सीएमडी बीसीसीएल ने बस्ताकोला क्षेत्र की खदानों का किया निरीक्षण

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 उत्पादन वृद्धि एवं मॉनसून तैयारी पर दिया जोर

धनबाद।सीएमडी बीसीसीएल,  मनोज कुमार अग्रवाल ने बस्ताकोला क्षेत्र की विभिन्न खदानों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्पादन में वृद्धि, परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करने तथा मॉनसून पूर्व तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया। निरीक्षण के दौरान निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री संजय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। अवसर पर कोयल भवन मुख्यालय से जीएम (कोऑर्डिनेशन), जीएम (एस्टेट), जीएम (ईएनएम), जीएम (सीएमसी), जीएम (सिविल इंडस्ट्रियल), एचओडी (पी एंड पी) तथा टीएस टू सीएमडी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बस्ताकोला क्षेत्र से जीएम (बस्ताकोला), क्षेत्रीय अधिकारी एवं ठेकेदार प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

सीएमडी ने अपने दौरे की शुरुआत राजापुर ओसीपी से की, जहां उन्होंने वर्तमान में संचालित हायर किए गए एचईएमएम पैच के कार्यों की समीक्षा की तथा राजापुर हाईवॉल परियोजना के शीघ्र संचालन हेतु की जा रही तैयारियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने खदान में जल निकासी (डीवाटरिंग) व्यवस्था की समीक्षा करते हुए इसकी निरंतर प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। परियोजना अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में 8000 गैलन प्रति मिनट की पंपिंग क्षमता स्थापित है, जो क्षेत्र में उपलब्ध जल प्रवाह के अनुरूप है।

मॉनसून को ध्यान में रखते हुए सीएमडी ने निर्देश दिया कि आपस में जुड़े हुए राजापुर एवं दोबारी सम्प (संग्रहित जल क्षेत्र) में उपलब्ध जल की समुचित मात्रा का आकलन किया जाए तथा समय रहते पर्याप्त क्षमता के पंप स्थापित कर प्रभावी डीवाटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चटकरी जोर से संभावित जल प्रवाह एवं पंप किए गए पानी के पुनः संचरण (री-सर्कुलेशन) की भी समुचित जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही, आसपास के जोर/नालों के डायवर्जन एवं लाइनिंग की संभावनाओं पर कार्य करने को कहा, ताकि खदान क्षेत्र में जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके।

उत्पादन समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि वर्तमान हायर एचईएमएम पैच में लगभग 2 लाख टन कोयला शेष है, जबकि निकटवर्ती क्षेत्र में लगभग 5 लाख टन कोयले वाला एक अन्य संभावित पैच चिन्हित किया गया है, जो प्रक्रियाधीन भूमि में स्थित है। इस पर सीएमडी ने संबंधित मुद्दों के शीघ्र समाधान हेतु आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने तथा अन्य संभावित पैचों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राजापुर ओसीपी के लीजहोल्ड क्षेत्र में लगभग 20 मिलियन टन कोयला अभी भी उपलब्ध है, जो भविष्य की उत्पादन संभावनाओं को सुदृढ़ करता है।

इसके पश्चात उन्होंने अमलगमेटेड बेर्रा-दोबारी-कुया-घनुडीह कोलियरी का निरीक्षण किया और परियोजना अधिकारी को निर्देश दिया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न पैचों के माध्यम से 2.1 मिलियन टन कोयला उत्पादन की समुचित योजना तैयार की जाए।

सीएमडी ने बस्ताकोला कोलियरी के लीज क्षेत्र में स्थित गौशाला का भी निरीक्षण किया, जिसके कारण बस्ताकोला ओसीपी-II के संचालन पर प्रभाव पड़ रहा है तथा लगभग 2.5 मिलियन टन कोयले की उपलब्धता इससे जुड़ी हुई है। इस दौरान उन्होंने गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्यों से सकारात्मक संवाद किया।

अधिकारियों ने बताया कि गौशाला के स्थानांतरण के उपरांत बस्ताकोला ओसीपी-II वित्तीय वर्ष 2026-27 में अपनी पूर्ण पर्यावरण स्वीकृत (ईसी) क्षमता 3.0 मिलियन टन प्राप्त कर सकता है, अन्यथा उत्पादन लगभग 2.5 मिलियन टन के स्तर पर रहेगा। स्थानांतरण की प्रगति की समीक्षा के दौरान यह जानकारी दी गई कि बलियापुर के समीप एक वैकल्पिक भूमि चिन्हित की गई है, और स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। सीएमडी ने बस्ताकोला प्रबंधन एवं गौशाला समिति को आपसी समन्वय एवं संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कंपनी एवं स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए कार्य प्रगति को गति दी जा सके। यह दौरा बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने, उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग तथा सुरक्षित एवं सतत खनन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक पहल रहा।

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