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  • केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण 20 से 30 अप्रैल 2025 तक अमेरिका और पेरू की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगी

    केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण 20 से 30 अप्रैल 2025 तक अमेरिका और पेरू की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगी

    वित्त मंत्री कई देशों और संगठनों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के अलावा जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठकों में भी भाग लेंगी

    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण 20 अप्रैल, 2025 से अमेरिका और पेरू की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगी। अमेरिका की यात्रा के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री 20 से 25 अप्रैल, 2025 तक सैन फ्रांसिस्को और वाशिंगटन डीसी का दौरा करेंगी।20 अप्रैल 2025 से शुरू होने वाली सैन फ्रांसिस्को की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री सैन फ्रांसिस्को के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टीट्यूशन में ‘विकसित भारत 2047 की नींव रखना’ विषय पर मुख्य भाषण देंगी, जिसके बाद एक फायरसाइड चैट सत्र होगा।

    श्रीमती सीतारमण सैन फ्रांसिस्को में स्थित शीर्ष सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) फर्मों के सीईओ के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने के अलावा निवेशकों के साथ एक गोलमेज बैठक के दौरान प्रमुख फंड प्रबंधन फर्मों के शीर्ष सीईओ के साथ बातचीत भी करेंगी। श्रीमती सीतारमण सैन फ्रांसिस्को में भारतीय प्रवासियों के एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगी और वहां बसे भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करेंगी।

    22 से 25 अप्रैल 2025 तक वाशिंगटन डीसी, अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान, श्रीमती सीतारमण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग, द्वितीय जी -20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर (एफएमसीबीजी) बैठकों, विकास समिति प्लेनरी, आईएमएफसी प्लेनरी और वैश्विक संप्रभु ऋण गोलमेज (जीएसडीआर) बैठक में भाग लेंगी।

    वाशिंगटन डीसी में स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान, श्रीमती सीतारमण अर्जेंटीना, बहरीन, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, सऊदी अरब, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी; इसके अलावा वह वित्तीय सेवाओं के लिए यूरोपीय संघ के आयुक्त; एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष; एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) के अध्यक्ष; वित्तीय स्वास्थ्य के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष अधिवक्ता (यूएनएसजीएसए); और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रथम उप प्रबंध निदेशक से भी मुलाकात करेंगी।

    26 से 30 अप्रैल 2025 तक पेरू की अपनी पहली यात्रा के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और व्यापार जगत के नेताओं के एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी और दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार संबंधों पर प्रकाश डालेगी।

    लीमा से अपनी यात्रा की शुरूआत करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण पेरू की राष्ट्रपति महामहिम सुश्री दीना बोलुआर्टे और पेरू के प्रधानमंत्री महामहिम गुस्तावो एड्रियनजेन से मुलाकात करेंगी। इसके अलावा वह पेरू के वित्त एवं अर्थव्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा और खान मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी करेंगी।

    पेरू की अपनी यात्रा के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री भारत-पेरू व्यापार मंच की बैठक की अध्यक्षता करेंगी, जिसमें भारत और पेरू दोनों देशों के प्रमुख व्यापार प्रतिनिधि शामिल होंगे। श्रीमती सीतारमण पेरू में वर्तमान में काम कर रहे भारतीय निवेशकों और व्यवसायों के साथ-साथ पेरू का दौरा करने वाले भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बातचीत करेंगी।

    महत्वपूर्ण खनिजों और बहुमूल्य धातुओं की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पेरू के महत्व को देखते हुए, इन बैठकों के दौरान खनन क्षेत्र में अधिक सहयोग के अवसरों का पता लगाने, विशेष रूप से भारत की संसाधन सुरक्षा को मजबूत करने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच मूल्य-श्रृंखला संबंधों को सुविधाजनक बनाने की भी संभावना है।

    केंद्रीय वित्त मंत्री लीमा में एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी भाग लेंगी, जहां वह पेरू में रह रहे भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करेंगी।

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एलन मस्क के साथ बातचीत में द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एलन मस्क के साथ बातचीत में द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एलन मस्क के साथ रचनात्मक बातचीत की। इस बातचीत में आपसी हितों के कई मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस वर्ष के शुरुमें वाशिंगटन डीसी में हुई उनकी बैठक के दौरान चर्चा में शामिल विषयों पर फिर से बातचीत की गई, जिसमें तकनीकी उन्नति के लिए साझा दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन क्षेत्रों में साझेदारी को और प्रगाढ़ करने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा: “एलन मस्क से बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें इस वर्ष के शुरुआत में वाशिंगटन डीसी में हमारी बैठक के दौरान शामिल किए गए विषय भी सम्मिलित थे। हमने प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर चर्चा की।भारत इन क्षेत्रों में अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और प्रगाढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

  • प्रकृति का कर्ज: संरक्षण से चुकाएं

    प्रकृति का कर्ज: संरक्षण से चुकाएं

    डॉ. पंकज कुमार ओझा 

    बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा

    प्रकृति हमारी माँ है—वह हमें जीवन देती है, पोषण करती है और हर कदम पर हमारा साथ देती है। हवा जो हम सांस लेते हैं, पानी जो हम पीते हैं, और धरती जो हमें भोजन देती है, यह सब प्रकृति की अनमोल देन है। लेकिन आज हम इस कर्ज को भूलकर प्रकृति का शोषण कर रहे हैं। जंगल कट रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, और हवा जहरीली होती जा रही है। यह समय है कि हम अपने कर्तव्य को समझें और प्रकृति के प्रति अपने कर्ज को संरक्षण के माध्यम से चुकाएं।

    प्रकृति का कर्ज: हमारा ऋण

    प्राचीन भारतीय संस्कृति में प्रकृति को देवता के रूप में पूजा जाता था। वेदों और उपनिषदों में इसे परम शक्ति माना गया है। ऋग्वेद में एक श्लोक है:

    या ओषधी: संनति पुरा जीवन्ति विश्वत: प्रभु:। तासामसि त्वमंगिर: प्राणं विश्वस्य रोचसि।।”(ऋग्वेद 10.97.4)

    अर्थ: “हे औषधियों, तुम प्राचीन काल से जीवन को संभालती हो और विश्व की शक्ति हो। तुम प्राण देती हो और संसार को प्रकाशित करती हो।”

    यह श्लोक प्रकृति की जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है। हमारा हर सांस, हर कण प्रकृति का उपहार है। फिर भी, हमने इस कर्ज को नजरअंदाज कर दिया और अपने स्वार्थ के लिए धरती को नुकसान पहुँचाया।

    संकट में प्रकृति

    आज पर्यावरण संकट एक वैश्विक समस्या बन चुका है। औद्योगीकरण, शहरीकरण और अंधाधुंध संसाधनों का दोहन इसके प्रमुख कारण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्रदूषण के कारण हर साल लाखों लोग असमय मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण हिमनद पिघल रहे हैं, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, और मौसम चक्र बिगड़ रहा है। जंगल, जो धरती के फेफड़े हैं, तेजी से सिकुड़ रहे हैं। यह सब प्रकृति के प्रति हमारी लापरवाही का परिणाम है।

    संरक्षण: हमारा कर्तव्य

    प्रकृति का कर्ज चुकाने का एकमात्र तरीका है इसका संरक्षण। हमें अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाने होंगे। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं:

    कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि।।”(गीता 2.47)

    अर्थ: “तुम्हें केवल कर्म करने का अधिकार है, उसके फल की चिंता मत करो।”

    यह श्लोक हमें निस्वार्थ कर्म की प्रेरणा देता है। पर्यावरण संरक्षण भी ऐसा ही कर्म है—हमें पेड़ लगाने, पानी बचाने और प्रदूषण कम करने जैसे कार्य बिना किसी स्वार्थ के करने चाहिए।

    वृक्षारोपण: पेड़ लगाना प्रकृति के प्रति हमारी सबसे बड़ी सेवा है। एक पेड़ न केवल ऑक्सीजन देता है, बल्कि मिट्टी को बांधता है और जलवायु को संतुलित करता है।  

    जल संरक्षण: नदियों और तालाबों को स्वच्छ रखना, वर्षा जल संचय करना हमारी जिम्मेदारी है। जल ही जीवन है, और इसे बचाना हमारा कर्तव्य है।  

    प्रदूषण नियंत्रण: प्लास्टिक का कम प्रयोग, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना और कचरे का पुनर्चक्रण जैसे कदम उठाने चाहिए।  

    जागरूकता: समाज को शिक्षित करना भी जरूरी है ताकि हर व्यक्ति इस संरक्षण अभियान का हिस्सा बने।

    प्रकृति और मानव का अटूट रिश्ता

    प्रकृति और मानव एक-दूसरे के पूरक हैं। अथर्ववेद में कहा गया है:”माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:।”(अथर्ववेद 12.1.12)

    अर्थ: “पृथ्वी मेरी माता है, और मैं उसका पुत्र हूँ।”

    यह श्लोक प्रकृति के साथ हमारे गहरे रिश्ते को दर्शाता है। जब हम प्रकृति का सम्मान करते हैं, तो यह हमें दुगुना लौटाती है। लेकिन जब हम इसे नष्ट करते हैं, तो यह हमारे लिए विनाश का कारण बनती है।

    प्रेरणा और संकल्प

    हमें अपने पूर्वजों से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया। आज विज्ञान और तकनीक के युग में भी हम संतुलन बनाए रख सकते हैं। हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाएगा, पानी की बर्बादी रोकेगा और पर्यावरण को स्वच्छ रखेगा। यह छोटे कदम ही बड़े बदलाव की नींव बनेंगे।

    निष्कर्ष

    प्रकृति का कर्ज चुकाना हमारा नैतिक और आध्यात्मिक दायित्व है। यह केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है। हमें यह समझना होगा कि प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं। जैसा कि यजुर्वेद में कहा गया है:”यत् ते पृथिवि विश्वं रूपं तस्मै ते विश्वरूपाय नम:।।”(यजुर्वेद 13.2)

    अर्थ: “हे पृथ्वी, जो तेरा विश्व रूप है, उसको नमस्कार।”

    आइए, हम सब मिलकर प्रकृति के इस कर्ज को संरक्षण के माध्यम से चुकाएं और एक हरे-भरे, स्वस्थ और सुंदर संसार का निर्माण करें। यह हमारा कर्तव्य है, हमारा धर्म है, और हमारी सबसे बड़ी पूजा है।

  • आतंकवाद से मुकाबले पर एडीएमएम-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की 14वीं बैठक नई दिल्ली में संपन्न

    आतंकवाद से मुकाबले पर एडीएमएम-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की 14वीं बैठक नई दिल्ली में संपन्न

    भारत और मलेशिया वर्ष 2024-2027 के लिए सह-अध्यक्ष बने; 2026 में मलेशिया में टेबल-टॉप अभ्यास और 2027 में भारत में फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास की घोषणा की

    नई दिल्ली। आतंकवाद से मुकाबले(सीटी) पर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) विशेषज्ञ कार्य समूह (सीटी पर ईडब्ल्यूजी) की 14वीं बैठक 19 से 20 मार्च, 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में आसियान सचिवालय, आसियान देशों (लाओ पीडीआर, मलेशिया, इंडोनेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम), एडीएमएम-प्लस सदस्य राज्यों (चीन, अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और कोरिया गणराज्य) के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

    आतंकवाद से मुकाबले (सीटी) पर 14 वें एडीएमएम-प्लस ईडब्ल्यूजी के दौरान , सह-अध्यक्षों, भारत और मलेशिया ने वर्ष 2024-2027 के लिए नियोजित गतिविधियों के लिए कार्य योजना प्रस्तुत की। इसने 2026 में मलेशिया में सीटी पर ईडब्ल्यूजी के लिए टेबल-टॉप अभ्यास और 2027 में भारत में फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित करने की घोषणा की।

    दो दिवसीय बैठक के दौरान आतंकवाद और उग्रवाद के उभरते खतरे से निपटने के लिए एक मजबूत और व्यापक रणनीति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य आसियान देशों के रक्षा बलों और उसके संवाद भागीदारों के जमीनी अनुभव को साझा करना था। बैठक ने वर्तमान चक्र के लिए नियोजित गतिविधियों/अभ्यासों/बैठकों/कार्यशालाओं की नींव रखी।

    इससे पहले, 2021-2024 के पिछले चक्र के दौरान सीटी पर ईडब्ल्यूजी के सह-अध्यक्ष रहे म्यांमार और रूस ने वर्तमान चक्र (2024-2027) के लिए सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया को सौंप दी थी। भारत वर्तमान चक्र के लिए पहली ईडब्ल्यूजी बैठक की मेजबानी कर रहा है।

    उद्घाटन सत्र में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने मुख्य भाषण दिया और उद्घाटन समारोह के दौरान भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक गतिशील और उभरती चुनौती बनी हुई है, जिसके खतरे लगातार सीमाओं को पार कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में आतंकवाद का मुकाबला करने की दिशा में भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला, जिसमें 2022 में यूएनएससी की आतंकवाद-रोधी समिति की भारत की अध्यक्षता के दौरान दिल्ली घोषणा को अपनाना भी शामिल है।

    इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अमिताभ प्रसाद, भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक , विदेश मंत्रालय और भारतीय सेना के आतंकवाद-रोधी प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। भाग लेने वाले देशों और आसियान सचिवालय के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने क्षेत्र में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक दौरे के हिस्से के रूप में प्रतिनिधियों ने आगरा का भी दौरा किया।

  • मास्को अंतरराष्ट्रीय यात्रा एवं पर्यटन प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश पर्यटन के प्रदर्शनी स्टाल पर भारी भीड़

    मास्को अंतरराष्ट्रीय यात्रा एवं पर्यटन प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश पर्यटन के प्रदर्शनी स्टाल पर भारी भीड़

    उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं सांस्कृतिक विरासत को विश्व के मानचित्र पर पेश करना हमारा उद्देश्य- जयवीर सिंह

    लखनऊ:/  उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने रूस की राजधानी मास्को में 18-20 मार्च तक आयोजित ‘मास्को अंतरराष्ट्रीय यात्रा एवं पर्यटन प्रदर्शनी 2025’ (एमआइटीटी) में जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी पर्यटन विभाग के मंडप में विभिन्न देशों के व्यवसायियों ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, टूर पैकेज और सुविधाओं की जानकारी ली। ताजमहल सहित अन्य आकर्षणों के बारे में भी आगन्तुको में उत्सुकता देखने को मिली।

    यह जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि ‘प्रदर्शनी मंडप में स्टॉल लगाए गए थे, जिसमें अंग्रेजी और रूसी भाषा में उत्तर प्रदेश की थीम पर आधारित सजावट थी। इसमें धार्मिक-आध्यात्मिक सर्किट, ईको सर्किट, महाभारत सर्किट, जैन सर्किट, हस्तशिल्प और ऐतिहासिक धरोहर सहित अन्य पर्यटन आकर्षण को प्रदर्शित किया गया। मंडप में वीवीआईपी लॉन्ज, डिजिटल स्क्रीन, एआर इंटरैक्टिव टच पैनल और सेल्फी जोन जैसी सुविधाएं थीं, जहां उत्तर प्रदेश की सुंदर पृष्ठभूमि प्रदर्शित की गई। अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों, निवेशकों और अन्य हितधारकों के साथ बी-टू-बी बैठक आयोजित की गई। पीआर किट का वितरण किया गया, जिसमें अंग्रेजी और रूसी भाषा में ब्रॉशर, लघु फ़िल्में और डिजिटल सामग्री शामिल थीं।

    जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन के प्रचार-प्रसार के तहत पर्यटन यात्रा कार्यक्रमों, वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन का प्रदर्शन किया गया। राज्य को ‘भगवान बुद्ध की धरती’ और ‘सांस्कृतिक त्योहारों की भूमि’ जैसे प्रमुख स्लोगनों के साथ प्रस्तुत किया गया। मंडप में आने वाले अधिकतर पर्यटकों ने अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, आगरा, दुधवा नेशनल पार्क, बुंदेलखंड, कुशीनगर, सारनाथ सहित अन्य स्थलों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मंडप में आने वाले पर्यटकों को बताया गया कि उ0प्र0 में रेल, वायु तथा जलमार्ग की बेहतर कनेक्टिविटी है।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य को एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रचारित करना था। इसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन और विविध यात्रा अनुभवों को प्रदर्शित कर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और निवेशकों को आकर्षित करना है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ जैसे आयोजन करके वैश्विक मंच पर भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना को प्रदर्शित किया। इस महाकुंभ में विभिन्न देशों के राजदूत से लेकर सनातनी आस्था में विश्वास रखने वालों की भारी भीड़ रही। इस महाकुंभ का प्रबंधन एवं सफल आयोजन पूरी दुनिया के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है। मास्को में पर्यटन विभाग के मंडप में महाकुंभ के बारे में जानकारी प्राप्त करने तथा अपना अनुभव सांझा करने के लिए आगन्तुकों की भारी भीड़ देखने को मिली।

  • रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के रक्षा मंत्री से भेंट की

    रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के रक्षा मंत्री से भेंट की

    दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग और एआई जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशने पर विचार कार्यरत हैं

    नई दिल्ली/ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के रक्षा मंत्री रूबेन ब्रेकेलमैन्स के साथ बैठक की। उन्होंने बातचीत के दौरान रक्षा, सुरक्षा, सूचना आदान-प्रदान, हिंद-प्रशांत और नई एवं उभरती हुई प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

    दोनों रक्षा मंत्रियों ने जहाज निर्माण, उपकरण और अंतरिक्ष क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के कौशल को प्रौद्योगिकी एवं पैमाने में अनुपूरकता को अनुकूल बनाया जा सके। उन्होंने संबंधित रक्षा प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थानों और संगठनों को जोड़ने के अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा संबंधित प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर भी चर्चा की। रक्षा मंत्री ने बैठक के बाद कहा कि भारत अपनी रक्षा साझेदारी को नीदरलैंड्स के साथ और आगे ले जाने के लिए तत्पर है।

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जर्मन गायिका सुश्री कैसमै की प्रशंसा की

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जर्मन गायिका सुश्री कैसमै की प्रशंसा की

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जर्मन गायिका सुश्री कैसमै की प्रशंसा की है।

    श्री मोदी ने कहा कि कैसमै जैसे कलाकारों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने समर्पित प्रयासों के माध्यम से कई अन्य लोगों के साथ मिलकर भारतीय विरासत की समृद्धि, गहराई और विविधता को प्रदर्शित करने में मदद की है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा; “भारतीय संस्कृति के बारे में विश्व की जिज्ञासा लगातार बढ़ रही है, और कैसमै जैसे कलाकारों ने इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। समर्पित प्रयासों के माध्यम से, उन्होंने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर भारतीय विरासत की समृद्धि, गहराई और विविधता को प्रदर्शित करने में मदद की है।

  • आतंकवाद-प्रतिघात पर एडीएमएम-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की 14वीं बैठक का आयोजन नई दिल्ली में किया जाएगा

    आतंकवाद-प्रतिघात पर एडीएमएम-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की 14वीं बैठक का आयोजन नई दिल्ली में किया जाएगा

    नई दिल्ली। आतंकवाद-प्रतिघात पर आसियान रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन-प्लस (एडीएमएम-प्लस) विशेषज्ञ कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) की 14वीं बैठक 19 से 20 मार्च, 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। भारत और मलेशिया इस बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 10 आसियान सदस्य राष्ट्र (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर व थाईलैंड) और आठ संवाद सहयोगी देशों (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, जापान, चीन, अमरीका व रूस) के प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ तिमोर लेस्ते तथा आसियान के सचिव भी भाग लेंगे।

    आतंकवाद का मुकाबला करने पर भारत पहली बार ईडब्ल्यूजी की सह-अध्यक्षता करेगा। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह 19 मार्च, 2025 को उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्य भाषण देंगे।

    यह 2024-2027 तक चलने वाले चक्र के लिए आतंकवाद-रोधी ईडब्ल्यूजी की योजनाबद्ध गतिविधियों की पहली बैठक होगी। इसमें चर्चा आतंकवाद और उग्रवाद के उभरते खतरे से निपटने के लिए एक सशक्त एवं व्यापक रणनीति तैयार करने पर केंद्रित होगी। इस बैठक का उद्देश्य आसियान के रक्षा बलों और उसके संवाद भागीदार देशों के वास्तविक अनुभव को साझा करना है। यह 2024-2027 तक के चक्र के लिए नियोजित गतिविधियों/अभ्यासों/सेमिनारों/कार्यशालाओं की नींव रखेगा।

    एडीएमएम-प्लस, इसमें भाग लेने वाले देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच व्यावहारिक सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। वर्तमान में यह वास्तविक सहकारिता के सात क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिनमें आतंकवाद-प्रतिघात, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा प्रबंधन, शांति अभियान, सैन्य चिकित्सा, मानवीय खदान कार्रवाई व साइबर सुरक्षा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए ईडब्ल्यूजी की स्थापना की गई है।

    तीन वर्ष के चक्र के बाद प्रत्येक ईडब्ल्यूजी की सह-अध्यक्षता एक आसियान सदस्य देश और एक संवाद साझेदार देश द्वारा की जाती है। सह-अध्यक्षों का मुख्य कार्य, अपनी अध्यक्षता के प्रारंभ में तीन-वर्षीय चक्र के लिए ईडब्ल्यूजी के उद्देश्य, नीतिगत दिशानिर्देश व कार्यात्मक निर्देश निर्धारित करना, नियमित ईडब्ल्यूजी बैठकों (वर्ष में न्यूनतम दो) का संचालन करना और तीन-वर्षीय चक्र के दौरान व्यावहारिक सहयोग में हुई प्रगति को जांचने के उद्देश्य से तीसरे वर्ष में सभी सदस्य देशों हेतु किसी भी रूप (टेबल-टॉप/फील्ड प्रशिक्षण/स्टाफ/संचार आदि) का अभ्यास करना है।

  • अयोध्या और कोरिया के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंध सदियों पुराने – जयवीर सिंह

    अयोध्या और कोरिया के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंध सदियों पुराने – जयवीर सिंह

    दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधिमंडल का सम्मान, दक्षिण कोरिया से गारक राजवंश के सदस्यों ने क्वीन-हो मेमोरियल का किया भ्रमण

    लखनऊ: दक्षिण कोरिया के गारक राजवंश के प्रतिनिधि सहित 80 सदस्यीय शिष्टमंडल 13 मार्च को अयोध्या पहुंचा। कोरिया राजवंश के लोग अयोध्या स्थित क्वीन हो मेमोरियल पार्क पहुंचकर पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। 

    दक्षिण कोरिया की प्राचीन किंवदंतियों के अनुसार, करीब 2,000 वर्ष पूर्व अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना ने कोरिया के राजा किम सुरो से विवाह किया था। गया राजवंश की संस्थापक राजा से शादी के बाद राजकुमारी सुरीरत्ना रानी हियो ह्वांग-ओक के नाम से जानी गईं। हियो ह्वांग-ओक को गारक राजवंश की संस्थापक माना जाता है। दक्षिण कोरिया के लोग अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं और साल में एक बार अयोध्या जरूर आते हैं। इस ऐतिहासिक संबंध के प्रतीक के रूप में अयोध्या में रानी हो का एक स्मारक पार्क भी स्थापित किया गया है, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करता है।

    दक्षिण कोरिया के गारक राजवंश के प्रतिनिधि सहित 80 सदस्यीय शिष्टमंडल 11 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचा। 12 मार्च को दल वाराणसी के लिए रवाना हुआ। कोरिया से आए आगंतुक 13 मार्च को अयोध्या पहुंचे। यहां राम मंदिर, क्वीन हो स्मारक सहित अन्य पावन स्थलों का दर्शन-भ्रमण भ्रमण किया। शाम को सरयू आरती में शामिल होने के बाद लेजर शो का आनंद लिया। रात में दक्षिण कोरिया के सदस्यों ने तय कार्यक्रम के अनुसार कुछ लोगों से मुलाकात की। मेहमानों के लिए आठ कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया।

    गौरतलब है कि, दक्षिण कोरिया राजवंश की यह 72वीं पीढ़ी है। राजवंश के सदस्य हर दौर में अपने जड़ से लगाव को प्रदर्शित करते रहे हैं। सनातन से उनका जुड़ाव सदियों पुराना है। यही वजह है कि अयोध्या उन्हें आकर्षित करता है। अपनी पांच दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में दक्षिण कोरिया का प्रतिनिधिमंडल आगरा में भ्रमण के बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गया।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दक्षिण कोरिया के गारक राजवंश के सदस्यों की आत्मीयता और पूर्वजों के प्रति समर्पण जगजाहिर है। उनकी सनातन के प्रति आस्था का हम सम्मान करते हैं। उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े कई स्थल हैं, जिनमें कपिलवस्तु, कुशीनगर, कौशाम्बी, सारनाथ, संकिसा और श्रावस्ती महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण कोरियाई पर्यटक इन बौद्ध स्थलों में विशेष रुचि रखते हैं। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में कोरियाई पर्यटक आते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और पर्यटन संबंध मजबूत हो रहे हैं।

  • विश्व में फैल रही है राजिम कुंभ कल्प की ख्याति,विदेशी पर्यटकों ने कहा – “इट्स वंडरफुल”

    विश्व में फैल रही है राजिम कुंभ कल्प की ख्याति,विदेशी पर्यटकों ने कहा – “इट्स वंडरफुल”

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आयोजित राजिम कुंभ कल्प अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध होता जा रहा है। इस वर्ष आयोजित राजिम कुंभ कल्प में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी, जिसमें देशभर के तीर्थयात्रियों के साथ विदेशी पर्यटकों ने भी हिस्सा लिया। नीदरलैंड से पहली बार आए सिनिस ने कहा, “यहाँ की संस्कृति और लोगों की आत्मीयता ने मुझे गहराई से प्रभावित किया है। यह एक अद्भुत अनुभव है!” वहीं, इटली से आए जुबेतो और पैट्रिसिया ने कहा कि वे भारत की आध्यात्मिक, धार्मिक और अलौकिक संस्कृति को करीब से देखने और समझने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, “राजिम कुंभ कल्प भारतीय आस्था और आध्यात्मिकता का अद्वितीय संगम है, जो हमें मंत्रमुग्ध कर रहा है।”

    *राजिम कुंभ की भव्यता से अभिभूत विदेशी पर्यटक*

    नीदरलैंड, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और इटली से आए पर्यटकों ने 54 एकड़ में फैले विशाल राजिम कुंभ कल्प की भव्यता को देखकर खुशी व्यक्त की। राजीव लोचन मंदिर और त्रिवेणी संगम पर स्थित कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में उत्कीर्ण प्राचीन कलाकृतियों ने उन्हें विशेष रूप से आकर्षित किया। विदेशी पर्यटक महाशिवरात्रि पर निकाली गई नागा साधुओं की शोभायात्रा में भी शामिल हुए और मेला क्षेत्र का पैदल भ्रमण किया। विदेशी पर्यटकों ने राजिम कुंभ कल्प की साज-सज्जा और संत समागम क्षेत्र की भव्यता देखकर कहा – “इट्स वंडरफुल!”

    विदेशी सैलानियों ने नागा साधुओं द्वारा निकाली गई शोभायात्रा और अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन को आश्चर्य और रोमांच से देखा। संत समागम क्षेत्र में उन्होंने विभिन्न संतों से आशीर्वाद लिया और नागा साधुओं के तपस्वी जीवन के बारे में जाना। पर्यटकों ने पूरे आयोजन की भव्यता को अपने कैमरों में कैद किया और मेला घूमने आए लोगों के साथ सेल्फी भी ली।

    *राजिम कुंभ कल्प – आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अंतरराष्ट्रीय मंच*

    राजिम कुंभ कल्प की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है। विदेशी मेहमानों की उपस्थिति से इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है, जिससे भविष्य में और अधिक पर्यटक और श्रद्धालु आकर्षित होंगे।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से राजिम कुंभ कल्प को एक भव्य, दिव्य और यादगार आयोजन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि सम्पूर्ण भारत की संस्कृति और आस्था की गौरवशाली पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर रहा है।