Category: GHAZIPUR

  • उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी परंपरा का अमूल्य खजाना – राखी अग्रवाल

    उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी परंपरा का अमूल्य खजाना – राखी अग्रवाल

    रागदारी संगीत की शुद्धता और गरिमा को बनाए रखने हेतु आवश्यक है परंपरा और नवाचार के बीच संतुलन – राखी अग्रवाल

    गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबंध प्रस्तुतीकरण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र/ छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी मे संगीत विषय की शोधार्थिनी राखी अग्रवाल ने अपने शोध प्रबंध शीर्षक  “उत्तर भारतीय रागदारी संगीत में व्याप्त विसंगतियां एवं विरोधाभास: एक अध्ययन” नामक विषय पर शोध प्रबंध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी परंपरा का अमूल्य खजाना है। यह केवल नियमों के अंतर्गत स्वरों का संयोजन नहीं, बल्कि भाव, समय, ऋतु और मनोभावों की गहरी अभिव्यक्ति है। रागदारी पद्धति में राग स्वरूप, समय-प्रणाली, वादी-संवादी स्वर, आलाप, तान, बंदिश आदि सभी का अपना अनुशासन है। गुरु-शिष्य परंपरा, घरानों की विशिष्टता और शुद्धता की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन, वर्तमान समय में इस परंपरा के समक्ष कई चुनौतियाँ हैं। जिसमें राग के मुख्य लक्षणों, स्वर स्वरूप, कण स्वरों के प्रयोग तथा सही स्वरोच्चार आदि की अवहेलना, बंदिशों के अर्थ और भाव से असंगत प्रस्तुति, जहाँ शब्द तो पारंपरिक हैं पर भाव आधुनिकता में खो जाते हैं और कभी कभी बंदिश का कोई अर्थ ही नहीं निकलता।  घराना परंपरा के क्षीण होने  के कारण आजकल विभिन्न घरानों की शैलियों का मिश्रण इतना हो रहा है कि उनकी विशिष्ट पहचान मिटती जा रही है। इसके अलावा, रागों में अनावश्यक प्रयोग और निरंतर सीखने और रियाज की कमी भी गंभीर विषय है। विरोधाभास भी कम नहीं है। इसमें जहाँ  एक ओर परंपरा को संरक्षित रखने की पुकार है, तो दूसरी ओर फ्यूजन और लोकप्रिय संगीत की लहर है। एक तरफ शुद्धता और गहराई का आग्रह है, तो दूसरी तरफ व्यावसायिक मंचों पर आकर्षक लेकिन सतही प्रस्तुति का दबाव है। गुरु-शिष्य परंपरा का स्थान संस्थागत प्रशिक्षण ले रहा है, जिससे प्रमाण पत्र तो मिलता है, मगर शास्त्रीय संगीत की समझ नहीं। गुरु और शिष्य के बीच आत्मीयता और निजी मार्गदर्शन कम हो रहा है। इन विसंगतियों और विरोधाभासों का समाधान संतुलन में है। हमें परंपरा का सम्मान करते हुए नियंत्रित नवाचार को अपनाना होगा। युवा पीढ़ी में राग-शुद्धि और ताल-लय की समझ गहरी करनी होगी, और घराना परंपरा के पुनर्जीवन के प्रयास करने होंगे और अंत में मैं यही कहूँगी कि उत्तर भारतीय रागदारी संगीत केवल हमारी धरोहर नहीं, हमारी पहचान है। इसे संरक्षित रखना, संवारना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबका सामूहिक दायित्व है। प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोध छात्रों द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थिनी राखी अग्रवाल ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे०:(डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया।  इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह, शोध निर्देशक एवं संगीत  विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफे० (डॉ०) मीना सिंह, प्रोफे(डॉ०) अरुण कुमार यादव, डॉ० रविशेखर सिंह, डॉ० रामदुलारे, डॉ० अशोक कुमार, डीएसडब्ल्यू प्रोफे० (डॉ०) संजय चतुर्वेदी, डॉ० लवजी सिंह, डॉ० मनोज कुमार मिश्र, डॉ०कमलेश, अमितेश सिंह, प्रदीप सिंह एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोध छात्र छात्रएं आदि उपस्थित रहे। अंत में डॉ० मीना सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया तथा संचालन अनुसंधान एवं विकास प्रोकोष्ठ के संयोजक प्रोफे०(डॉ०) जी० सिंह ने किया।

  • गाजीपुर हत्याकांड: बेटे की मौत पर बिलखती रही मां, अधिकारियों से आंचल फैलाकर मांगा इंसाफ

    गाजीपुर हत्याकांड: बेटे की मौत पर बिलखती रही मां, अधिकारियों से आंचल फैलाकर मांगा इंसाफ

    गाजीपुर जिले के महराजगंज स्थित सनबीम स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र आदित्य वर्मा की हत्या मामले ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। मृतक छात्र के परिजन गुरुवार को डीएम और एएसपी ग्रामीण से मिलने पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार भी साथ थे। अधिकारियों के सामने आदित्य की मां गुड़िया आंसुओं में डूबी रहीं और इंसाफ की गुहार लगाती रहीं।

    “मेरे बेटे ने बहुत दर्द सहा होगा” – मां की चीख

    डीएम दफ्तर में मौजूद लोगों का दिल उस वक्त पसीज गया जब आदित्य की मां गुड़िया रोते हुए बोलीं – “मेरे बेटे को बहुत दर्द हुआ होगा। चाकू घोंपकर मेरी आंखों का तारा छीन लिया गया। आरोपी बच्चों को ऐसी सजा मिले कि जिंदगी भर याद रखें।”
    गुड़िया ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर अपील की कि आरोपियों को आजीवन कारावास दिया जाए, ताकि किसी और परिवार के साथ ऐसी त्रासदी न हो।

    स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप

    आदित्य की मां ने स्कूल प्रशासन पर भी बड़ा आरोप लगाया। उनका कहना है कि समय पर बेटे को अस्पताल ले जाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि “इस स्कूल में अब कोई भी अपने बच्चों को न भेजे। यहां की लापरवाही ने मेरा बेटा छीन लिया। स्कूल की मान्यता रद्द की जानी चाहिए।”

    पिता ने भी जताई नाराजगी

    मृतक छात्र के पिता शिवजी वर्मा ने भी अधिकारियों से कहा कि बेटे की मौत के लिए स्कूल प्रबंधन जिम्मेदार है। समय रहते इलाज न मिलने की वजह से आदित्य की जान चली गई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्कूल की मान्यता तत्काल रद्द की जाए।

    कैसे हुआ वारदात

    सोमवार को गाजीपुर के शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित महराजगंज सनबीम स्कूल में नौवीं कक्षा के छात्र ने फल काटने वाले चाकू से हमला कर आदित्य वर्मा (15) की हत्या कर दी थी। इस हमले में आरोपी समेत तीन छात्र घायल हुए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    फॉरेंसिक टीम और पुलिस ने घटनास्थल से चाकू बरामद कर लिया है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी कब्जे में ले लिए गए हैं।

    शौचालय में हुआ झगड़ा

    जांच के अनुसार, यह वारदात तीसरी मंजिल पर बने शौचालय में हुई। सुबह करीब 9:30 बजे तीसरे पीरियड की घंटी बजने पर कुछ छात्र शौचालय गए थे। इसी दौरान दो गुटों के बीच विवाद बढ़ गया। कक्षा 9 के छात्र ने चाकू निकालकर आदित्य पर हमला कर दिया। सिर और सीने पर गहरे वार से आदित्य गंभीर रूप से घायल हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    प्रशासन सख्त, कार्रवाई की तैयारी

    फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

  • गाजीपुर पी जी कॉलेज में वैदिक रीति से नए सत्र का शुभारंभ

    गाजीपुर पी जी कॉलेज में वैदिक रीति से नए सत्र का शुभारंभ

    गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में नवीन सत्र- 2025-26 का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान के साथ धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर शोध ग्रंथालय में ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्चन और आरती की गई। इसके साथ ही हवन-यज्ञ का भी आयोजन हुआ। जिसमें सभी ने आहुति देकर मंगलकामना की। प्राचार्य प्रोफेसर राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध ग्रंथालय के परिसर में सिंदूर के पेड़ का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके उपरांत कॉलेज के संस्थापक सचिव एवं प्रबंधक स्वर्गीय बाबू राजेश्वर प्रसाद सिंह की आदम कद प्रतिमा एवं चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति पर प्राचार्य प्रोफेसर राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में समस्त शिक्षकों और कर्मचारियों ने पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 

    प्राचार्य प्रोफेसर राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा ने कि नए सत्र का यह शुभारंभ हमारी सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को मजबूत करने का प्रतीक है। वैदिक रीति से आयोजित यह कार्यक्रम हमारी परंपराओं के प्रति सम्मान और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। स्वर्गीय बाबू राजेश्वर प्रसाद सिंह के योगदान को हम सदा स्मरण करेंगे। महाविद्यालय के सभी छह संकायों कला, विज्ञान, वाणिज्य, कृषि, अध्यापक शिक्षा एवं शारीरिक शिक्षा में स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर पर उच्च गुणवत्तायुक्त प्रयोगशाला, छात्र पुस्तकालय, विभागीय पुस्तकालय, आनलाइन पुस्तकालय, कम्प्यूटरिकृत केंद्रीय शोध ग्रन्थालय, रोवर्स रेंजर्स, एन. सी.सी., एन. एस.एस. के साथ-साथ जिम्नेजियम हाल, आउटडोर तथा इंडोर स्टेडियम के माध्यम से खेलों में भी उच्च स्तर की सुविधायें उपलब्ध होने के साथ साथ सम्पूर्ण परिसर वाई-फाई से सुसज्जित है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु समग्रता के साथ प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने अवगत कराया कि विभिन्न विषयों में प्रवेश शुरू है, जिसकी तिथि और समय सहित विस्तृत विवरण महाविद्यालय की वेबसाइट से प्राप्त किया जा सकेगा। समस्त विद्यार्थियों को समर्थ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। कार्यक्रम में प्रबंधक समिति के प्रतिनिधि सौरभ सिंह, प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह, प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ सिंह, प्रोफेसर विनय कुमार दूबें, प्रोफेसर डीआर सिंह, प्रोफेसर संजय चतुर्वेदी, डॉ० इन्दीवर पाठक, डॉ शैलेन्द्र सिंह, डॉ० सुधीर सिंह, संजय श्रीवास्तव, अनिल पांडेय, अरुण सिंह बघेल, विवेक सिंह’सम्मी, विजय सिंह, अमितेश सिंह, ममता मिश्रा, गौरी सिंह,  सीमा सिंह सहित कॉलेज के सभी शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं शामिल रहे। यह आयोजन कॉलेज के सांस्कृतिक और शैक्षणिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

  • गाज़ीपुर के चंवर गाँव में जीरो-टिलेज गेहूँ की जीरो टिलेज विधि पर सार्वजनिक कटाई और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

    गाज़ीपुर के चंवर गाँव में जीरो-टिलेज गेहूँ की जीरो टिलेज विधि पर सार्वजनिक कटाई और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

     वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान- दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) द्वारा मरदह ब्लॉक के चंवर गाँव (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) में जीरो-टिलेज गेहूँ पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के द्वारा किसानों को धान की सीधी बुवाई और जीरो-टिलेज गेहूँ की  तकनीकों के बारे में जानकारी प्रदान की गई।

    इस कार्यक्रम में 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया। साथ ही यूपीडास्प, कृषि विभाग-उत्तर प्रदेश, आईसीएआर-अटारी कानपुर, कृषि विज्ञान केंद्र  और अन्य संगठनों के विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। किसानों के सामने गेहूँ की कटाई कराई गयी जिसमे गेहूँ की पैदावार 5.6 टन/हेक्टेयर रही । जीरो टिलेज तकनीक के द्वारा  किसानों को कम लागत, बेहतर उत्पादन, मिट्टी की सेहत में सुधार और जलवायु अनुकूल खेती जैसी विशेषताओं का भी लाभ मिलता है। 

    कार्यक्रम की शुरुआत में आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने सभी अतिथियों और किसानों का स्वागत करते हुए कहा, “हम उत्तर प्रदेश में टिकाऊ और मशीनीकृत खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) और ज़ीरो टिलेज गेहूँ (जेडटीडब्लू) जैसी तकनीकों पर ज़ोर है। हमारा ध्यान कार्बन क्रेडिट, हरित सर्कुलर अर्थव्यवस्था और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से मशीनीकरण को मजबूत करने पर है। आज का ज़ीरो टिल गेहूँ का  प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम हमारे नवाचार-आधारित कृषि के संकल्प को दर्शाता है, जिसमें आइसार्क, वाराणसी एक प्रमुख केंद्र के रूप में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”

    इरी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. आर.के. मलिक ने बताया “धान की सीधी बुवाई और जीरो टिल विधि से गेहूँ की बुवाई अपनाने से किसानों की लागत कम होंगी तथा साथ ही गेहूं बुवाई अगेती की जा सकती है, अगेती बुवाई होने पर गेहूं की पैदावार बढ़ती है।

    आईसीएआर-अटारी, कानपुर के निदेशक डॉ. शांतनु कुमार दुबे ने अपने संबोधन में कहा, “समय पर बुआई, उन्नत किस्में और मशीनीकरण – इन तीनों के मेल से धान की सीधी बुवाई और जीरो टिलेज गेंहू जैसी तकनीकों को अपनाकर हम कृषि में बदलाव ला सकते हैं।”

    गाज़ीपुर के कृषि उपनिदेशक (कृषि विभाग) डॉ. अतिंद्र सिंह ने कहा, “आज की कटाई से यह बात प्रमाणित होती है कि इस जनपद मे भी किसान नई तकनीक अपना कर अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। पराली जलाने की समस्या को भी मशीनों और समयबद्ध खेती से हल किया जा सकता है।”

    यूपीडास्प, कृषि विभाग-उत्तर प्रदेश के तकनीकी समन्वयक डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि पूर्वांचल में उत्तर प्रदेश सरकार एवं वर्ल्ड बैंक के समन्वय से 6 वर्षीय यूपीएग्रिस नामक एक प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है इस प्रोजेक्ट के माध्यम से धान की सीधी बुवाई और जीरो टिल विधि से गेहूँ की बुवाई पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिससे किसानों को खेती में कम लागत होगी, बेहतर मुनाफा, उन्नत तकनीक, समय पर मौसम जानकारी, मशीनरी और बेहतर विपणन के साधन मिलेंगे।

    इस अवसर पर केवीके गाज़ीपुर के हेड – डॉ. वी के. सिंह व जौनपुर केवीके के हेड और विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। आइसार्क के वैज्ञानिक डॉ. विक्रम पाटिल ने बताया कि गेंहूँ की बुआई देर से करने पर गेहूँ के उत्पादन में कमी आती है। उन्होंने अवशेष प्रबंधन, लागत कम करने की रणनीति पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी साझा किया कि पिछले खऱीफ सीजन में इसी खेत के में धान की सीधी बुवाई की पैदावार 6.5 टन/हेक्टेयर और आज की जीरो टिलेज गेहूँ की पैदावार 5.6 टन/हेक्टेयर रही – यानि कुल मिलाकर धान -गेहूँ प्रणाली की उत्पादकता 12.1 टन/हेक्टेयर रही।

    प्रगतिशील किसान अमरजीत सिंह ने अपने खेत पर जीरो-टिलेज गेहूँ की खेती का अनुभव साझा किया और बताया कि इससे लागत कम हुई और काम में आसानी भी आई। गेहूँ की कटाई उनके खेत पर हुई, जिससे अन्य किसानों ने जीरो टिल गेहूँ की व तकनीक को करीब से देखा। इन्होंने पहले अपने उसी खेत मे धान की सीधी बुवाई तकनीक से खेती करी थी, जिससे वह बेहद खुश थें।

    कार्यक्रम का समापन यूपीडास्प, कृषि विभाग-उत्तर प्रदेश के कृषि विशेषज्ञ डॉ. वी.पी. सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम किसानों को टिकाऊ खेती और नवाचारों की ओर प्रेरित करने की दिशा में बड़ा कदम है।” उन्होंने किसानों से अपील की वह अपने खेती से जुड़े खर्चों का और खेती से जुड़े आय का विवरण रखें।यह आयोजन आइसार्क की ऑन-फार्म डेमोंस्ट्रेशन श्रृंखला एवं क्षमता विकास का एक हिस्सा था जिसके जरिये किसानों को टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ना तथा खेत स्तर पर प्रशिक्षण व जागरूकता के माध्यम से उनकी क्षमता सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाता है।

  • प्रोफेसर हवलदार सिंह जी की मनाई गई दूसरी पुण्यतिथि

    प्रोफेसर हवलदार सिंह जी की मनाई गई दूसरी पुण्यतिथि

    बबुरी चन्दौली । (शैलेश सिंह) शिक्षाविद स्व० हवलदार सिंह जी की दूसरी पुण्यतिथि उनके पैतृक गाॅव भवतपूरा ( हटिया ) में मनाई गई। बताते चलें कि प्रोफेसर हवलदार सिंह जी का जन्म चंदौली जिले के बबुरी के समीप भवतपुरा गांव में 1 जुलाई 1940 को हुआ था।
    प्रोफेसर साहब बचपन से ही पढ़ाई लिखाई के साथ ही साथ कुस्ती में भी बड़े नामचीन रहे, खेलकूद में उनकी गहरी रुचि रही। भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार सुजीत कुमार रिस्ते में इनके भतीजे लगते थे।
    प्रोफेसर साहब की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा बबुरी में हुई इसके बाद हाईस्कूल और इंटरमीडिएट चकिया से प्रथम डिविजन से पास किए। तब के मित्र और सहयोगी बताते हैं कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी उनके सहपाठी और घनिष्ठ मित्र रहे। स्कूली शिक्षा पूर्ण कर
    स्नातक और परास्नातक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से करने के बाद हवलदार सिंह जी गाजीपुर पीजी कॉलेज में साइंस से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर 1973 में नियुक्त हुए। और 30 जून 2000 को अपने जीवन के बहुमूल्य 27 वर्ष गुजारने के बाद सेवानिवृत्त हुए।

    सेवानिवृत्त के पश्चात शहरी जीवन उनको रास नहीं आया लिहाजा इलाहाबाद, बनारस को छोड़कर गाॅव चले आये और यहां अपने जीवन के 23 सालों को गांव के युवाओं के बीच आगे बढ़ाने में लगाये रहे।
    गांव के अधिकांश बच्चे प्रोफेसर साहब के सानिध्य में सरकारी नौकरी में विभिन्न विभागों में अच्छे अच्छे पदों पर आसीन हुए हैं।
    प्रोफेसर साहब के छोटे भाई जिम्मेदार सिंह का कहना है कि गाजीपुर में रहते थे लेकिन उनका लगाव गांव से लगा रहता था भतीजे पूर्व प्रधान धर्मेंद्र सिंह जी का कहना है कि प्रोफेसर साहब गांव के अनेक युवाओं के मार्गदर्शक थे। व्यवहार के चलते ही घर पर सुबह से लेकर शाम तक गांव के बच्चों, बूढ़ों का जमावड़ा लगा रहता था और सभी लोग प्रोफेसर साहब का बहुत सम्मान भी करते थे।
    प्रोफेसर साहब के जाने के बाद हमारा गांव अब सुना हो गया है । प्रोफेसर साहब के करीबी कमला पति सिंह ने उनको याद करके गमगीन हो गये कहे कि ऐसे पुण्यात्मा की कमी मुझे और परिवार और मेरे गांव को हमेशा खलेगी।
    श्रद्धांजलि सभा में जिम्मेदार सिंह, कमला पति सिंह, पूर्व प्रधान धर्मेन्द्र सिंह, भतीजे भानु प्रताप सिंह, उदय प्रताप सिंह, संतोष सिंह, चंद्रशेखर सिंह, अजीत सिंह, वकील सिंह, राघवेन्द्र सिंह, नरेंद्र सिंह, पूर्व प्रधान रामअवध सिंह, हृदय नारायण सिंह, पूर्व प्रधान बब्लू सिंह, टप्पू सिंह, जीतनारायन सिंह, विवेक सिंह, शुभम सिंह, राहुल सिंह, सहित भारी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।