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  • वेदांता का मुनाफा तीसरी तिमाही में 60 प्रतिशत बढ़कर 7,807 करोड़ रुपये

    वेदांता का मुनाफा तीसरी तिमाही में 60 प्रतिशत बढ़कर 7,807 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली, । वेदांता लिमिटेड ने आज 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही और वित्तीय वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों के लिए अपने अलेखापरीक्षित समेकित वित्तीय परिणामों की घोषणा की। कंपनी का कर पश्चात मुनाफा (पीएटी) सालाना आधार पर 60 प्रतिशत बढ़कर 7,807 रुपये करोड़ पर पहुंच गया। तिमाही के दौरान कंपनी ने अब तक का रिकॉर्ड एबिट्डा 15,171 रुपये करोड़ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। एबिट्डा मार्जिन 629 बेसिस पॉइंट्स के विस्तार के साथ 41 प्रतिशत तक पहुंच गया। वेदांता ने अब तक का सर्वाधिक त्रैमासिक राजस्व 45,899 रुपये करोड़ दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    वेदांता का नेट डेब्ट टू एबिट्डा रेशो 1.40x से बेहतर होकर 1.23x पर पहुंच गया, साथ ही रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड 27 फीसदी पर रहा, इसमें सालाना 296 बीपीएस  की बढ़ोतरी हुई। वेदांता के डिमर्जर से जुड़े एनसीएलटी आदेश के बाद, क्रिसिल और इक्रा दोनों ने कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को एए स्तर पर बरकरार रखा है।

    आयरन ओर के कारोबार ने 1.2 मिलियन टन का त्रैमासिक सीलेबल ओर उत्पादन दर्ज किया, जिसमें 3 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी हुई। वहीं पिग आयरन का उत्पादन 6 फीसदी सालाना बढ़ोतरी के बाद 229 किलोटन पर पहुंचा। कॉपर कैथोड़ का उत्पादन सालाना बढ़कर 45 किलोटन पर पहुंच गया, यह पिछले सात सालों में अधिकतम त्रैमासिक उत्पादन रहा। फेरो क्रोम का उत्पादन 32 फीसदी सालाना की ज़बरदस्त बढ़ोतरी के बाद 24 किलोटन पर पहुंचा। पावर व्यवसाय ने मजबूत प्रदर्शन किया, जिसमें बिक्री में सालाना आधार पर 61 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

    वेदांता ने तिमाही के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। कंपनी को इसके प्रस्तावित डीमर्जर क लिए माननीय एनसीएलटी से अनुमोदन मिल गया है, जो दीर्घकालिक मूल्य सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।। वेदांता ने इनकैब इंडस्ट्रीज़ के अधिग्रहण के साथ कॉपर और एलुमिनियम में अपने डाउनस्ट्रीम फुटप्रिन्ट को मजबूत बना लिया है।

    कंपनी ने तिमाही के दौरान लगभग 30 प्रतिशत का कुल शेयरधारक प्रतिफल दर्ज किया, जो निफ्टी से 5x और निफ्टी मेटल सूचकांक से 2.7x बेहतर रहा, क्योंकि शेयरों ने बार-बार अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छुआ। इसके अलावा, वेदांता ग्रुप ने उच्च-मूल्य क्रिटिकल मिनरल्स के तीन अतिरिक्त माइनिंग ब्लॉक हासिल किए,  जिसके साथ कुल असाइन्ड ब्लॉक्स की संख्या 11 पर पहुंच गई है। कुल शेयरहोल्डर रिटर्न पिछले पांच सालों में 428 फीसदी रहा, जिससे कुल डिविडेंड यील्ड 73.5 फीसदी हो गई है।

  • फियो को भारत के विदेश व्यापार में लगातार तेज़ी को लेकर उम्मीद – अध्यक्ष, एस सी रल्हन

    फियो को भारत के विदेश व्यापार में लगातार तेज़ी को लेकर उम्मीद – अध्यक्ष, एस सी रल्हन

    वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान निर्यात में 4.33 प्रतिशत की वृद्धि

    नई दिल्ली | 15 जनवरी, 2025: फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने दिसंबर 2025 के व्यापार डेटा में दिखे भारत के विदेश व्यापार में लगातार और व्यापक वृद्धि पर मज़बूत उम्मीद जताई है। यह प्रदर्शन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई-चेन में बदलाव, महंगाई के दबाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद के माहौल में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने डेटा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत के निर्यात में लगातार विस्तार भारतीय निर्यातकों के लचीलेपन, फुर्ती और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि निर्यातकों ने न केवल वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना किया है, बल्कि एक सहायक नीतिगत माहौल की मदद से बाज़ार विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और उत्पाद प्रतिस्पर्धा के माध्यम से उभरते अवसरों का भी लाभ उठाया है।

    अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत का कुल निर्यात 4.33 प्रतिशत बढ़कर 634.26 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में यह 607.93 बिलियन डॉलर था। इस अवधि के दौरान वस्तु निर्यात 330.29 बिलियन डॉलर रहा, जो अप्रैल-दिसंबर 2024-25 में 322.41 बिलियन डॉलर की तुलना में 2.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। अकेले दिसंबर 2025 में निर्यात 1.87 प्रतिशत बढ़कर 38.51 बिलियन डॉलर हो गया, जो प्रमुख उत्पाद क्षेत्रों में लगातार मांग को दर्शाता है।

    श्री रल्हन ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रवाह में अस्थिरता को देखते हुए यह प्रदर्शन विशेष रूप से उत्साहजनक है, और यह निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकारी पहलों की प्रभावशीलता को दर्शाता है, जिसमें नीतिगत निरंतरता, निर्यात सुविधा उपाय, बेहतर लॉजिस्टिक्स, व्यापार प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और एमएसएमई निर्यातकों को लक्षित समर्थन शामिल है।

    आयात के मोर्चे पर, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत का कुल आयात 4.95 प्रतिशत बढ़कर 730.84 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 696.37 बिलियन डॉलर था। वस्तु आयात 5.90 प्रतिशत बढ़कर 578.61 बिलियन डॉलर हो गया, जो अप्रैल-दिसंबर 2024-25 में 546.36 बिलियन डॉलर था। दिसंबर 2025 में आयात 63.55 बिलियन डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले यह 58.43 बिलियन डॉलर था, जिसके कारण व्यापार घाटा 25 बिलियन डॉलर रहा।

    श्री रल्हन ने बताया कि आयात में बढ़ोतरी एनर्जी प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और इंडस्ट्रियल इनपुट के ज़्यादा इनफ्लो मजबूत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और निवेश मांग का संकेत देते हैं, जो मध्यम अवधि की आर्थिक वृद्धि के लिए अच्छे संकेत हैं।

    अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, इंजीनियरिंग गुड्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, रसायन, रेडीमेड गारमेंट्स, सूती वस्त्र, हथकरघा उत्पाद, चावल और समुद्री उत्पाद शीर्ष निर्यात वस्तु के रूप में उभरे। आयात के मामले में, प्रमुख वस्तुओं में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, सोना, मशीनरी, परिवहन उपकरण, अलौह धातु, रसायन, कोयला, प्लास्टिक और लोहा और इस्पात शामिल थे।

    श्री रल्हन ने आगे बताया कि भारत के शीर्ष निर्यात गंतव्य—अमेरिका, यूएई, चीन, नीदरलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, बांग्लादेश, सिंगापुर, सऊदी अरब और हांगकांग—एक अच्छी तरह से विविध और लचीले निर्यात पदचिह्न को प्रदर्शित करते हैं। यह विविधीकरण ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब भू-राजनीतिक संघर्षों, प्रतिबंधों, शिपिंग व्यवधानों और रणनीतिक पुनर्गठन के कारण वैश्विक व्यापार मार्गों को नया आकार दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप जैसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की लगातार मजबूत भागीदारी, उभरते बाजारों और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ गहरे व्यापार संबंधों के साथ, भारत को एक विश्वसनीय, भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में मजबूत करता है। बांग्लादेश, सिंगापुर और सऊदी अरब को बढ़ते निर्यात भी क्षेत्रीय एकीकरण, विकासशील देशों के बीच सहयोग और हिंद-प्रशांत और मध्य पूर्व में रणनीतिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करते हैं।

    श्री रल्हन ने दोहराया कि सराहनीय निर्यात प्रदर्शन भारत के निर्यातकों के सामूहिक प्रयासों और सरकार की सक्रिय और सुविधाजनक व्यापार नीतियों का परिणाम है। आगे बढ़ते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर नीतिगत समर्थन, तेज लॉजिस्टिक्स, स्थिर व्यापार समझौते और बाजार विविधीकरण पर निरंतर ध्यान भारत की निर्यात वृद्धि की गति को और तेज करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

  • उ0प्र0 असीमित सम्भावनाओं का ही नहीं, बल्कि सम्भावनाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रदेश बन चुका – मुख्यमंत्री

    उ0प्र0 असीमित सम्भावनाओं का ही नहीं, बल्कि सम्भावनाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रदेश बन चुका – मुख्यमंत्री

    रक्षा मंत्री, उ0प्र0 के मुख्यमंत्री तथा केन्द्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री ने अशोक लेलैण्ड के नवीन मैन्युफैक्चरिंग प्लाण्ट का उद्घाटन किया

    आज यह प्रदेश विकास का पर्याय बन चुका, प्रदेश की कानून-व्यवस्था को जिस तरह सुदृढ़ किया, यह अपने में एक मिसाल : रक्षामंत्री

    प्रदेश में निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र प्रणाली के माध्यम से विभागीय स्वीकृतियों, विभागीय समन्वय और सतत् हैण्ड होल्डिंग को सुनिश्चित किया जा रहा

    लखनऊ :  केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा केन्द्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच0डी0 कुमारस्वामी जी ने आज यहां सरोजनीनगर इण्डस्ट्रियल एरिया में अशोक लेलैण्ड के नवीन मैन्युफैक्चरिंग प्लाण्ट का उद्घाटन किया। इसके पूर्व, रक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री तथा भारी उद्योग मंत्री ने अशोक लेलैण्ड के इलेक्ट्रिक वाहनों को झण्डी दिखाकर रवाना किया। प्लाण्ट का अवलोकन किया तथा परिसर में सिन्दूर व रुद्राक्ष का पौधरोपण किया।
    रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सशक्त नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने अपनी पहचान बदली है। आज यह प्रदेश विकास का पर्याय बन चुका है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को जिस तरह सुदृढ़ किया है, यह अपने में एक मिसाल है। आम जन सरकार से समाज में अमन-चैन बनाए रखने की भी उम्मीद रखता है। एक ऐसा समाज जहां कोई भय न हो। जहाँ लोगों को घर से बाहर निकलने के पहले सोचना न पड़े। जहाँ उद्योगपति उद्योग लगाने में न हिचकें तथा इन्वेस्टर्स निवेश करने में न डरें। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में इस काम को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश की सुरक्षा से जुड़े काम भी शुरू हो चुके हैं। यहाँ बनाये गये डिफेंस कॉरिडोर के माध्यम से हथियार, गोला-बारूद और लड़ाकू जहाजों से सम्बन्धित सामान बनेगा। बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ यहां अपने कारखाने लगा रही हैं, जिससे गाँव के लोगों को यहीं पर रोजगार मिलेगा। लखनऊ में ब्रह्मोस एयररोस्पेस की फैक्ट्री भी स्थापित की गयी है, जो ब्रह्मोस मिसाइल बना रही है। जिसका करिश्मा आप लोगों ने ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान देखा होगा। अब यह मिसाइल बाहर से बनकर नहीं आती है। हमारे अपने देश में और अपने उत्तर प्रदेश में ही बनती है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस की फैक्ट्री स्थापित करने में मुख्यमंत्री की पहल व सहयोग सराहनीय है।
    रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारत अपने हथियार खुद बना रहा है। उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में डबल इंजन सरकार ने विकास के इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए ‘उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस यूनिट एण्ड एम्प्लॉयमेण्ट प्रमोशन’ पॉलिसी बनाई है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब उत्तर प्रदेश को ऐसा राज्य बनाया जा रहा है, जहां सेना के लिए साजो-सामान बड़े पैमाने पर बनेंगे। प्रदेश सरकार ‘ग्लोबल-500 एण्ड फॉर्च्यून इण्डिया-500 कम्पनी इन्वेस्टमेण्ट प्रमोशन पॉलिसी-2023’ भी लेकर आयी है, ताकि यहाँ इन्वेस्टमेण्ट तथा औद्योगिक विकास बढ़ सके।
    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज का समारोह प्रदेश के प्रति उद्योगपतियों के बढ़ते हुए विश्वास का प्रतीक है। इस इण्टीग्रेटेड पैसेज एण्ड बस मैन्युफैक्चरिंग प्लाण्ट में 2,500 यूनिट प्रतिवर्ष की क्षमता है, जिसे चरणबद्ध ढंग से 5,000 यूनिट प्रतिवर्ष तक बढ़ाया जाना है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रतिबद्धता और हम सभी के दृढ़ विश्वास का प्रतीक है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग और ग्लोबल कूलिंग से त्रस्त है। विभिन्न प्रकार की आपदाएँ हम सबके सामने एक नई चुनौतियाँ खड़ी कर रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लाण्ट स्वयं को तैयार करने की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों का हिस्सा है। इसमें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार की सम्भावनाएँ विकसित हुई हैं। प्रदेश सरकार पर विश्वास कर लखनऊ में महत्वपूर्ण निवेश करने के लिए हिन्दुजा समूह बधाई का पात्र है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश असीमित सम्भावनाओं का ही नहीं, बल्कि सम्भावनाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रदेश बन चुका है। पिछले साढ़े 08 वर्षों में हुए बड़े परिवर्तन इसका उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। आज प्रदेश के समस्त जनपदों में भारी पैमाने पर निवेश हो रहा है। यहां बेहतर कनेक्टिविटी है। देश के एक्सप्रेस-वे का 55 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे आज उत्तर प्रदेश के पास है। प्रदेश के सर्वाधिक शहरों में मेट्रो का संचालन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में हो रहा है। देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क प्रदेश में है। देश में बनने वाले दो डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर प्रदेश से होकर निकल रहे हैं। इस फ्रेट कॉरीडोर पर प्रदेश का लॉजिस्टिक टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स एण्ड ट्रांसपोर्ट हब विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में देश की पहली रैपिड रेल और पहला वॉटर-वे संचालित हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक लेलैण्ड का यह मैन्युफैक्चरिंग प्लाण्ट प्रदेश के लिए एफ0डी0आई0 और फॉर्च्यून-500 पॉलिसी का हिस्सा है। वर्ष 2017 से पूर्व एफ0डी0आई0 में यू0पी0 का अंश बहुत कम था। आज प्रदेश ने अपनी पॉलिसी के माध्यम से बड़े पैमाने पर एफ0डी0आई0 और फॉर्च्यून-500 को आकर्षित किया है। इस प्लाण्ट के लिए सितम्बर, 2023 में एम0ओ0यू0 हुआ, जनवरी, 2024 में एल0ओ0आई0 तथा भूमि स्थानान्तरण की कार्यवाही सम्पन्न हुई। केवल 18 महीनों में एक विश्वस्तरीय प्लाण्ट निर्मित होकर प्रदेश को समर्पित किया जा रहा है। यह डबल इंजन सरकार की फास्ट ट्रैक अप्रूवल प्रणाली और सुशासन का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र प्रणाली के माध्यम से विभागीय स्वीकृतियों, विभागीय समन्वय और सतत् हैण्ड होल्डिंग को सुनिश्चित किया जा रहा है। परिणामस्वरूप, ऑटो कम्पोनेण्ट और ई0वी0 ईको-सिस्टम में आज प्रदेश तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में आने वाले समय में सम्भावनाओं को और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल बाजार में प्रदेश की भागीदारी 19 प्रतिशत थी। फेम-01 और फेम-02 का प्रमुख लाभार्थी उत्तर प्रदेश है। वर्तमान में प्रदेश में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। अशोक लेलैण्ड के इस इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लाण्ट में प्रदेश के 10,000 युवाओं को प्रतिवर्ष स्किल डेवलपमेण्ट के साथ जोड़ने के लिए हिन्दुजा ग्रुप प्रदेश सरकार के साथ एम0ओ0यू0 करने जा रहा है।
    इलेक्ट्रिक व्हीकल का यह सेक्टर नई स्किल, नई टेक्नोलॉजी और नये भविष्य के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आई0टी0आई0, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग संस्थान स्वयं को इलेक्ट्रिक व्हीकल की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। देश का सबसे अधिक श्रम शक्ति रखने वाला उत्तर प्रदेश इस तकनीक के माध्यम से ट्रस्ट एण्ड ट्रांसपोर्टेशन की नई भूमिका के रूप में स्वयं को स्थापित करेगा।कार्यक्रम को केन्द्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच0डी0 कुमारस्वामी ने भी सम्बोधित किया।
    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सी0ई0ओ0 मनोज कुमार सिंह, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अध्यक्ष हिन्दुजा ग्रुप (भारत) अशोक हिन्दुजा, अध्यक्ष हिन्दुजा ग्रुप (यूरोप) प्रकाश पी0 हिन्दुजा, ट्रस्टी हिन्दुजा फाउण्डेशन अजय हिन्दुजा, अध्यक्ष अशोक लेलैण्ड धीरज हिन्दुजा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • एचएएल के ध्रुव न्यू जेनरेशन हेलीकॉप्टर ने पहली उड़ान भरी : सिविल एविएशन सेक्टर में कंपनी की मज़बूत एंट्री

    एचएएल के ध्रुव न्यू जेनरेशन हेलीकॉप्टर ने पहली उड़ान भरी : सिविल एविएशन सेक्टर में कंपनी की मज़बूत एंट्री

    बेंगलुरु । एचएएल के ध्रुव न्यू जेनरेशन  हेलीकॉप्टर ने आज अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की, जो सिविल एविएशन हेलीकॉप्टर सेक्टर में HAL की मज़बूत एंट्री और सिविल एविएशन में ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।  नागरिक उड्डयन मंत्री  किंजरापु राम मोहन नायडू ने एचएएल के CMD डॉ. डी. के. सुनील, DGCA के JDG  मनीष कुमार, पवन हंस लिमिटेड के CMD  संजीव राजदान और बेंगलुरु में हेलीकॉप्टर डिवीजन में एचएएल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई।

    इस कार्यक्रम के दौरान, एचएएल को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन  से ‘शक्ति सिविल इंजन के स्वदेशी निर्माण’ का सर्टिफिकेशन भी मिला। यह पहली बार है कि किसी एयरो इंजन को DGCA द्वारा स्वदेशी उत्पादन के लिए सर्टिफाइड किया गया है, जो महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी छलांग है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सफ्रान इंजन्स की भागीदारी और DGCA के करीबी तालमेल से संभव हुई है। ध्रुव NG अगले तीन से चार महीनों में पूर्ण सिविल सर्टिफिकेशन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

    इसे आत्मनिर्भर भारत की उड़ान बताते हुए  राम मोहन नायडू ने कहा, “यह उड़ान भारतीय विमानन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मैं एक विकसित भारत के संकल्प को पंख लगाते हुए देख सकता हूँ। एचएएल ने डेमो दिखाने के एक साल के भीतर ही पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। ध्रुव NG कई ऑपरेटरों के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। ‘मेक इन इंडिया’ अब वैश्विक गुणवत्ता की मुहर है।”  एचएएल के CMD, डॉ. डी. के. सुनील ने कहा, “ध्रुव ‘न्यू जेन’ हेलीकॉप्टर एचएएल के सिविल विस्तार की नींव है। ध्रुव Mk 1 सिविल प्लेटफॉर्म पहले ही 24,000 घंटे से ज़्यादा उड़ान भर चुका है और इसे खास तौर पर ग्लोबल सिविल एविएशन मार्केट की कड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपग्रेड किया गया है, जो भारत की स्वदेशी रोटरी-विंग क्षमता में एक मील का पत्थर है। ध्रुव NG बेहतर सुरक्षा, हाई-परफॉर्मेंस और लागत-प्रभावशीलता प्रदान करता है, जिससे यह आयातित हेलीकॉप्टरों का एक मज़बूत विकल्प बन जाता है। हम DGCA के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि विश्व स्तर पर स्वीकृत सर्टिफिकेशन मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।”एचएएल द्वारा डिज़ाइन और निर्मित, ध्रुव NG एक परिष्कृत 5.5-टन, हल्का ट्विन-इंजन, मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर है जिसे भारतीय इलाके की विविध और कठिन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इंजीनियर किया गया है।

    ट्विन शक्ति 1H1C इंजन से लैस, इस हेलीकॉप्टर में एक विश्व स्तरीय, सिविल-सर्टिफाइड ग्लास कॉकपिट (AS4 आवश्यकताओं के अनुरूप) और बेहतर स्थितिजन्य जागरूकता के लिए एक आधुनिक एवियोनिक्स सूट है। सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए, ध्रुव NG में क्रैशप्रूफ सीटें, सेल्फ-सीलिंग फ्यूल टैंक और उच्च रिडंडेंसी के लिए एक सिद्ध ट्विन-इंजन कॉन्फ़िगरेशन शामिल है। उन्नत कंपन नियंत्रण प्रणाली VIP और चिकित्सा परिवहन के लिए तैयार एक सहज सवारी सुनिश्चित करती है।

    एचएएल विनिर्माण, रखरखाव और उन्नयन के लिए “वन-स्टॉप सॉल्यूशन” प्रदान करता है। ऑपरेशनल सहायता एकीकृत लॉजिस्टिक्स मॉडल के माध्यम से प्रदान की जाती है, जिसमें पावर-बाय-आवर (PBH) और परफॉर्मेंस-बेस्ड लॉजिस्टिक्स (PBL) शामिल हैं, जो उच्च फ्लीट सर्विसिबिलिटी सुनिश्चित करते हैं।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयास से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड में शामिल,मखाना की खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयास से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड में शामिल,मखाना की खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

    प्रदेश में मखाना की खेती पर 40 और प्रसंस्करण यूनिट लगाने पर 50 प्रतिशत अनुदान
    रायपुर/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से प्रदेश में मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में शामिल किया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से राज्य में मखाना की खेती कर रहे किसानों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि हाल ही में धमतरी जिले में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय  कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती के प्रयासों को देखते हुए मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है। राज्य में हो रहे मखाने के उत्कृष्ट उत्पादन पर केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने प्रसन्नता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मखाना बोर्ड के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल प्रबंधन, प्रसंस्करण तकनीक और बाजार तक पहुच में सहायता दी जाएगी। इसी तारतम्य में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव श्रीमती शहला निगार की अध्यक्षता में आज मिशन फार इंटिग्रेटेड डेव्हलपमेंट आफ हार्टिकल्चर अंतर्गत राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक सम्पन्न हुई।

    बैठक में संचालक उद्यानिकी लोकेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 से सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ मखाना प्रांरभ किया गया है। इस योजना में शत प्रतिशत केन्द्रीय अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में आगामी 4 माह हेतु 180 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के तहत तालाब में मखाना की खेती करने वाले किसानों को राशि 1.79 लाख रूपए की इकाई लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत की राशि 72000 रूपए का अनुदान देने का प्रावधान है। इसी तरह स्वयं के खेत में मखाना उत्पादन करने वाले कृषकों को राशि 1.32 लाख रूपए की इकाई लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत की राशि 53000 रूपए का अनुदान देने का प्रावधान है। साथ ही नए तालाब के निर्माण पर राशि 7.00 लाख की इकाई लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत  राशि .2.80 लाख का अनुदान देने का प्रावधान है।

    मखाना के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन हेतु माइक्रो लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के स्थापना बाबत इकाई लागत राशि 10 लाख रूपए पर 35 प्रतिशत का अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया हैै। इसी तरह एफपीओ हेतु स्माल लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के स्थापना बाबत इकाई लागत राशि 39 लाख रूपए पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है तथा निजी क्षेत्र हेतु इकाई लागत राशि 39 लाख रूपए पर 35 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। लार्ज लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के स्थापना बाबत इकाई लागत राशि 07 करोड़ रूप्ए पर 35 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। मखाना की खेती को बढ़ावा देने हेतु योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ ही एक्पोजर विजिट भी कराया जा रहा है। मखाना खेती को प्रेरित करने हेतु इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय तथा महात्मा गाँधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा मखाने की उत्कृष्ट खेती का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

  • फियो ने प्रधानमंत्री के जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान के तीन देशों के दौरे का स्वागत किया

    फियो ने प्रधानमंत्री के जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान के तीन देशों के दौरे का स्वागत किया

    व्‍यापार और आर्थिक साझीदारी को गहरा करने का एक बड़ा अवसर -फियो अध्‍यक्ष, एस सी रल्हन

    नई दिल्ली/ फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइज़ेशन्स (फियो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15-18 दिसंबर, 2025 तक होने वाले तीन देशों के दौरे की घोषणा का दिल से स्वागत करता है। यह दौरा भारत के अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार को बढ़ाने के लिए एक अहम समय पर हो रहा है और पश्चिम एशिया और अफ्रीका में भारत की आर्थिक उपस्थिति को बढ़ाने के लिए बड़ा अवसर प्रदान करता है।

    इस घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए, फियो के अध्‍यक्ष, एस सी रल्हन ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी का जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान का दौरा, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में विशेष साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनी‍तिक रिश्तों को मजबूत करने के भारत की प्रतिबद्धता का एक मजबूत संकेत देता है। ऐसे समय में जब ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव हो रहे हैं, इन साझेदारी को गहरा करने से भारतीय निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंचने, व्‍यापार मार्गों में विविधता लाने और लंबे समय के व्‍यावसायिक सहयोग को बढ़ावा देने में बहुत मदद मिलेगी।”

    महामहिम किंग अब्दुल्ला II इब्न अल हुसैन के आमंत्रण पर 15-16 दिसंबर, 2025 को प्रधानमंत्री का जॉर्डन दौरा राजन‍यिक रिश्तों की 75वीं वर्षगांठ के साथ हो रहा है, जो दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और बढ़ते रिश्तों को दिखाता है। उम्मीद है कि बातचीत में द्वीपक्षीय सहयोग के पूरे कार्यक्षेत्र के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी बात होगी। श्री रल्हन ने कहा कि जॉर्डन वेस्ट एशिया और बड़े मिडिल ईस्ट रीजन के लिए एक महत्वपूर्ण गेटवे है। अप्रैल-अगस्त, 2025-26 के दौरान जॉर्डन के साथ भारत का कुल द्वीपक्षीय व्‍यापार 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें सिर्फ़ पांच महीनों में लगभग 461 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ। और इसलिए, जॉर्डन के साथ बेहतर आर्थिक बातचीत से फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल्स, आईटी सर्विसेज़ और फ़ूड और एग्री-प्रोडक्ट्स जैसे सेक्‍टरों में भारतीय निर्यातकों के लिए मौके और बढ़ेंगे, जिससे 2030 तक निर्यात बढ़कर 5 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है।

    16-17 दिसंबर, 2025 को अपने दौरे के दूसरे हिस्से में, प्रधानमंत्री महामहिम डॉ. अबी अहमद अली के बुलावे पर इथियोपिया जाएंगे। यह दौरा प्रधानमंत्री का इथियोपिया का पहला दौरा है, जो तेज़ी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था है और अफ्रीका में भारत के सबसे ज़रूरी साझीदारों में से एक है। फियो प्रमुख ने कहा कि इथियोपिया अफ्रीकी क्षेत्र का एक अहम सदस्य है और भारत के साउथ-साउथ कोऑपरेशन में एक ज़रूरी साझीदार है। यह दौरा व्‍यापार, निवेश और विकास साझीदारी को गहरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। भारतीय निर्यातक, खासकर ऑटोमोबाइल, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और एजुकेशन सर्विसेज़ में, इथियोपिया के बढ़ते मार्केट में बहुत ज़्यादा संभावना देखते हैं, जहां दोनों देशों के बीच द्वीपक्षीय व्‍यापार 550 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

    प्रधानमंत्री अपने दौरे के आखिरी हिस्से में, महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक के आमंत्रण पर, दूसरी बार 17-18 दिसंबर, 2025 को ओमान जाएँगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ है। चूंकि भारत और ओमान एक लंबे समय से चली आ रही और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, जिसे मज़बूत व्‍यापार संबंधों,ऊर्जा सहयोग और कल्चरल लिंकेज का सपोर्ट है। श्री रल्हन ने ज़ोर देकर कहा कि ओमान हमेशा से गल्फ में भारत के सबसे भरोसेमंद आर्थिक साझेदारों में से एक रहा है। यह दौरा ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, फ़ूड सिक्योरिटी और एमएसएमई सहयोग में नए रास्ते तलाशने का एक शानदार अवसर देता है। ओमान के साथ द्वीपक्षीय संरचना को मज़बूत करने से भारत के निर्यात सेक्टर पर सीधा सकारात्‍मक असर पड़ेगा, जो 4 बिलियन डॉलर से ज़्यादा का निर्यात है। हालांकि, चूंकि हम एक व्‍यापार समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के आखिरी चरण में हैं। ओमान के साथ हुए इस समझौते से दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार और निवेश को दोगुना करने में बहुत ज़रूरी बढ़ावा मिलेगा।

    फियो का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री का तीन देशों का दौरा भारत की व्‍यापार कूटनीति को काफ़ी मज़बूत करेगा और बहुत ज़्यादा रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। श्री रल्हन ने भरोसा जताया कि फियो इस ज़रूरी दौरे के नतीजों का इंतज़ार कर रहा है और इन राजनयिक बातचीत को भारतीय निर्यातक समुदाय के लिए ठोस व्यापार और निवेश के मौकों में बदलने के लिए सभी हितधारकों की सहायता करेगा और उनके साथ जुड़ेगा।

  • रिलायंस ज्वेल्स शादी के सीज़न के लिए अपना सिग्नेचर ‘विवाहम’ कलेक्शन वापस लाया 

    रिलायंस ज्वेल्स शादी के सीज़न के लिए अपना सिग्नेचर ‘विवाहम’ कलेक्शन वापस लाया 

    हर ब्राइडल स्टाइल के लिए शानदार गोल्ड और डायमंड डिज़ाइन, एक्सक्लूसिव ऑफ़र और 100% ओल्ड गोल्ड एक्सचेंज के साथ

    मुंबई, : रिलायंस ज्वेल्स, जो भारत के सबसे भरोसेमंद ज्वेलरी ब्रांड्स में से एक है, अपने बहुत इंतज़ार किए जा रहे ‘विवाहम’ कलेक्शन की वापसी के साथ शादी के सीज़न की शुरुआत कर रहा है, जो टाइमलेस डिज़ाइन और कारीगरी के ज़रिए भारत की रिच ब्राइडल विरासत का जश्न मनाता है। 2025 एडिशन ब्राइडल ज्वेलरी को विरासत और कंटेंपररी एलिगेंस के बीच एक ब्रिज के तौर पर फिर से दिखाता है, जो दिखाता है कि आज की दुल्हनें अपनी जड़ों को कैसे सेलिब्रेट करती हैं और अपने खास स्टाइल को अपनाती हैं।
    देश भर की संस्कृतियों और शिल्पकला को समेटे हुए, विवाहम में विभिन्न क्षेत्रीय पहचानों से प्रेरित सोने और हीरे की कृतियों की एक शानदार श्रृंखला प्रदर्शित की गई है, जिसमें दिल्ली और पंजाब की शाही शान, महाराष्ट्र और गुजरात का प्राचीन आकर्षण और ओडिशा की अलंकृत कलात्मकता से लेकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक की मंदिर-प्रेरित भव्यता और बंगाल और असम के जटिल रूपांकन शामिल हैं। प्रत्येक टुकड़ा विरासत की एक कहानी बताता है, जिसे आधुनिक दुल्हन के लिए पुनर्व्याख्यायित किया गया है। इस संग्रह में चोकर्स, लंबे हार, कमर बेल्ट, मांग टीका, झुमके, चूड़ियां और अंगूठियां हैं, जो हर दुल्हन के लुक को कालातीत लालित्य के साथ पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

    इस शादी के सीजन को और भी खास बनाने के लिए, रिलायंस ज्वेल्स उत्तम डिजाइन को मूल्यवान लाभों के साथ जोड़ रहा है  इसके साथ ही, ब्रांड गोल्ड मेकिंग चार्ज पर 50% तक और डायमंड वैल्यू और मेकिंग चार्ज पर 30% तक की छूट दे रहा है।

    इस कलेक्शन के बारे में बात करते हुए, रिलायंस ज्वेल्स के एक प्रवक्ता ने कहा, “शादियां भावना, संस्कृति और व्यक्तिगत स्टाइल को दर्शाती हैं। विवाहम के साथ, हम हर भारतीय दुल्हन की खासियत का जश्न मनाते हैं – चाहे वह क्लासिक कला में सुंदरता ढूंढती हो या आधुनिक निखार में। हर पीस को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वह अपने खास दिन पर सचमुच चमकदार महसूस करे। ग्राहक देशभर में 145 से ज़्यादा रिलायंस ज्वेल्स शोरूम में विवाहम कलेक्शन देख और खोज सकते हैं।

  • भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला :14 नवंबर से दिल्ली में बिखरेगी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा

    भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला :14 नवंबर से दिल्ली में बिखरेगी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा

    *छत्तीसगढ़ में पर्यटन-संस्कृति के साथ उद्योगों-कृषि आधारित उद्योगों की संभावनाओं का होगा प्रदर्शन*

    *वनोपज उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ मिलेट कैफे भी लगेगा*

    रायपुुर, /  नईदिल्ली के भारत मण्डपम में 14 नवंबर से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा बिखरेगी। यहां 27 नवंबर तक भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की थीम पर छत्तीसगढ़ का आकर्षक पवेलियन बनाया जा रहा है। इस मेले में देश के सभी राज्यों सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उद्योगपति और निवेशक भी आयेंगे। मेले में बने छत्तीसगढ़ पवेलियन में राज्य के औद्योगिक विकास की झलक दिखाई जायेगी। यहां छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था, उद्योगों के लिए व्यापक अनुकूल माहौल और व्यवस्थाऐं तथा नई औद्योगिक नीति के बारे में आगंतुकों को पूरी जानकरी दी जायेगी। इस मेले में राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में उपलब्ध निवेश प्रोत्साहन, सुक्ष्म लघु एवं मध्यम ईकाईयों की स्थापना, उनके उत्पादों से संबंधित जानकारियों का भी प्रदर्शन किया जायेगा। मेला अवधि में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए निवेशेकों के साथ बैठकें, इन्वेस्टर कनेक्ट आदि भी किये जायेंगे।  

    इस अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पर्यटन की संभावना का भी प्रदर्शन किया जायेगा, ताकि संस्कृति और पर्यटन पर आधारित रोजगार मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। मेले में बने पवेलियन में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प, वनोपज उत्पादों, खादी ग्रामोद्योग क्षेत्र में उद्योग शुरू करने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। पवेलियन में बस्तर क्षेत्र को फोकस करते हुए डिजिटल तकनीकों से सुसज्जित प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। 

    अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के दौरान 24 नवंबर को भारत मण्डपम दिल्ली में छत्तीसगढ़ दिवस भी मनाया जायेगा। शाम 6 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित मंत्रीमण्डल के सदस्य भी शामिल होंगे। यह आयोजन संस्कृति विभाग द्वारा किया जायेगा। छत्तीसगढ़ पवेलियन में हर दिन राज्य की सांस्कृतिक छटा का प्रदर्शन नृतक दलों के माध्यम से किया जायेगा।  यहां छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग हस्तकला, हथकरघा, चरखा आदि का जीवंत प्रदर्शन, उत्कृष्ट उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की भी व्यवस्था रहेगी। छत्तीसगढ़ पवेलियन में मिलेट से संबंधी उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ मिलेट कैफे भी लगाया जायेगा। इससे लोगों को छत्तीसगढ़ में उगाये जाने वाले लघु धान्यों कोदो, कुटकी, रागी, संवा आदि के उत्पादन, उनके व्यवसाय के लिये आकर्षित किया जा सकेगा। इस मेले में छत्तीसगढ़ में उपलब्ध जैविक और एक्जॉटिक खाद्यन्नों का भी प्रदर्शन होगा, ताकि इन उत्पादकों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल सके। लघु वनोपज संघ के द्वारा अपने वनोपजों से बने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री भी कि जायेगी। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एफएमसीजी कंपनियों के माध्यम से इन उत्पादों की मार्केटिंग करने की व्यवस्था का प्रयास किया जायेगा। पवेलियन में छत्तीसगढ़ के आकर्षक पर्यटन स्थलों, उपलब्ध अधोसंरचना और ईको-टूरिज्म के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। ताकि अधिक से अधिक लोग छत्तीसगढ़ के बारे में जान सके।

  • निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना, भारत के निर्यात इकोसिस्टम के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव – एस. सी. रल्हन

    निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना, भारत के निर्यात इकोसिस्टम के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव – एस. सी. रल्हन

    फियो ने निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) और निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना को कैबिनेट की मंज़ूरी का स्वागत किया

    नई दिल्ली : फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) को मंज़ूरी दिए जाने का स्वागत करता है। यह केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य विशेष रूप से एमएसएमई, पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान सेक्टरों के लिए भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करना है। वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक 25,060 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाला यह मिशन, कई निर्यात संवर्धन योजनाओं को एक व्यापक, परिणाम-आधारित और डिजिटल रूप से संचालित ढाँचे में समेकित करके एक बड़े संरचनात्मक सुधार का प्रतीक है।

    इस घटनाक्रम पर बोलते हुए फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा, “निर्यात संवर्धन मिशन भारत के व्यापार क्षेत्र के लिए एक व्यावहारिक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है। वित्तीय और गैर-वित्तीय युक्तियों को एक एकीकृत ढाँचे के अंतर्गत लाकर, यह मिशन वैश्विक व्यापार गतिशीलता के लिए आवश्यक निरंतरता, लचीलापन और जवाबदेही प्रदान करता है। यह विशेष रूप से एमएसएमई को सशक्त बनाएगा, जिन्हें अक्सर किफायती वित्त और अनुपालन सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होती है।”

    मिशन की समावेशिता पर प्रकाश डालते हुए, श्री रल्हन ने कहा, “ईपीएम उन संरचनात्मक चुनौतियों – वित्त तक सीमित पहुँच और उच्च अनुपालन लागत से लेकर कमज़ोर ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स बाधाओं तक- का समयोचित समाधान है, जिन्होंने लंबे समय से भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को कुंद किया है। इन मुद्दों से सीधे निपटकर, यह पहल निर्यात की गति को बनाए रखने, रोज़गार की रक्षा करने और भारत के निर्यात आधार को नए भौगोलिक क्षेत्रों और उभरते सेक्टरों में विविधता प्रदान करने में मदद करेगी।”

    ईपीएम के तहत, कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों जैसे हालिया वैश्विक टैरिफ वृद्धि से प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे निरंतर निर्यात ऑर्डर और रोज़गार सुरक्षा सुनिश्चित होगी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा, जो पारदर्शिता, गति और सुगम पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से सभी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन करेगा।

    श्री रल्हन ने कहा, “मौजूदा व्यापार प्रणालियों के साथ मिशन का डिजिटल एकीकरण निर्यातकों के अनुभव को बदल देगा – कागजी कार्रवाई को कम करेगा, समन्वय में सुधार करेगा और समय पर वितरण सुनिश्चित करेगा। यह विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप एक स्मार्ट, तकनीक-सक्षम निर्यात इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

    फियो अध्यक्ष ने इस बात पर ज़ोर दिया कि निर्यात संवर्धन मिशन न केवल निर्यात में एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ावा देगा, बल्कि विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवाओं में रोज़गार सृजन को भी उत्प्रेरित करेगा, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मज़बूत होगी। फियो अध्यक्ष ने कहा कि निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना न केवल को-लैटेरल ऋण प्रदान करेगी, बल्कि अतिरिक्त वित्तीय तरलता भी प्रदान करेगी, जो समय की मांग है।

    श्री रल्हन ने कहा “फियो मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए वाणिज्य विभाग, डीजीएफटी इकोसिस्टम और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है। यह भारतीय निर्यात के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण है और हमें इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ ग्रहण करना चाहिए।”

  • फियो मॉस्को में आयोजित होने वाले माइटेक्स इंटरनेशनल टूल्स एक्सपो 2025 में भारतीय भागीदारी का नेतृत्व करेगा

    फियो मॉस्को में आयोजित होने वाले माइटेक्स इंटरनेशनल टूल्स एक्सपो 2025 में भारतीय भागीदारी का नेतृत्व करेगा

    नई दिल्ली : भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा स्थापित फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) रूस के मॉस्को स्थित क्रोकस एक्सपो में 11 से 14 नवंबर 2025 तक आयोजित होने वाले माइटेक्स इंटरनेशनल टूल्स एक्सपो 2025 में भाग लेने के लिए तैयार है।फियो इंडिया पैवेलियन के अंतर्गत, 20 से अधिक भारतीय कंपनियों द्वारा हैंड टूल्स, इंजीनियरिंग वस्तुएं, औद्योगिक हार्डवेयर, मशीनरी पार्ट्स, फास्टनर और संबंधित औद्योगिक समाधानों सहित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करने की उम्मीद है। यह पैवेलियन हॉल 5 में स्थित होगा, जो भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और वैश्विक औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं के लिए एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका को उजागर करेगा।

    माइटेक्स 2025 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फियो के अध्यक्ष श्री एस सी रल्हन करेंगे, उनके साथ फियो के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ अजय सहाय और फियो के उप निदेशक रोहित तेजपाल भी होंगे।

    भारत की भागीदारी के बारे में बोलते हुए, रल्हन ने कहा, “रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहा है, और इंजीनियरिंग एवं उपकरण क्षेत्र सहयोग की अपार संभावनाएँ प्रस्तुत करता है। रूस को हमारा इंजीनियरिंग निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है और इस वर्ष इसके 1.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। माइटेक्स में हमारी भागीदारी का उद्देश्य वाणिज्यिक संबंधों को गहरा करना और रूसी बाज़ार में भारतीय विनिर्माण उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा।”

    इस यात्रा के दौरान, मास्को स्थित भारतीय दूतावास, भारत सरकार के वाणिज्य विभाग, फियो और आईसीसी के सहयोग से, व्यापार साझेदारी, संयुक्त उद्यमों और बाज़ार संबंधों को सुगम बनाने के लिए भारतीय निर्यातकों और रूसी उद्योग प्रतिनिधियों के बीच बी2बी बैठकें आयोजित करेगा।