्थिति में आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए सम्मिलित हुए। बैठक में मंत्री नन्दी ने उत्तर प्रदेश की निर्यात नीति के साथ ही प्रगति का खाका केंद्रीय मंत्री के साथ ही विभिन्न राज्य से आए मंत्रीगण के सामने रखा। बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हाल ही में मंजूर हुए 25,060 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन में टारगेटेड स्कीमें शामिल की जाएंगी, ताकि लैंडलॉक्ड (बिना समुद्र तट वाले) राज्यों को निर्यात के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने (export promotion for landlocked states) में मदद मिल सके। उन्होंने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत केंद्र-राज्य साझीदारी का भी सुझाव दिया।
मंत्री नन्दी ने कहा कि डबल इंजन की हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप निर्यात प्रोत्साहन को विशेष प्राथमिकता दी है। भारत सरकार से मिलने वाले सतत मार्गदर्शन का परिणाम है कि पिछले 8 वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश के निर्यात में दोगुने से अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश का निर्यात 84 हजार करोड़ से बढ़कर 1 लाख 86 हजार करोड़ पहुंच गया है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से एक्सपोर्ट को नई उड़ान दी गई है। हमारे स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों को विभिन्न देशों के बायर्स से वर्ष 2027 तक के एडवांस ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। निर्यात के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से नई निर्यात नीति 2025-30 प्रख्यापित की गई है। इस नीति के माध्यम से पहली बार मैन्युफैक्चर्स के साथ ही मर्चेन्ट निर्यातकों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही सर्विस सेक्टर्स से जुड़े निर्यातकों को भी सुविधायें प्रदान की गयी है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर विपणन सहायता के अंतर्गत सहायता राशि 16 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये वार्षिक कर दी गयी है।
गेटवेपोर्ट योजना के अन्तर्गत एक निर्यातक को 20 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक की वार्षिक सहायता धनराशि प्रदान किये जाने की व्यवस्था है। एयर फ्रेट स्कीम की धनराशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये वार्षिक कर दी गयी है।
इंटरनेशनल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मस पर ऑनबोर्डिंग के लिए पहले वर्ष की लिस्टिंग फीस में 3 लाख रूपये की एकमुश्त सहायता प्रदान किये जाने की व्यवस्था है।इस प्रकार उत्तर प्रदेश की निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 नए सुधारों और उपहारों का गुलदस्ता है। यह नीति भारत के समग्र निर्यात में उत्तर प्रदेश की अपेक्षित भागीदारी को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। उत्तर प्रदेश भारत सरकार की मंशा के अनुरूप एक्सपोर्ट इकोसिस्टम को नई ऊंचाई और नई गति देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह को भारतीय एग्रोनॉमी सोसाइटी के फेलो अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार एग्रोनॉमी के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मानों में से एक है, जो कृषि अनुसंधान, नवाचार और टिकाऊ खेती प्रणालियों में विशिष्ट योगदान को मान्यता देता है।
डॉ. सिंह को यह सम्मान एग्रोनॉमी के क्षेत्र में उनके विगत तीन दशकों के उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र (सिमिट) के महानिदेशक डॉ. ब्रैम गोवर्ट्स और रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पंजाब सिंह द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान 6वें अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस के दौरान दिया गया, जिसका विषय था “स्मार्ट एग्री-फूड सिस्टम और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए एग्रोनॉमी का पुनःपरिकल्पन”।
यह अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस 24 से 26 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। इस कांग्रेस का उद्घाटन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया, जिसमें केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी, और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस आयोजन में भारत एवं विश्वभर से आए 500 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, शोधकर्ता और प्रगतिशील किसान शामिल हैं।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के निवासी डॉ. सुधांशु सिंह एक विश्व-प्रसिद्ध एग्रोनॉमिस्ट हैं। उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या से कृषि में बी.एससी. तथा एग्रोनॉमी में एम.एससी. की पढ़ाई की और दोनों ही पाठ्यक्रमों में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान सरकार में अधिकारी के तौर पर की और बाद में फिलीपींस स्थित अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (इरी) में बाढ़ सहनशील (सब1) धान पर पीएच.डी. शोध किया, जिसके बाद उन्होंने पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप पूरा किया। डॉ. सिंह ने 2013 से 2020 तक इरी में दक्षिण एशिया के लिए सिस्टम एग्रोनॉमिस्ट के रूप में कार्य किया और वर्तमान में इरी के दक्षिण एशिया केंद्र के निदेशक के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं।
डॉ. सिंह के शोध ने तनाव-सहिष्णु धान किस्मों, धान की सीधी बुआई तकनीकों, यंत्रीकृत धान-गेहूं प्रणालियों, ग्रीनहाउस गैस न्यूनीकरण और बीज प्रणाली को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने ‘सीड्स विदाउट बॉर्डर्स’ जैसी वैश्विक पहल को आगे बढ़ाया है। डॉ. सिंह ने 30 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं का नेतृत्व किया है और 150 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों के लेखक हैं। भारतीय एग्रोनॉमी सोसाइटी के सक्रिय एवं आजीवन सदस्य के रूप में वे समाज की वैज्ञानिक पहुंच और वैश्विक पहचान को मजबूत करने में निरंतर योगदान दे रहे हैं। डॉ. सिंह के नेतृत्व में वाराणसी स्थित आइसार्क धान अनुसंधान और विकास का अग्रणी केंद्र बनकर उभरा है।
इस कांग्रेस में एक विशेष सत्र “भारत में धान-गेहूं फसल प्रणाली का अनुकूलन और कम-उत्सर्जन धान उत्पादन तकनीक” शीर्षक से आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. सुधांशु सिंह ने की। इस अवसर पर उन्होंने “खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए आनुवंशिक क्षमता का उपयोग” विषय पर तकनीकी सत्र की सह-अध्यक्षता भी की। इस कार्यक्रम में इरी के प्रमुख वैज्ञानिक, जिनमें डॉ. पन्नीरसेल्वम (एग्रोनॉमिस्ट, दक्षिण एशिया) और डॉ. स्वाति नायक (अंतरिम कंट्री मैनेजर, भारत एवं दक्षिण एशिया लीड – बीज प्रणाली एवं उत्पाद प्रबंधन) शामिल थे , जिन्होने टिकाऊ और जलवायु-सहिष्णु धान उत्पादन प्रणालियों की दिशा में आइसार्क के प्रमुख नवाचारों और इरी की वर्तमान प्रगति को प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के शिखर पर, विधिवत मन्त्रोच्चार के साथ धर्मध्वजा का पुनर्स्थापन किया, कार्यक्रम में उ0प्र0 की राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष सम्मिलित हुए
भगवान श्रीराम मन्दिर के गर्भगृह की अनन्त ऊर्जा, श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप धर्म ध्वजा के रूप में इस दिव्यतम व भव्यतम मंदिर में प्रतिस्थापित हुआ : प्रधानमंत्री
आज हम सभी के लिए यह सार्थकता का दिवस, इस दिन के लिए अनेक लोगों ने सपना देखा, प्रयास किये तथा अपना बलिदान दिया : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक
अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर पर ध्वजारोहण एक नये युग का शुभारम्भ,: मुख्यमंत्री
लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ0 मोहनराव भागवत ने आज अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के शिखर पर, विधिवत मन्त्रोच्चार के साथ धर्मध्वजा का पुनर्स्थापन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महन्त नृत्य गोपालदास जी महाराज उपस्थित रहे। इसके पूर्व, प्रधानमंत्री जी ने सप्त मन्दिर (महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह, माता शबरी), शेषावतार मन्दिर तथा माता अन्नपूर्णा देवी मन्दिर में दर्शन-पूजन किया। इसके उपरान्त प्रधानमंत्री एवं डॉ0 मोहनराव भागवत ने श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में पूजा-अर्चना की। प्रधानमंत्री जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज भगवान श्रीराम मन्दिर के गर्भगृह की अनन्त ऊर्जा तथा श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप धर्म ध्वजा के रूप में इस दिव्यतम व भव्यतम मंदिर में प्रतिस्थापित हुआ है। यह केवल एक धर्म ध्वजा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इस पर अंकित सूर्यवंश की ख्याति वर्णित ऊँ शब्द और कोविदार वृक्ष राम राज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प व सफलता का प्रतीक है। संघर्ष से सृजन की गाथा है। सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है। संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणति है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिन्दु की साक्षी बन रही है। सम्पूर्ण भारत व विश्व राममय है। प्रत्येक राम भक्त के हृदय में अद्वितीय सन्तोष, असीम कृतज्ञता व अपार अलौकिक आनन्द है। आज सदियों की वेदना विराम पा रही है। सदियों का संकल्प सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति हुई है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही तथा जो यज्ञ एक भी पल आस्था से नहीं डिगा, विश्वास से नहीं टूटा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली सदियों और सहस्त्र शताब्दियों तक यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों व सिद्धान्तों का उद्घोष करेगा। यह धर्मध्वज ‘सत्यमेव जयते’ अर्थात् सत्य की ही जीत होती है, का आवाह्न करेगा। धर्म ध्वज उद्घोष करेगा कि ‘सत्यमेव परम ब्रह्म, सत्यमेव धर्म प्रतिष्ठित’ अर्थात् सत्य ही परम ब्रह्म का स्वरूप है व सत्य में ही धर्म स्थापित है। यह धर्मध्वज हमारी प्रेरणा बनेगा। ‘रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’ अर्थात जो कहा जाए वही किया जाए। यह धर्मध्वज संदेश देगा। ‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा’ अर्थात विश्व में कर्म और कर्तव्य की प्रधानता हो। धर्मध्वज कामना करेगा कि ‘बैर न बिग्रह आस न त्रासा, सुखमय ताहि सदा सब आसा’ यानी भेदभाव, पीड़ा, परेशानी से मुक्ति प्राप्त हो तथा समाज में शान्ति और सुख हो। यह हमें संकल्पित करेगा कि ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ अर्थात् हम ऐसा समाज बनाएं, जहां गरीबी न हो तथा जहां कोई दुखी या लाचार व्यक्ति न हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में कहा गया है कि ‘आरोपितं ध्वजं दृष्ट्वा, ये अभिनन्दन्ति धार्मिकाः, ते अपि सर्वे प्रमुच्यन्ते, महा पातक कोटिभिः’ अर्थात् जो लोग किसी कारण मंदिर नहीं आ पाते, और दूर से मंदिर के ध्वज को प्रणाम कर लेते हैं, उन्हें भी उतना ही पुण्य मिल जाता है। यह धर्मध्वज भी इस मंदिर के ध्येय का प्रतीक है। यह ध्वज दूर से ही श्रीरामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा और युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम के आदर्शां और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। प्रधानमंत्री जी ने सम्पूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों, श्रीराम मंदिर निर्माण में अपना सहयोग देने वाले श्रमवीरों, कारीगरों, योजनाकारों, वास्तुकारों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह अयोध्या की वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां से प्रभु श्रीराम ने अपना जीवन प्रारम्भ किया था। इसी अयोध्या ने संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति व उसके संस्कारों से पुरुषोत्तम बनता है। जब प्रभु श्रीराम अयोध्या से वनवास के लिए गए, उस समय वह युवराज राम थे। लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम बन कर आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषाद राज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान का समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में भी समाज की इसी सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। प्रभु श्रीराम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है। यहां सप्त मन्दिर बने हैं, जिनमें माता शबरी का मंदिर जनजातीय समाज के प्रेम भाव और आतिथ्य परम्परा की प्रतिमूर्ति है। निषाद राज का मंदिर उस मित्रता का साक्षी है, जो साधन नहीं साध्य की भावना को पूजती है। यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और संत तुलसीदास जी हैं। श्रीरामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन यहां पर होते हैं। यहां जटायु जी और गिलहरी की मूर्तियां भी है, जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रत्येक छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों का आवाह्न करते हुए कहा कि आप जब भी श्रीराम मन्दिर आए तो सप्तम मन्दिर के दर्शन अवश्य करें। यह मन्दिर हमारी आस्था के साथ-साथ मित्रता, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को भी शक्ति देते हैं। हमारे श्रीराम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं मूल्य प्रिय हैं। उन्हें शक्ति नहीं सहयोग महान लगता है। आज हम भी उसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं। विगत 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा सहित प्रत्येक वर्ग को विकास के केन्द्र में रखा गया है। जब देश का प्रत्येक व्यक्ति, वर्ग, क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा। जब वर्ष 2047 में देश आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मना रहा होगा, तब तक हमें सम्मिलित प्रयास से विकसित भारत का निर्माण करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीराम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, वह मूल्य, मर्यादा व दिशा हैं। यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित तथा समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमें अपने अन्दर ‘श्रीराम’ को जगाना होगा। अपने अन्दर श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा करनी होगी। इस संकल्प के लिए आज से बेहतर दिन और क्या हो सकता है। 25 नवम्बर का यह ऐतिहासिक दिन अपनी विरासत पर गर्व करने का एक और अद्भुत क्षण लेकर आया है। इसकी वजह है, धर्मध्वजा पर अंकित कोविदार वृक्ष। यह वृक्ष इस बात का उदाहरण है कि जब हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं, तो हमारा वैभव इतिहास के पन्नों में दब जाता है। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि जब भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पहुंचे, तो लक्ष्मण ने दूर से ही अयोध्या की सेना को पहचान लिया। यह कैसे हुआ, इसका वर्णन वाल्मीकि जी ने करते हुए उल्लिखित किया है कि ‘विराजति उद्गत स्कन्धम्, कोविदार ध्वजः रथे’ अर्थात् लक्ष्मण कहते हैं कि ‘हे राम, सामने जो तेजस्वी प्रकाश में विशाल वृक्ष जैसा ध्वज दिखाई दे रहा है, वही अयोध्या की सेना का ध्वज है, उस पर कोविदार का शुभ चिन्ह अंकित है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के उत्तरी हिस्से में स्थित उत्तरमेरूर गांव में हज़ारों वर्ष पहले का एक शिलालेख है। उसमें उल्लिखित है कि उस कालखण्ड में भी कैसे लोकतांत्रिक तरीके से शासन व्यवस्था चलती थी तथा लोग सरकार कैसे चुनते थे। लेकिन हमारे यहां तो मैग्ना कार्टा की प्रशंसा का ही चलन रहा। यहां भगवान बसवन्ना, उनके अनुभव मंटपा की जानकारी भी सीमित रखी गई। अनुभव मंटपा अर्थात् जहां सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक विषयों पर सार्वजनिक बहस होती थी। जहां सामूहिक सहमति से निर्णय लिए जाते थे। लेकिन गुलामी की मानसिकता के कारण भारत की अनेक पीढ़ियों को इस जानकारी से वंचित रखा गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब से प्रभु श्रीराम मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई है, तब से आज तक करीब-करीब पैंतालीस करोड़ श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं। यह वह पवित्र भूमि है, जहां पैंतालीस करोड़ लोगों के चरण रज पड़े हैं। इससे अयोध्या और आसपास के लोगों की आय में आर्थिक परिवर्तन व वृद्धि हुई है। कभी अयोध्यानगरी विकास के पैमानों में बहुत पीछे थी, आज यह प्रदेश के अग्रणी शहरों में से एक बन रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का आने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण है। आजादी के बाद के 70 वर्षों में भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, लेकिन विगत 11 वर्षों में ही भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। वह दिन दूर नहीं, जब भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ0 मोहनराव भागवत ने कहा कि आज हम सभी के लिए यह सार्थकता का दिवस है। इस दिन के लिए अनेक लोगों ने सपना देखा, प्रयास किये तथा अपना बलिदान दिया। आज प्रभु श्रीराम मन्दिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। रामराज्य का जो ध्वज पहले अयोध्या में फहराता था और सम्पूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख-शान्ति प्रदान करता था, हम सभी ने उस ध्वज को आज फिर से प्रभु श्रीराम के मन्दिर के शिखर पर विराजमान होते हुए अपनी आंखों से देखा है। हमें सम्पूर्ण दुनिया को ओंकार से प्रतिनिधित होने वाले सत्य को प्रदान करने वाला, परम वैभव व सर्वशक्ति सम्पन्न, सबको खुशी और उन्नति बांटने वाला तथा विकास के सुफल प्रदान करने वाला भारतवर्ष खड़ा करना है। यह विश्व की अपेक्षा और हमारा कर्तव्य है। प्रभु श्रीराम मन्दिर में हमारे इस संकल्प के प्रतीक की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गयी है। हमें यह संकल्प हमारे पूर्वजों ने दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक ने कहा कि सम्पूर्ण दुनिया में धर्म, ज्ञान तथा सुफल बांटने वाले भारत की शुरूआत हो चुकी है। इस ध्वज प्रतीक को देखकर दृढ़तापूर्वक सतत् प्रयास करते हुए सभी प्रकार की विपरीतताओं के पश्चात भी हम सबको मिलकर इस भारत का निर्माण करना पड़ेगा। ‘एतद् देश प्रसूतस्य शकासाद् अग्रजन्मनः, स्वं-स्वं चरित्रं शिक्षरेन् पृथ्वियां सर्व मानवः’ अर्थात भारत में जन्मे हमारे अग्र्रजों ने अपने उत्तम चरित्र की शिक्षा व जीवन की विद्या पृथ्वी के समस्त मानवों को प्रदान की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रभु श्रीराम का यह भव्य मन्दिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था, सम्मान और आत्मगौरव का प्रतीक है। अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर पर ध्वजारोहण एक नये युग का शुभारम्भ है। यह केसरिया ध्वज धर्म, मर्यादा, सत्य, न्याय, राष्ट्र धर्म तथा विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक है। आज का यह पावन दिन उन श्रीराम भक्तों, पूज्य सन्तों, योद्धाओं की अखण्ड साधना व संघर्ष को समर्पित है, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। विवाह पंचमी का यह दिव्य संयोग इस उत्सव को और अधिक पावन बना रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘आजु सफल तपु तीरथ त्यागू, आजु सुफल जप जोग बिरागू, सफल सकल सुभ साधन साजू, राम तुम्हहि अवलोकत आजू’ अर्थात् हे प्रभु श्रीराम, आपका दर्शन करते ही आज मेरा तप, तीर्थ सेवन, त्याग, जप, योग, वैराग्य तथा सम्पूर्ण शुभ साधनों का समुदाय सफल हो गया है। ध्वजारोहण उस सत्य का उद्घोष है कि धर्म का प्रकाश अमर है और रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा पद ग्रहण के प्रथम दिन से ही कोटि-कोटि भारतवासियों के मन में जिस सम्भावना, संकल्प और विश्वास का सूर्योदय हुआ, आज वह साकार होकर इस भव्य श्रीराम मन्दिर के रूप में सभी देशवासियों व सनातन धर्मावलम्बियों के समक्ष स्थित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां धर्म पथ, राम पथ, भक्ति पथ, पंचकोसी, चौदहकोसी व चौरासीकोसी परिक्रमा श्रद्धालुओं और भक्तों की आस्था को सम्मान प्रदान कर रही है। यहां महर्षि बाल्मीकि के नाम पर स्थापित अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध करा रहा है। हम इस नयी अयोध्या का दर्शन देश की पहली सोलर सिटी व सस्टेनेबल स्मार्ट सिटी के रूप में कर रहे हैं। इस अवसर पर साधु-संत सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।