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  • डिजिटल दौर की युवा पीढ़ी ने संस्कृति से बदला नजरिया, भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव में दोस्ती की नई मिसाल

    डिजिटल दौर की युवा पीढ़ी ने संस्कृति से बदला नजरिया, भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव में दोस्ती की नई मिसाल

    *लोक नृत्यों की गूंज से मजबूत हो रहे भारत-नेपाल रिश्ते, पूर्वांचल और तराई में सजा सांस्कृतिक उत्सव*

    *भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 बना सांस्कृतिक एकता और पर्यटन प्रोत्साहन का महापर्व- जयवीर सिंह* 

    लखनऊ,/ भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करता ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026’ इन दिनों जनमानस को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर रहा है। 16 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह बहुप्रतीक्षित महोत्सव अपने आधे पड़ाव तक पहुंच चुका है। दोनों देशों के कलाकारों की अनूठी लोक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। झगड़ जनजाति लोक नृत्य, कुमारी नृत्य, फरुवाही लोक नृत्य तथा बधावा लोक नृत्य की मनमोहक छटा भारत-नेपाल की साझा विरासत को नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। 

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026′ दोनों देशों के संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और भावनात्मक आधार पर सदियों से जुड़े हैं। इन रिश्तों को और प्रगाढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नया आकार देगा। महोत्सव प्रदेश के पूर्वांचल और तराई के आठ जिलों में मित्रता का मंच सजा रहा है। इसमें एक जनपद, एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी भी लगी है।’

    *रचनात्मक गतिविधियों से सशक्त संदेश* 
    28 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में स्काउट एंड गाइड के बच्चों द्वारा योग का सुंदर प्रदर्शन, भारत-नेपाल मैत्री विषय पर चित्रकला और रंगोली जैसी रचनात्मक गतिविधियां भारत-नेपाल की दोस्ती का सशक्त संदेश दे रही हैं। नेपाल से आए कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जब मंच पर अपनी सांस्कृतिक छटा बिखेरी, तो भारत-नेपाल मैत्री केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आत्मीयता के जीवंत उत्सव में बदल गई। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘इस महोत्सव ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि डिजिटल युग में जी रही मौजूदा पीढ़ी जब अपनी अभिव्यक्ति को परंपरा के रंगों से सजाती है, तब पूर्वांचल और तराई की धरती पर भारत-नेपाल मैत्री और भी प्रखर एवं अर्थपूर्ण स्वरूप में सामने आती है।’

    *‘रोटी-बेटी’ रिश्ते की झलक* 
    कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में आयोजित महोत्सव में धोबिया लोकनृत्य और नुक्कड़ नाटकों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने दोनों देशों के संबंधों को भावनात्मक गहराई से प्रस्तुत किया। कलाकारों ने ‘रोटी-बेटी’ के आत्मीय रिश्ते को मंच पर इस तरह साकार किया कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे। प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि भारत-नेपाल की यह परंपरागत मित्रता और पारिवारिक जुड़ाव हर वर्ष इसी उत्साह, उल्लास और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाता रहेगा। 

  • यूपी बोर्ड की परीक्षा शुरु,माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने किया निरीक्षण

    यूपी बोर्ड की परीक्षा शुरु,माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने किया निरीक्षण

    परीक्षा के प्रथम दिन टीप्स के साथ तिलक लगाकर बच्चों को दीं शुभकामनाएं 

    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने यूपी बोर्ड परीक्षा के प्रथम दिवस पर लखनऊ के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विक्रमादित्य मार्ग में  निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

    माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने इस अवसर पर छात्राओं को टीका चंदन करते हुए पेड़ा खिलाकर मुह मीठा कराया गया।

    माध्यमिक शिक्षा मंत्री द्वारा शांत मन और पूरी ऊर्जा के साथ परीक्षा देने एवं अपनी मेहनत से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करते हुए अपने माता-पिता, गुरुजनों और प्रदेश का गौरव बढाने हेतु आशीर्वाद प्रदान किया। 

    राजकीय बालिका इ० कालेज जियामऊ लखनऊ सेन्टर कोड-341874 को परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। जिसमें प्रथम पाली में विषय हिन्दी में हाईस्कूल के 304 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। द्वितीय पाली में विषय-हिन्दी इण्टरमीडिएट के 352 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।

     माध्यमिक शिक्षा विभाग, परिषद द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा की गौरवशाली परंपरा और परीक्षा को नकल विहीन एवं शुचिता और गरिमा को बनाए रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाएँ आज 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक प्रदेशभर में आयोजित की जा रही हैं।

    यूपी बोर्ड परीक्षा के प्रथम दिवस 18 फरवरी की प्रथम पाली (प्रातः 8:30 बजे से 11:45 तक) हाईस्कूल में हिन्दी एवं प्रारम्भिक हिन्दी की परीक्षा 8,033 परीक्षा केन्द्रों पर सम्पन्न होगी जिसमें कुल 27,54,376 परीक्षार्थी पंजीकृत है।

    द्वितीय पाली (सायं 2-00 बजे से 5-15 बजे तक) इण्टरमीडिएट की हिन्दी एवं सामान्य हिन्दी की परीक्षा 7,998  परीक्षा केन्द्रों पर सम्पन्न होगी जिसमें कुल 24,99,370  परीक्षार्थी पंजीकृत है।

    राज्य स्तरीय हाईटेक कंट्रोल रूम, लखनऊ से 75 जनपदों के सभी 8033 परीक्षा केंद्रों की लाइव ऑनलाइन मॉनिटरिंग और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गयी है।

    कुल 53,37,778 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं हाईस्कूल 27,61,696 एवं इंटरमीडिएट 25,76,082 परीक्षा में शामिल होंगे।

    प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र स्थापित — 596 राजकीय, 3453 सहायता प्राप्त एवं 3984 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं।

    18 जनपद संवेदनशील घोषित; 222 परीक्षा केंद्र अति संवेदनशील एवं 683 संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं।

    प्रत्येक परीक्षा कक्ष में वॉयस रिकॉर्डरयुक्त 02 सीसीटीवी कैमरे, राउटर, डीवीआर व हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था, स्ट्रांग रूम 24×7 निगरानी में हैं।

    8033 केंद्र व्यवस्थापक, 8033 बाह्य केंद्र व्यवस्थापक, 427 जोनल मजिस्ट्रेट, 1210 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 440 जनपदीय सचल दल तथा 69 मंडलीय दल सक्रिय हैं।

    प्रश्नपत्रों के रिजर्व सेट सुरक्षित डबल लॉक अलमारी में सीलबंद; उत्तर पुस्तिकाएँ चार रंगों व सुरक्षा फीचर के साथ मुद्रित की गयी हैं। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के तहत कदाचार पर कठोर दंड का प्रावधान है।

    टोल-फ्री हेल्पलाइन 18001806607, 18001806608 तथा परिषद प्रयागराज के हेल्पलाइन नंबर सक्रिय, ईमेल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था है।

    मंत्री गुलाब देवी ने कहा  कि नकलविहीन, पारदर्शी और शुचितापूर्ण परीक्षा कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा परीक्षार्थी तनावमुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दें।

  • मंत्री ए के शर्मा के नेतृत्व में महत्वपूर्ण पहल: उत्तर प्रदेश नगर निगम संशोधन अधिनियम 2026 विधानसभा से पारित

    मंत्री ए के शर्मा के नेतृत्व में महत्वपूर्ण पहल: उत्तर प्रदेश नगर निगम संशोधन अधिनियम 2026 विधानसभा से पारित

    कुष्ठाश्रम जैसी भेदभावपूर्ण शब्दावली को हटाना मानव गरिमा और सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम:  ए के शर्मा*

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील संशोधन विधेयक पारित किया गया। उत्तर प्रदेश नगर निगम संशोधन अधिनियम 2026 तथा उत्तर प्रदेश नगर पालिका संशोधन अधिनियम को सदन ने पारित कर मानव गरिमा और समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

    मंत्री शर्मा ने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि कुष्ठ रोग एक गैर-संक्रामक रोग है और अन्य अनेक रोगों की भांति पूर्णतः इलाज योग्य है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 115 के खंड (ड)(i) तथा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 8 के खंड 2(i)(b) में प्रयुक्त “कुष्ठाश्रम” शब्द को विलोपित किया गया है, क्योंकि यह शब्दावली कुष्ठ रोग से प्रभावित अथवा स्वस्थ हो चुके व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण अभिव्यक्ति मानी जाती रही है।मंत्रीशर्मा ने कहा कि पूर्व में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी सभी राज्यों को ऐसे भेदभावपूर्ण शब्दों को कानूनों से हटाने के निर्देश दिए गए थे। उसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह संशोधन लाकर सामाजिक न्याय और संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार कुष्ठ रोगियों की देखभाल, उपचार और पुनर्वास के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है और किसी भी स्तर पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समाज से भी अपील की कि ऐसे व्यक्तियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न करें और उन्हें समान सम्मान प्रदान करें।मंत्री शर्मा ने यह भी कहा कि “कुष्ठाश्रम” शब्द का प्रयोग नकारात्मक भाव लिए हुए था, जिससे संबंधित व्यक्तियों की गरिमा प्रभावित होती थी। इसलिए मानवाधिकारों और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखते हुए अधिनियम में संशोधन का निर्णय लिया गया।

    इस अवसर पर आगरा से मा. विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, हाथरस से विधायक मंजुला सिंह माहौर एवं रायबरेली से विधायक अशोक कुमार ने इस मानवीय और दूरदर्शी पहल के लिए नगर विकास मंत्री ए के शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।यह संशोधन न केवल विधिक सुधार है, बल्कि सामाजिक चेतना और संवेदनशील शासन का प्रतीक है,जो उत्तर प्रदेश सरकार की “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की भावना को और सुदृढ़ करता है।

  • उ0प्र0 ट्रिपल ‘टी’ अर्थात टेक्नोलॉजी,ट्रस्ट एण्ड ट्रान्सफॉरमेशन की त्रिवेणी बनकर उभरा

    उ0प्र0 ट्रिपल ‘टी’ अर्थात टेक्नोलॉजी,ट्रस्ट एण्ड ट्रान्सफॉरमेशन की त्रिवेणी बनकर उभरा

    लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने जनकल्याण, रोजगार सृजन, निवेश का विस्तार तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध प्रदेश के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप वर्ष 2029-30 तक प्रदेश को 01 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का हमारा लक्ष्य है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए इस वर्ष का बजट सदन में प्रस्तुत किया गया है। इस बजट के माध्यम से राज्य सरकार ने प्रदेश में प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास किया गया है। हर गाँव में खेल का मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम तथा जनपद स्तर पर स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। मेजर ध्यानचन्द जी के नाम पर जनपद मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का निर्माण किया जा रहा है। मण्डल मुख्यालय पर एक स्पोर्ट्स कॉलेज बनाया जाएगा, इन्हें किसी एक विशेष खेल के लिए सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। यह प्रदेश के युवाओं को खेल के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। ओलम्पिक, कॉमनवेल्थ तथा एशियाड खेलों में पदक प्राप्त करने वाले प्रदेश के 500 से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी उपलब्ध करायी जा चुकी है। वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स तथा वर्ष 2036 में ओलम्पिक खेलों की मेजबानी के लिए हमने सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की कार्यवाही आगे बढ़ायी है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के एजेण्डे में विकास नहीं था, बल्कि परिवारवाद, तुष्टिकरण तथा दंगाइयों को पोषित करने का था। जे0पी0एन0आई0सी0 का डी0पी0आर0 200 करोड़ रुपये था, यह 800 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अधूरा है। गोमती रिवर फ्रण्ट का डी0पी0आर0 300 करोड़ रुपये का था, जिस पर 1,400 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी कार्य अधूरे थे। बिना भूमि अर्जित किए ही पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के टेण्डर एवॉर्ड कर दिए गए थे। पहले यह टेण्डर 15,200 करोड़ रुपये का था। यह एक्सप्रेस-वे 110 मीटर चौड़ा 350 किलोमीटर लम्बाई में बनना था। हमारी सरकार बनने पर इसके कार्यों की समीक्षा की गई, तो पता चला कि भूमि का अर्जन ही नहीं हुआ है। हमने इसके टेण्डर निरस्त कर दिए। हमने एक्सप्रेस-वे को 120 मीटर करने का प्रस्ताव रखा, क्योंकि दिल्ली से वाराणसी तक चलने वाली बुलेट ट्रेन चलाने के लिए भूमि की व्यवस्था भी इसके साथ की गई है। बाद में जब एक साथ टेक्निकल और फाइनेन्शियल बिड मँगाते हुए टेण्डर किए गए, तब वह 11,800 करोड़ रुपये के थे।
    इमरजेंसी के समय प्रदेश में दूसरी आजादी के आन्दोलन का शंखनाद करने वाले जय प्रकाश नारायण जी उत्तर प्रदेश की धरा पर जन्मे थे। जय प्रकाश नारायण की अन्तिम इच्छा का सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने उनकी जन्मभूमि पर हॉस्पिटल निर्माण तथा कनेक्टिविटी के कार्य किए हैं। पिछली सरकारों ने जय प्रकाश नारायण जी और डॉ0 राम मनोहर लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया। आज इनका समाजवाद सम्पत्ति और सन्तति का प्रतीक बन गया है। इन्होंने अपने कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में अव्यवस्था और अराजकता फैलायी। युवाओं के सामने पहचान तथा बहन और बेटियों के सामने सुरक्षा का संकट खड़ा किया। अन्नदाता किसानों को आत्महत्या करने तथा व्यापारियों को प्रदेश छोड़ने के लिए मजबूर किया।  
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जल, थल और नभ की बेहतरीन कनेक्टिविटी है। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे का संजाल है। देश के एक्सप्रेस-वे का 55 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क उत्तर प्रदेश में है। 22 फरवरी, 2026 को देश की पहली रैपिड रेल दिल्ली से मेरठ का उद्घाटन प्रधानमंत्री जी करने का जा रहे हैं।
    वर्ष 2017 के पूर्व मेरठ से दिल्ली की दूरी 05 से 06 घण्टे में तय होती थी तथा सफर भी सुरक्षित नहीं था। आज उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का वातावरण है। अब दिल्ली और मेरठ के बीच 12-लेन का हाइवे बन जाने से यह दूरी 45 मिनट में तय की जा सकती है। उत्तर प्रदेश में 07 एक्सप्रेस-वे क्रियाशील हैं, 05 निर्माणाधीन हैं तथा 10 पर कार्य चल रहा है। देश में सर्वाधिक 06 शहरों में मेट्रो रेल संचालित हैं। प्रधानमंत्री द्वारा 22 फरवरी, 2026 को मेरठ में मेट्रो रेल का उद्घाटन होने के बाद यह संख्या 07 हो जाएगी। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन उत्तर प्रदेश में है। वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैण्ड वॉटर-वे संचालित हो रहा है। उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक का बेहतरीन केन्द्र बनने जा रहा है।

  • ब्रज क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाएगा आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम – मंत्री जयवीर सिंह

    ब्रज क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाएगा आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम – मंत्री जयवीर सिंह

    उत्तर भारत का आधुनिक आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम 80 फीसदी तैयार, इमर्सिव लर्निंग और इंटरैक्टिव डिस्प्ले होंगे मुख्य आकर्षण, ब्रज क्षेत्र को मिलेगी विशिष्ट पहचान, आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम ‘वेदों की ओर लौटो’ का देगा संदेश*

    *ईश्वर, वेद और सच का संदेश देगा आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम, सेवा और समानता की राह दिखाएंगे पाँच पिलर*

    लखनऊ,आगरा/ उत्तर भारत का आधुनिक आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम अब लगभग तैयार है। नई तकनीक से सुसज्जित यह संग्रहालय अतीत की गौरवगाथा को नए और आकर्षक अंदाज़ में पेश करेगा, जहां इतिहास केवल पढ़ा नहीं जाएगा, बल्कि महसूस किया जाएगा। ब्रज क्षेत्र की यह महत्वाकांक्षी परियोजना न सिर्फ पर्यटन को नई राष्ट्रीय पहचान देगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी। फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज में 24.45 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा उत्तर प्रदेश का पहला आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम तेजी से तैयार हो रहा है, जिसका लगभग 80 फीसदी से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है। इसको लेकर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान जल्द से जल्द कार्य संपन्न करने के निर्देश दिए।

    *विज़ुअल स्टोरीटेलिंग में सजेगा आर्य इतिहास*

    इसकी विशेषता पर जानकारी देते हुए मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, इस म्यूजियम में इतिहास को इमर्सिव लर्निंग, विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए दिखाया जाएगा, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। यहां स्थापना और शुरुआती दौर, संस्थापक और स्थानीय नेताओं का योगदान, आजादी की लड़ाई में भूमिका, सिद्धांत और विचारधारा, योग की अहमियत और आज के समय में इसकी जरूरत जैसे जोन बनाए गए हैं। कुल मिलाकर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और उनसे प्रेरणा लेने का एक बेहतरीन माध्यम है। म्यूजियम में ऑडिटोरियम, मल्टीपर्पज हॉल, एम्फीथिएटर, हेलीपैड, फायर फाइटिंग सिस्टम और कई ब्लॉकों का ढांचा तैयार हो गया है और अधिकतर जगहों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। बाहरी इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्यूबवेल, अंडरग्राउंड सम्प और कुछ अन्य कार्य प्रगति पर हैं, जबकि सीसी रोड, हॉर्टिकल्चर, तालाब विकास, फ्लोटिंग मल्टीमीडिया और CCTV जैसे कुछ काम अभी शुरू होने बाकी हैं। कुल मिलाकर परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और तय समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    *सत्य, धर्म और सेवा का संदेश देता संग्रहालय*

    इसके अलावा इस म्यूजियम में पाँच पिलरों की सीख भी होगी। जिसमें पहला, ईश्वर ही सच्चे ज्ञान का असली स्रोत है-वह निराकार, अनंत और पूरी सृष्टि का रचयिता है। दूसरा, वेद हमें सही सोच और सही जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए उन्हें समझना और उनके अनुसार चलना हमारी जिम्मेदारी है। तीसरा, हमें हर हाल में सच का साथ देना चाहिए और गलत बातों से दूर रहना चाहिए, ताकि हमारा हर कदम धर्म और ईमानदारी पर टिका हो। चौथा, हमारा उद्देश्य केवल अपनी तरक्की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक उन्नति करना है। और पाँचवां, हमें सभी लोगों के साथ प्रेम, सम्मान और न्याय से व्यवहार करना चाहिए एवं दूसरों की प्रगति में ही अपनी सफलता देखनी चाहिए। 

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने हाल ही में हुई एक बैठक में इसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आर्य गुरुकुल म्यूजियम हमारे अतीत की विरासत और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक सशक्त माध्यम है। अब सिर्फ आगरा का ताजमहल ही नहीं बल्कि आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान कायम करेगा। ब्रज क्षेत्र का यह म्यूज़ियम केवल इतिहास को संजोने का प्रयास नहीं, बल्कि उस चेतना को फिर से जागृत करने का संकल्प है जिसने समाज को ज्ञान, समानता और राष्ट्रभाव की दिशा दी। आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी के दिल और दिमाग से जोड़ रहे हैं, ताकि वे केवल इतिहास को जानें ही नहीं, बल्कि उसे महसूस करें, समझें और उससे प्रेरणा लेकर एक सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

    हाल ही में पर्यटन मंत्री ने प्रमुख और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को लेकर अहम समीक्षा बैठक की थी, जिसमें फिरोजाबाद में बन रहे ग्लास म्यूजियम फिरोजाबाद, मैनपुरी के कल्चरल सेंटर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम तथा सामौर बाबा मंदिर कॉम्प्लेक्स की प्रगति और विकास योजनाओं का विस्तार से अवलोकन किया गया था। आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम सिर्फ एक भवन नहीं है, बल्कि एक ऐसे आंदोलन की कहानी बताएगा, जिसने भारत में सोच, समाज और देशभक्ति को नई दिशा दी। आर्य समाज ने “वेदों की ओर लौटो” का संदेश देकर लोगों को जागरूक किया और सामाजिक बराबरी, शिक्षा और तर्क की सोच को मजबूत बनाया। यह म्यूज़ियम आज की पीढ़ी के लिए एक एजुकेशनल हब की तरह काम करेगा, जहां लोग अपने इतिहास और संस्कारों को आसान और दिलचस्प तरीके से समझ सकते हैं।

  • मंत्री ए के शर्मा ने तमसा नदी तट स्थित मऊ महादेव मंदिर के नवनिर्मित भव्य घाटों का लोकार्पण किया

    मंत्री ए के शर्मा ने तमसा नदी तट स्थित मऊ महादेव मंदिर के नवनिर्मित भव्य घाटों का लोकार्पण किया

    शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर मऊ को ऐतिहासिक सौगात*

    *माफिया-मुक्त मऊ की नई पहचान बना मऊ महादेव धाम – ए के शर्मा

    लखनऊ, मऊ/ शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर जनपद मऊ को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सौगात मिली, जब नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने तमसा नदी तट स्थित मऊ महादेव मंदिर के नवनिर्मित भव्य घाटों का लोकार्पण किया। 938.00 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना आईसीआईसीआई बैंक के सीएसआर फंड से पूरी हुई है। रेड स्टोन धौलपुर के पत्थरों से सुसज्जित घाटों ने पूरे परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया है। घाट परिसर में स्थापित भगवान शिव की 61 फीट ऊंची कंक्रीट निर्मित भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और आस्था का केंद्र बन गई है। राजस्थान के कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित यह प्रतिमा दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन रही है।

    *अब मऊ की पहचान माफिया से नहीं, महादेव से होगी*

    अपने संबोधन में मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि जिस स्थान पर आज श्रद्धालु श्रद्धा के साथ आरती और दर्शन कर रहे हैं, कभी वहां गंदगी, अव्यवस्था और भय का वातावरण था। लोग इस क्षेत्र में आने से कतराते थे। उन्होंने कहा कि आज मऊ भय और गुंडाराज की छवि से बाहर निकलकर “माफिया-मुक्त मऊ” की नई पहचान बना रहा है। शासन अब डर से नहीं, निर्णय से चलता है। कानून व्यवस्था की मजबूती और विकास की निरंतरता ने जनपद की दिशा बदल दी है। उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा कि “अब मऊ की पहचान माफिया से नहीं, महादेव से होगी।” यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि स्थानीय जनता के सहयोग और संकल्प से संभव हुआ है।

    *मऊ महादेव धाम बनेगा ‘यूपी का कैलाश*

    मंत्री श्री शर्मा ने घोषणा की कि मऊ महादेव धाम को उत्तर प्रदेश का ‘कैलाश’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी एक वर्ष के भीतर यहां एक सुंदर एवं आधुनिक ग्रीन पार्क का निर्माण कराया जाएगा, जिससे यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि मऊ में विकास कार्यों की गति निरंतर जारी रहेगी। सड़क, बिजली, नगर विकास और धार्मिक स्थलों के कायाकल्प के माध्यम से जनपद को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जाएगा।

    *डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में बदलता मऊ*

    अपने उद्बोधन में मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश विकसित प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुदृढ़ कानून व्यवस्था, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव से मऊ जैसे जनपदों में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और आध्यात्मिक स्थलों के विकास के माध्यम से प्रदेश की पहचान मजबूत हो रही है।

    *भव्य आयोजन ने बढ़ाया जनउत्साह*

    लोकार्पण अवसर पर आयोजित भव्य आरती, लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर जनपद के बदलते स्वरूप का स्वागत किया।

    *संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम*

    मऊ महादेव धाम के नवनिर्मित घाट न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा और सुरक्षा प्रदान करेंगे, बल्कि इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। यह परियोजना माफिया-मुक्त, सुरक्षित और विकसित मऊ की नई पहचान का प्रतीक बन चुकी है। शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर मिला यह उपहार जनपद के आत्मगौरव, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और समग्र विकास का सशक्त संदेश देता है।मऊ अब भय की नहीं, भक्ति और विकास की राह पर अग्रसर है।

  • कुशीनगर में स्थापित होगी अत्याधुनिक केले की टिशू कल्चर लैब

    कुशीनगर में स्थापित होगी अत्याधुनिक केले की टिशू कल्चर लैब

    किसानों को मिलेंगे उन्नत किस्म के केले के पौधे, बढ़ेगी आय और खुशहाली

     लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के क्रम में जनपद कुशीनगर के कसया स्थित राजकीय आलू फार्म पर ‘केला टिशू कल्चर लैब’ की स्थापना की जा रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु कुल 401.75 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से 223.54 लाख रुपये निर्माण कार्य और 178.21 लाख रुपये मशीनरी व उपकरणों के लिए आवंटित किए गए हैं। इस लैब की स्थापना से क्षेत्र के केला उत्पादक किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले रोगमुक्त पौधे स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उनकी उत्पादन लागत में कमी आएगी और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनपद कुशीनगर में केले की खेती को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ना है। कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि वर्तमान में किसानों को उन्नत टिशू कल्चर पौधों के लिए अन्य राज्यों या दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे परिवहन के दौरान पौधों के खराब होने का डर और अधिक व्यय होता था। अब स्थानीय स्तर पर लैब स्थापित होने से किसानों को समय पर स्वस्थ और अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के पौधे प्राप्त होंगे। यह लैब न केवल केले की गुणवत्ता में सुधार करेगी, बल्कि निर्यात योग्य फसल तैयार करने में भी सहायक सिद्ध होगी, जिससे ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) अभियान को भी नई गति मिलेगी।

    परियोजना के अंतर्गत निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (UPRNSS) को सौंपी गई है। कुशीनगर के कसया में ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) पोटैटो के अतिरिक्त घटकों के लिए भी 70.86 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार कुल 472.61 लाख रुपये की संयुक्त वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया गतिमान है। इन सुविधाओं के विकसित होने से कुशीनगर और आसपास के जनपदों के हजारों किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि यह लैब तकनीकी हस्तांतरण का केंद्र बनेगी, जहां किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा। लैब के माध्यम से तैयार पौधे कीट और रोगों के प्रति सहनशील होंगे, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होगा और किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होगी। सरकार का यह कदम कुशीनगर को केले के उत्पादन और प्रसंस्करण के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

  • जलशक्ति मंत्री ने सिंचाई विभाग के नवनिर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल सिंचाई भवन का किया लोकार्पण

    जलशक्ति मंत्री ने सिंचाई विभाग के नवनिर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल सिंचाई भवन का किया लोकार्पण

    लखनऊ । उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आज यहां उदयगंज स्थित सिंचाई विभाग मुख्यालय परिसर में नवनिर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल सिंचाई भवन, का लोकार्पण किया, इस अवसर पर जलशक्ति राज्यमंत्री राकेश निषाद, प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग अनिल गर्ग,  प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष इं0 संदीप कुमार, प्रमुख अभियन्ता परिकल्प एवं नियोजन इं0 अशोक कुमार सिंह, मुख्य अभियन्ता, अधीक्षण अभियन्ता तथा अन्य अभियन्ता गण एवं विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे। सिंचाई भवन के उद्घाटन पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए जलशक्ति मंत्री ने कहा कि यह भवन सिंचाई विभाग के कार्यों एवं कार्यक्षमता को और अधिक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति प्रदान करेगा।
    आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस भवन में बेसमेंट तथा भूतल पर वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था के साथ प्रथम तल से चतुर्थ तल तक लगभग 600 अधिकारियों एवं कर्मचारियों हेतु बैठने की व्यवस्था की गई है। इस भवन में अधिकारियों की समीक्षा बैठक एवं अन्य मीटिंगों हेतु हॉल निर्मित है। यह भवन विभागीय कार्यकुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ जनहितकारी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इसके साथ ही सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग से संबंधित कोर्ट केसेज के ऑनलाइन अनुश्रवण हेतु सूचना प्रणाली संगठन, लखनऊ द्वारा विकसित LCMIS पोर्टल का भी उद्घाटन किया। यह पोर्टल कोर्ट केसेज एवं आर्बिट्रेशन प्रकरणों को डिजिटल करते हुए उनका तत्क्षण अनुश्रवण सुलभ करने, पारदर्शिता रखने एवं प्रत्येक स्तर पर त्वरित प्रभावी कार्यवाही करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। LCMIS पोर्टल द्वारा कोर्ट केसेज के विभिन्न प्रकार के मासिक एवं अन्य रिपोर्ट स्वजनित होने से कागज एवं स्थान की भी बचत होगी। 

  • आईसीडीएस विभाग एवं अडानी फाउंडेशन के मध्य “Suposhan Project” हेतु एम०ओ०यू० हस्ताक्षरित

    आईसीडीएस विभाग एवं अडानी फाउंडेशन के मध्य “Suposhan Project” हेतु एम०ओ०यू० हस्ताक्षरित

    लखनऊ/ मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य महिला कल्याण एवम बाल विकास सेवा पुष्टाहार के विधानसभा कार्यालय में आज बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग एवं अडानी फाउंडेशन के मध्य जनपद सोनभद्र में “Suposhan Project” के क्रियान्वयन हेतु महत्वपूर्ण MoU हस्ताक्षरित किए गए। यह एम०ओ०यू० माननीय मंत्री बेबी रानी मौर्य की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर अपर मुख्य सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार श्रीमती लीना जौहरी तथा निदेशक, आईसीडीएस श्रीमती सरनीत कौर ब्रोका व डॉ अनुपमा शांडिल्य उप निदेशक उपस्थित थे। अडानी समूह की ओर से नॉर्थ इंडिया प्रमुख एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट एवं सरकारी मामले) आनंद सिंह विसेन तथा महाप्रबंधक (कॉरपोरेट एवं सरकारी मामले) मनीष अग्रवाल भी उपस्थित रहे। “Suposhan Project” का उद्देश्य आईसीडीएस सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए 0-5 वर्ष के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में कुपोषण की रोकथाम तथा पोषण सुरक्षा को सशक्त करना है। परियोजना विभागीय व्यवस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर तकनीकी एवं क्रियान्वयन सहयोग प्रदान करेगी।

    परियोजना के अंतर्गत 0-5 वर्ष के बच्चों में दुबलापन (Wasting), कम वजन (Underweight) एवं ठिगनापन (Stunting) की पहचान एवं प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाएगा। गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों की समयबद्ध पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहयोग किया जाएगा। अडानी फाउंडेशन द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का क्षमता वर्धन, व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC), पोषण परामर्श एवं ग्रोथ मॉनिटरिंग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम, किशोरियों में एनीमिया नियंत्रण हेतु परामर्श, संतुलित आहार संबंधी मार्गदर्शन तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने वाले अभियान भी संचालित किए जाएंगे। “Suposhan Project” पूर्णतः गैर-वित्तीय (Non-Financial) प्रस्ताव है तथा विभागीय संसाधनों एवं संरचनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से कार्य करेगा। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि कुपोषण उन्मूलन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है तथा इस प्रकार की साझेदारी से जमीनी स्तर पर ठोस एवं मापनीय परिणाम प्राप्त होंगे। अपर मुख्य सचिव महोदया ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में नवाचार एवं तकनीकी सहयोग की महत्ता पर बल दिया। निदेशक, आईसीडीएस ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल जनपद सोनभद्र में पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

  • स्वस्थ नागरिक ही विकसित प्रदेश की नींवः ब्रजेश पाठक

    स्वस्थ नागरिक ही विकसित प्रदेश की नींवः ब्रजेश पाठक

    विधान परिषद के बजट सत्र में गरजे डिप्टी सीएम, विपक्ष को लिए आड़े हाथ

    कहा- पिछली सरकारों ने जनता को लूटा, हमने गुणवत्तापूर्ण इलाज दिया 

    लखनऊ।  स्वथ्य नागरिक ही विकसित देश और प्रदेश की नींव हैं। जब तक नागरिक स्वस्थ नहीं होंगे, कोई भी देश या प्रदेश तरक्की नहीं कर सकता। पिछली सरकारों ने प्रदेश को लूटने का काम किया है। प्रदेश की जनता की गुमराह कर अपनों को फायदा दिया है। हमारी सरकार विकासित उत्तर प्रदेश के सपने को साकार करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। 

    यह कहना है प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का। गुरुवार को विधान परिषद में बजट सत्र में प्रस्तुत प्रश्नों का उत्तर देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता के साथ रोगियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने प्रदेश को सिर्फ लूटने का काम किया। मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग तो बना दीं लेकिन न चिकित्सक रखे और न ही पैरा मेडिकल या अन्य स्टाफ की तैनाती हुई। जनता को गुमराह कर अपने कथित विकास कार्यों का ढोल पीटा। 

    *हमने धरातल पर कार्य किया*

    हमारी सरकार ने धरातल पर कार्य किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में आज का नया उत्तर प्रदेश विकास पथ पर तेजी से दौड़ रहा है। हमारी सरकार गंभीर रोगों से ग्रसित रोगियों के लिए लगातार काम कर रही है। हर जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा है। हमारे पास गोरखपुर और रायबरेली में दो एम्स हैं, जो रोगियों का गुणवत्तापूर्ण इलाज कर रहे हैं। *मानक विहीन चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई*

    हमारी सरकार संवेदनशीलता के साथ मेडिकल ही नहीं, हर क्षेत्र में कार्य कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हमने काफी काम किया है।  उन्होंने कहा कि मानक विहीन चिकित्सालयों के विरुद्ध विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जाती रहती है। वर्तमान में प्रदेश में 16520 चिकित्सक तैनात हैं। नए चिकित्सकों की तैनाती भी की जा रही है। डिप्टी सीएम ने कहा कि कैंसर के नए मरीजों की संख्या बढ़ी है। हमारी सरकार उनके इलाज के लिए प्रतिबद्ध है। 

    *स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं* 

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि हम सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खानपान और रहन-सहन पर उचित ध्यान रखना चाहिए। आजकल लोगों ने, खासतौर पर युवाओं ने प्राकृतिक चीजों से दूरी बना ली है। जंग फूड का सेवन कर रहे हैं। दैनिक दिनचर्या में व्यायाम बहुत आवश्यक है।