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  • आईटीबी बर्लिन-2026 में दिखेगी उत्तर प्रदेश पर्यटन की सशक्त मौजूदगी, समृद्ध विरासत का होगा भव्य प्रदर्शन

    आईटीबी बर्लिन-2026 में दिखेगी उत्तर प्रदेश पर्यटन की सशक्त मौजूदगी, समृद्ध विरासत का होगा भव्य प्रदर्शन

    03 से 05 मार्च तक आयोजित आईटीबी बर्लिन में मनेगा 60 वर्षों की गौरवशाली विरासत का उत्सव

    ITB बर्लिन-2026 की थीम ‘डिस्कवर द स्टोरीज बिहाइंड 60 इयर्स ऑफ लेगेसी’ होगी

    एडवेंचर टूरिज्म, बिजनेस ट्रैवल, एलजीबीटीक्यू+ ट्रैवल, लग्जरी ट्रैवल, मेडिकल टूरिज्म सहित अन्य पर प्रदर्शनी

    उ०प्र० पर्यटन के स्टॉल पर विभाग की वेबसाइट्स-मोबाइल एप्लीकेशन, पर्यटन सर्किट, वेलनेस टूरिज्म और ओडीओपी का प्रदर्शन

    आईटीबी बर्लिन-2026 में दुनिया से संवाद करेगा उत्तर प्रदेश का पर्यटन विजन- जयवीर सिंह

    लखनऊ। विश्व पर्यटन उद्योग के सबसे प्रतिष्ठित मंच आईटीबी बर्लिन-2026 में उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक पर्यटन संभावनाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने को तैयार है। आगामी 03 से 05 मार्च तक आयोजित ‘इंटरनेशनल टूरिज्म-बोर्से बर्लिन’ में पर्यटन विशेषज्ञों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के समक्ष उत्तर प्रदेश अपने विविध पर्यटन स्थलों, टूरिज्म सर्किट्स, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म की झलक पेश करेगा। 

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘आईटीबी बर्लिन-2026′ का आयोजन बर्लिन एक्सपो सेंटर सिटी, मेसे डैम 22 में किया जाएगा। वर्ष 1966 से आईटीबी बर्लिन वैश्विक यात्रा एवं पर्यटन उद्योग के लिए एक अग्रणी मंच के रूप में स्थापित है। इस वर्ष यह अपने 60 वर्षों की गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाने जा रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन अपने विजन के साथ दुनिया से संवाद करेगा।’

    *आईटीबी बर्लिन-2026 की थीम* 

    ‘इंटरनेशनल टूरिज्म-बोर्से बर्लिन (आईटीबी बर्लिन-2026)’ इस बार अपने 60 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उत्सव मनाने जा रहा है। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करते हुए आईटीबी बर्लिन-2026 की थीम ‘डिस्कवर द स्टोरीज बिहाइंड 60 इयर्स ऑफ लेगेसी’ रखी गई है। यह वैश्विक पर्यटन उद्योग के विकास, नवाचार, साझेदारी सहित अन्य प्रेरक प्रसंगों को एक मंच पर सामने लाएगी। यह थीम अतीत की विरासत को सम्मान देते हुए भविष्य की रूपरेखा तय करता है। 

    *बदलती प्राथमिकताएं-उभरते रुझान*  

    आईटीबी बर्लिन-2026 में प्रदर्शनी के माध्यम से पर्यटन जगत की बदलती प्राथमिकताओं और उभरते रुझानों को प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदर्शनी को भौगोलिक सीमाओं तक सीमित न रखकर एडवेंचर टूरिज्म, बिजनेस ट्रैवल, एलजीबीटीक्यू+ ट्रैवल, लग्जरी ट्रैवल, मेडिकल टूरिज्म तथा ट्रैवल टेक्नोलॉजी जैसे विविध बाजार खंडों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य हर प्रकार के यात्रियों और उद्योग से जुड़े हितधारकों को उनकी रुचि और जरूरत के अनुरूप अनुभव मिल सके। 

    *’वैश्विक मंच पर प्रदर्शित होंगी प्रदेश की पर्यटन संभावनाएं’*

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में यूपी टूरिज्म भव्य पवेलियन के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध पर्यटन संभावनाओं को प्रदर्शित करेगा। पवेलियन में साइनेज एवं डिस्प्ले अंग्रेजी एवं स्थानीय भाषा में होंगे। इसके अलावा, वीवीआईपी लाउंज, रचनात्मक सेटअप, हस्तशिल्प, कलाकृतियां एवं ओडीओपी (एक जनपद, एक उत्पाद) को प्रदर्शित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन की वेबसाइट्स एवं मोबाइल एप्लीकेशन को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे प्रदेश की पर्यटन क्षमता को वैश्विक मानचित्र पर नई मजबूती मिलेगी।

  • उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व करते हुए किया क्रोएशिया प्रधानमंत्री का स्वागत

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व करते हुए किया क्रोएशिया प्रधानमंत्री का स्वागत

    उच्च शिक्षा मंत्री ताजमहल व आगरा किला भ्रमण में क्रोएशिया प्रधानमंत्री के साथ रहें 

    मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने क्रोएशिया प्रधानमंत्री को  प्रदेश की विरासत और पर्यटन क्षमता से कराया परिचय

    आगरा/लखनऊ, / प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने क्रोएशिया गणराज्य के प्रधानमंत्री एंड्रेज प्लेनकोविक के आगरा आगमन पर उनका स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।

    प्रधानमंत्री क्रोएशिया के आगमन पर  उच्च शिक्षा मंत्री ने मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के साथ पुष्पगुच्छ भेंट कर औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल का भ्रमण किया और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला तथा वैश्विक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उच्च शिक्षा मंत्री,  प्रधानमंत्री क्रोएशिया के साथ आगरा किला भी पहुंचे। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक विविधता पर चर्चा करते हुए प्रदेश में बढ़ते वैश्विक आकर्षण को रेखांकित किया। मंत्री उपाध्याय ने आगरा और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास की योजनाओं की भी जानकारी दी। भ्रमण कार्यक्रम के उपरांत उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से प्रधानमंत्री क्रोएशिया को औपचारिक विदाई दी गई।

  • मातृभाषा के सम्मान का संकल्प: भाषाई पूर्वाग्रह त्यागकर समावेशिता की ओर

    मातृभाषा के सम्मान का संकल्प: भाषाई पूर्वाग्रह त्यागकर समावेशिता की ओर

    21 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विशेष

    – सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

     ‌‌‌         प्रतिवर्ष 21 फरवरी के दिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व में भाषायी एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले। मातृभाषा के महत्ता  इसी  बानगी में देखिए की मातृभाषा के लिए एक देश के दो टुकड़े हो गए। जब हमारा देश आजाद हुआ तब पाकिस्तान दो भागों में विभक्त था एक पूर्वी पाकिस्तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान। आज जो बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र देश के रूप में जाना जाता है वही पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था और बांग्ला भाषा यानी मातृभाषा के लिए वहां के लोगों ने क्रांति का बीजारोपण किया और अपनी भाषा के लिए उन्होंने पाकिस्तान से विद्रोह करके अपना अलग देश स्थापित कर लिया। हालांकि सब के पीछे और भी कारण थे लेकिन अपनी मातृभाषा यानि बांग्ला भाषा को सर्वोत्तम स्थान देने के लिए भी इस देश में हुए क्रांति के पीछे  अहम भूमिका रही। अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा से बांग्लादेश के भाषा आन्दोलन दिवस को अन्तरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली, जो बांग्लादेश में सन १९५२ से मनाया जाता रहा है। बांग्लादेश में इस दिन एक राष्ट्रीय अवकाश होता है। २००८ को अन्तरराष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्त्व को फिर दोहराया है।

    वर्तमान विकट स्थिति के बावजूद भारत मातृभाषा आधारित शिक्षा को मान्यता देती है। क्योंकि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा के शुरुआती चरण से लेकर उच्च शिक्षा तक मातृभाषा आधारित शिक्षा को मान्यता देती है। इससे इन भाषाओं को दीर्घावधि तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है, हालाँकि भाषा के न्याय के प्रश्न का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि भाषा शिक्षा के लिए कोई बाधा नहीं है। भारत में मध्यप्रदेश के और उत्तर प्रदेश के बहुत बड़े क्षेत्र में बुंदेलखंड में बुंदेलखंडी भाषा बोली जाती है। और इसके बोलने वाले यद्यपि बहुत हैं। तथापि बच्चों में अन्य भाषाओं के प्रति लगाव रहा है, इसलिए इसके लिए  बुंदेलखंडी भाषा के उन्नयन तथा शासकीय प्रयोजनों में बोलने की कोशिश करना आवश्यक है। आज 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। दुनियाभर में भाषा एक ऐसा साधन है, जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है और उनकी संस्कृति को प्रदर्शित करता है। एक देश में कई मातृभाषा हो सकती हैं। भारत में ही 122 ऐसी भाषाएं हैं, जिनको बोलने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा है। वहीं 29 भाषाएं ऐसी हैं, जिन्हें 10 लाख लोग बोलते हैं। भाषाओं में हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, पंजाबी, अरबी, जापान, रूसी, पुर्तगाली, मंदारिन और स्पैनिश बोली जाती हैं। विश्व में भाषाई व सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए और कई मातृ भाषाओं के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से प्रति साल 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।वर्ष 1999 में यूनेस्को ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान किया था। पहली बार इस दिन को मनाने की शुरुआत बांग्लादेश ने की थी। बाद में वर्ष 2000 से विश्व भर में यह दिन मनाया जाने लगा।

     जब 1947 में भारत से अलग होकर पाकिस्तान बना तो भौगोलिक रूप से दो हिस्सों में बांटा गया। पहला -पूर्वी पाकिस्तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान। पाकिस्तान ने उर्दू में देश की मातृभाषा घोषित किया। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला भाषा अधिक होने के कारण उन्होंने बांग्ला को अपनी मातृभाषा बनाने के लिए संघर्ष शुरू किया। बाद में पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया। 21 फरवरी को उनका संघर्ष पूरा हुआ और बांग्लादेश की वर्षगांठ भी इसी दिन से मनाई जाने लगी।

    भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत विविध संस्कृति और विभिन्न भाषाओं का देश है। 1961 की जनगणना के मुताबिक, भारत में लगभग 1652 भाषाएं बोली जाती हैं। हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल भारत में लगभग 1365 मातृभाषाएं हैं, जिनका क्षेत्रीय आधार अलग- अलग है। हिंदी दूसरी सबसे लोकप्रिय मातृभाषा है। देश में 43 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, इसमें 12 फीसद द्विभाषी है।

    अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। हालाँकि, उत्सव का मूल विचार मातृभाषाओं के बारे में जागरूकता फैलाना और समावेशिता को प्रोत्साहित करना है। चूँकि बांग्लादेश का अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के साथ ऐतिहासिक संबंध है, इसलिए इसे दुखद गोलीबारी की याद में और उन शहीदों को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने अपनी मातृभाषा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

     वैश्विक स्तर पर, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस बहुभाषी शिक्षा के बारे में जागरूकता पैदा करने और प्रोत्साहित करने के लिए मौजूद है। जैसे अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के बारे में विभिन्न विषयों पर शोध करना, सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करना, और बहुभाषावाद पर व्याख्यान, कार्यक्रमों या कार्यशालाओं में भाग लेना। साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेना, विभिन्न भाषाओं या अपनी मातृभाषा में बनी फिल्मों और किताबों को बढ़ावा देना, मातृभाषा के उपयोग को प्रोत्साहित करना या एक नई भाषा सीखना इस दिन को मनाने के कुछ और तरीके हैं। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2024 का थीम लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण, बहू भाषावाद को बढ़ावा देने और भाषाई विरासत को बनाए रखने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना है। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस इस संदेश को प्रतिध्वनित करता है कि हमें कुछ भाषाओं के बारे में अपने किसी भी पूर्वाग्रह को बदलना होगा, और हमारी दुनिया पर मौजूद कई अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं के पोषण के लिए समावेशिता का वातावरण बनाना होगा। ऐसा करने से, और अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ाने से, रोजगार और विकास के अवसर पैदा होते हैं, और इस प्रकार हर किसी को अपनी संस्कृति और अपने देश के विकास में योगदान करने का मौका मिलता है।     

    एवी के न्यूज सर्विस

  • डिजिटल दौर की युवा पीढ़ी ने संस्कृति से बदला नजरिया, भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव में दोस्ती की नई मिसाल

    डिजिटल दौर की युवा पीढ़ी ने संस्कृति से बदला नजरिया, भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव में दोस्ती की नई मिसाल

    *लोक नृत्यों की गूंज से मजबूत हो रहे भारत-नेपाल रिश्ते, पूर्वांचल और तराई में सजा सांस्कृतिक उत्सव*

    *भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 बना सांस्कृतिक एकता और पर्यटन प्रोत्साहन का महापर्व- जयवीर सिंह* 

    लखनऊ,/ भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करता ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026’ इन दिनों जनमानस को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर रहा है। 16 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह बहुप्रतीक्षित महोत्सव अपने आधे पड़ाव तक पहुंच चुका है। दोनों देशों के कलाकारों की अनूठी लोक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। झगड़ जनजाति लोक नृत्य, कुमारी नृत्य, फरुवाही लोक नृत्य तथा बधावा लोक नृत्य की मनमोहक छटा भारत-नेपाल की साझा विरासत को नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। 

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026′ दोनों देशों के संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और भावनात्मक आधार पर सदियों से जुड़े हैं। इन रिश्तों को और प्रगाढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नया आकार देगा। महोत्सव प्रदेश के पूर्वांचल और तराई के आठ जिलों में मित्रता का मंच सजा रहा है। इसमें एक जनपद, एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी भी लगी है।’

    *रचनात्मक गतिविधियों से सशक्त संदेश* 
    28 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में स्काउट एंड गाइड के बच्चों द्वारा योग का सुंदर प्रदर्शन, भारत-नेपाल मैत्री विषय पर चित्रकला और रंगोली जैसी रचनात्मक गतिविधियां भारत-नेपाल की दोस्ती का सशक्त संदेश दे रही हैं। नेपाल से आए कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जब मंच पर अपनी सांस्कृतिक छटा बिखेरी, तो भारत-नेपाल मैत्री केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आत्मीयता के जीवंत उत्सव में बदल गई। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘इस महोत्सव ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि डिजिटल युग में जी रही मौजूदा पीढ़ी जब अपनी अभिव्यक्ति को परंपरा के रंगों से सजाती है, तब पूर्वांचल और तराई की धरती पर भारत-नेपाल मैत्री और भी प्रखर एवं अर्थपूर्ण स्वरूप में सामने आती है।’

    *‘रोटी-बेटी’ रिश्ते की झलक* 
    कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में आयोजित महोत्सव में धोबिया लोकनृत्य और नुक्कड़ नाटकों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने दोनों देशों के संबंधों को भावनात्मक गहराई से प्रस्तुत किया। कलाकारों ने ‘रोटी-बेटी’ के आत्मीय रिश्ते को मंच पर इस तरह साकार किया कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे। प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि भारत-नेपाल की यह परंपरागत मित्रता और पारिवारिक जुड़ाव हर वर्ष इसी उत्साह, उल्लास और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाता रहेगा। 

  • एनटीपीसी टाइम एशिया-पैसिफिक – 2026 की सर्वश्रेष्ठ कंपनियां में शामिल

    एनटीपीसी टाइम एशिया-पैसिफिक – 2026 की सर्वश्रेष्ठ कंपनियां में शामिल

    एनटीपीसी को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान

    नई दिल्ली : एनटीपीसी ने एक महत्वपूर्ण वैश्विक उपलब्धि हासिल करते हुए 11 फरवरी 2026 को घोषित प्रतिष्ठित TIME Asia-Pacific’s Best Companies of 2026 सूची में स्थान प्राप्त किया है। यह सूची TIME द्वारा Statista के साथ साझेदारी में प्रकाशित की जाती है, जो बाजार एवं उपभोक्ता डेटा तथा रैंकिंग का एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय प्रदाता है। Asia-Pacific’s Best Companies of 2026 रैंकिंग एशिया-प्रशांत क्षेत्र की शीर्ष प्रदर्शन करने वाली कंपनियों की पहचान करने के लिए एक व्यापक विश्लेषण है। यह रैंकिंग तीन प्रमुख आयामों—कर्मचारी संतुष्टि, वित्तीय प्रदर्शन और स्थिरता पारदर्शिता (ESG)—पर आधारित है। इस विशिष्ट सूची में एनटीपीसी का शामिल होना इन सभी मानकों पर उसके मजबूत और संतुलित प्रदर्शन तथा उत्कृष्टता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    दुनिया की अग्रणी पावर कंपनी बनने तथा भारत की विकास यात्रा और ऊर्जा परिवर्तन को गति देने की अपनी दृष्टि के अनुरूप, एनटीपीसी निरंतर विश्वसनीय, किफायती और सतत ऊर्जा समाधान प्रदान कर रही है। नवाचार, परिचालन दक्षता और जिम्मेदारी की मजबूत भावना से प्रेरित होकर कंपनी देश की प्रगति को किफायती, प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से ऊर्जा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। एनटीपीसी का मानना है कि उसका मूल व्यवसाय—ऊर्जा उत्पादन—सामाजिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह प्रतिष्ठित सम्मान एनटीपीसी की उत्कृष्टता की निरंतर खोज और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती सशक्त उपस्थिति का प्रमाण है। यह पूरे एनटीपीसी परिवार के समर्पण, उत्साह और सामूहिक प्रयासों का उत्सव है, जिनकी साझा दृष्टि और प्रतिबद्धता संगठन को निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर कर रही है।

    यह सम्मान एनटीपीसी के विशिष्ट और मानव-केंद्रित “People before PLF (Plant Load Factor)” दर्शन की भी पुनः पुष्टि करता है। कंपनी ने मानव संसाधन विकास और प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर प्रक्रिया सुधार के माध्यम से एक संवेदनशील, समावेशी और सीखने को प्रोत्साहित करने वाला कार्यस्थल विकसित करते हुए नए मानक स्थापित किए हैं। कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता देते हुए, सहभागिता को बढ़ावा देकर और प्रगतिशील मानव संसाधन नीतियों को व्यावसायिक उद्देश्यों के साथ जोड़कर, एनटीपीसी ने एक सार्थक, सहयोगात्मक और सशक्त कर्मचारी अनुभव निर्मित किया है।

    TIME द्वारा मिला यह वैश्विक सम्मान एनटीपीसी की एक पसंदीदा नियोक्ता और सतत विकास के अग्रणी संगठन के रूप में स्थिति को और मजबूत करता है, साथ ही भारत और विश्व के लिए एक उज्जवल, स्वच्छ और अधिक सुदृढ़ ऊर्जा भविष्य के निर्माण में उसकी भूमिका को रेखांकित करता है।

  • चंदौली का वैश्विक गौरव : मुगलसराय के डॉ. अभिमन्यु पांडेय को ऑक्सफोर्ड और ब्रिटिश संसद का बुलावा

    चंदौली का वैश्विक गौरव : मुगलसराय के डॉ. अभिमन्यु पांडेय को ऑक्सफोर्ड और ब्रिटिश संसद का बुलावा

    *लंदन के ‘हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट’ में आयोजित ‘होलिस्टिक मेडिसिन कॉन्फ्रेंस 2026’ में बतौर विशिष्ट डेलीगेट होंगे शामिल

    पीडीडीयू नगर: उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद के लिए गर्व का विषय है कि मुगलसराय के विख्यात चिकित्सक डॉ. अभिमन्यु पांडेय को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश संसद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। आगामी 10 अप्रैल 2026 को लंदन स्थित ब्रिटिश संसद परिसर में आयोजित होने वाली ‘होलिस्टिक मेडिसिन कॉन्फ्रेंस 2026’ में वे बतौर विशिष्ट डेलीगेट भाग लेंगे।

    यह आमंत्रण मर्टन कॉलेज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वरिष्ठ अकादमिक हस्ती एवं ‘द 1928 इंस्टीट्यूट’ की को-चेयर डॉ. निकिता वेद (MBE) की ओर से भेजा गया है। डॉ. पांडेय को होम्योपैथिक मेडिसिन के क्षेत्र में उनके शोध और स्वास्थ्य सेवाओं में असाधारण योगदान के लिए यह सम्मान मिला है। विशेष रूप से अर्थराइटिस और ऑटो इम्यून डिजीज के उपचार एवं अध्ययन में उनके कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। सम्मेलन में डॉ. अभिमन्यु पांडेय ब्रिटिश सांसद शिवानी राजा (MP), बैरोनेस वर्मा और लॉर्ड रवल सहित वैश्विक नीति-निर्माताओं व स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करेंगे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सचिवालय और इंडिया ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) द्वारा समर्थित यह आयोजन भारत और ब्रिटेन के बीच चिकित्सा एवं शोध सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

    अपनी उपलब्धि पर डॉ. पांडेय ने कहा,“ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश पार्लियामेंट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से मान्यता मिलना किसी भी चिकित्सक के लिए सर्वोच्च सम्मान है। मेरा प्रयास रहेगा कि मैं इस वैश्विक मंच पर काशी की ज्ञान-परंपरा और आधुनिक चिकित्सा शोध का सार्थक प्रतिनिधित्व कर सकूं।”डॉ. अभिमन्यु की इस उपलब्धि से न केवल चंदौली बल्कि पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ इसे उत्तर प्रदेश के किसी चिकित्सक को मिला अब तक का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक मान रहे हैं।

  • छत्तीसगढ़ की कला आयरलैंड तक पहुँची : डबलिन में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की गूंज

    छत्तीसगढ़ की कला आयरलैंड तक पहुँची : डबलिन में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की गूंज

    *छत्तीसगढ़ की कला आयरलैंड तक पहुँचना गौरव का विषय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

    रायपुर /आयरलैंड की राजधानी डबलिन में भारत की सांस्कृतिक विविधता की एक सशक्त झलक देखने को मिली, जब स्टेट कल्चरल इवेंट सीरीज़ के तहत भारतीय दूतावास, डबलिन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य पर केंद्रित भव्य सांस्कृतिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आयरलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्घाटन आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा द्वारा किया गया।  उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और राज्य की विशिष्ट पहचान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारत की विविधता को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करते हैं। आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर आधारित एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें राज्य की कला, संस्कृति, परंपरा और विकास यात्रा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने आगंतुकों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जहाँ राज्य की कारीगरी की बारीकी और सौंदर्य को सराहा गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुत लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा को आयरलैंड की धरती तक पहुँचा दिया और दर्शकों से भरपूर प्रशंसा प्राप्त की। कार्यक्रम का समापन छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों के साथ हुआ, जिसने उपस्थित अतिथियों को राज्य की स्वादिष्ट पाक-परंपरा से परिचित कराया। कुल मिलाकर यह आयोजन छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल साबित हुआ।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आयरलैंड की राजधानी डबलिन में आयोजित छत्तीसगढ़ केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि प्रदेश की लोकसंस्कृति अब वैश्विक दर्शकों तक पहुँच रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्टेट कल्चरल इवेंट सीरीज़ के अंतर्गत भारतीय दूतावास, डबलिन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक विविधता और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। उन्होंने इस आयोजन के लिए भारतीय दूतावास और आयरलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, हस्तशिल्प और लोक परंपराएँ राज्य की पहचान का मूल आधार हैं। आयरलैंड में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ की हस्तकला, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने सराहा, यह राज्य के कलाकारों और कारीगरों के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएँ मिलती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की कला-संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश में इसी तरह मंच मिलेगा और राज्य की विशिष्ट पहचान विश्व पटल पर और अधिक सुदृढ़ होगी।

  • टीडब्ल्यूआई समूह उत्तर प्रदेश में भारत का पहला हाइब्रिड ईवी मोटरसाइकिल संयंत्र स्थापित करेगा

    टीडब्ल्यूआई समूह उत्तर प्रदेश में भारत का पहला हाइब्रिड ईवी मोटरसाइकिल संयंत्र स्थापित करेगा

    दावोस : एआई, सोलर, ईवी और रक्षा क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों के साथ उत्तर प्रदेश ने किया  रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार*

    *ग्रीनको समूह ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 1 गीगावॉट कम्प्यूट डेटा सेंटर विकसित करने हेतु किया ऐतिहासिक समझौता (एमओयू)*

    *आईनाक्स जीएफएल समूह ने सोलर क्षमता और सोलर मॉड्यूल निर्माण के लिए ₹10,500 करोड़ निवेश की प्रतिबद्धता जताई*

    *स्वीडन की प्रोमोटेक कंपनी मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करेगी और यूएवी (ड्रोन) अवसरों की संभावनाएं तलाशेगी*

    दावोस/लखनऊ। विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) की वार्षिक बैठक 2026 के दूसरे दिन दावोस में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख वैश्विक एवं भारतीय कंपनियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें जारी रखते हुए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्तावों एवं दीर्घकालिक साझेदारियों को मजबूत किया। 

    उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कैबिनेट मंत्री (वित्त एवं संसदीय कार्य) सुरेश कुमार खन्ना कर रहे है उनके साथ प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी दीपक कुमार (अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त),  अमित सिंह, सचिव, (मुख्यमंत्री कार्यालय), विजय किरण आनंद (सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी इन्वेस्ट यूपी एवं यूपीसीडा) और इंदरजीत सिंह (विशेष सचिव, ऊर्जा विभाग एवं निदेशक, यूपीनेडा) मौजूद हैं।

    दिन भर प्रतिनिधिमंडल ने बायर कंज्यूमर हेल्थ (Bayer Consumer Health), ग्रीनको (Greenko), आरईसी लिमिटेड (REC Ltd), रिलायसैट (Relisat), कॉग्निजेंट (Cognizant) और जुबिलेंट भारतीया समूह (Jubilant Bhartia Group) जैसी कंपनियों के साथ रणनीतिक चर्चा की। इन बैठकों में उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक साझेदारी तथा विभिन्न क्षेत्रों में निवेश अवसरों पर विस्तृत संवाद हुआ। इस दिन का प्रमुख आकर्षण एएम ग्रीन समूह (AM Green Group) और इन्वेस्ट यूपी के बीच ग्रेटर नोएडा में 1 गीगावॉट (GW) कम्प्यूट डेटा सेंटर स्थापित करने हेतु हुआ ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) रहा। यह बहु-अरब डॉलर की परियोजना चरणबद्ध रूप से विकसित होगी, जिसमें 250 मेगावॉट (MW) क्षमता के 24 माह के भीतर संचालन में आने तथा 2028 तक पूर्ण क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है।

    वैश्विक एआई वर्कलोड्स की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई यह सुविधा स्केलेबल कम्प्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर, लो-लेटेंसी कनेक्टिविटी और भारत के डेवलपर समुदाय के लिए बेहतर चिपसेट एक्सेस उपलब्ध कराएगी। यह परियोजना 

    हाइपरस्केलर्स, एंटरप्राइजेज और सॉवरेन डिजिटल पहलों को समर्थन देगी। एएम ग्रीन की 24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा समाधानों से संचालित यह प्रोजेक्ट बड़े स्तर पर एफडीआई आकर्षित करने, हजारों उच्च-कौशल रोजगार सृजित करने तथा विकसित भारत 

    2047 विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को भारत का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    स्वच्छ ऊर्जा में राज्य के नेतृत्व को और मजबूत करते हुए आईनाक्स जीएफएल समूह (Inox GFL Group) ने उत्तर प्रदेश में 2 गीगावॉट सौर ऊर्जा परियोजना तथा 3 गीगावॉट सौर मॉड्यूल निर्माण इकाई स्थापित करने हेतु एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना में ₹10,500 करोड़ के प्रस्तावित निवेश के साथ 800–1000 लोगों के लिए रोजगार सृजन होगा।

    अगली पीढ़ी की मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने टीडब्ल्यूआई समूह (TWI Group of Companies) के साथ ₹1,100 करोड़ का एमओयू किया। इसके अंतर्गत राज्य में भारत की पहली हाइब्रिड ईवी मोटरसाइकिल निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी, जिससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रोजगार सृजन और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।

    अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के विस्तार में, प्रतिनिधिमंडल ने प्रोमोटेक (Promoteq)—स्वीडन स्थित कंपनी—के साथ भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत उत्तर प्रदेश में निवेश संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रोमोटेक ने लखनऊ में ₹500 करोड़ के निवेश से एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना साझा की तथा उत्तर प्रदेश रक्षा नीति के तहत यूएवी (UAV) निर्माण में भी रुचि जताई। इससे यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत निवेश एवं औद्योगिक अवसरों को नई गति मिलेगी। इन प्रभावशाली एमओयू और उच्चस्तरीय बैठकों के माध्यम से उत्तर प्रदेश एक भविष्य-तैयार निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है, जहां नवाचार, सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धी औद्योगिक वृद्धि को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • वैश्विक मंच दावोस में उत्तर प्रदेश प्रतिनिधिमंडल की प्रभावी भागीदारी, औद्योगिक और डिजिटल विकास को नई दिशा

    वैश्विक मंच दावोस में उत्तर प्रदेश प्रतिनिधिमंडल की प्रभावी भागीदारी, औद्योगिक और डिजिटल विकास को नई दिशा

    *दावोस में उत्तर प्रदेश प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकें, डिजिटल, ऊर्जा और औद्योगिक विकास को मिला बढ़ावा*

    दावोस, लखनऊ। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश प्रतिनिधिमंडल ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) में प्रमुख वैश्विक कंपनियों एवं संस्थानों के साथ एक श्रृंखला में महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकें कीं। इस प्रतिनिधिमंडल में इंफ्रास्ट्रक्चर एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार; मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव अमित सिंह; अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के सचिव एवं इन्वेस्ट यूपी तथा यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद; तथा ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव एवं यूपीनेडा के निदेशक इंदरजीत सिंह के साथ वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित थे। बैठकों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में और अधिक सुदृढ़ करना तथा राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और वैश्विक सहयोग के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा करना रहा।

    दिन की बैठकों की शुरुआत लुई ड्रेफस कंपनी के साथ संवाद से हुई, जिसके पश्चात उबर टेक्नोलॉजीज, ऑटोमेशन एनीवेयर, कॉल्ड्रॉन, पेप्सिको, एचसीएल सॉफ्टवेयर, वेल्थ डोर, अनुपम रसायन इंडिया लिमिटेड, गूगल क्लाउड, ग्रीनको के साथ बी2जी (बिज़नेस-टू-गवर्नमेंट) बैठकें आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त, कार्बन कंपास के संस्थापक एवं सीईओ नीरज अग्रवाल—जो आईआईटी कानपुर एवं एमआईआईटी के पूर्व छात्र हैं तथा नासा के पूर्व वैज्ञानिक रह चुके हैं—और डेलॉइट दक्षिण एशिया के साथ भी विस्तृत चर्चा की गई। उबर टेक्नोलॉजीज के साथ हुई बैठक में नोएडा में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की स्थापना, निवेश विस्तार तथा मोबिलिटी साझेदारियों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 13 से अधिक स्थानों पर 1.5 लाख वाहनों के संचालन के साथ, उबर ने राज्य की प्रगतिशील नीतिगत रूपरेखा के अंतर्गत पर्यटन, लास्टमाइल कनेक्टिविटी तथा नवाचार-आधारित समाधानों पर विशेष जोर दिया। इसके अतिरिक्त, अर्जेंटीना सरकार के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें आपसी सहयोग एवं निवेश अवसरों पर चर्चा की गई।

    इन बैठकों के दौरान डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, फ़ूड प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन तथा ग्लोबल ट्रेड जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को रेखांकित किया, जो सतत एवं समावेशी विकास की दिशा में उत्तर प्रदेश की परिकल्पना के अनुरूप हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की सुदृढ़ नीतिगत रूपरेखा, इन्वेस्टर-फ्रेंडली इकोसिस्टम तथा नवाचार-आधारित विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। दावोस में हुए ये संवाद परिवर्तनकारी साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति एवं वैश्विक एकीकरण को और गति प्रदान करने की अपेक्षा हैं।

  • जन मित्र सम्मान प्राप्तकर्ताओं चंद्र मिश्रा और प्रो. सुरेश नायर के कर-कमलों से प्रो.चॉकी फ्रेन को जन मित्र सम्मान

    जन मित्र सम्मान प्राप्तकर्ताओं चंद्र मिश्रा और प्रो. सुरेश नायर के कर-कमलों से प्रो.चॉकी फ्रेन को जन मित्र सम्मान

    वाराणसी ।( जी. जी. न्यूज ) अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार, लेखक, शिक्षाविद् एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता चाॅकी फ्रेन को कला, मानव गरिमा, शांति और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके आजीवन एवं असाधारण योगदान के लिए जन मित्र सम्मान (Jan Mitra Award) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पूर्व जन मित्र सम्मान प्राप्तकर्ताओं Chandra Mishra तथा Suresh Nair के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया। यह क्षण न्याय, लोकतंत्र और मानवीय मूल्यों के लिए सतत संघर्ष की परंपरा और एकजुटता का प्रतीक रहा।

    जन मित्र सम्मान समारोह का आयोजन 10 जनवरी 2026 को दोपहर 1:00 बजे, पीवीसीएचआर कार्यालय, पांडेयपुर, वाराणसी में किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन People’s Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR), Jan Mitra Nyas तथा Mirza Ghalib Literature & Art Global Club द्वारा किया गया।

    जन मित्र सम्मान उन व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने कला, संस्कृति और शिक्षा को मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की रक्षा का सशक्त माध्यम बनाया है। प्रो. फ्रेन की कला ने युद्ध, सत्ता, पूंजी और बहिष्करण की अमानवीय संरचनाओं को चुनौती देते हुए हाशिये पर खड़े समुदायों की आवाज़ को वैश्विक मंच दिया है।

    सम्मान स्वीकार करते हुए प्रो. चॉकी फ्रेन ने कहा: “शिक्षण, नेतृत्व और शोध के माध्यम से कला की उस जिम्मेदारी और शक्ति को सामने लाने के लिए किए गए आजीवन कार्य को मान्यता मिलना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। कला अपने समय की साक्षी होती है और प्रभुत्वशाली आख्यानों को चुनौती देती है। इस अर्थपूर्ण सम्मान के लिए मैं डॉ. लेनिन रघुवंशी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।”

    फुलब्राइट-नेहरू स्कॉलर रह चुके प्रो. फ्रेन वर्तमान में George Mason University में अध्यापन कर रहे हैं। उनकी कलाकृतियाँ अमेरिका, यूरोप, मध्य-पूर्व और भारत में प्रदर्शित हो चुकी हैं और लोकतंत्र, अन्याय एवं मानवीय पीड़ा पर उनके सशक्त हस्तक्षेप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई हैं। आयोजकों ने कहा कि जन मित्र सम्मान केवल कला का नहीं, बल्कि नैतिक साहस, मानवीय प्रतिबद्धता और उत्पीड़ित समुदायों के साथ अटूट एकजुटता का सम्मान है। समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जब कला विवेक और करुणा से जुड़ती है, तब वह शांति, न्याय और सामाजिक परिवर्तन की सबसे सशक्त आवाज़ बन जाती है।